भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने डिजिटल प्रणालियों में सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियों की पहचान करने के लिए Anthropic के उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल Claude Mythos का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी फिलहाल नियंत्रित वातावरण में इस मॉडल की क्षमताओं का परीक्षण कर रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब AI आधारित तकनीकें उन साइबर सुरक्षा खामियों का पता लगाने में सक्षम हो रही हैं, जिन्हें पारंपरिक जांच के दौरान पहचानना मुश्किल हो सकता है।
Anthropic ने अप्रैल 2026 में Claude Mythos पेश किया था। इसे खास तौर पर जटिल सॉफ्टवेयर कमजोरियों की पहचान करने और साइबर सुरक्षा से जुड़े शोध में सहायता देने के लिए तैयार किया गया है। CERT-In इस मॉडल की उपयोगिता और इससे जुड़े संभावित जोखिमों को समझने के बाद ही इसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, CERT-In Claude Mythos के परीक्षण को लेकर सावधानी बरत रहा है। एजेंसी की योजना है कि शुरुआत में चुनिंदा डिजिटल प्रणालियों और सुरक्षा से जुड़े कुछ कार्यों को ही इस AI मॉडल के माध्यम से जांचा जाए। फिलहाल सभी प्रणालियों का बड़े स्तर पर आकलन करने के लिए इस पर निर्भर रहने की योजना नहीं है।
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि एजेंसी इस मॉडल को धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक अपनी कार्यप्रणाली में शामिल करना चाहती है। इससे अधिकारियों को इसकी क्षमताओं को समझने, परिणामों की जांच करने और इसके संभावित जोखिमों का आकलन करने का अवसर मिलेगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, CERT-In फिलहाल Claude Mythos का परीक्षण एक अलग और सुरक्षित वातावरण में कर रहा है। यह परीक्षण व्यवस्था बाहरी डिजिटल प्रणालियों से जुड़ी हुई नहीं है। इसका उद्देश्य संवेदनशील जानकारियों को सुरक्षित रखना और AI मॉडल की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखना है।
रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि CERT-In को हाल ही में इस मॉडल तक पहुंच मिली है। एजेंसी अपनी सभी जानकारियां क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म पर भेजने को लेकर सतर्क है। इसलिए फिलहाल बंद वातावरण में ही इसकी जांच की जा रही है। इस तरीके से संवेदनशील सरकारी और तकनीकी जानकारी के अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है।
क्लाउड माइथोस के अलावा CERT-In कुछ अन्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल की क्षमताओं का भी आकलन कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें ऐसे मॉडल शामिल हैं जो Claude Mythos की लगभग 80 से 85 प्रतिशत क्षमताओं के बराबर प्रदर्शन कर सकते हैं।
एक से अधिक AI मॉडल का परीक्षण करने से एजेंसी को किसी एक तकनीकी कंपनी या सेवा प्रदाता पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, अलग-अलग मॉडलों के परिणामों की तुलना करके यह समझना आसान होगा कि कौन-सा मॉडल किस तरह की सुरक्षा खामी पहचानने में अधिक प्रभावी है।
Anthropic ने अप्रैल 2026 में क्लाउड माइथोस को पेश किया था। यह कंपनी का एक उन्नत AI मॉडल है, जिसे साइबर सुरक्षा से जुड़ी जटिल समस्याओं की पहचान करने के लिए विकसित किया गया है। कंपनी ने शुरुआत में अपने प्रोजेक्ट ग्लासविंग (Project Glasswing) के तहत कुछ चुनिंदा संगठनों को ही इसका सीमित इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
मॉडल की घोषणा के बाद भारत ने भी इस तक उचित पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की थी। भारत का मानना था कि ऐसी उन्नत तकनीक सॉफ्टवेयर में मौजूद उन कमजोरियों का पता लगाने में मदद कर सकती है, जिन्हें सामान्य सुरक्षा जांच के दौरान नजरअंदाज किया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, Claude Mythos ने अब तक व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले कई सॉफ्टवेयर सिस्टम में हजारों सुरक्षा खामियों की पहचान की है। इनमें वेब ब्राउजर भी शामिल हैं। इसकी खासियत यह बताई जा रही है कि यह ऐसी कमजोरियों को भी सामने ला सकता है, जिनकी पहचान पारंपरिक तरीकों से करना कठिन होता है।
भारत जैसे तेजी से डिजिटल सेवाओं का विस्तार करने वाले देश के लिए ऐसी तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म, वित्तीय सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रणालियों की सुरक्षा जांच को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती क्षमताओं के साथ साइबर सुरक्षा सरकारों और कारोबारों के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही है। सॉफ्टवेयर की कमजोरियों, वित्तीय प्लेटफॉर्म पर हमलों और बिना अनुमति AI गतिविधियों से जुड़े हालिया मामलों ने डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत को और बढ़ा दिया है।
पिछले कुछ सप्ताहों में कई सुरक्षा कमजोरियों की खबरें सामने आई हैं। इनमें eMudhra की सुरक्षा चाबियों से जुड़ी समस्याएं, PHP सॉफ्टवेयर की कमजोरियां और Node.js से जुड़े संभावित साइबर हमले शामिल बताए गए हैं। इन घटनाओं के बाद ऑनलाइन दुनिया में कथित तौर पर ‘ब्लैक अक्टूबर’ (Black October) को लेकर भी चर्चा हुई।
वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म पर सामने आई सुरक्षा घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। Binance से जुड़े एक बड़े सुरक्षा उल्लंघन की खबरों के साथ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और AU Small Finance Bank से संबंधित कथित डेटा सुरक्षा घटनाओं ने डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई चुनौती अनियंत्रित AI एजेंट यानी ऐसे AI सिस्टम हैं, जो उचित अनुमति के बिना डिजिटल संसाधनों तक पहुंचने या काम करने लगते हैं। CERT-In ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि कुछ अनधिकृत AI एजेंटों ने चुनिंदा भारतीय संगठनों की गोपनीय जानकारी और प्रणालियों तक पहुंच बना ली थी। हालांकि, एजेंसी ने संबंधित संगठनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।
इसके अलावा, कुछ अन्य घटनाओं ने भी AI एजेंटों की गतिविधियों पर निगरानी रखने की जरूरत को सामने रखा है। इनमें OpenAI से जुड़े एजेंटों की कथित गतिविधियां और अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइटों को निशाना बनाने से संबंधित खबरें शामिल हैं।
Anthropic के Claude से जुड़ी एक अन्य घटना की भी रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि एक हत्या की जांच के दौरान Claude ने पुलिस पोर्टल के माध्यम से गलत सूचना दी थी।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि AI तकनीक का इस्तेमाल केवल सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है। यदि इन प्रणालियों पर उचित नियंत्रण न हो, तो इनका दुरुपयोग भी हो सकता है। इसलिए AI एजेंटों की गतिविधियों पर नजर रखना, उनकी पहुंच सीमित करना और मजबूत सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी है।
CERT-In द्वारा Claude Mythos के इस्तेमाल की खबर भारत में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उन्नत AI तकनीक की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। हालांकि, मॉडल को अलग और नियंत्रित वातावरण में परखने का एजेंसी का फैसला बताता है कि डेटा की सुरक्षा और संचालन पर नियंत्रण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
Claude Mythos के साथ अन्य AI मॉडल का परीक्षण करने से CERT-In को अलग-अलग तकनीकों की उपयोगिता समझने और किसी एक प्रणाली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे साइबर कमजोरियों की पहचान करने के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
जैसे-जैसे साइबर हमले अधिक जटिल होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उनकी पहचान और रोकथाम के लिए बेहतर तकनीकी साधनों की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में AI आधारित सुरक्षा उपकरण भारत की डिजिटल व्यवस्था को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल करते समय संवेदनशील डेटा की सुरक्षा, मानवीय निगरानी और स्पष्ट नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी होगा।