ई-संजीवनी से 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन पूरे, PM मोदी ने ‘मन की बात’ में सराहना की

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26 Oct 2026
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News Synopsis

भारत में डिजिटल तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने की दिशा में ई-संजीवनी ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के नवीनतम एपिसोड में बताया कि राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ई-संजीवनी के माध्यम से देशभर में करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि दिखाती है कि डिजिटल तकनीक की मदद से दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी डॉक्टरों की सलाह और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ई-संजीवनी ने यह साबित किया है कि तकनीक आम लोगों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ जरूरी सेवाओं को उन स्थानों तक पहुंचा सकती है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचना कठिन होता है। इस उपलब्धि में डॉक्टरों की मेहनत, स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता और डिजिटल सेवाओं पर नागरिकों के भरोसे की अहम भूमिका रही है।

ई-संजीवनी की मदद से उन लोगों को भी चिकित्सा सलाह मिल सकती है, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, लद्दाख और नागालैंड जैसे क्षेत्रों के उदाहरण बताते हैं कि टेलीमेडिसिन स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में किस तरह मदद कर सकती है।

ई-संजीवनी ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी (e-Sanjeevani Gives a New Direction to Digital Healthcare)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में ई-संजीवनी की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों को चिकित्सा विशेषज्ञता से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।

टेली-कंसल्टेशन का अर्थ है फोन या डिजिटल माध्यमों की मदद से डॉक्टर से चिकित्सा सलाह लेना। इसके जरिए मरीज और डॉक्टर हमेशा एक ही स्थान पर मौजूद हुए बिना भी बातचीत कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी भी विशेषज्ञ डॉक्टर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

भारत जैसे विशाल देश में यह व्यवस्था खास तौर पर उपयोगी है, क्योंकि कई दूरस्थ और भौगोलिक रूप से अलग-थलग क्षेत्रों में बड़े अस्पतालों तथा विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचना आसान नहीं होता। ई-संजीवनी लोगों को अपने आसपास उपलब्ध स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से चिकित्सा सलाह प्राप्त करने में मदद करती है।

दूर-दराज के क्षेत्रों में मरीजों को मिला उपचार (Patients Receive Medical Assistance in Remote Areas)

प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी के माध्यम से सहायता पाने वाले कई मरीजों के उदाहरण साझा किए। इन मामलों से पता चलता है कि डिजिटल चिकित्सा सेवाएं उन क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है।

बाराटांग द्वीप के बच्चे को मिली समय पर चिकित्सा सलाह (Child on Baratang Island Receives Timely Medical Advice)

प्रधानमंत्री ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बाराटांग द्वीप पर रहने वाले जारवा जनजातीय समुदाय के एक बच्चे का उदाहरण दिया। बच्चे को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। ऐसी स्थिति में स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से एक विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह ली।

जांच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद बच्चे में निमोनिया की पहचान हुई। प्रधानमंत्री के अनुसार, जरूरी चिकित्सकीय हस्तक्षेप के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ। यह उदाहरण बताता है कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी डिजिटल माध्यम से विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने पर मरीजों को समय पर सहायता मिल सकती है।

लक्षद्वीप में 60 वर्षीय मरीज को मिला मार्गदर्शन (60-Year-Old Patient in Lakshadweep Receives Guidance)

प्रधानमंत्री ने लक्षद्वीप के कालपेनी में रहने वाले 60 वर्षीय कुन्ही कोया का भी उल्लेख किया। बीमार पड़ने पर उन्हें ई-संजीवनी के जरिए चिकित्सा सहायता मिली। कवरत्ती में मौजूद एक डॉक्टर ने इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्थानीय चिकित्सा टीम को मार्गदर्शन दिया।

इस तरह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं और दूर बैठे डॉक्टर की विशेषज्ञ सलाह के बीच संपर्क स्थापित किया गया। इससे मरीज की स्थिति को समझने और उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिली।

लद्दाख के जांस्कर में गर्भवती महिला को मिली विशेषज्ञ सहायता (Pregnant Woman in Zanskar, Ladakh Receives Specialist Assistance)

लद्दाख के जांस्कर क्षेत्र में कुंजांग डोलमा को गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता मिली। ई-संजीवनी के माध्यम से उन्हें जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। यह उदाहरण दर्शाता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में भी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों को विशेषज्ञों से जोड़ने में मदद कर सकती हैं।

नागालैंड के बच्चे के कान के संक्रमण का पता चला (Ear Infection Diagnosed in a Child from Nagaland)

प्रधानमंत्री ने नागालैंड के पेरेन जिले में रहने वाले 12 वर्षीय मुशेम का मामला भी साझा किया। बच्चे को बुखार के साथ कान में संक्रमण की समस्या थी। ई-संजीवनी के माध्यम से उसकी स्थिति का आकलन किया गया और संक्रमण की पहचान के बाद दवा दी गई।

इन उदाहरणों के जरिए प्रधानमंत्री ने बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं अलग-अलग आयु वर्ग के मरीजों और विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक चिकित्सा सलाह पहुंचाने में उपयोगी भूमिका निभा रही हैं।

देशभर में करीब 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका (Role of Nearly 1.90 Lakh Ayushman Arogya Mandirs Across India)

प्रधानमंत्री ने देशभर में संचालित करीब 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये केंद्र स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं।

इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और शुरुआती स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान देने में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।

ई-संजीवनी इन केंद्रों के काम को और प्रभावी बनाने में सहायता करती है। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी जरूरत पड़ने पर दूसरे डॉक्टरों या विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। इससे मरीजों को हर बार बड़े अस्पताल तक जाने की आवश्यकता कम हो सकती है, हालांकि गंभीर स्थिति में प्रत्यक्ष चिकित्सा जांच या अस्पताल में उपचार जरूरी हो सकता है।

ई-संजीवनी कैसे काम करती है? (How Does e-Sanjeevani Work?)

ई-संजीवनी एक राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जो डिजिटल माध्यम से डॉक्टरों और मरीजों के बीच संपर्क स्थापित करती है। इसके जरिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक-दूसरे से परामर्श कर सकते हैं और मरीज घर से भी डॉक्टर की सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

डॉक्टर से डॉक्टर के बीच परामर्श (Doctor-to-Doctor Consultation)

ई-संजीवनी के एक तरीके में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर उपलब्ध स्वास्थ्यकर्मी या डॉक्टर किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर मरीजों की स्थिति को समझने और आगे की चिकित्सा के बारे में मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर से मरीज के बीच परामर्श (Doctor-to-Patient Consultation)

दूसरे तरीके में मरीज सीधे डिजिटल माध्यम से डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। इससे घर बैठे चिकित्सा परामर्श प्राप्त करने की सुविधा मिलती है और सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अस्पताल या बड़े स्वास्थ्य केंद्र तक जाने की जरूरत कम हो सकती है।

हालांकि, टेलीमेडिसिन हर बीमारी के लिए प्रत्यक्ष जांच का विकल्प नहीं है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार मरीज को अस्पताल में जांच या इलाज कराने की आवश्यकता हो सकती है।

ई-संजीवनी किसने विकसित किया? (Who Developed e-Sanjeevani?)

ई-संजीवनी को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) ने विकसित किया है। इसे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा के रूप में शुरू किया था।

इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीक के जरिए चिकित्सा सलाह को अधिक लोगों तक पहुंचाना है। खासकर उन लोगों के लिए यह सेवा उपयोगी हो सकती है, जिन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

निष्कर्ष: डिजिटल तकनीक से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी (Conclusion: Digital Technology Expands Access to Healthcare)

ई-संजीवनी के माध्यम से करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन का आंकड़ा भारत में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में साझा किए गए उदाहरण बताते हैं कि यह सेवा दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को डॉक्टरों और विशेषज्ञों से जोड़ने में मदद कर रही है।

करीब 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के साथ मिलकर ऐसी डिजिटल सेवाएं स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने, नियमित जांच को बढ़ावा देने और समय पर चिकित्सा सलाह उपलब्ध कराने में योगदान दे सकती हैं। आने वाले समय में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि लोगों को इनकी जानकारी, जरूरी तकनीकी सुविधाएं और आवश्यकता के अनुसार प्रत्यक्ष चिकित्सा सहायता कितनी आसानी से मिलती है।

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