आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल इंसानों से जुड़े कामों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका इस्तेमाल खेती और पशुपालन के क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ICAR-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र, नागालैंड के शोधकर्ताओं ने मिथुन के व्यवहार की वास्तविक समय में पहचान और निगरानी करने वाली AI आधारित प्रणाली विकसित की है।
मिथुन को आम तौर पर ‘पहाड़ों का मवेशी’ कहा जाता है। यह पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी समुदायों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पशु है। मिथुन स्थानीय लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
ICAR-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र, नागालैंड ICAR-National Research Centre on Mithun, Nagaland के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित नई प्रणाली की मदद से मिथुन के व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा सकती है। इससे पशुओं के स्वास्थ्य, कल्याण, प्रजनन और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
यह अध्ययन हाल ही में Engineering Research Express में प्रकाशित हुआ है। इसमें मिथुन के व्यवहार की स्वचालित पहचान और निगरानी के लिए AI आधारित ऐसी प्रणाली प्रस्तुत की गई है, जो बिना पशु को परेशान किए काम कर सकती है।
शोध का मुख्य उद्देश्य वीडियो फुटेज के माध्यम से यह पता लगाना था कि कोई मिथुन उस समय क्या कर रहा है और उसकी पहचान लगातार बनाए रखना था। इसके लिए शोधकर्ताओं ने AI और कंप्यूटर विजन तकनीक का इस्तेमाल किया है।
पशुओं के व्यवहार पर नजर रखना उनके स्वास्थ्य और बेहतर देखभाल के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। खाने, खड़े होने, लेटने या प्रजनन से जुड़े व्यवहार में बदलाव कई बार पशु की स्वास्थ्य स्थिति या शारीरिक अवस्था में बदलाव का शुरुआती संकेत दे सकते हैं।
पारंपरिक तरीके से पशुओं की निगरानी मुख्य रूप से इंसानों द्वारा की जाती है। इसमें काफी समय और मेहनत लगती है। दिन-रात लगातार पशुओं पर नजर रखना विशेष रूप से कठिन होता है। रात के समय यह काम और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
AI आधारित निगरानी इस समस्या का समाधान पेश कर सकती है, क्योंकि कैमरों के जरिए पशुओं की गतिविधियों को लगातार रिकॉर्ड किया जा सकता है और AI इन गतिविधियों का विश्लेषण कर सकता है।
इस प्रणाली को विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं ने नागालैंड स्थित ICAR-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के फार्म में दो शेड में कुल 12 हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाए। इन कैमरों के माध्यम से दिन और रात दोनों समय पशुओं की निगरानी की गई। रात के समय निगरानी के लिए इन्फ्रारेड सुविधा का भी इस्तेमाल किया गया।
कैमरों से प्राप्त वीडियो फुटेज के आधार पर शोधकर्ताओं ने 3,000 ऐसी तस्वीरों का डेटासेट तैयार किया, जिन्हें हाथ से चिन्हित किया गया था। इन तस्वीरों में मिथुन के चार प्रमुख व्यवहारों को शामिल किया गया। इनमें खाना खाना, खड़ा होना, लेटना और चढ़ना शामिल हैं।
शोध में मिथुन के खाने, खड़े होने, लेटने और चढ़ने जैसे व्यवहारों को पहचानने पर ध्यान दिया गया। इन गतिविधियों की पहचान पशु के स्वास्थ्य और प्रजनन प्रबंधन के लिए उपयोगी जानकारी दे सकती है।
मिसाल के तौर पर, खाने या लेटने के व्यवहार में असामान्य बदलाव किसी स्वास्थ्य समस्या या असुविधा का संकेत हो सकता है। वहीं, चढ़ने का व्यवहार प्रजनन और मादा पशु में हीट यानी प्रजनन अवस्था की निगरानी में उपयोगी हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने AI प्रणाली में YOLOv8n मॉडल का इस्तेमाल पशुओं के व्यवहार की पहचान के लिए किया। इसके साथ DeepSORT तकनीक का उपयोग अलग-अलग मिथुन की पहचान बनाए रखने और वीडियो के अलग-अलग फ्रेम में उनके आवागमन को ट्रैक करने के लिए किया गया।
इसका मतलब यह है कि प्रणाली केवल यह नहीं बताती कि पशु क्या कर रहा है, बल्कि यह भी पहचानने की कोशिश करती है कि कौन-सा मिथुन उस गतिविधि को कर रहा है।
शोध में YOLOv8n मॉडल ने mAP@0.5 पर 99.5 प्रतिशत की औसत सटीकता हासिल की। वहीं, इसकी रिकॉल दर 99.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
NVIDIA RTX 3060 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट पर इस प्रणाली ने लगभग 31 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से वीडियो को संसाधित किया। यह प्रदर्शन बताता है कि प्रणाली वास्तविक समय में पशुओं की गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने प्रणाली का परीक्षण आसान परिस्थितियों के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण फार्म परिस्थितियों में भी किया। इनमें पशुओं का आंशिक रूप से छिप जाना, पीछे का जटिल दृश्य, असमान और गीली जमीन, परछाइयां, तेज गतिविधियों के कारण तस्वीर का धुंधला होना और रात में इन्फ्रारेड फुटेज शामिल थे।
AI आधारित लगातार निगरानी से पशुपालकों और पशु प्रबंधकों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं। पशु कितनी बार खा रहा है, कितनी देर खड़ा रह रहा है या कितनी देर लेट रहा है, जैसे व्यवहारों में बदलाव स्वास्थ्य और आराम की स्थिति को समझने में मदद कर सकते हैं।
इसी तरह, चढ़ने जैसी गतिविधियों की निगरानी प्रजनन प्रबंधन में उपयोगी हो सकती है। इससे पशुपालकों को पशुओं की प्रजनन स्थिति से जुड़े संकेतों को समझने में मदद मिल सकती है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पशुओं की गतिविधियों की जानकारी हासिल करने के लिए हर समय उनके पास मौजूद रहने की जरूरत कम हो सकती है। कैमरे लगातार निगरानी करते रहेंगे और AI रिकॉर्ड किए गए दृश्य से उपयोगी जानकारी निकाल सकता है।
इससे विशेष रूप से बड़े पशुधन समूहों और दिन-रात निगरानी की जरूरत वाले फार्मों पर काम का बोझ कम किया जा सकता है।
हालांकि शोध के परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने माना है कि इस प्रणाली की कुछ सीमाएं अभी मौजूद हैं। फिलहाल इसका परीक्षण केवल एक फार्म पर किया गया है। इसलिए अलग-अलग फार्म, भौगोलिक क्षेत्र, मौसम, पशुओं की संख्या और कैमरों की अलग-अलग व्यवस्था में इसका परीक्षण करना जरूरी होगा।
वर्तमान अध्ययन में केवल चार प्रकार के व्यवहारों को शामिल किया गया है। अगर पशु बहुत ज्यादा एक-दूसरे के पीछे या सामने आ जाएं और पूरी तरह या काफी हद तक छिप जाएं, तो पहचान और ट्रैकिंग की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, पशुओं की पहचान को लगातार सही बनाए रखने की क्षमता का मानक ट्रैकिंग मापदंडों के आधार पर और विस्तृत मूल्यांकन भी किया जाना बाकी है।
शोधकर्ता भविष्य में इस प्रणाली को और अधिक उन्नत बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसमें मिथुन के आक्रामक व्यवहार, एक-दूसरे की सफाई करने जैसी गतिविधियों और बीमारी से जुड़ी निष्क्रियता की पहचान शामिल हो सकती है।
इसके अलावा, भविष्य के अध्ययनों में समय के साथ होने वाले व्यवहारिक बदलावों को समझने वाले उन्नत AI मॉडल, सीधे उपकरण पर डेटा का विश्लेषण करने वाली तकनीक और अलग-अलग फार्म तथा मौसमों से जुड़े बड़े डेटासेट तैयार करने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
यह अध्ययन दिखाता है कि पशु विज्ञान को AI और कंप्यूटर विजन के साथ जोड़कर पशुपालन के लिए नई तकनीकी व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं। लगातार और स्वचालित निगरानी से पशुपालकों को पशुओं के व्यवहार से जुड़ा डेटा मिल सकता है, जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य, कल्याण, प्रजनन और बेहतर प्रबंधन के लिए किया जा सकता है।
ऐसी तकनीकें भविष्य में सटीक पशुपालन को बढ़ावा दे सकती हैं। इससे पशुपालकों को केवल अनुमान या सीमित समय की निगरानी पर निर्भर रहने के बजाय लगातार मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर पशुओं की देखभाल करने में मदद मिल सकती है।
यह शोध Engineering Research Express, Volume 8 (2026), Article 175213 में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन ICAR-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र, नागालैंड के शोधकर्ताओं ने NIT नागालैंड, नागालैंड विश्वविद्यालय और CHRIST (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के सहयोग से किया है।