वैज्ञानिकों के एक अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी के आकार के ग्रह उन तारा प्रणालियों में भी स्थिर कक्षाओं में रह सकते हैं, जहां एक नहीं, बल्कि दो तारे मौजूद हों। यह खोज उन संभावनाओं को समझने में मदद कर सकती है, जिनके तहत ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे ग्रहों का अस्तित्व संभव है। आमतौर पर हम ऐसे ग्रहों की कल्पना करते हैं, जो हमारे सौर मंडल की तरह एक तारे की परिक्रमा करते हैं। लेकिन कुछ तारा प्रणालियों में दो तारे एक-दूसरे के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के साथ मौजूद रहते हैं।
शोधकर्ताओं ने 70 Ophiuchi नाम की तारा प्रणाली का अध्ययन किया, जो पृथ्वी से लगभग 16 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। अध्ययन के अनुसार, इस प्रणाली में पृथ्वी के आकार के ग्रहों के लिए स्थिर कक्षाओं में बने रहना संभव हो सकता है। इसका अर्थ है कि दूसरे तारे का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव होने के बावजूद कुछ ग्रह लंबे समय तक अपनी कक्षा में रह सकते हैं।
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी ग्रह का स्थिर रहना उसके संभावित रहने योग्य होने की दिशा में एक जरूरी पहलू है। हालांकि, केवल स्थिर कक्षा होने से यह साबित नहीं होता कि उस ग्रह पर जीवन मौजूद है या वहां जीवन पनप सकता है।
70 Ophiuchi एक द्वितारा प्रणाली है, यानी ऐसी तारा प्रणाली जिसमें दो तारे एक-दूसरे के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण एक साझा केंद्र के आसपास घूमते हैं। यह प्रणाली पृथ्वी से लगभग 16 प्रकाश वर्ष दूर है। प्रकाश वर्ष दूरी मापने की एक इकाई है, जिसका अर्थ है कि प्रकाश एक वर्ष में जितनी दूरी तय करता है।
इस तरह की प्रणालियां वैज्ञानिकों के लिए खास हैं, क्योंकि यहां ग्रहों को एक के बजाय दो तारों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। इससे ग्रहों की कक्षा और उनकी लंबी अवधि की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने यह समझने का प्रयास किया कि क्या ऐसी परिस्थितियों में पृथ्वी के आकार के ग्रह अपनी कक्षा में सुरक्षित रह सकते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि सही परिस्थितियों में इन ग्रहों का अस्तित्व संभव हो सकता है।
हमारे सौर मंडल में पृथ्वी सहित दूसरे ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। लेकिन द्वितारा प्रणालियों में गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव अधिक जटिल हो सकता है। दोनों तारों की स्थिति और उनके खिंचाव के कारण ग्रह की गति और कक्षा बदल सकती है।
यदि ग्रह की कक्षा बहुत अधिक अस्थिर हो जाए, तो वह अपने मूल रास्ते से दूर जा सकता है। इसके विपरीत, स्थिर कक्षा किसी ग्रह को लंबे समय तक अपने तारे या तारों के आसपास बने रहने में मदद कर सकती है।
70 Ophiuchi पर किया गया अध्ययन इसी सवाल को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिल सकती है कि पृथ्वी जैसे ग्रह किन परिस्थितियों में दो तारों वाली प्रणालियों में भी मौजूद रह सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में K-ड्वार्फ श्रेणी के तारों पर ध्यान दिया। ये तारे सूर्य की तुलना में सामान्यतः छोटे और ठंडे होते हैं। इनकी विशेषताओं को समझना उन ग्रहों की संभावनाओं का अध्ययन करने में उपयोगी हो सकता है, जहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं।
किसी ग्रह पर जीवन की संभावना का आकलन करते समय वैज्ञानिक कई बातों पर विचार करते हैं। इनमें तारे से मिलने वाली ऊर्जा, ग्रह की कक्षा, तापमान और तरल पानी की संभावित उपलब्धता शामिल हैं।
हालांकि, किसी तारे का छोटा या ठंडा होना अपने आप में जीवन की गारंटी नहीं है। ग्रह का वातावरण, उसकी सतह की परिस्थितियां और अन्य भौतिक विशेषताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
अध्ययन में लगभग एक सदी तक फैले खगोलीय आंकड़ों और कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग किया गया। ऐसे आंकड़े वैज्ञानिकों को तारों की गति और उनके गुरुत्वाकर्षण प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।
कंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से शोधकर्ता अलग-अलग परिस्थितियों में ग्रहों की संभावित कक्षाओं का आकलन कर सकते हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कोई ग्रह लंबे समय तक स्थिर रह पाएगा या नहीं।
अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी जैसे ग्रह 70 Ophiuchi प्रणाली के रहने योग्य क्षेत्र में स्थिर रह सकते हैं। यह निष्कर्ष भविष्य में ऐसे ग्रहों की खोज के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, सिमुलेशन में किसी ग्रह की संभावित स्थिरता दिखने का अर्थ यह नहीं है कि उस ग्रह की वास्तविक मौजूदगी की पुष्टि भी हो गई है।
रहने योग्य क्षेत्र किसी तारे के आसपास का वह इलाका होता है, जहां उचित वायुमंडलीय परिस्थितियों में किसी ग्रह की सतह पर तरल पानी मौजूद रह सकता है। तरल पानी को पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी माना जाता है, इसलिए वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाएं तलाशते समय इस क्षेत्र को विशेष महत्व देते हैं।
यदि कोई ग्रह अपने तारे से बहुत अधिक दूर हो, तो वहां अत्यधिक ठंड हो सकती है। दूसरी ओर, तारे के बहुत करीब स्थित ग्रह पर तापमान इतना अधिक हो सकता है कि सतह पर तरल पानी बने रहना मुश्किल हो जाए।
70 Ophiuchi के अध्ययन में पृथ्वी जैसे ग्रहों के लिए ऐसे क्षेत्र में स्थिर कक्षाओं की संभावना सामने आई है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि दो तारों वाली प्रणालियों में भी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां कहां बन सकती हैं।
यह समझना जरूरी है कि रहने योग्य क्षेत्र में मौजूद होना और वास्तव में रहने योग्य होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी ग्रह की कक्षा स्थिर हो सकती है, लेकिन वहां जीवन के लिए जरूरी वातावरण, पानी या अन्य परिस्थितियां मौजूद हों, यह आवश्यक नहीं है।
इसलिए 70 Ophiuchi से जुड़ा अध्ययन जीवन की खोज में एक संभावित दिशा दिखाता है, न कि किसी दूसरे ग्रह पर जीवन मिलने का प्रमाण।
शोधकर्ताओं ने दोनों तारों के आसपास बृहस्पति जैसे विशाल ग्रहों की मौजूदगी की संभावनाओं की भी जांच की। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अध्ययन में मुख्य तारे से लगभग पांच खगोलीय इकाई (AU) तक की दूरी के दायरे में ऐसे विशाल ग्रहों को लेकर सीमाएं निर्धारित की गईं।
एक खगोलीय इकाई पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी के बराबर होती है। इसका उपयोग सौर मंडल और दूसरी तारा प्रणालियों में दूरियां बताने के लिए किया जाता है।
विशाल ग्रहों की मौजूदगी या उनकी अनुपस्थिति को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे ग्रह किसी प्रणाली में दूसरे ग्रहों की कक्षाओं और उनकी गति को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अध्ययन में किसी विशेष दूरी तक विशाल ग्रहों को लेकर निष्कर्ष सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी प्रणाली में किसी भी प्रकार के ग्रह मौजूद नहीं हो सकते।
भविष्य में विकसित होने वाली उन्नत अंतरिक्ष दूरबीनें वैज्ञानिकों को पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज में नई मदद दे सकती हैं। इनमें NASA की प्रस्तावित Habitable Worlds Observatory भी शामिल है। इसका उद्देश्य ऐसे ग्रहों का अध्ययन करना है, जहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद होने की संभावना हो सकती है।
ऐसी दूरबीनों से वैज्ञानिक ग्रहों के बारे में अधिक जानकारी जुटाने और उनके वातावरण में जीवन से जुड़े संभावित संकेतों की जांच करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। दो तारों वाली प्रणालियों में ग्रहों की खोज करना भी इस व्यापक वैज्ञानिक प्रयास का हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, किसी ग्रह का पता लगाना और वहां जीवन के प्रमाण खोजना अलग-अलग चरण हैं। इसके लिए लंबे समय तक अवलोकन और अलग-अलग वैज्ञानिक तरीकों की जरूरत हो सकती है।
70 Ophiuchi तारा प्रणाली पर किया गया अध्ययन इस संभावना को मजबूत करता है कि पृथ्वी के आकार के ग्रह दो तारों वाली प्रणालियों में भी स्थिर कक्षाओं में रह सकते हैं। लंबे समय के खगोलीय आंकड़ों और कंप्यूटर सिमुलेशन से मिले निष्कर्ष वैज्ञानिकों को ऐसे ग्रहों की परिस्थितियां समझने में मदद कर सकते हैं।
भविष्य की उन्नत दूरबीनें इन संभावनाओं की जांच को आगे बढ़ा सकती हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस प्रणाली में जीवन मौजूद है। फिलहाल, यह शोध ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे ग्रहों और संभावित रहने योग्य दुनियाओं की तलाश के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा प्रस्तुत करता है।