विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने शुक्रवार को घोषणा की कि संस्था अगले पांच वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े अपने वित्तपोषण कारोबार को पांच गुना बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए विश्व बैंक ने 20 देशों की पहचान की है, जिनके साथ महत्वपूर्ण खनिजों के विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर साझेदारी की जा सकती है।
बंगा ने यह जानकारी बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के पूर्ण सत्र में अपने संबोधन के दौरान दी। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों का विकास केवल कच्चे माल की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और संबंधित देशों में आर्थिक मूल्य बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया के कई देश ऊर्जा परिवर्तन, आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादन के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा World Bank President Ajay Banga ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व बैंक महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अगले पांच वर्षों के दौरान अपने कारोबार को पांच गुना करने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि इसी सप्ताह बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) के सहयोग से पहले देश-स्तरीय समझौतों की शुरुआत की गई है।
इन समझौतों का उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को विकसित करना और खनिजों से पैदा होने वाले अधिक रोजगार तथा आर्थिक लाभ को संबंधित देशों के भीतर बनाए रखना है।
इस पहल के तहत केवल खनिजों की खोज और खनन पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि उनसे जुड़ी स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों को भी महत्व दिया जाएगा। यदि खनिज उत्पादक देश कच्चे माल के साथ-साथ उसके प्रसंस्करण और उससे जुड़े उद्योगों को भी विकसित करते हैं, तो उन्हें अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकता है।
विश्व बैंक की नई धातु एवं खनिज कार्यान्वयन योजना के तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 19 अरब डॉलर के वित्तपोषण का लक्ष्य रखा गया है।
इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2021 से 2025 के दौरान इस क्षेत्र में 3.6 अरब डॉलर का वित्तपोषण किया गया था। इस प्रकार नई योजना में निर्धारित राशि पिछले पांच वित्त वर्षों के मुकाबले काफी अधिक है।
यह लक्ष्य महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे खनन, खनिज प्रसंस्करण और संबंधित बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए निवेश जुटाने के अवसर बढ़ सकते हैं।
महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज होते हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था, औद्योगिक उत्पादन या राष्ट्रीय रणनीतिक जरूरतों के लिए विशेष उपयोगिता होती है और जिनकी आपूर्ति में बाधा आने का जोखिम भी हो सकता है। इनकी सूची अलग-अलग देशों की जरूरतों के अनुसार बदल सकती है।
लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे खनिजों का उपयोग बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और कई आधुनिक तकनीकों में किया जाता है। इसलिए इनकी स्थिर आपूर्ति बनाए रखना कई देशों के लिए महत्वपूर्ण है।
इन खनिजों के विकास में निवेश से उत्पादक देशों को खनन के अलावा प्रसंस्करण, परिवहन और अन्य संबंधित उद्योगों में भी अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय औद्योगिक क्षमता पर निर्भर करेगा।
अमेरिका, जो विश्व बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक है, लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि बैंक महत्वपूर्ण खनिजों के विकास के लिए अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट US Treasury Secretary Scott Bessent ने इसी सप्ताह कहा था कि विश्व बैंक को महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। उनके अनुसार, इसके लिए परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों को कम करना, वित्तपोषण उपलब्ध कराना और जरूरी बुनियादी ढांचे में निवेश करना महत्वपूर्ण है।
परियोजनाओं के जोखिम कम करने का अर्थ है ऐसी वित्तीय और व्यावहारिक बाधाओं को घटाना, जिनके कारण निवेशक किसी परियोजना में पैसा लगाने से हिचकिचा सकते हैं। बेहतर बुनियादी ढांचे और वित्तीय सहायता से कुछ परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बेसेंट ने समुद्र की गहराई में खनन से जुड़ी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया था। हालांकि, अजय बंगा ने अपने संबोधन में गहरे समुद्र में खनन का विशेष रूप से जिक्र नहीं किया।
विश्व बैंक की धातु एवं खनिज योजना में गहरे समुद्र में खनन के उभरते क्षेत्र के प्रति सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई है। योजना के अनुसार, इस क्षेत्र में बैंक की किसी भी भागीदारी या निवेश को लागू बैंक नीतियों के अनुरूप होना होगा।
गहरे समुद्र में खनन को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और समुद्री पारिस्थितिकी की सुरक्षा जैसे सवाल महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इस क्षेत्र में निवेश करते समय संबंधित नियमों और जोखिमों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
अजय बंगा ने अपने संबोधन में विश्व बैंक समूह के वित्तपोषण से जुड़ी व्यापक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 30 जून को समाप्त हुए वित्त वर्ष 2026 के दौरान समूह ने 112 अरब डॉलर की निजी पूंजी जुटाई।
यह राशि वित्त वर्ष 2022 की तुलना में तीन गुना से भी अधिक थी। वित्त वर्ष 2022 वह अवधि थी, जो बंगा के विश्व बैंक अध्यक्ष बनने से पहले की थी।
निजी पूंजी जुटाने का अर्थ है कि विकास परियोजनाओं के लिए निजी निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से भी धन प्राप्त किया जाए। इससे विकास कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों का विस्तार हो सकता है और केवल सार्वजनिक वित्तपोषण पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।
बंगा के अनुसार, विश्व बैंक की अपनी वित्तीय क्षमता से दिए गए ऋण और निजी क्षेत्र से जुटाई गई पूंजी को मिलाकर वित्त वर्ष 2026 में विश्व बैंक समूह का कुल वित्तपोषण 230 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
यह आंकड़ा समूह की विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की व्यापक गतिविधियों को दर्शाता है। महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में वित्तपोषण बढ़ाने का नया लक्ष्य भी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत विभिन्न देशों में आर्थिक विकास और औद्योगिक क्षमताओं को सहयोग देने की योजना है।
इस प्रयास का उद्देश्य खनिज संसाधनों के विकास के साथ स्थानीय उद्योगों, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। साथ ही, परियोजनाओं के जोखिम, पर्यावरणीय प्रभाव और बुनियादी ढांचे की जरूरतों को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित वित्तपोषण लक्ष्य किस हद तक वास्तविक निवेश, जिम्मेदार खनन, स्थानीय प्रसंस्करण क्षमता और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ में बदल पाता है।