Flipkart ने अपने री-कॉमर्स विंग Flipkart Reset के तहत एक टेक्सटाइल सर्कुलरिटी पहल के साथ फैशन सेक्टर में कदम रखते हुए अपने सर्कुलर इकॉनमी प्रयासों का विस्तार किया है। Flipkart Reset ही इसके व्यापक सर्कुलर इकॉनमी प्रयासों का मुख्य आधार है। ‘Swap on Jeans’ प्रोग्राम के ज़रिए ग्राहक खरीदारी करते समय अपने पुराने डेनिम बॉटमवियर को बदल सकते हैं। यह सुविधा Flipkart के लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क की मदद से एक आसान डोरस्टेप मॉडल के ज़रिए उपलब्ध है। यह पहल बेंगलुरु में शुरू हुए एक शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट से बढ़कर अब दिल्ली/NCR और बेंगलुरु के 260 से ज़्यादा पिन कोड तक पहुँच चुकी है। यह प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डेनिम बॉटमवियर की बढ़ती रेंज पर लागू है, और ग्राहकों को पुराने कपड़े वापस करने के बदले नई खरीदारी पर तुरंत लाभ प्रदान करती है। खरीदारी के सफ़र में टेक-बैक को शामिल करके फ्लिपकार्ट सुविधा और एक्सेसिबिलिटी की मुख्य रुकावटों को दूर कर रहा है, साथ ही ऑथराइज़्ड पार्टनर्स के साथ मिलकर इकट्ठा की गई चीज़ों का ज़िम्मेदारी से दोबारा इस्तेमाल, रीसाइक्लिंग या अपसाइक्लिंग पक्का कर रहा है।
टेक्सटाइल में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है, जब फैशन वेस्ट खासकर पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट के स्केल और अर्जेंसी को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होता जा रहा है। अकेले भारत में ही प्रतिवर्ष 70 लाख टन से अधिक वस्त्र कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से लगभग 60% उपभोक्ता-पश्चात निपटान से उत्पन्न होता है। हालांकि इस कचरे का एक बड़ा हिस्सा इनफॉर्मल तरीकों से इकट्ठा किया जाता है, लेकिन इसका लगभग आधा ही लैंडफिल से सही तरीके से हटाया जाता है, जिससे स्ट्रक्चर्ड कलेक्शन, क्वालिटी असेसमेंट और वैल्यू रिकवरी सिस्टम में लगातार कमियां दिखती हैं। प्री-कंज्यूमर वेस्ट के लिए मजबूत रिकवरी मैकेनिज्म के बावजूद पोस्ट-कंज्यूमर टेक्सटाइल बिखरे हुए हैं, और मटीरियल की क्वालिटी में अंतर और कंज्यूमर के लिए रिटर्न के सीमित रास्तों की वजह से वैल्यू चेन में उन्हें फिर से जोड़ना मुश्किल है।
इस संदर्भ में ‘स्वैप ऑन जींस’ जैसी पहल रोज़ाना के खरीदारी के फैसलों में सर्कुलरिटी लाने में अहम भूमिका निभाती है, जिससे ग्राहकों के लिए ज़िम्मेदार डिस्पोज़ल ज़्यादा आसान, सुविधाजनक और स्केलेबल हो जाता है। इसके ज़रिए फ्लिपकार्ट का मकसद कलेक्शन की चुनौतियों को दूर करके और एक मज़बूत वैल्यू-रिकवरी फ्रेमवर्क बनाकर टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग को बदलना है, जो कचरे को एक सस्टेनेबल एसेट में बदल दे। साथ ही इसे और ज़्यादा पिन कोड और दूसरी टेक्सटाइल कैटेगरी में बढ़ाने का प्लान है।
Flipkart Reset ने शुरू में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और बड़े अप्लायंसेज जैसी कैटेगरी पर फोकस किया। बढ़ते इस्तेमाल और बढ़ते कचरे के बीच इसने भारत में व्यवस्थित री-कॉमर्स के लिए एक मज़बूत नींव रखी। टेक-इनेबल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम से जुड़ा यह प्लेटफॉर्म तुरंत वैल्यू और आसान अपग्रेड के मौके देता है, जिसे AI-लेड डायग्नोस्टिक्स और एक स्टैंडर्ड इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क का सपोर्ट मिलता है, जो तेज़ और ट्रांसपेरेंट वैल्यूएशन पक्का करता है। एक्सचेंज, रीफर्बिशमेंट और रीसाइक्लिंग को एक ही टेक्नोलॉजी-आधारित इकोसिस्टम में लाकर Reset लाखों ग्राहकों को इस्तेमाल किए हुए प्रोडक्ट से वैल्यू पाने में मदद करता है। यह बेकार पड़ी चीज़ों को 'घर की करेंसी' में बदल देता है, साथ ही प्रोडक्ट की लाइफ बढ़ाता है, और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल पक्का करता है। Flipkart Minutes के ज़रिए तुरंत स्मार्टफोन एक्सचेंज और SellBack प्रोग्राम जैसे नए आइडिया ग्राहकों के लिए और भी आसान रास्ते खोलते हैं। इसी बुनियाद पर फ्लिपकार्ट अब इस तरीके को टेक्सटाइल जैसी नई कैटेगरी में भी अपना रहा है, और वही सुविधा और वैल्यू-ड्रिवन मॉडल हाई-वॉल्यूम सेगमेंट में ला रहा है।
जैसा कि वर्ल्ड अर्थ डे सिस्टम में बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर देता है, इन सर्कुलर तरीकों की बढ़ोतरी यह साबित करती है, कि ज़िम्मेदार ग्रोथ और देश भर में विकास साथ-साथ चलते हैं। इन चॉइस को सप्लाई चेन के बीच में शामिल करके फ्लिपकार्ट यह पक्का कर रहा है, कि ज़्यादा सस्टेनेबल भारत का रास्ता सुविधा, वैल्यू और धरती के लिए लंबे समय के कमिटमेंट पर बना हो। इलेक्ट्रॉनिक्स की लाइफ बढ़ाने से लेकर फैशन से मटीरियल रिकवर करने तक ये कोशिशें रोज़ाना के ऑप्शन को थोड़ा स्मार्ट, ज़्यादा ज़िम्मेदार और सस्टेनेबल बनाने पर फोकस हैं।