केंद्र सरकार ने साउथ ब्लॉक में हुई अपनी अंतिम बैठक में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को नई गति देने वाले बड़े फैसले लिए हैं, इस बैठक में रेल, सडक, मेट्रो, शहरी विकास और स्टार्टअप से जुडी परियोजनाओं को मिलाकर कुल 1.60 लाख करोड रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, यह बैठक इसलिए भी खास रही क्योंकि लगभग 95 वर्षों के बाद अब कैबिनेट की बैठकें साउथ ब्लॉक से हटकर नए सेवा तीर्थ परिसर में होंगी,1931 में उद्घाटन हुए साउथ ब्लॉक से सरकार का यह अंतिम औपचारिक सत्र था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया था।
कैबिनेट समिति ने कुल 18,509 करोड रुपये की लागत से तीन प्रमुख मल्टी ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को हरी झंडी दी, इनमें कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसपेटे तीसरी और चौथी रेल लाइन शामिल हैं, इन परियोजनाओं से लगभग 389 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क जुड़ेगा और 12 जिलों को सीधा लाभ मिलेगा, इससे 96 एमटीपीए अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी, इसके साथ ही ईंधन आयात में 22 करोड लीटर की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 111 करोड किलोग्राम की कटौती का अनुमान है।
असम में गोहपुर से नुमालीगढ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली टनल परियोजना को भी मंजूरी मिली है, 18,662 करोड रुपये की इस परियोजना में 33.7 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाया जाएगा, यह परियोजना उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए लॉजिस्टिक्स और व्यापार को मजबूत करेगी।
तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र में कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिन पर कुल मिलाकर हजारों करोड रुपये खर्च होंगे, इन परियोजनाओं से यात्रा समय में कमी आएगी, औद्योगिक संपर्क बेहतर होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, इसके अलावा नोएडा मेट्रो एक्वा लाइन के सेक्टर 142 से बॉटनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर विस्तार को 2,254 करोड रुपये की मंजूरी मिली है, जिससे दिल्ली एनसीआर में मेट्रो कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
कैबिनेट ने अर्बन चैलेंजिंग फंड के तहत 1 लाख करोड रुपये की केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है, जिससे अगले पांच वर्षों में 4 लाख करोड रुपये से अधिक की परियोजनाएं शुरू होने की उम्मीद है, साथ ही स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के लिए 10,000 करोड रुपये का फंड स्वीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग और उभरते शहरों में स्टार्टअप को कैपिटल उपलब्ध कराना है।
स्टार्टअप क्षेत्र को प्रोत्साहन देते हुए कैबिनेट ने 10 हजार करोड़ रुपये के 'स्टार्टअप इंडिया फंड आफ फंड्स 2.0' को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य नवाचार आधारित उद्योगों को पूंजी उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे शहरों और नए उद्यमियों को भी निवेश का मौका मिल सके। अश्विनी वैष्णव Ashwini Vaishnaw ने बताया कि इस योजना के तहत डीप टेक, तकनीक आधारित और क्षेत्र से अप्रभावित स्टार्टअप पर फोकस किया जाएगा।
डीप टेक और हाई-टेक स्टार्टअप की फंडिंग करने वाले वैकल्पिक निवेश फंडों में सरकार अधिक योगदान देगी। केंद्र सरकार ने 2016 में स्टार्टअप को प्रारंभिक पूंजी उपलब्ध कराने और उन्हें सोचा-समझा जोखिम उठाने में सक्षम बनाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का फंड आफ फंड्स बनाया था।