दिल्ली-एनसीआर में 56,000 से अधिक वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड पर आधारित एक बड़ी स्टडी में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के बीच मजबूत संबंध सामने आया है। शोध में पाया गया कि ये दोनों बीमारियां लोगों में अलग-अलग होने की तुलना में अपेक्षा से अधिक बार एक साथ दिखाई देती हैं। स्टडी के अनुसार, लगभग 5 प्रतिशत प्रतिभागियों में डायबिटीज और हाइपरटेंशन दोनों पाए गए।
शोधकर्ताओं का कहना है कि खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद लोगों को केवल डायबिटीज या केवल ब्लड प्रेशर की जांच कराने के बजाय दोनों की नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अध्ययन दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा अस्पतालों में preventive health check-up कराने वाले लोगों पर आधारित था, इसलिए इसके नतीजों को पूरे भारत की आबादी पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
मैक्स हेल्थकेयर Max Healthcare study के शोधकर्ताओं ने दिल्ली-एनसीआर के छह अस्पतालों में 2021 से 2024 के बीच preventive health check-up कराने वाले 56,393 वयस्कों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड का अध्ययन किया। यह शोध Diabetes & Metabolic Syndrome: Clinical Research & Reviews जर्नल में प्रकाशित हुआ।
शोध में पाया गया कि लगभग हर 20 में से एक व्यक्ति में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों मौजूद थे। शोधकर्ताओं के अनुसार, दोनों बीमारियों का एक साथ पाया जाना उस स्थिति की तुलना में काफी अधिक था, जितना केवल उनके अलग-अलग प्रसार के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता था।
स्टडी में प्रतिभागियों को डायबिटीज की श्रेणी में तब रखा गया जब वे पहले से इसका इलाज करा रहे थे या उनके HbA1c का स्तर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक था, अथवा उनका fasting blood sugar 126 mg/dL या उससे अधिक था। हाइपरटेंशन के लिए इलाज चल रहा होना या 140/90 mmHg या उससे अधिक ब्लड प्रेशर होना मानदंडों में शामिल था।
डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड शुगर का बढ़ा रहना शरीर की रक्त वाहिकाओं और अन्य अंगों पर असर डाल सकता है। वहीं, लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर भी हृदय, मस्तिष्क और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
मैक्स हेल्थकेयर के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड शुगर जैसे कारक metabolic syndrome से भी जुड़े हो सकते हैं।
स्टडी का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष उम्र से जुड़ा हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का एक साथ होना लगभग 40 वर्ष की उम्र के आसपास तेजी से बढ़ना शुरू होता है।
यह वृद्धि 50 के दशक के आखिर तक जारी रहती है। इसके बाद दोनों स्थितियों के एक साथ पाए जाने की दर धीरे-धीरे स्थिर होने लगती है और लगभग 70 वर्ष की उम्र के आसपास इसका स्तर plateau पर पहुंचता दिखाई देता है।
स्टडी में लगभग 17 प्रतिशत लोगों में 70 वर्ष की उम्र के आसपास दोनों स्थितियां पाई गईं। यह पैटर्न बताता है कि उम्र बढ़ने के साथ नियमित preventive health check-up का महत्व और बढ़ सकता है।
40 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में कई metabolic और cardiovascular risk factors बढ़ सकते हैं। इसलिए केवल किसी एक बीमारी के लक्षणों या पुराने मेडिकल रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों की निगरानी उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के लिए जांच कितनी बार होनी चाहिए, यह उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, परिवार के इतिहास और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
अध्ययन में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के बीच मजबूत संबंध पाया गया। स्टडी के अनुसार, डायबिटीज वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना उन लोगों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक थी जिन्हें डायबिटीज नहीं थी।
दूसरी ओर, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में डायबिटीज होने की संभावना भी उन लोगों की तुलना में लगभग 2.5 गुना अधिक पाई गई।
इससे संकेत मिलता है कि दोनों स्थितियों को अलग-अलग समस्याओं के रूप में देखने के बजाय कई मामलों में एक साथ cardiovascular और metabolic risk के हिस्से के रूप में देखना अधिक उपयोगी हो सकता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन के परिणाम preventive healthcare में अधिक integrated approach की जरूरत को दिखाते हैं।
मैक्स हेल्थकेयर के biostatistics consultant डॉ. अभय इंद्रायन ने बताया कि 40 वर्ष की उम्र के बाद दोनों स्थितियों के साथ पाए जाने की दर में वृद्धि combined screening strategies के लिए उपयोगी quantitative evidence देती है।
इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति की जांच डायबिटीज के लिए की जा रही है, तो उसके ब्लड प्रेशर की भी जांच की जा सकती है। इसी तरह, हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति में ब्लड शुगर की जांच पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
किसी बीमारी की शुरुआती पहचान होने पर व्यक्ति और डॉक्टर समय रहते lifestyle changes, monitoring और जरूरत पड़ने पर उपचार पर विचार कर सकते हैं।
इससे उन जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है जो लंबे समय तक uncontrolled diabetes या hypertension से जुड़े होते हैं।
भारत में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों पर अलग-अलग काफी शोध हुआ है। लेकिन दोनों बीमारियों के एक साथ होने की दर और उम्र के साथ इसमें होने वाले बदलाव पर तुलनात्मक रूप से कम जानकारी उपलब्ध है।
मैक्स हेल्थकेयर के इस अध्ययन ने इसी पहलू पर ध्यान दिया और अलग-अलग आयु समूहों में दोनों स्थितियों के संयुक्त प्रसार का विश्लेषण किया।
56,393 लोगों के बड़े dataset ने शोधकर्ताओं को यह देखने का अवसर दिया कि उम्र बढ़ने के साथ दोनों बीमारियों के एक साथ होने की दर किस तरह बदलती है।
इस शोध की खास बात यह है कि इसमें केवल यह नहीं बताया गया कि कितने लोगों को दोनों बीमारियां थीं, बल्कि यह भी देखा गया कि उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या किस तरह बदलती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, कम उम्र में दोनों स्थितियों का एक साथ होना बहुत कम था, लेकिन 40 वर्ष के आसपास इसमें तेज वृद्धि दिखाई देने लगी। इसके बाद यह वृद्धि 50 के दशक के आखिर तक जारी रही।
शोधकर्ताओं का मानना है कि preventive healthcare का उद्देश्य केवल एक बीमारी की पहचान करना नहीं होना चाहिए। जब दो स्वास्थ्य समस्याएं एक साथ अपेक्षा से अधिक बार दिखाई देती हैं, तो screening programmes में दोनों को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है।
विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों के लिए blood pressure और blood sugar की नियमित निगरानी overall health risk की बेहतर तस्वीर दे सकती है।
मैक्स हेल्थकेयर भी diabetes और hypertension को metabolic health से जुड़े महत्वपूर्ण risk factors के रूप में देखता है।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का समय पर पता चलना स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर और हाई ब्लड प्रेशर हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं जैसे गंभीर complications के जोखिम से जुड़े हैं। मैक्स हेल्थकेयर भी metabolic syndrome और hypertension को cardiovascular तथा kidney-related health risks से जोड़ता है।
इसलिए blood sugar और blood pressure की जांच को एक साथ देखना कुछ लोगों में अधिक व्यापक health assessment का हिस्सा बन सकता है।
हालांकि, ये सामान्य risk factors हैं। व्यक्तिगत जांच और उपचार का निर्णय योग्य healthcare professional की सलाह से ही किया जाना चाहिए।
अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि healthcare systems वयस्कों के लिए combined screening approaches पर विचार कर सकते हैं, खासकर middle age में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए।
Blood pressure और blood sugar की नियमित निगरानी किसी व्यक्ति के metabolic और cardiovascular risk को समझने में मदद कर सकती है।
हालांकि, इस अध्ययन की एक महत्वपूर्ण सीमा भी है। इसमें दिल्ली-एनसीआर के छह Max Healthcare centres में preventive health check-up कराने वाले लोगों के रिकॉर्ड शामिल थे। इसलिए ये परिणाम भारत की पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं करते।
डायबिटीज और hypertension दोनों ही आम chronic health conditions हैं। जब दोनों एक व्यक्ति में एक साथ मौजूद होते हैं, तो स्वास्थ्य जोखिमों का प्रबंधन अधिक जटिल हो सकता है।
इसी वजह से preventive healthcare में केवल एक बीमारी पर ध्यान देने के बजाय व्यक्ति के overall risk profile को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है।
मैक्स हेल्थकेयर के अनुसार, metabolic syndrome में high blood pressure और high blood sugar जैसे कई risk factors एक साथ दिखाई दे सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में 56,000 से अधिक वयस्कों पर किए गए अध्ययन ने डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के एक साथ होने के महत्वपूर्ण संबंध को सामने रखा है। अध्ययन में 56,393 लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया और करीब 5 प्रतिशत प्रतिभागियों में दोनों स्थितियां पाई गईं।
शोध के अनुसार, दोनों बीमारियों के एक साथ होने की दर लगभग 40 वर्ष की उम्र के बाद तेजी से बढ़ती है और 50 के दशक के आखिर तक बढ़ती रहती है। लगभग 70 वर्ष की उम्र में यह दर करीब 17 प्रतिशत तक पहुंचती दिखाई दी।
अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि खासकर 40 वर्ष के बाद preventive health check-ups में blood sugar और blood pressure दोनों की निगरानी पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, यह एक दिल्ली-एनसीआर आधारित अध्ययन है और इसके निष्कर्षों को पूरे भारत पर लागू करने से पहले अन्य आबादी में भी शोध की जरूरत होगी।