CCPA ने PhysicsWallah और McAfee पर डार्क पैटर्न के लिए लगाया जुर्माना

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05 Jun 2026
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News Synopsis

भारत के केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण नियामक (CCPA) ने दो प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म—एडटेक कंपनी PhysicsWallah और साइबर सुरक्षा कंपनी McAfee Software India Pvt Ltd—के खिलाफ कार्रवाई की है। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने “डार्क पैटर्न” का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं को गुमराह किया, उनके निर्णयों को प्रभावित किया और उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन किया।

CCPA ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भ्रामक प्रथाओं पर की कार्रवाई

उपभोक्ता कानून के तहत नियामकीय कदम

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने दोनों कंपनियों पर वित्तीय जुर्माना लगाया और सुधारात्मक निर्देश जारी किए हैं। PhysicsWallah पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया गया है, जबकि McAfee Software India पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 और डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश, 2023 के तहत की गई है।

नियामक के अनुसार दोनों प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे इंटरफेस डिज़ाइन का उपयोग किया जो पारदर्शिता के बिना उपयोगकर्ताओं के व्यवहार को प्रभावित करते थे।

PhysicsWallah मामला: जबरन डोनेशन और “फ्री” कोर्स पर सवाल

चेकआउट में ऑटोमैटिक डोनेशन जुड़ना

CCPA की जांच में पाया गया कि PhysicsWallah के चेकआउट प्रोसेस में ₹10 का डोनेशन पहले से चयनित (pre-selected) था, जो PW Foundation को जाता था। यदि उपयोगकर्ता इसे नहीं हटाते, तो यह राशि स्वतः बिल में जुड़ जाती थी।

नियामक ने कहा कि यह “सूचित सहमति” के सिद्धांत का उल्लंघन है, क्योंकि उपयोगकर्ताओं से स्पष्ट रूप से अनुमति नहीं ली गई थी।

भावनात्मक संदेशों के माध्यम से प्रभाव

अथॉरिटी ने यह भी पाया कि प्लेटफॉर्म पर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और विवाह जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़े भावनात्मक संदेश दिखाए जाते थे। इनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को डोनेशन विकल्प को हटाने से रोकना था।

इन्हें “कन्फर्म शेमिंग” और “बास्केट स्नीकिंग” जैसी डार्क पैटर्न श्रेणियों में रखा गया है।

“फ्री” कोर्स को लेकर भ्रामक दावा

जांच में यह भी सामने आया कि प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध “फ्री” कोर्स तक पहुंचने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपना मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी व्यक्तिगत जानकारी देनी पड़ती थी।

हालांकि यह भी पाया गया कि कंटेंट सभी उपयोगकर्ताओं के लिए समान था, यानी डेटा संग्रह जरूरी नहीं था। इसे “फोर्स्ड एक्शन” डार्क पैटर्न माना गया।

नियामक ने कहा कि बिना स्पष्ट जानकारी दिए “फ्री” कहना उपभोक्ताओं को गुमराह करता है।

उपभोक्ताओं और छात्रों पर प्रभाव

CCPA ने कहा कि PhysicsWallah के अधिकतर उपयोगकर्ता छात्र हैं, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। ऐसे में इस तरह की डिज़ाइन प्रथाएँ विशेष रूप से चिंताजनक हैं।

इन प्रथाओं से उपभोक्ताओं की स्वतंत्र और सूचित निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।

McAfee मामला: सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल में दबाव बनाने का आरोप

“Accept Risk” संदेश पर आपत्ति

दूसरे मामले में McAfee Software India पर सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल प्रक्रिया को लेकर जुर्माना लगाया गया। नियामक ने पाया कि उपयोगकर्ताओं को दो विकल्प दिए जाते थे—“Renew Now” और “Accept Risk”।

CCPA के अनुसार “Accept Risk” शब्द यह संकेत देता था कि यदि सब्सक्रिप्शन न लिया जाए तो साइबर सुरक्षा खतरा हो सकता है, जो पूरी तरह प्रमाणित नहीं था।

इंटरफेस डिज़ाइन में दबाव

नियामक ने कहा कि इस तरह का डिज़ाइन उपयोगकर्ताओं पर भुगतान जारी रखने का दबाव बनाता है। इसमें कई डार्क पैटर्न पाए गए, जैसे:

  • कन्फर्म शेमिंग
  • इंटरफेस इंटरफेरेंस
  • ट्रिक क्वेश्चन
  • फोर्स्ड एक्शन

निष्पक्ष उपभोक्ता निर्णय का उल्लंघन

CCPA ने कहा कि सब्सक्रिप्शन निर्णय बिना डर या दबाव के लिए जाने चाहिए। McAfee की डिज़ाइन प्रक्रिया उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है और यह अनुचित व्यापार व्यवहार है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर डार्क पैटर्न के खिलाफ व्यापक कार्रवाई

2023 के दिशानिर्देश

“डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश, 2023” में 13 प्रकार के डार्क पैटर्न को अनुचित व्यापार व्यवहार के रूप में पहचाना गया है।

इनमें शामिल हैं:

  • बास्केट स्नीकिंग
  • कन्फर्म शेमिंग
  • फोर्स्ड एक्शन
  • इंटरफेस इंटरफेरेंस
  • ट्रिक क्वेश्चन

अनुपालन को मजबूत करने के प्रयास

जून 2025 में नियामक ने एक एडवाइजरी जारी कर ई-कॉमर्स कंपनियों से सेल्फ-ऑडिट करने और अपने प्लेटफॉर्म से डार्क पैटर्न हटाने को कहा था।

CCPA ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को पारदर्शिता और स्पष्ट सहमति सुनिश्चित करनी होगी।

निष्कर्ष:

PhysicsWallah और McAfee पर की गई यह कार्रवाई दिखाती है, कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डिज़ाइन और उपयोगकर्ता अनुभव पर नियामक निगरानी बढ़ रही है। उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है, कि ऑनलाइन सेवाओं में पारदर्शिता हो और उपयोगकर्ताओं को बिना किसी भ्रम या दबाव के निर्णय लेने का अधिकार मिले।

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