भारत की पैरा तीरंदाज स्वाति चौधरी ने गुरुवार को एशियन पैरा गेम्स में W1 श्रेणी की तीरंदाजी में देश के लिए पहला पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 37 वर्षीय स्वाति ने महिलाओं की व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। हालांकि, फाइनल मुकाबले में उन्हें चीन की तीरंदाज सेन मेंगकान के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त तीरंदाज स्वाति ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए कड़ी चुनौती पेश की। एक समय वह मुकाबले में बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन आखिरी चरण में वह अपनी लय और सटीक निशानेबाजी को बरकरार नहीं रख सकीं। उतार-चढ़ाव से भरे इस मुकाबले में उन्हें 4-6 से हार मिली।
भले ही स्वाति स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं, लेकिन उनका प्रदर्शन भारतीय पैरा तीरंदाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। W1 श्रेणी में देश का पहला पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती मौजूदगी को मजबूती दी है। उनकी इस सफलता से पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता और उनके संघर्ष को भी पहचान मिली है।
स्वाति ने फाइनल मुकाबले की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की। पहले सेट में उनकी चीनी प्रतिद्वंद्वी का एक निशाना सटीक नहीं लगा, जिसका फायदा उठाकर स्वाति ने 25-17 से सेट जीत लिया। इस जीत के साथ सेट-पॉइंट प्रणाली के तहत भारतीय तीरंदाज ने 2-0 की शुरुआती बढ़त बना ली।
दूसरे सेट में सेन मेंगकान ने वापसी की। इस दौरान स्वाति अपने निशानों में पहले जैसी सटीकता बनाए रखने के लिए संघर्ष करती नजर आईं। चीनी तीरंदाज ने 22-21 से सेट अपने नाम किया और मुकाबले का स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया।
तीसरे सेट में स्वाति ने फिर से नियंत्रण हासिल किया। सेन की निशानेबाजी में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाते हुए भारतीय खिलाड़ी ने 22-21 से करीबी जीत दर्ज की। इस जीत के बाद स्वाति 4-2 से आगे हो गईं और स्वर्ण पदक जीतने से केवल एक सेट दूर रह गईं।
हालांकि, चौथे सेट में मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सेन मेंगकान ने अपने तीनों तीरों से 10-10 अंक हासिल किए और कुल 30 अंक बनाए। इसके मुकाबले स्वाति केवल 20 अंक ही जुटा सकीं। इस परिणाम के साथ मुकाबला 4-4 से बराबर हो गया और स्वर्ण पदक का फैसला करने के लिए आखिरी सेट खेलना पड़ा।
स्वर्ण पदक के लिए निर्णायक सेट में सेन मेंगकान ने धैर्य बनाए रखा और दमदार प्रदर्शन किया। उन्होंने दबाव की स्थिति में सटीक निशाने लगाए और 28 अंक हासिल किए, जबकि स्वाति चौधरी 21 अंक ही बना सकीं।
चीनी तीरंदाज ने निर्णायक सेट 28-21 से जीत लिया। इस जीत के साथ उन्होंने फाइनल में शानदार वापसी करते हुए अपना पहला एशियन पैरा गेम्स स्वर्ण पदक हासिल किया।
फाइनल का परिणाम दिखाता है कि दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला कितना कड़ा था। स्वाति ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वी को चुनौती दी और शुरुआती बढ़त भी बनाई, लेकिन वह उसे खिताबी जीत में नहीं बदल सकीं। इसके बावजूद, उनका रजत पदक भारत के लिए ऐतिहासिक रहा और देश की पैरा तीरंदाजी में एक नई उपलब्धि जुड़ गई।
उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली स्वाति चौधरी ने पैरा तीरंदाजी में अपनी पहचान भारत की उभरती हुई खिलाड़ियों में बनाई है। उनकी सफलता के पीछे लगातार अभ्यास, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अनुभव रहा है।
स्वाति मेरठ स्थित गुरुकुल आर्चरी अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं। उन्हें एथेंस ओलंपिक में हिस्सा ले चुके तीरंदाज और कोच सत्यदेव प्रसाद मार्गदर्शन देते हैं। उनके प्रशिक्षण और प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद की है।
हालांकि, आर्थिक चुनौतियों ने उन्हें कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चयन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से रोकने में बाधा पैदा की। इन कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अपने खेल में सुधार करने पर ध्यान दिया।
एशियन पैरा गेम्स में मिला रजत पदक उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता बताती है कि लगातार मेहनत, सही मार्गदर्शन और प्रतियोगिताओं का अनुभव खिलाड़ियों को बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकते हैं।
W1 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए निर्धारित है, जिनके हाथों और पैरों दोनों की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। इसमें ऐसे खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं, जिन्हें टेट्राप्लेजिया यानी चारों अंगों की गतिविधियों में गंभीर सीमाओं या मांसपेशियों की शक्ति और अंगों के काम करने की क्षमता से जुड़ी समान समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस श्रेणी के खिलाड़ियों को शारीरिक और तकनीकी स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तीरंदाजी में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उन्हें सटीक निशाना लगाने, एकाग्रता बनाए रखने और अपने उपकरणों पर लगातार नियंत्रण रखने की जरूरत होती है।
स्वाति चौधरी का पदक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एशियन पैरा गेम्स की W1 श्रेणी में भारत का पहला पदक है। उनकी उपलब्धि से इस श्रेणी के खेल के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है और अधिक खिलाड़ियों को पैरा खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।
एशियन पैरा गेम्स में स्वाति का रजत पदक उनके पिछले अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रदर्शन की कड़ी में एक और बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इससे पहले भी कई प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है।
वर्ष 2026 में बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में स्वाति ने तीन रजत पदक जीते थे। ये पदक महिलाओं की W1 व्यक्तिगत स्पर्धा, महिलाओं की W1 टीम स्पर्धा और W1 मिश्रित टीम स्पर्धा में आए थे। इन उपलब्धियों से पता चलता है कि वह अलग-अलग प्रारूपों में भी मजबूत प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
इसके अलावा, उन्होंने पिछले महीने अहमदाबाद में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में कांस्य पदक हासिल किया था। इस तरह उनके अंतरराष्ट्रीय पदकों की सूची में लगातार नई उपलब्धियां जुड़ती रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वाति ने अपनी प्रतिभा साबित की है। उन्होंने 2025 की पैरा तीरंदाजी राष्ट्रीय चैंपियनशिप और खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025, दोनों में महिलाओं की W1 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता था। इन जीतों ने उन्हें भारत की प्रमुख पैरा तीरंदाजों में अपनी जगह मजबूत करने में मदद की।
स्वाति चौधरी को प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए सरकार की वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता योजना (Annual Calendar for Training and Competition यानी ACTC) के तहत सहायता मिल रही है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों को समर्थन देने के लिए 51,99,651 रुपये की वित्तीय सहायता निर्धारित की गई है।
इस तरह की सहायता से खिलाड़ियों को कोचिंग, खेल उपकरण, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले पैरा खिलाड़ियों के लिए लगातार आर्थिक और संस्थागत सहयोग महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के अवसर मिलते हैं।
स्वाति की उपलब्धियां दिखाती हैं कि व्यक्तिगत मेहनत के साथ अच्छा प्रशिक्षण, अनुभवी कोच का मार्गदर्शन और व्यवस्थित सरकारी सहायता भी खेलों में आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
एशियन पैरा गेम्स में स्वाति चौधरी का रजत पदक भारतीय पैरा तीरंदाजी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चीन की सेन मेंगकान ने शानदार वापसी करते हुए स्वर्ण पदक जीता, लेकिन स्वाति ने W1 श्रेणी में भारत को पहला पदक दिलाकर देश का नाम रोशन किया।
मेरठ से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का उनका सफर, विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीते गए पदक और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का उनका प्रयास दूसरे खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उनकी सफलता भारतीय पैरा तीरंदाजी की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है और भविष्य में इस खेल में देश की संभावनाओं को मजबूत करती है।