आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाले शॉपिंग एजेंट की बढ़ती लोकप्रियता ऑनलाइन रिटेल की दुनिया में बड़े बदलाव ला रही है। अमेज़न और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो रही है। ये AI टूल्स ग्राहकों की जरूरतों को समझकर उनके लिए उत्पाद खोज सकते हैं, अलग-अलग कंपनियों की कीमतों की तुलना कर सकते हैं और यहां तक कि उनकी ओर से खरीदारी भी पूरी कर सकते हैं। इससे लोगों के ऑनलाइन खरीदारी करने का पारंपरिक तरीका बदल सकता है।
हालांकि, इस बदलाव से रिटेल कंपनियों की कमाई का एक महत्वपूर्ण जरिया प्रभावित हो सकता है। यह जरिया है डिजिटल विज्ञापन। Amazon और Walmart जैसी कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर ब्रांड्स को विज्ञापन दिखाने और उनके उत्पादों को अधिक लोगों तक पहुंचाने की सुविधा देती हैं।
इसके बदले उन्हें अच्छी कमाई होती है। लेकिन यदि ग्राहक सीधे AI एजेंट से उत्पाद खोजने और खरीदने लगेंगे, तो पारंपरिक विज्ञापनों की भूमिका कम हो सकती है। ऐसे में कंपनियों के सामने AI आधारित खरीदारी को अपनाने के साथ अपने विज्ञापन कारोबार और ग्राहक डेटा को सुरक्षित रखने की चुनौती होगी।
AI शॉपिंग एजेंट ऐसे डिजिटल सहायक हैं, जो ग्राहकों की जरूरतों को समझकर उनके लिए सही उत्पाद खोजने, कीमतों की तुलना करने और खरीदारी करने में मदद करते हैं। इनकी मदद से ग्राहकों को अलग-अलग वेबसाइटों पर जाकर घंटों उत्पाद खोजने की जरूरत नहीं पड़ सकती।
Meta के हाल ही में पेश किए गए Muse जैसे टूल ऑनलाइन खरीदारी के अनुभव को बदल सकते हैं। अभी तक ग्राहक Amazon जैसी वेबसाइटों पर जाकर उत्पाद खोजते हैं और उन्हें कई बार प्रायोजित विज्ञापन वाले उत्पाद भी दिखाई देते हैं। कंपनियां इन विज्ञापनों के लिए रिटेल प्लेटफॉर्म को भुगतान करती हैं।
लेकिन AI एजेंट के बढ़ते इस्तेमाल से ग्राहक सीधे अपने डिजिटल सहायक से किसी उत्पाद की जानकारी मांग सकते हैं। इसके बाद AI एजेंट अलग-अलग विकल्पों में से कुछ उत्पाद सुझा सकता है और ग्राहक की अनुमति से खरीदारी भी कर सकता है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक विज्ञापनों को देखने और उन पर क्लिक करने की संभावना कम हो सकती है।
Morgan Stanley के एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक अमेरिका में कुल ई-कॉमर्स खर्च का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा AI शॉपिंग एजेंट के माध्यम से हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो रिटेल कंपनियों को अपनी विज्ञापन रणनीतियों और कमाई के तरीकों में बदलाव करना पड़ सकता है।
एजेंटिक कॉमर्स के बढ़ते बाजार में Amazon और Walmart अलग-अलग रास्ते अपना रही हैं। Amazon जहां कुछ बाहरी AI शॉपिंग टूल्स की पहुंच को सीमित कर रही है, वहीं Walmart बाहरी प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर इस तकनीक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
सितंबर में Amazon ने Meta के Muse शॉपिंग एजेंट को अपनी वेबसाइट तक पहुंचने से रोक दिया था। कंपनी का आरोप था कि इस टूल ने बिना अनुमति उसके ऑनलाइन स्टोर तक पहुंच बनाई और ग्राहकों के लॉगिन विवरण एकत्र करके सुरक्षित किए।
Amazon का कहना है कि बाहरी AI एजेंट को किसी प्लेटफॉर्म पर काम करते समय पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए और उस प्लेटफॉर्म के नियमों तथा अनुमति संबंधी शर्तों का सम्मान करना चाहिए।
कंपनी का Perplexity के Comet शॉपिंग एजेंट के साथ भी कानूनी विवाद चल रहा है। मार्च में Amazon को इस टूल पर प्रतिबंध लगाने वाला अदालती आदेश मिला था, लेकिन अगस्त में अमेरिका की नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने इस प्रतिबंध को रद्द कर दिया। इस मामले में कानूनी विवाद अभी जारी है।
Amazon के CEO Andy Jassy ने हाल ही में कहा कि बाहरी AI एजेंट का अभी तक कंपनी के विज्ञापन कारोबार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, LSEG के आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में Amazon के विज्ञापन राजस्व में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह लगभग चार वर्षों में इसकी सबसे धीमी वृद्धि दर रही।
Amazon से अलग Walmart ने अधिक सहयोगात्मक रणनीति अपनाई है। 21 अक्टूबर को कंपनी ने ऐसी तकनीकी व्यवस्था पेश की, जो बाहरी एजेंटिक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदारी को आसान बना सकती है।
इस व्यवस्था के तहत Walmart पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बाहरी AI एजेंट के लिए एक अलग प्रोफाइल मिल सकती है, जो उनके Walmart खाते से जुड़ी होगी।
इससे ग्राहक AI सहायक के माध्यम से होने वाली खरीदारी को मंजूरी दे सकेंगे और खर्च की अधिकतम सीमा भी तय कर सकेंगे। यानी AI एजेंट खरीदारी में मदद करेगा, लेकिन अंतिम नियंत्रण ग्राहक के पास रहेगा।
वॉलमार्ट के सीएफओ जॉन डेविड रेनी Walmart के CFO John David Rainey पहले ही विज्ञापन, सदस्यता योजनाओं और ऑनलाइन मार्केटप्लेस कारोबार के महत्व पर जोर दे चुके हैं। इन तीनों कारोबारों ने मिलकर कंपनी की तिमाही परिचालन आय में हुई वृद्धि में 45 प्रतिशत का योगदान दिया था।
AI शॉपिंग एजेंट के बढ़ते प्रभाव से रिटेल कंपनियों को विज्ञापन से कमाई करने के अपने तरीकों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
रिटेल मीडिया प्लेटफॉर्म Footprints AI के CEO Dan Marc का मानना है कि बड़ी रिटेल कंपनियां अपने प्रमुख ब्रांड साझेदारों के साथ कई वर्षों के विज्ञापन समझौते कर सकती हैं। इससे उन्हें भविष्य में विज्ञापन से होने वाली कमाई को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
उनका यह भी मानना है कि जैसे-जैसे ग्राहक उत्पाद खोजने के लिए AI सहायक और बड़े भाषा मॉडल (LLM) का इस्तेमाल करेंगे, डिजिटल रिटेल विज्ञापनों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में ब्रांड्स के बीच विज्ञापन साझेदारी और उत्पादों को ग्राहकों की नजरों में लाने की प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।
AI शॉपिंग एजेंट को लेकर चिंताओं के बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक रिटेल मीडिया कारोबार के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकती है।
Morningstar के विश्लेषक Brett Husslein के अनुसार, AI शॉपिंग एजेंट को रिटेल विज्ञापन के लिए पूरी तरह खतरे के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसे विज्ञापन उद्योग में आने वाले बदलाव और विकास के रूप में समझा जा सकता है।
Emarketer के अनुमान के मुताबिक, ब्रांड्स वर्ष 2026 में रिटेल मीडिया विज्ञापनों पर 22.6 प्रतिशत अधिक खर्च कर सकते हैं। वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में लगभग 60.7 अरब डॉलर खर्च किए गए थे।
कुछ कंपनियां अपने AI आधारित शॉपिंग सहायकों में ही विज्ञापन दिखाने के नए तरीके आजमा रही हैं।
Walmart: कंपनी ने अपने AI शॉपिंग चैटबॉट Sparky में विज्ञापन दिखाने का परीक्षण शुरू किया है।
Amazon: कंपनी ने अपने AI शॉपिंग सहायक Alexa for Shopping में विज्ञापन की सुविधा को शामिल किया है।
इन प्रयासों से पता चलता है कि कंपनियां खरीदारी की प्रक्रिया के स्वचालित होने के बावजूद विज्ञापन को प्रासंगिक बनाए रखने के तरीके खोज रही हैं।
AI आधारित खरीदारी से कंपनियों के उत्पादों के प्रचार का तरीका भी बदल सकता है। पारंपरिक डिजिटल विज्ञापनों में आकर्षक तस्वीरों, प्रचार संदेशों और ब्रांड की कहानी पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
लेकिन AI एजेंट उत्पादों की सिफारिश करते समय उनकी कीमत, विशेषताओं, तकनीकी जानकारी और अन्य तथ्यों को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसलिए कंपनियों को अपनी उत्पाद संबंधी जानकारी इस तरह तैयार करनी होगी, जिसे AI सिस्टम आसानी से समझ और उपयोग कर सकें।
Procter & Gamble, Nestle और L'Oreal जैसे बड़े उपभोक्ता ब्रांड अपनी उत्पाद जानकारी को AI सिस्टम के अनुकूल बनाने पर काम कर रहे हैं।
Mondelez के ग्लोबल डिजिटल कॉमर्स के उपाध्यक्ष Andrew Lederman ने भी इस बात पर जोर दिया है कि AI एजेंट ब्रांड्स और ग्राहकों के बीच संपर्क को और मजबूत कर सकते हैं।
वहीं, डिजिटल कॉमर्स सलाहकार कंपनी Flywheel ने कारोबारियों को सलाह दी है कि वे तुरंत अपने विज्ञापन बजट में बड़े बदलाव करने के बजाय पहले यह समझें कि AI के कारण उत्पाद खोजने और खरीदने का तरीका किस तरह बदल रहा है।
भविष्य में एजेंटिक कॉमर्स का विकास रिटेल कंपनियों, ब्रांड्स और ग्राहकों के बीच संबंधों को पूरी तरह बदल सकता है।
Kearney की वरिष्ठ सलाहकार Katherine Black का मानना है कि आने वाले समय में रिटेल मीडिया एक बोली आधारित व्यवस्था में बदल सकता है।
इस संभावित मॉडल में AI एजेंट ग्राहक की पसंद, बजट और जरूरतों के अनुसार उत्पाद खोजेंगे। वहीं, रिटेल कंपनियां उत्पादों के लिए न्यूनतम और अधिकतम कीमतों की सीमा तय कर सकती हैं।
इससे उत्पादों की सिफारिश अधिक व्यक्तिगत और कीमत पर आधारित हो सकती है। परिणामस्वरूप, पारंपरिक विज्ञापन स्थानों की तुलना में उत्पाद की वास्तविक कीमत, गुणवत्ता और ग्राहक की जरूरतें अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
AI शॉपिंग एजेंट Amazon, Walmart और दूसरी बड़ी रिटेल कंपनियों के सामने एक नई प्रतिस्पर्धी चुनौती पेश कर रहे हैं। स्वचालित खरीदारी से पारंपरिक विज्ञापन मॉडल प्रभावित हो सकता है, लेकिन इससे कंपनियों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।
AI आधारित प्रचार, व्यक्तिगत उत्पाद सुझाव और बेहतर उत्पाद खोज जैसी सुविधाएं भविष्य में विज्ञापन कारोबार के नए रूप बन सकती हैं। जो कंपनियां समय रहते अपनी रणनीतियों में बदलाव करेंगी, वे एजेंटिक कॉमर्स के बढ़ते बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति बनाए रखने में सफल हो सकती हैं।