भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारत के पांच नए स्थलों को यूनेस्कोकी विश्व धरोहर की अस्थायी सूची यानी Tentative List में शामिल किया गया है। इनमें मध्य प्रदेश की चार महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें और महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन से जुड़े भारत तथा दक्षिण अफ्रीका के स्थल शामिल हैं।
संस्कृति मंत्रालय के PIB Culture ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस जानकारी को साझा किया। मंत्रालय ने इसे भारत की समृद्ध विरासत के लिए एक “गौरवपूर्ण उपलब्धि” बताया। इन पांच नए नामांकनों के जुड़ने के बाद यूनेस्को की अस्थायी सूची में भारत के स्थलों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है।
नई सूची में बाघ गुफा चित्र, चंबल घाटी के मंदिर समूह, उदयगिरि की गुफाएं, गिन्नौरगढ़ और भारत-दक्षिण अफ्रीका का संयुक्त ‘Sites of Satyagraha’ प्रस्ताव शामिल है।
इन पांच नए नामांकनों में भारत के इतिहास, धार्मिक परंपराओं, स्थापत्य कला और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया है। मध्य प्रदेश के चार स्थल प्राचीन भारतीय कला और वास्तुकला की झलक देते हैं, जबकि पांचवां नामांकन महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विचार के विकास को भारत और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
Four Historical Heritage Sites in Madhya Pradesh
मध्य प्रदेश से जिन चार स्थलों को यूनेस्को UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है, उनमें उदयगिरि की गुफाएं, बाघ गुफा चित्र, गिन्नौरगढ़ और चंबल घाटी के मंदिर समूह शामिल हैं।
ये स्थल अलग-अलग ऐतिहासिक काल और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े हुए हैं। इनमें प्राचीन गुफा स्थापत्य, बौद्ध कला, गोंड शासकों की विरासत और मंदिर वास्तुकला की झलक मिलती है।
मध्य प्रदेश की उदयगिरि पहाड़ी पर स्थित गुफाएं भारतीय इतिहास और प्राचीन धार्मिक कला का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। यूनेस्को के अनुसार, यहां चट्टानों को काटकर बनाया गया एक धार्मिक परिसर है, जिसका विकास मुख्य रूप से चौथी शताब्दी के अंतिम वर्षों और पांचवीं शताब्दी की शुरुआत में गुप्त शासकों के संरक्षण में हुआ।
उदयगिरि परिसर में कुल 20 खुदाई की गई गुफाएं हैं। यहां मूर्तिकला वाले पैनल, शिलालेख, आने-जाने के प्राचीन रास्ते और चट्टानों पर बने पुराने निशान मौजूद हैं। इसके साथ ही यहां की प्राकृतिक भौगोलिक और जल संबंधी विशेषताएं भी इस पूरे परिसर का हिस्सा हैं।
इन सभी विशेषताओं को मिलाकर उदयगिरि को एक ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में देखा जाता है, जो प्राचीन भारत की धार्मिक मान्यताओं और कला परंपरा की जानकारी देता है।
मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में विंध्य पर्वतमाला की दक्षिणी ढलान पर बाघनी नदी के किनारे स्थित बाघ की गुफाएं भी UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल की गई हैं।
बाघ की गुफाओं में चट्टानों को काटकर बनाई गई नौ बौद्ध गुफाएं हैं। ये गुफाएं प्राचीन बौद्ध संस्कृति और कला से जुड़ी हुई हैं तथा अपने भित्तिचित्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
इस क्षेत्र की एक खास भौगोलिक विशेषता यहां मिलने वाला बलुआ पत्थर है। आसपास के बड़े क्षेत्र में मुख्य रूप से बेसाल्ट चट्टानें पाई जाती हैं, जबकि बाघ की गुफाएं बलुआ पत्थर की चट्टानों में बनी हैं। इस प्राकृतिक विशेषता ने गुफाओं की वास्तुकला और उनमें बने भित्तिचित्रों के संरक्षण को प्रभावित किया है।
मध्य भारत के इतिहास में गिन्नौरगढ़ का किला भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह पूर्ववर्ती राज गोंड शासकों की प्रमुख किलाबंद राजधानी के रूप में जाना जाता था।
किले का नामांकन मध्य भारत में गोंड शासन की ऐतिहासिक विरासत को सामने लाता है। यह स्थल उस समय की राजनीतिक व्यवस्था, सुरक्षा और किलाबंदी से जुड़ी जानकारी प्रदान करता है।
मध्य प्रदेश स्थित चंबल घाटी के मंदिर समूह को भी UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इस समूह में बटेश्वर, पड़ावली और काकनमठ के मंदिर शामिल हैं।
इन मंदिरों में प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला, धार्मिक परंपराओं और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी की झलक दिखाई देती है। इन स्थलों का ऐतिहासिक महत्व चंबल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को समझने में भी मदद करता है।
पांचवां नामांकन इन चार स्थलों से अलग है। यह भारत और दक्षिण अफ्रीका में स्थित सत्याग्रह से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का संयुक्त प्रस्ताव है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विचार के विकास की पूरी यात्रा को सामने रखना है। इसमें दक्षिण अफ्रीका में विचार की शुरुआत से लेकर भारत में उसके प्रयोग, विस्तार और संस्थागत रूप लेने तक के विभिन्न चरणों को शामिल किया गया है।
UNESCO की जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव में कुल नौ स्थल शामिल किए जाने हैं। इनमें दो दक्षिण अफ्रीका में और सात भारत में स्थित हैं।
गांधीजी ने वर्ष 1893 से 1914 तक दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्ष बिताए थे। इसी अवधि में उनके सत्य, अहिंसा और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध से जुड़े विचारों का विकास हुआ।
दक्षिण अफ्रीका में प्रस्तावित दो स्थलों में पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन और फीनिक्स बस्ती शामिल हैं।
पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन गांधीजी के जीवन की उस घटना से जुड़ा है, जब उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसे उनके संघर्ष और सत्याग्रह की विचारधारा के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों में माना जाता है।
फीनिक्स बस्ती गांधीजी के सामुदायिक जीवन और सत्य तथा अहिंसा आधारित प्रयोगों से जुड़ी है। इसे आगे विकसित हुए आश्रमों की प्रारंभिक मिसाल के रूप में प्रस्ताव में शामिल किया गया है।
भारत में प्रस्तावित सात स्थलों में महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणि भवन परिसर, हरिजन सेवक संघ परिसर, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति निवास शामिल हैं।
ये स्थल गांधीजी के भारत लौटने के बाद सत्याग्रह के विकास, सामाजिक कार्यों और जन आंदोलनों से जुड़े अलग-अलग चरणों को दर्शाते हैं।
इन नौ स्थलों को सत्याग्रह के विकास के अलग-अलग चरणों से जोड़ा गया है। पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन गांधीजी के नस्लीय भेदभाव के अनुभव और प्रतिरोध की शुरुआती सोच को दर्शाता है। फीनिक्स बस्ती सत्य और अहिंसा पर आधारित समुदाय बनाने के प्रयोग को प्रस्तुत करती है।
भारत में गांधीजी की वापसी के बाद सत्याग्रह के विचार को व्यापक जन आंदोलनों से जोड़ा गया। महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम और मणि भवन इस विकास और विस्तार के चरण का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वहीं हरिजन सेवक संघ, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति सत्याग्रह की विरासत के संस्थागत रूप और उसके बाद के प्रभाव को दर्शाने वाले स्थल हैं।
किसी स्थल को UNESCO की विश्व धरोहर सूची के लिए विचार किए जाने से पहले उसे संबंधित देश की अस्थायी सूची में शामिल किया जाना आवश्यक होता है। इसलिए किसी स्थल का Tentative List में आना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलने के समान नहीं है।
इसके बाद संबंधित स्थल के संरक्षण, ऐतिहासिक महत्व और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अंतिम विश्व धरोहर का दर्जा UNESCO की निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही दिया जाता है।
भारत के पांच नए स्थलों का अस्थायी सूची में शामिल होना देश की विविध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे इन स्थलों के संरक्षण, शोध और उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।