भारत अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के अगले चरण के लिए Digital Public Infrastructure (DPI) 2.0 को लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह एक रणनीतिक फ्रेमवर्क है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना और उत्पादकता को बढ़ाना है। DPI@2047 विज़न के तहत पेश किया गया यह रोडमैप वेलफेयर-आधारित डिजिटल सिस्टम से आगे बढ़कर आर्थिक दक्षता, नवाचार और दीर्घकालिक मजबूती पर केंद्रित है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन के अनुसार DPI 2.0 भारत के लिए एक शक्तिशाली प्रोडक्टिविटी इंजन बन सकता है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद करेगा और घरेलू क्षमताओं को मजबूत करेगा। यह पहल आधार (Aadhaar) और UPI जैसे सफल प्लेटफॉर्म्स की नींव पर आधारित है, जिन्होंने वित्तीय समावेशन और सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।
अब फोकस आर्थिक मूल्य को प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ाने पर है। जल्द शुरू होने वाली पायलट परियोजनाओं के साथ DPI 2.0 को भारत को 2047 तक एक वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है।
भारत का Digital Public Infrastructure 2.0 रोडमैप एक व्यापक रणनीति है, जिसका उद्देश्य डिजिटल सिस्टम को प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में एकीकृत करना है। इसे नीति आयोग (NITI Aayog) के नेतृत्व में विकसित किया गया है।
DPI के पहले चरण में मुख्य रूप से समावेशन और कल्याणकारी सेवाओं पर ध्यान दिया गया था, जबकि दूसरे चरण में आर्थिक परिवर्तन को प्राथमिकता दी गई है। इस रोडमैप में आठ प्रमुख सेक्टर शामिल हैं:
MSMEs
कृषि (Agriculture)
स्वास्थ्य (Healthcare)
शिक्षा (Education)
क्रेडिट सिस्टम
ऊर्जा (Energy)
सामाजिक सुरक्षा (Social Protection)
इस पहल में विकेंद्रीकृत (decentralized) कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें जिला-स्तरीय मॉडल शामिल होंगे ताकि स्थानीय समस्याओं का समाधान किया जा सके।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-ड्रिवन सिस्टम्स के इंटीग्रेशन पर भी फोकस किया जा रहा है ताकि दक्षता बढ़े, लागत कम हो और सेवाओं में सुधार हो।
भारत का डिजिटल सफर पिछले दशक में काफी तेजी से आगे बढ़ा है। DPI का पहला चरण आधार और UPI जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आधारित था, जिन्होंने:
डिजिटल पहचान (Identity Verification) को मजबूत किया
डिजिटल पेमेंट्स को क्रांतिकारी बनाया
वित्तीय समावेशन को बढ़ाया
इन सिस्टम्स ने करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा और डिजिटल लेनदेन को तेजी से बढ़ाया।
DPI 2.0 इसी सफलता पर आधारित है और इसका उद्देश्य अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में उपयोग करना है। DPI@2047 विज़न भारत को स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से जुड़ा है।
पायलट प्रोजेक्ट्स वित्त वर्ष 2026–27 में शुरू होने की उम्मीद है, जिनका शुरुआती फोकस MSMEs और कृषि क्षेत्रों पर रहेगा।
DPI 2.0 को अर्थशास्त्रियों, उद्योग विशेषज्ञों और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
NITI Aayog के अधिकारियों के अनुसार यह फ्रेमवर्क केवल सेवाएं देने के बजाय आर्थिक मूल्य उत्पन्न करने पर केंद्रित है।
उद्योग जगत का मानना है, कि डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और सिस्टम इंटीग्रेशन से:
व्यवसायों की लागत कम होगी
बाजार तक पहुंच आसान होगी
उत्पादकता बढ़ेगी
MSMEs पर विशेष उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की रोजगार और GDP में बड़ी हिस्सेदारी रखता है।
NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार DPI ने पहले ही वित्तीय समावेशन और सेवा दक्षता में बड़ा योगदान दिया है।
World Bank के अनुसार मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वाले देश अधिक उत्पादकता वृद्धि और आर्थिक स्थिरता दिखाते हैं।
IMF विशेषज्ञों का मानना है, कि डिजिटलाइजेशन कुल फैक्टर प्रोडक्टिविटी (Total Factor Productivity) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में DPI 2.0 से:
सेवाओं की दक्षता बढ़ेगी
सूचना तक पहुंच बेहतर होगी
निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी
DPI 2.0 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकता है। इससे:
उत्पादन और निवेश में वृद्धि होगी
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
ग्रामीण आय में सुधार होगा
विकेंद्रीकृत मॉडल राज्यों और जिलों को अधिक भूमिका देगा, जिससे शासन अधिक प्रभावी बनेगा।
वैश्विक स्तर पर यह पहल भारत को डिजिटल इनोवेशन के नेता के रूप में स्थापित कर सकती है।
DPI 2.0 की सफलता इसके प्रभावी कार्यान्वयन और सरकार, उद्योग तथा टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के सहयोग पर निर्भर करेगी।
मुख्य चुनौतियाँ:
डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी
सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप
2026–27 में शुरू होने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स इस मॉडल की वास्तविक परीक्षा होंगे।
यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो DPI 2.0 भारत के लिए एक मजबूत आर्थिक परिवर्तन का आधार बन सकता है, जो आने वाले दशकों में विकास, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देगा।