मध्य प्रदेश का Gwalior जल्द ही दूरसंचार उपकरणों के निर्माण के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय के अनुसार, शहर में एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग ₹5,500 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और इससे 18,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को Gwalior में प्रस्तावित Telecom Manufacturing Zone के लिए चिन्हित स्थान का निरीक्षण किया। यह स्थान Shrimant Madhavrao Scindia Counter Magnet City (SADA) में है। उनके साथ दूरसंचार विभाग के सचिव और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया Union Minister for Communications and Development of North Eastern Region Jyotiraditya Scindia ने कहा कि यह परियोजना केवल एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य Gwalior में एक पूरा औद्योगिक तंत्र तैयार करना है, जिसमें करीब 24 से 25 दूरसंचार निर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। ये इकाइयां दूरसंचार उपकरणों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के जरूरी कलपुर्जों का निर्माण करेंगी। इससे Gwalior की पहचान एक उभरते हुए दूरसंचार निर्माण केंद्र के रूप में मजबूत हो सकती है।
प्रस्तावित TMZ को इस तरह विकसित करने की योजना है कि यहां केवल बड़ी निर्माण इकाइयां ही नहीं, बल्कि दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी अलग-अलग कंपनियां और सहायक उद्योग भी एक साथ काम कर सकें।
इसका उद्देश्य एक ऐसा औद्योगिक तंत्र बनाना है, जहां दूरसंचार उपकरणों और उनके कलपुर्जों का निर्माण एक ही क्षेत्र में किया जा सके। इससे कंपनियों को उत्पादन, आपूर्ति और परीक्षण जैसी सुविधाओं के लिए एक-दूसरे के करीब रहने का फायदा मिल सकता है।
मंत्रालय के अनुसार, TMZ के पहले चरण के लिए करीब 170 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। इसमें SADA क्षेत्र में 90 एकड़ से अधिक और IT Park में 70 एकड़ से अधिक जमीन शामिल है।
Scindia के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना को लेकर निवेशकों की रुचि काफी अधिक है। TMZ में निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए मिले आवेदन उपलब्ध जमीन से भी अधिक हैं।
इसी वजह से सरकार पहले चरण के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन की पहचान करने की तैयारी कर रही है। जरूरत पड़ने पर जमीन का आवंटन भी बढ़ाया जा सकता है।
SADA को मूल रूप से Gwalior को एक नए औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने और Delhi के लिए एक Counter Magnet City बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
Counter Magnet City का अर्थ ऐसे शहर से है जिसे बड़े महानगरों पर बढ़ते आर्थिक और जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए विकसित किया जाता है। प्रस्तावित Telecom Manufacturing Zone इसी पुराने उद्देश्य को एक नए औद्योगिक क्षेत्र के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश है।
दूरसंचार निर्माण के लिए विशेष क्षेत्र बनने से Gwalior में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, परिवहन, सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों को भी गति मिलने की संभावना है।
टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना के लिए दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच जुलाई 2026 में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे।
इसके बाद परियोजना को जोड़ने के लिए अगस्त में दिल्ली और मुंबई में निवेशक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का नेतृत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया।
मंत्रालय के अनुसार, Delhi में आयोजित बैठक के दौरान लगभग ₹3,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। इन प्रस्तावों से करीब 14,000 रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई।
वहीं Mumbai में आयोजित बैठक में लगभग ₹2,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, जिनसे करीब 4,000 रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
निवेशकों की ओर से मिली प्रतिक्रिया के बाद परियोजना में रुचि रखने वाली कंपनियों को जमीन आवंटन की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवेदन करने को कहा गया।
मंत्रालय के अनुसार, अब तक 24 कंपनियों ने प्रस्तावित TMZ में अपनी निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इन कंपनियों के आने से Gwalior में दूरसंचार उपकरण और संबंधित कलपुर्जों के निर्माण का आधार तैयार हो सकता है। साथ ही, इससे स्थानीय स्तर पर नए कारोबार और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
Madhya Pradesh सरकार ने Telecom Manufacturing उद्योग को आकर्षित करने के लिए एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है। Scindia ने इस पैकेज को तैयार करने के लिए राज्य सरकार का आभार जताया।
इस पैकेज में जमीन के पट्टे, बिजली, रोजगार और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन शामिल हैं। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ प्रावधान किए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य केवल कंपनियों को जमीन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां कंपनियां लंबे समय तक उत्पादन गतिविधियां चला सकें।
दूरसंचार विभाग ने TMZ के लिए लगभग ₹500 करोड़ की Common Testing Lab योजना का भी प्रस्ताव दिया है।
इस सुविधा का उद्देश्य क्षेत्र में स्थापित होने वाली निर्माण इकाइयों को परीक्षण से जुड़ा बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है। इससे कंपनियों को अपने दूरसंचार उपकरणों और कलपुर्जों की जांच के लिए साझा सुविधा मिल सकेगी।
ऐसी साझा परीक्षण सुविधा छोटे और मध्यम निर्माताओं के लिए भी उपयोगी हो सकती है, क्योंकि उन्हें अलग से महंगा परीक्षण ढांचा तैयार करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
Scindia ने Gwalior की कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन को TMZ के विकास के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताया।
लगभग 120 किलोमीटर लंबे Agra-Gwalior High-Speed Corridor को Gwalior की Delhi और उत्तर भारत के प्रमुख बाजारों से कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इससे औद्योगिक माल की आवाजाही और व्यापारिक संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
Gwalior पहले से ही प्रमुख रेलवे मार्गों से जुड़ा हुआ है। इससे सामान और कर्मचारियों की देश के अलग-अलग हिस्सों तक आवाजाही आसान हो सकती है।
शहर की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए Gwalior Airport का विकास लगभग ₹650 करोड़ की लागत से किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह काम करीब 16 महीनों में पूरा हुआ।
एयरपोर्ट से Delhi, Mumbai और Bengaluru जैसे प्रमुख शहरों के साथ हवाई संपर्क मजबूत हुआ है। इससे निवेशकों, कारोबारी प्रतिनिधियों और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के लिए Gwalior तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
Gwalior में कई इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षण संस्थान भी हैं। मंत्रालय के अनुसार, शहर में हर साल करीब 25,000 इंजीनियरिंग छात्र पढ़ाई पूरी करते हैं।
यह प्रशिक्षित युवा दूरसंचार निर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक तकनीकी और कुशल कर्मचारियों का आधार तैयार कर सकते हैं। इससे कंपनियों को स्थानीय स्तर पर मानव संसाधन उपलब्ध होने में मदद मिल सकती है।
Asia के पहले Telecom Manufacturing Zone की प्रस्तावित स्थापना Gwalior के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। करीब ₹5,500 करोड़ के निवेश, 24–25 निर्माण इकाइयों की योजना और 18,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार की संभावना इस परियोजना के संभावित आर्थिक प्रभाव को दर्शाती है।
जमीन, बिजली, रोजगार और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन, Common Testing Lab, बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी तथा स्थानीय तकनीकी प्रतिभा इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास में सहायक हो सकते हैं।
यदि प्रस्तावित इकाइयां योजना के अनुसार स्थापित होती हैं, तो Gwalior में दूरसंचार उपकरण और कलपुर्जों के निर्माण का एक नया औद्योगिक तंत्र विकसित हो सकता है। इससे शहर की औद्योगिक पहचान मजबूत होने के साथ मध्य प्रदेश के दूरसंचार निर्माण क्षेत्र को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।