भारत ने एशियन पैरा गेम्स की रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष डबल्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि महिला डबल्स टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। पैरालंपिक चैंपियन हरविंदर सिंह और उनके साथी विजय सुंडी ने पुरुषों के फाइनल में बेहतरीन तालमेल और निरंतर सटीक निशानेबाजी के दम पर चीन की जोड़ी को हराया। वहीं, महिला वर्ग में भावना चौधरी और पूजा जात्यान की जोड़ी खिताबी मुकाबले में चीन से हार गई।
एशियन पैरा गेम्स Asian Para Games
पुरुष डबल्स के फाइनल में हरविंदर और विजय ने चीन के युन डुओ और झाओ लिशुए को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह मुकाबला ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पज स्क्वायर में खेला गया। शुरुआत में दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अगले सेटों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की।
दूसरी ओर, महिला डबल्स के फाइनल में भावना चौधरी और पूजा जात्यान को चीन की गाओ जिहान और वांग शुएच्यान के खिलाफ 0-6 से हार का सामना करना पड़ा। भारतीय जोड़ी को तीनों सेट में हार मिली और उसे रजत पदक मिला। इस बीच, हरविंदर सिंह और भावना चौधरी की मिश्रित डबल्स जोड़ी सेमीफाइनल में हार गई। अब यह जोड़ी कांस्य पदक के लिए ईरान के खिलाफ मुकाबला करेगी।
पुरुष रिकर्व डबल्स के फाइनल में हरविंदर सिंह और विजय सुंडी Harvinder Singh and Vijay Sundi ने चीन के युन डुओ और झाओ लिशुए के खिलाफ मजबूत खेल दिखाया। भारतीय जोड़ी ने 5-1 के अंतर से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया। हरविंदर पहले ही पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, जबकि विजय सुंडी इस प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सा ले रहे थे।
मुकाबले का पहला सेट काफी करीबी रहा। भारत और चीन, दोनों की जोड़ियों ने 35-35 अंक हासिल किए, जिसके चलते सेट बराबरी पर समाप्त हुआ। इस शुरुआत के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया और अगले दोनों सेट जीतकर मुकाबले पर पकड़ बना ली।
दूसरे सेट में हरविंदर और विजय ने 37 अंक हासिल किए, जबकि चीन की जोड़ी 36 अंक ही बना सकी। इसके बाद तीसरे सेट में भारतीय खिलाड़ियों ने 38 अंक जुटाए, जबकि चीनी जोड़ी 36 अंक तक पहुंची। लगातार दो सेट जीतने से भारत ने मुकाबले में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।
रिकर्व तीरंदाजी में खिलाड़ियों को निर्धारित दूरी पर रखे लक्ष्य के केंद्र के जितना करीब तीर मारने होते हैं, उतने अधिक अंक मिलते हैं। इसलिए सटीक निशाना, एकाग्रता और दबाव में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना बेहद जरूरी होता है। भारतीय जोड़ी ने निर्णायक चरण में इन सभी पहलुओं पर बेहतर नियंत्रण दिखाया।
पहले सेट में बराबरी के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने जिस तरह लगातार बेहतर अंक हासिल किए, उसने मुकाबले की दिशा बदल दी। चीन की जोड़ी अंतिम दोनों सेटों में भारतीय खिलाड़ियों की निरंतरता का मुकाबला नहीं कर सकी। हरविंदर और विजय ने महत्वपूर्ण मौकों पर सटीक निशाने लगाए और खिताब अपने नाम कर लिया।
यह जीत भारतीय तीरंदाजी दल के लिए महत्वपूर्ण रही। अनुभवी पैरालंपिक चैंपियन हरविंदर और पहली बार इस प्रतियोगिता में उतरे विजय के बीच अच्छा तालमेल देखने को मिला। दोनों ने दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखा और भारत को पुरुष डबल्स में स्वर्ण पदक दिलाया।
महिला रिकर्व डबल्स के फाइनल में भारतीय जोड़ी भावना चौधरी और पूजा जात्यान का सामना चीन की गाओ जिहान और वांग शुएच्यान से हुआ। चीनी खिलाड़ियों ने मुकाबले की शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन किया और भारत को किसी भी सेट में वापसी का मौका नहीं दिया।
चीन की जोड़ी ने पहला सेट 38-31 से जीता। दूसरे सेट में उसने 35 अंक हासिल किए, जबकि भारत 30 अंक ही बना सका। तीसरे सेट में चीन ने 39 अंक जुटाए और भारतीय जोड़ी 29 अंक पर रुक गई। इस तरह चीन ने फाइनल 6-0 से जीत लिया और स्वर्ण पदक हासिल किया। भारतीय टीम को रजत पदक मिला।
महिला फाइनल के तीनों सेट में चीन की जोड़ी ने भारत से अधिक अंक हासिल किए। भारतीय खिलाड़ियों ने मुकाबले में प्रयास जारी रखा, लेकिन चीनी जोड़ी की सटीक निशानेबाजी के सामने वे बढ़त नहीं बना सकीं। 31, 30 और 29 अंकों के साथ भारतीय टीम का स्कोर हर सेट में चीन से कम रहा।
हालांकि, फाइनल में हार के बावजूद भारत का रजत पदक प्रतियोगिता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। महिला खिलाड़ियों ने फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और देश के पदक खाते में एक और पदक जोड़ा।
पुरुष डबल्स में स्वर्ण जीतने वाले 35 वर्षीय हरविंदर सिंह ने भावना चौधरी के साथ मिश्रित डबल्स स्पर्धा के सेमीफाइनल में भी हिस्सा लिया। हालांकि, भारतीय जोड़ी को चीन के झाओ लिशुए और वांग शुएच्यान के खिलाफ 0-6 से हार का सामना करना पड़ा।
इस हार के बाद हरविंदर और भावना अब कांस्य पदक के मुकाबले में ईरान की जोड़ी के खिलाफ उतरेंगे। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के पास प्रतियोगिता में एक और पदक जीतने का अवसर बना हुआ है।
मिश्रित डबल्स में पुरुष और महिला खिलाड़ी एक साथ जोड़ी बनाकर मुकाबला करते हैं। इस प्रारूप में दोनों खिलाड़ियों के बीच तालमेल, रणनीति और सटीक निशानेबाजी अहम भूमिका निभाती है। भारतीय जोड़ी सेमीफाइनल में जीत हासिल नहीं कर सकी, लेकिन कांस्य पदक के मुकाबले में उसके पास वापसी का मौका रहेगा।
हरविंदर सिंह भारतीय पैरा तीरंदाजी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2018 के एशियन गेम्स में व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने डबल्स स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। उस प्रतियोगिता में उनके साथी साहिल थे।
हरविंदर ने पैरालंपिक खेलों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने 2020 के टोक्यो पैरालंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा का कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 2024 के पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धि को और ऊंचा किया।
उनका अनुभव भारतीय पुरुष डबल्स टीम के लिए उपयोगी साबित हुआ। विजय सुंडी के साथ मिलकर उन्होंने फाइनल में दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया और भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
एशियन पैरा गेम्स की रिकर्व तीरंदाजी स्पर्धाओं में भारत के लिए पुरुष डबल्स का स्वर्ण पदक सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा। हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने चीन को 5-1 से हराकर खिताब जीता। महिला डबल्स में भावना चौधरी और पूजा जात्यान ने रजत पदक हासिल किया, जबकि हरविंदर और भावना की मिश्रित डबल्स जोड़ी अब कांस्य पदक के लिए मुकाबला करेगी।
हरविंदर सिंह का अनुभव और विजय सुंडी का पदार्पण भारतीय टीम के लिए सफल साबित हुआ। इन नतीजों से पैरा तीरंदाजी में भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता सामने आती है और आगामी मुकाबलों में पदक जीतने की उम्मीद बनी रहती है।