ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को कैबिनेट की मंजूरी, 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा को मिलेगा ग्रिड कनेक्शन

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01 Oct 2026
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News Synopsis

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी भारत के 2035 तक 900 गीगावाट (GW) गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने GEC-III योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड तक पहुंचाने के लिए आवश्यक पारेषण व्यवस्था विकसित करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Prime Minister Narendra Modi ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट में इस फैसले को स्वच्छ ऊर्जा और मजबूत बिजली ग्रिड की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इससे देश में स्वच्छ बिजली, मजबूत ग्रिड और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

GEC-III से 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड तक पहुंचाने की तैयारी GEC-III to Enable Evacuation of 135 GW Renewable Energy

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना Green Energy Corridor Phase-III Scheme का मुख्य उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए जरूरी पारेषण ढांचे को मजबूत करना है।

योजना के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसी पारेषण प्रणालियां विकसित की जाएंगी, जिनके माध्यम से 135 GW तक नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड तक पहुंचाया जा सकेगा।

मजबूत बिजली ग्रिड पर जोर Focus on Stronger Power Grids

सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से बिजली उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करने के लिए मजबूत और लचीली पारेषण व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

GEC-III इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने पर केंद्रित है।

2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य Target of 900 GW Non-Fossil Capacity by 2035

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GEC-III को 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में बड़ा बढ़ावा बताया है।

भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता जुलाई 2026 में बढ़कर 552 GW हो गई। वर्ष 2014 में यह क्षमता करीब 249 GW थी। इस दौरान देश की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

गैर-जीवाश्म क्षमता 300.50 GW पहुंची Non-Fossil Capacity Reaches 300.50 GW

31 जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300.50 GW हो चुकी थी। यह देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है।

गैर-जीवाश्म ऊर्जा में सौर, पवन, जलविद्युत और अन्य गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त बिजली क्षमता शामिल होती है। भारत द्वारा इस क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने से ऊर्जा क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को गति मिल रही है।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेज बढ़ोतरी India Records Rapid Growth in Solar Power Capacity

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सौर ऊर्जा भारत की क्षमता विस्तार का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुकी है। 31 जुलाई 2026 तक देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 164.59 GW पहुंच गई थी।

2014 में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2.8 GW थी। इसके बाद लगातार निवेश, परियोजनाओं और उत्पादन क्षमता में विस्तार के कारण सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई है।

2025 में भारत ने 37 GW से अधिक सौर क्षमता जोड़ी India Added More Than 37 GW of Solar Capacity in 2025

भारत वर्ष 2025 में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा। इस दौरान देश ने 37 GW से अधिक नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी।

इसी अवधि में अमेरिका ने करीब 34 GW सौर क्षमता जोड़ी। इससे भारत में सौर ऊर्जा के तेजी से विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते निवेश का संकेत मिलता है।

GEC-III के लिए 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश GEC-III to Involve Over Rs 1.86 Lakh Crore Outlay

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के लिए कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

इसमें दो प्रमुख हिस्से शामिल हैं। पहला हिस्सा राज्यों के भीतर पारेषण प्रणालियों यानी Intra-State Transmission Systems (InSTS) के विकास के लिए है। इसके लिए 1,36,378 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

दूसरा हिस्सा 50 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के लिए रखा गया है, जिसके लिए करीब 50,000 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।

केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता Central Financial Support

GEC-III योजना के तहत केंद्र सरकार की कुल वित्तीय सहायता 54,082 करोड़ रुपये होगी। यह सहायता योजना के तहत आवश्यक पारेषण और ऊर्जा भंडारण ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

50 GWh बैटरी भंडारण प्रणाली की तैनाती Deployment of 50 GWh Battery Energy Storage Systems

योजना में 50 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) स्थापित करने का भी प्रावधान है। इन प्रणालियों को नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक या बिजली उत्पादन केंद्र के स्तर पर अथवा ग्रिड के लिए महत्वपूर्ण किसी अन्य स्थान पर लगाया जा सकता है।

बैटरी भंडारण का उद्देश्य बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करना है।

नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमितता से निपटने में मदद Helping Address Renewable Energy Intermittency

सौर ऊर्जा मुख्य रूप से दिन के समय उपलब्ध होती है, जबकि बिजली की मांग दिन और रात दोनों समय बनी रहती है। इसी तरह पवन ऊर्जा का उत्पादन भी मौसम और हवा की गति पर निर्भर करता है।

BESS जैसी भंडारण प्रणालियां अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करके जरूरत के समय उसका उपयोग करने में मदद कर सकती हैं। इससे ग्रिड में बिजली की उपलब्धता को अधिक लचीला बनाया जा सकता है।

योजना का उद्देश्य ग्रिड में भीड़, अधिक मांग वाले समय में बिजली कटौती और सौर ऊर्जा उपलब्ध न होने वाले घंटों की मांग को पूरा करने में सहायता करना भी है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे Green Energy Corridor to Generate Employment Opportunities

GEC-III केवल बिजली पारेषण और भंडारण क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। योजना से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में भी रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

BESS के निर्माण और स्थापना से देश में ऊर्जा भंडारण से जुड़े उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है।

निर्माण और रखरखाव में कुशल रोजगार Skilled Jobs in Construction and Maintenance

योजना के तहत पारेषण ढांचे, बैटरी भंडारण प्रणालियों और ग्रिड प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में लंबे समय तक कुशल रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

इसमें संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। भाग लेने वाले राज्यों में इन क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता बढ़ सकती है।

स्वच्छ ऊर्जा विस्तार के लिए मजबूत ग्रिड क्यों जरूरी है? Why Strong Grids Are Essential for Clean Energy Expansion

भारत में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है। लेकिन केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इस बिजली को उत्पादन केंद्रों से उन क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत पारेषण नेटवर्क भी जरूरी है जहां इसकी मांग है।

GEC-III इसी अंतर को कम करने का प्रयास है। 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता विकसित होने से नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को बिजली व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष Conclusion

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को मंजूरी भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और बिजली ग्रिड को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है। योजना के तहत 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा के पारेषण, 50 GWh बैटरी भंडारण क्षमता और मजबूत राज्य स्तरीय बिजली ग्रिड विकसित करने की योजना है।

1,86,405 करोड़ रुपये के कुल परियोजना खर्च और 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ GEC-III का लक्ष्य वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा किया जाना है।

भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता पहले ही 300.50 GW तक पहुंच चुकी है। ऐसे में यह योजना 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य की दिशा में पारेषण और ऊर्जा भंडारण जैसी जरूरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

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