भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग देश की आर्थिक वृद्धि में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स (SIAM) Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के अध्यक्ष शैलेश चंद्र ने कहा कि ऑटो उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में 22.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देता है और देश के कुल GST संग्रह में इसकी हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है।
Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शैलेश चंद्र ने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। इसके अलावा, इस उद्योग का असर इससे जुड़े कई अन्य क्षेत्रों और पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ता है।
यानी वाहन उद्योग की वृद्धि का लाभ केवल वाहन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कलपुर्जे, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सर्विस, बीमा और अन्य संबंधित क्षेत्रों को भी मिलता है।
भारतीय ऑटो उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घरेलू बिक्री और निर्यात दोनों क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन किया। कई वाहन श्रेणियों में बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
यात्री वाहनों, दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि घरेलू बाजार में वाहनों की मांग मजबूत बनी हुई है और भारतीय वाहन निर्माता वैश्विक बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में यात्री वाहनों की बिक्री 46 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.9 प्रतिशत अधिक है।
यात्री वाहनों के निर्यात में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली। इस श्रेणी में निर्यात 9.1 लाख यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.5 प्रतिशत अधिक है।
यह वृद्धि भारतीय वाहन कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय वाहनों की मांग को दर्शाती है।
भारत के दोपहिया वाहन बाजार ने भी वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया। घरेलू बिक्री 10.7 प्रतिशत बढ़कर 2.171 करोड़ यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
दोपहिया वाहनों के निर्यात में भी तेज वृद्धि हुई। निर्यात 23.4 प्रतिशत बढ़कर 51.8 लाख यूनिट हो गया।
भारत दुनिया के प्रमुख दोपहिया वाहन बाजारों में शामिल है और घरेलू मांग के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।
तिपहिया वाहनों की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 2025-26 में 12.8 प्रतिशत बढ़कर 8.4 लाख यूनिट हो गई।
हालांकि, इस श्रेणी में सबसे तेज वृद्धि निर्यात में देखने को मिली। तिपहिया वाहनों का निर्यात 50.1 प्रतिशत बढ़कर 3.1 लाख यूनिट से 4.6 लाख यूनिट तक पहुंच गया।
यह वृद्धि भारतीय तिपहिया वाहन निर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती संभावनाओं का संकेत देती है।
वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन किया। घरेलू बाजार में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 10.80 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है।
वहीं, वाणिज्यिक वाहनों का निर्यात 17.4 प्रतिशत बढ़कर 95,000 यूनिट हो गया।
ट्रक, बस और अन्य वाणिज्यिक वाहन आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनकी मांग में वृद्धि को अक्सर निर्माण, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत के रूप में देखा जाता है।
ऑटो उद्योग की वृद्धि के साथ-साथ कंपनियां पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और वाहन सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप भी आगे बढ़ रही हैं।
शैलेश चंद्र ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से पूरा ऑटोमोबाइल उद्योग E20-अनुरूप पेट्रोल वाहनों के निर्माण की दिशा में पूरी तरह परिवर्तित हो गया।
E20-अनुरूप वाहनों को ऐसे ईंधन के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण होता है।
ऑटो उद्योग के अनुसार, E20-अनुरूप वाहनों की ओर बदलाव से कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, कई वाहन निर्माताओं ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के वाणिज्यिक लॉन्च और प्रदर्शन भी किए हैं। ऐसे वाहन एक से अधिक प्रकार के ईंधन या अलग-अलग अनुपात में ईंधन मिश्रण के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भी तेजी से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों सहित कई श्रेणियों में नए पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
देश में कुल इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण वित्त वर्ष 2024-25 के 19.7 लाख यूनिट से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 25 लाख यूनिट हो गया। यानी इसमें 24.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय उपभोक्ताओं के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है।
शैलेश चंद्र ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी के पीछे सरकार और ऑटो उद्योग के बीच लगातार हो रहे सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की PM E-DRIVE योजना ने भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बदलाव को महत्वपूर्ण गति दी है।
इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, चार्जिंग से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करना और देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की भूमिका केवल वाहनों के उत्पादन और बिक्री तक सीमित नहीं है। यह देश के विनिर्माण क्षेत्र, रोजगार, कर संग्रह, निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
वाहन उद्योग से जुड़े कलपुर्जा निर्माता, डीलर, सर्विस सेंटर, परिवहन कंपनियां, लॉजिस्टिक्स सेवाएं, बीमा कंपनियां और अन्य व्यवसाय भी इससे लाभान्वित होते हैं। इसलिए ऑटो उद्योग में वृद्धि का व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिलता है।
भारत में वाहन बिक्री और निर्यात में लगातार वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि देश का ऑटो क्षेत्र घरेलू मांग के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की क्षमता रखता है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है और कई अन्य उद्योगों को साथ लेकर चलता है। SIAM के अनुसार, यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है।
इसके अलावा, 22.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक योगदान और GST संग्रह में लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे भारत की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल करती है।
बढ़ते निर्यात, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, वैकल्पिक ईंधन और बेहतर वाहन सुरक्षा के साथ भारतीय ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास के साथ-साथ तकनीकी बदलाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में यात्री वाहनों, दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री तथा निर्यात में दर्ज मजबूत वृद्धि ने इस क्षेत्र की क्षमता को एक बार फिर सामने रखा है।
इसके साथ ही, E20-अनुरूप वाहनों का विस्तार, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग यह दिखाती है कि भारतीय ऑटो उद्योग तेजी से बदल रहा है।
सरकार की नीतियों और उद्योग के बीच सहयोग के साथ यदि विनिर्माण, तकनीक, निर्यात और हरित मोबिलिटी पर लगातार ध्यान दिया जाता है, तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।