भारत के पैरालंपिक और विश्व चैंपियन सुमित अंतिल ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा। शुक्रवार को नागोया सिटी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में उन्होंने 72.46 मीटर दूर भाला फेंककर पहला स्थान हासिल किया।
इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। महेंद्र गुर्जर ने रजत पदक और संदीप सरगर ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह भारत ने भाला फेंक स्पर्धा के तीनों पदक जीतकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। यह प्रदर्शन एशियन पैरा गेम्स में भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ पदक प्रदर्शन का भी हिस्सा बना।
भारतीय खिलाड़ियों ने केवल भाला फेंक ही नहीं, बल्कि क्लब थ्रो, दौड़ और बैडमिंटन जैसी स्पर्धाओं में भी शानदार प्रदर्शन किया। इन उपलब्धियों की बदौलत भारत ने प्रतियोगिता में कुल 114 पदक जीतकर अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।
एशियन पैरा गेम्स 2026 Asian Para Games 2026
सुमित अंतिल Sumit Antil ने पुरुषों की भाला फेंक एफ42–एफ44/एफ61–एफ64 फाइनल स्पर्धा में 72.46 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में अपना खिताब बरकरार रखा और एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित की।
सुमित की सफलता ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए तीनों पदक जीतने का रास्ता साफ किया। उनके प्रदर्शन ने दिखाया कि भारतीय पैरा एथलीट लगातार उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
इस स्पर्धा में महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर दूर भाला फेंककर रजत पदक हासिल किया। वह एफ42 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें 1,066 रजा अंक मिले।
वहीं, संदीप सरगर ने 64.48 मीटर की दूरी दर्ज करते हुए कांस्य पदक जीता और 1,006 रजा अंक हासिल किए। हालांकि दोनों खिलाड़ियों की दूरी सुमित के प्रदर्शन से कम रही, लेकिन उन्होंने अपनी-अपनी श्रेणियों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
महेंद्र गुर्जर और संदीप सरगर ने अपनी संबंधित श्रेणियों में खेलों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। इस उपलब्धि ने भारतीय पैरा एथलेटिक्स दल की सफलता को और खास बना दिया।
रजा अंक प्रणाली का उपयोग अलग-अलग दिव्यांगता श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना करने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली में गणितीय तरीके से खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है, ताकि उनकी उपलब्धियों को अधिक समान आधार पर समझा और क्रमबद्ध किया जा सके।
पैरा एथलेटिक्स की उन स्पर्धाओं में यह प्रणाली विशेष रूप से उपयोगी होती है, जहां अलग-अलग कार्यात्मक क्षमताओं वाले खिलाड़ी एक ही संयुक्त प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। ऐसे आयोजनों में खिलाड़ियों की दिव्यांगता के अनुसार वर्गीकरण किया जाता है। रजा अंक उनके प्रदर्शन का तुलनात्मक मूल्यांकन करने में मदद करते हैं।
भारत के प्रणव सूरमा ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की क्लब थ्रो एफ51 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 32.87 मीटर की दूरी दर्ज की, जो इस प्रतियोगिता का नया रिकॉर्ड बना।
क्लब थ्रो में भारत के धरमबीर ने 27.71 मीटर दूर क्लब फेंककर कांस्य पदक हासिल किया। इस स्पर्धा में भी भारत के पास तीनों पदक जीतने का अवसर था, लेकिन अनुभवी खिलाड़ी अमित कुमार सरोहा 27.26 मीटर के प्रदर्शन के साथ पांचवें स्थान पर रहे।
इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा। प्रणव सूरमा के स्वर्ण और धरमबीर के कांस्य पदक ने भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। इन परिणामों से पता चलता है कि भारतीय खिलाड़ी पैरा एथलेटिक्स की विभिन्न स्पर्धाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए कुल 114 पदक जीते। इस प्रदर्शन के साथ भारत ने चीन के हांगझोऊ में आयोजित पिछले संस्करण में बनाए गए 111 पदकों के अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
रिपोर्ट किए गए पदक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने प्रतियोगिता में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक हासिल किए। इस बार भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या भी बढ़कर 30 हो गई, जबकि हांगझोऊ में देश ने 29 स्वर्ण पदक जीते थे।
यह उपलब्धि केवल पदकों की संख्या तक सीमित नहीं है। यह विभिन्न खेलों में भारतीय पैरा खिलाड़ियों की मेहनत, तैयारी और बेहतर प्रदर्शन को भी दर्शाती है। एथलेटिक्स से लेकर बैडमिंटन तक, भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
भारत के इस प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों में देश की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का भी पता चलता है। खिलाड़ियों की व्यक्तिगत सफलताओं ने सामूहिक रूप से देश को एशियन पैरा गेम्स में उसके अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तक पहुंचाने में योगदान दिया।
भारतीय पैरा एथलीट संदीप ने पुरुषों की 100 मीटर टी64 दौड़ में कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने यह दौड़ 11.67 सेकंड में पूरी की और प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया।
संदीप का यह पदक इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि वह इससे पहले इसी प्रतियोगिता में 400 मीटर टी64 स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी जीत चुके थे। इस तरह उन्होंने दौड़ की दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
100 मीटर और 400 मीटर में उनका प्रदर्शन भारत के ट्रैक एथलेटिक्स अभियान के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। उनकी सफलता ने देश की कुल पदक संख्या बढ़ाने में भी योगदान दिया।
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों थुलासिमथि मुरुगेसन और मानसी जोशी ने महिला युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और उपलब्धि जोड़ी।
भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की मौजूदा विश्व चैंपियन खिलाड़ी क्यूशिया यांग और जूशियान शियाओ को सीधे दो गेम में हराया। भारत की जोड़ी ने पहला गेम 21-16 से और दूसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबला अपने नाम किया।
यह जीत भारतीय खिलाड़ियों के लिए विशेष महत्व रखती है। साल 2025 की एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में भारतीय जोड़ी को इसी चीनी जोड़ी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इस बार जीत हासिल करके थुलासिमथि और मानसी ने उस हार का बदला भी लिया।
पिछले संस्करण में रजत पदक जीतने वाली भारतीय जोड़ी ने इस बार स्वर्ण पदक हासिल किया। यह बदलाव उनके बेहतर प्रदर्शन और प्रतियोगिता में मजबूत वापसी को दर्शाता है।
थुलासिमथि मुरुगेसन ने महिला युगल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 स्पर्धा में भी पदक हासिल किया। उन्होंने नितेश कुमार के साथ मिलकर रजत पदक जीता।
एक ही प्रतियोगिता में दो अलग-अलग युगल स्पर्धाओं में पदक जीतना थुलासिमथि के शानदार प्रदर्शन को दर्शाता है। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय बैडमिंटन दल की पदक संख्या बढ़ाने के साथ-साथ इस प्रतियोगिता में भारत की मजबूत उपस्थिति को भी रेखांकित किया।
बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने दिखाया कि देश के पैरा खिलाड़ी व्यक्तिगत और जोड़ी आधारित स्पर्धाओं में लगातार बेहतर नतीजे हासिल कर रहे हैं।
आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में सुमित अंतिल का स्वर्ण पदक और भारतीय खिलाड़ियों का भाला फेंक में तीनों पदक जीतना प्रतियोगिता के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। प्रणव सूरमा के रिकॉर्ड प्रदर्शन, संदीप के दौड़ में पदक और थुलासिमथि मुरुगेसन तथा मानसी जोशी की बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीतने वाली जोड़ी ने भारत की सफलता को और मजबूत किया।
भारत ने कुल 114 पदक जीतकर हांगझोऊ में बनाए गए 111 पदकों के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदकों के साथ यह प्रदर्शन भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया। खिलाड़ियों की मेहनत और शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि भारत एशियाई पैरा खेलों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।