भारत की सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) देशभर में अपनी मोबाइल नेटवर्क सेवाओं को बेहतर बनाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की योजना अगले चरण में 50 हजार से 60 हजार नए 4G मोबाइल टावर लगाने की है।
केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस विस्तार योजना की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार BSNL के नेटवर्क और कनेक्टिविटी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी पहले ही करीब एक लाख 4G टावर लगा चुकी है। नए टावर लगने से खासतौर पर छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और दूरदराज के गांवों में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।
हालांकि, इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कुछ यूजर्स ने मजाक में सवाल उठाया कि जब निजी दूरसंचार कंपनियां 5G सेवाएं दे रही हैं और दुनिया में 6G की चर्चा शुरू हो चुकी है, तब BSNL अब भी 4G नेटवर्क का विस्तार क्यों कर रहा है। दूसरी ओर, कंपनी की स्वदेशी तकनीक को भारत के दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया Union Telecommunications Minister Jyotiraditya Scindia ने नेटवर्क विस्तार से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया था कि मार्च तक BSNL के लगभग 98 हजार टावर लगाने का काम पूरा हो चुका था। इसके बाद सरकार ने 50 हजार से 60 हजार अतिरिक्त टावर लगाने की योजना बनाई। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य देश के उन क्षेत्रों तक बेहतर मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना है, जहां अभी कनेक्टिविटी की सुविधा सीमित है।
इस परियोजना की एक खास बात यह है कि इसमें भारत में विकसित स्वदेशी 4G तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीकी व्यवस्था को तैयार करने में कई भारतीय कंपनियों और संस्थानों की भूमिका है।
C-DOT: यह संस्था 4G नेटवर्क के मुख्य तकनीकी ढांचे यानी कोर नेटवर्क को विकसित करने के लिए जिम्मेदार है।
Tejas Networks: कंपनी रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) से जुड़े उपकरण उपलब्ध करा रही है, जिनकी मदद से मोबाइल फोन को नेटवर्क से जोड़ा जाता है।
Tata Consultancy Services (TCS): TCS इस पूरी व्यवस्था को एक साथ जोड़ने और उसके संचालन से संबंधित तकनीकी एकीकरण का काम संभाल रही है।
इस स्वदेशी तकनीक का उद्देश्य भारत में दूरसंचार उपकरणों और तकनीकी समाधानों का विकास करना तथा विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना है। सरकार का कहना है कि BSNL का मौजूदा 4G नेटवर्क भविष्य में 5G तकनीक में भी बदला जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पहले नेटवर्क को स्थिर और मजबूत बनाना जरूरी होगा।
करीब एक लाख 4G टावर लगाने के बावजूद BSNL को देशभर में मजबूत नेटवर्क पहुंच बनाने के लिए अभी काफी काम करना है। एक रिपोर्ट में दूरसंचार विभाग (DoT) के अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि देश में पर्याप्त 4G कवरेज उपलब्ध कराने के लिए BSNL को कम से कम 3.5 लाख टावरों की जरूरत हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी लगभग एक लाख टावर लगा चुकी है और 25 हजार अन्य टावरों के लिए ऑर्डर भी दे चुकी है। इसके अलावा, 50 हजार से 60 हजार नए टावर लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे साफ है कि कंपनी को अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करना होगा।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि BSNL अपने नेटवर्क विस्तार और भविष्य में 5G सेवाएं शुरू करने की तैयारी के लिए वित्त मंत्रालय से करीब 75 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांग सकती है।
वहीं, वर्ष 2019 से अब तक BSNL को सरकार की ओर से लगभग 3.29 लाख करोड़ रुपये के पुनरुद्धार पैकेज मिल चुके हैं। इन पैकेजों का उद्देश्य कंपनी की आर्थिक स्थिति सुधारना, नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और निजी दूरसंचार कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की उसकी क्षमता बढ़ाना है।
नेटवर्क विस्तार के साथ BSNL नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए किफायती रिचार्ज योजनाओं पर भी ध्यान दे रही है। इसी दिशा में कंपनी ने नए ग्राहकों के लिए 51 रुपये का विशेष स्मार्ट स्टार्ट प्रीपेड प्लान पेश किया है। इस योजना में कई सुविधाएं शामिल हैं।
पात्र नए ग्राहकों को मुफ्त सिम कार्ड।
अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा।
प्रतिदिन 2GB इंटरनेट डेटा।
हर दिन 100 SMS।
कुल 28 दिनों की वैधता।
यह प्रचार योजना नए ग्राहकों के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध बताई गई है। TelecomTalk की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑफर की अवधि पहले भी कई बार बढ़ाई जा चुकी है। शुरुआत में इसे 30 जून तक उपलब्ध कराया गया था, जिसके बाद इसकी समयसीमा 31 अगस्त तक बढ़ाई गई। कम कीमत में अधिक सुविधाएं देने वाली इस योजना से BSNL को उन ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है, जो अपने मोबाइल खर्च को कम रखना चाहते हैं।
BSNL के नए 4G टावर लगाने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मजाकिया प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने कंपनी की तकनीकी प्रगति की तुलना पाषाण युग से करते हुए सवाल किया कि जब निजी कंपनियां 5G सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, तब BSNL अब भी 4G टावर लगाने पर जोर क्यों दे रही है।
इन प्रतिक्रियाओं के पीछे BSNL की पुरानी छवि भी एक वजह है। लंबे समय से कंपनी को नेटवर्क सुधारने, नई तकनीक अपनाने और सेवाओं के विस्तार में निजी कंपनियों से पीछे माना जाता रहा है। जब भी BSNL किसी नए नेटवर्क प्रोजेक्ट या तकनीकी सुधार की घोषणा करती है, सोशल मीडिया पर पुराने मीम्स और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां फिर से सामने आने लगती हैं।
हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं को केवल मजाक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये देश के दूरसंचार बाजार में BSNL और निजी कंपनियों के बीच मौजूद तकनीकी अंतर की ओर भी इशारा करती हैं। ग्राहकों की अपेक्षाएं अब तेज इंटरनेट, बेहतर नेटवर्क और बिना रुकावट वाली सेवाओं से जुड़ी हैं। ऐसे में BSNL के लिए केवल टावर लगाना ही नहीं, बल्कि नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारना भी जरूरी है।
BSNL के 4G विस्तार पर भले ही सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हों, लेकिन इस परियोजना में इस्तेमाल की जा रही स्वदेशी तकनीक भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इस व्यवस्था में नेटवर्क के जरूरी उपकरण और सॉफ्टवेयर भारतीय कंपनियों तथा संस्थानों के योगदान से तैयार किए गए हैं।
सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के स्वदेशी 4G तकनीकी ढांचे का उद्घाटन किया था। इसे देश में दूरसंचार तकनीक विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना गया। इसका उद्देश्य केवल BSNL को बेहतर नेटवर्क उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि भारत में दूरसंचार उपकरणों और तकनीकी समाधानों के विकास को भी बढ़ावा देना है।
इससे देश को विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और भविष्य में अपनी जरूरतों के अनुसार नेटवर्क विकसित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यही तकनीकी ढांचा आगे चलकर 5G सेवाओं के विस्तार की नींव बन सकता है।
BSNL को लेकर हो रही चर्चाओं में 6G तकनीक का जिक्र भी सामने आया है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 6G अभी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं है। दुनियाभर में इस तकनीक पर शोध, परीक्षण और मानक तय करने का काम चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, 6G सेवाओं की व्यावसायिक शुरुआत लगभग 2030 के आसपास होने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने भी 6G तकनीक के विकास की दिशा में काम शुरू किया है। देश का लक्ष्य इस अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक के विकास और मानक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। फिलहाल 7G नाम से कोई स्थापित वैश्विक तकनीकी मानक या व्यावसायिक मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।
दूसरी ओर, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी निजी कंपनियां भारत में 5G सेवाएं शुरू कर चुकी हैं। इस वजह से नेटवर्क की नई पीढ़ी अपनाने के मामले में उन्हें BSNL पर बढ़त हासिल है।
BSNL की ओर से 50 हजार से 60 हजार अतिरिक्त 4G टावर लगाने की योजना बताती है कि कंपनी देशभर में अपनी नेटवर्क पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया पर 4G विस्तार को लेकर भले ही मजाक बनाया जा रहा हो, लेकिन स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल भारत के दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अब BSNL के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर टावर लगाने, नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने और ग्राहकों को भरोसेमंद सेवाएं देने की है। भविष्य में 5G की ओर बढ़ने की उसकी क्षमता भी इसी बात पर निर्भर करेगी कि वह मौजूदा 4G नेटवर्क को कितना मजबूत बना पाती है।