विश्व बैंक की विश्व विकास रिपोर्ट 2026 (World Development Report 2026), जिसका शीर्षक The Promise of Artificial Intelligence है, के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कम और मध्यम आय वाले देशों को लंबे समय से चली आ रही विकास संबंधी समस्याओं को हल करने और आर्थिक विकास को गति देने में मदद कर सकती है।
रिपोर्ट AI को विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताती है। हालांकि, इसमें यह चेतावनी भी दी गई है कि जिन देशों को इस तकनीक से सबसे अधिक लाभ मिल सकता है, उनमें से कई अभी इसका प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
विश्व बैंक की सलाह है कि विकासशील देश तुरंत अपने उन्नत AI मॉडल बनाने में बड़े निवेश करने के बजाय पहले से उपलब्ध AI टूल अपनाने और उन्हें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने पर ध्यान दें।
इस तरीके से देश कम समय में AI के लाभ उठा सकते हैं। साथ ही, वे धीरे-धीरे अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं और भविष्य में नए आविष्कारों के लिए जरूरी बुनियादी ढाँचा तैयार कर सकते हैं।
विश्व बैंक World Bank का कहना है कि विकासशील देशों को सबसे उन्नत AI मॉडल बनाने के लिए बड़ी तकनीकी कंपनियों से तुरंत प्रतिस्पर्धा करने के बजाय AI के व्यावहारिक इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्नत AI प्रणाली विकसित करने के लिए भारी वित्तीय निवेश, शक्तिशाली कंप्यूटिंग सुविधाओं, विशेष तकनीकी कौशल और कई वर्षों के शोध की जरूरत होती है। इन आवश्यकताओं के कारण कम और मध्यम आय वाले देशों के लिए निकट भविष्य में स्थापित AI कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दुनिया में कुछ ही देशों और कंपनियों के पास बड़े स्तर पर सबसे उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं।
विकासशील देशों के लिए पहले से उपलब्ध AI प्रणालियों को अपनाना और उन्हें स्थानीय भाषाओं, उद्योगों तथा सरकारी सेवाओं के अनुसार ढालना अधिक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है।
इस रणनीति से सरकारों, कारोबारों और विभिन्न संस्थानों को AI के उपयोग की संभावनाएँ तलाशने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, वे भविष्य में अधिक महत्वाकांक्षी तकनीकी परियोजनाओं के लिए जरूरी कौशल और बुनियादी सुविधाएँ भी विकसित कर सकेंगे।
हालांकि, सबसे उन्नत AI मॉडल बनाना अधिकांश विकासशील देशों के लिए अभी भी कठिन है, लेकिन विश्व बैंक ने ऐसी कुछ पहलों का उल्लेख किया है, जिन्हें स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
इनमें भारत का Sarvam AI, संयुक्त अरब अमीरात का Falcon और उप-सहारा अफ्रीका का InkubaLM शामिल हैं। ये परियोजनाएँ ऐसे AI मॉडल विकसित करने के प्रयासों को दर्शाती हैं, जो क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
विविध भाषाओं और संस्कृतियों वाले देशों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए AI टूल विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं। आम तौर पर उपलब्ध कुछ AI मॉडल हर भाषा या सांस्कृतिक संदर्भ को समान रूप से अच्छी तरह समझने में सक्षम नहीं होते।
उदाहरण के लिए, स्थानीय भाषाओं के लिए बनाए गए AI टूल उन लोगों को डिजिटल सेवाओं, शिक्षा से जुड़ी सामग्री और व्यावसायिक सुविधाओं तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं, जिन्हें भाषा के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि अधिकांश विकासशील देशों के लिए बिल्कुल शुरुआत से सबसे उन्नत AI मॉडल बनाना निकट भविष्य में व्यावहारिक लक्ष्य नहीं है। मौजूदा तकनीक को अपनाने, स्थानीय जरूरतों के अनुसार उसमें बदलाव करने और धीरे-धीरे अपनी क्षमताएँ विकसित करने का मिला-जुला तरीका अधिक उपयोगी हो सकता है।
रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में AI टूल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ChatGPT के लॉन्च होने के छह महीने के भीतर ही इसके वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का आधा हिस्सा मध्यम आय वाले देशों से आया था।
इसके बावजूद, अलग-अलग आय वर्ग वाले देशों में AI अपनाने की स्थिति समान नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च आय वाले देशों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लगभग 25 प्रतिशत लोगों ने ChatGPT अपनाया था। इसके मुकाबले, निम्न-मध्यम आय वाले देशों में यह आँकड़ा 4.7 प्रतिशत और कम आय वाले देशों में केवल 0.7 प्रतिशत था।
ये आँकड़े अमीर अर्थव्यवस्थाओं और कम संसाधनों वाले देशों के बीच मौजूद डिजिटल अंतर को दिखाते हैं। इंटरनेट की सीमित उपलब्धता, कमजोर डिजिटल बुनियादी ढाँचा, तकनीक का खर्च और जरूरी कौशल की कमी लोगों तथा कारोबारों को AI का पूरा लाभ उठाने से रोक सकती है।
यदि विकासशील देशों को उत्पादकता बढ़ाने, सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए AI का उपयोग करना है, तो इन बाधाओं को दूर करना जरूरी होगा।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में रोजगार पर जनरेटिव AI के संभावित प्रभाव का भी अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट का अनुमान है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में लगभग 4.5 प्रतिशत नौकरियाँ जनरेटिव AI के कारण स्वचालित हो सकती हैं। उच्च आय वाले देशों में यह अनुमान 14.2 प्रतिशत है।
इससे संकेत मिलता है कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में फिलहाल नौकरियों पर सीधा खतरा अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसकी एक वजह यह है कि इन देशों में बड़ी संख्या में लोग ऐसे काम करते हैं, जिनमें शारीरिक श्रम की जरूरत होती है, जबकि कुछ उन्नत AI प्रणालियाँ मुख्य रूप से ज्ञान और जानकारी पर आधारित पेशेवर कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि, AI की क्षमताएँ और उसका इस्तेमाल बढ़ने के साथ अलग-अलग देशों, व्यवसायों और रोजगार क्षेत्रों पर इसका प्रभाव भी बदल सकता है।
रिपोर्ट छोटे कारोबारों के लिए भी AI में कई संभावनाएँ देखती है। विकासशील देशों में रोजगार का एक बड़ा हिस्सा छोटे उद्यमों से जुड़ा होता है।
AI टूल छोटे कारोबारों को उत्पादकता बढ़ाने, ग्राहकों से संवाद करने, रोजमर्रा के प्रशासनिक काम सँभालने और जरूरी जानकारी तेजी से प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।
इस तरह उपयोगी डिजिटल सुविधाओं को अधिक लोगों तक पहुँचाकर AI कारोबारों को बेहतर तरीके से काम करने में सहायता दे सकता है। इसके लिए हर छोटे उद्यम को अपनी जटिल तकनीकी प्रणाली अलग से विकसित करने की जरूरत नहीं होगी।
विश्व बैंक विकासशील देशों को सलाह देता है कि वे AI को लेकर न तो बढ़ा-चढ़ाकर किए जा रहे दावों से प्रभावित हों और न ही जरूरत से ज्यादा डरें। इसके बजाय, उन्हें संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए।
एक ओर, जरूरी संसाधनों के बिना उन्नत AI मॉडल बनाने पर बहुत अधिक पैसा खर्च करना विकास की दूसरी जरूरी प्राथमिकताओं के लिए उपलब्ध धन को कम कर सकता है। दूसरी ओर, AI से पूरी तरह दूर रहने पर देश उत्पादकता और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के अवसर खो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारों को AI के प्रभावी इस्तेमाल के लिए जरूरी आधार तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए। इनमें भरोसेमंद डिजिटल बुनियादी ढाँचा, उपयुक्त कौशल, उपयोगी AI टूल तक पहुँच और तकनीक को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने की क्षमता शामिल हैं।
कारोबार और सार्वजनिक संस्थान भी उन व्यावहारिक समस्याओं की पहचान करके महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिन्हें AI की मदद से हल किया जा सकता है।
इस तरह देश केवल तकनीक से जुड़ी उम्मीदों या आशंकाओं के आधार पर फैसले लेने के बजाय वास्तविक परिणामों के आधार पर AI के लाभ और जोखिम का मूल्यांकन कर सकेंगे।
विश्व विकास रिपोर्ट 2026 कृत्रिम बुद्धिमत्ता को विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताती है, लेकिन साथ ही सही प्राथमिकताएँ तय करने की जरूरत पर जोर देती है।
अपने उन्नत AI मॉडल स्वतंत्र रूप से बनाने की कोशिश करने के बजाय मौजूदा AI टूल अपनाना, उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालना और डिजिटल तैयारी में सुधार करना विकासशील देशों को जल्दी लाभ पहुँचा सकता है।
डिजिटल बुनियादी ढाँचे, कौशल और व्यावहारिक उपयोगों में निवेश करके ये देश अधिक समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। साथ ही, वे धीरे-धीरे अपनी AI क्षमताओं को मजबूत कर भविष्य में नए मॉडल और तकनीक विकसित करने की बेहतर स्थिति में पहुँच सकते हैं।