कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है। बैंकिंग, खुदरा कारोबार, स्वास्थ्य सेवा, विपणन, ग्राहक सेवा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में कंपनियां AI का इस्तेमाल करके अपने काम को तेज और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश कर रही हैं। नई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में विभिन्न उद्योगों की कंपनियों ने AI के इस्तेमाल से औसतन 8.2% से 12.3% तक शुद्ध उत्पादकता सुधार दर्ज किया है। यह संकेत देता है कि AI अब कारोबार के लिए केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि मौजूदा समय में उत्पादकता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है।
हालांकि, AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ एक नई चुनौती भी सामने आ रही है। कंपनियां AI से मिलने वाले लाभों को तेजी से अपना रही हैं, लेकिन उससे जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी शासन व्यवस्था, नीतियां और आंतरिक नियंत्रण उसी गति से विकसित नहीं हो रहे हैं। मॉर्गन स्टेनली इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल इन्वेस्टिंग की Governance and AI Adoption रिपोर्ट ने इसी अंतर को रेखांकित किया है। रिपोर्ट बताती है कि AI से उत्पादकता में स्पष्ट लाभ मिल रहा है, लेकिन कंपनियों को AI मॉडल, डेटा, गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और बदलते नियमों से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन पर अभी काफी काम करना बाकी है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष कई उद्योगों में काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के सर्वेक्षण पर आधारित हैं। मॉर्गन स्टेनली रिसर्च की Alphawise टीम ने अप्रैल 2026 में विभिन्न क्षेत्रों के 808 वरिष्ठ अधिकारियों से ऑनलाइन बातचीत की। इसमें बैंकिंग, सॉफ्टवेयर और सेवाएं, तकनीकी हार्डवेयर, सेमीकंडक्टर और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्र शामिल थे।
इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में किए गए 935 अधिकारियों के एक अन्य सर्वेक्षण के आंकड़ों को भी अध्ययन में शामिल किया गया। इसमें परिवहन, वाहन, उपभोक्ता वस्तुएं, स्वास्थ्य सेवा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल थे।
AI शासन व्यवस्था की स्थिति समझने के लिए दुनिया भर की कंपनियों में AI से जुड़े नियंत्रणों की जिम्मेदारी संभालने वाले 200 अधिकारियों का एक अलग सर्वेक्षण भी किया गया। इन सभी आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट ने AI अपनाने, उत्पादकता में सुधार और जोखिम प्रबंधन की मौजूदा स्थिति का आकलन किया।
रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में शामिल 10 उद्योग समूहों की कंपनियों ने पिछले 12 महीनों में AI के इस्तेमाल से औसतन 8.2% से 12.3% तक शुद्ध उत्पादकता सुधार का अनुमान लगाया है।
यह लाभ केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। उपभोक्ता वस्तुओं के वितरण और खुदरा कारोबार जैसी पारंपरिक गतिविधियों से जुड़ी कंपनियां भी AI के इस्तेमाल से उत्पादकता में सुधार की जानकारी दे रही हैं।
यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि AI अब केवल तकनीकी विशेषज्ञों के लिए उपयोगी उपकरण नहीं रह गई है। कंपनियां इसे व्यापक कारोबारी गतिविधियों में शामिल कर रही हैं। AI की मदद से दोहराए जाने वाले कामों को स्वचालित किया जा सकता है, कर्मचारियों को जानकारी और विश्लेषण उपलब्ध कराया जा सकता है तथा कई प्रक्रियाओं को कम समय में पूरा किया जा सकता है।
कंपनियां AI का उपयोग कई महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इनमें शामिल हैं।
जैसे-जैसे कंपनियां AI तकनीक के साथ अनुभव हासिल कर रही हैं, इसके रोजमर्रा के कारोबारी कामकाज का हिस्सा बनने की संभावना भी बढ़ रही है।
AI से मिलने वाले उत्पादकता लाभ तेजी से सामने आ रहे हैं, लेकिन कंपनियों की जोखिम प्रबंधन व्यवस्था अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है।
200 AI शासन अधिकारियों के सर्वेक्षण में 48% अधिकारियों ने कहा कि उनकी मौजूदा जोखिम प्रबंधन व्यवस्था AI से जुड़ी चुनौतियों के लिए काफी हद तक पर्याप्त है, लेकिन इसमें कुछ बदलाव करने की आवश्यकता होगी। वहीं 39% अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था काम कर सकती है, हालांकि उनकी कंपनियां अभी इसकी उपयुक्तता का मूल्यांकन कर रही हैं।
लगभग 90% उत्तरदाताओं ने बताया कि उनकी कंपनियों ने या तो AI शासन और जोखिम प्रबंधन की जिम्मेदारी तय कर ली है या यह निर्धारित करने की प्रक्रिया में हैं कि इसकी जिम्मेदारी संगठन के किस हिस्से को दी जानी चाहिए।
यह संकेत देता है कि कंपनियां AI शासन को गंभीरता से लेना शुरू कर चुकी हैं, लेकिन व्यवस्था अभी विकास के दौर में है।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि AI से जुड़े विस्तृत नियंत्रणों को लागू करने में कंपनियां अभी पीछे हैं।
केवल 41% कंपनियों ने बताया कि उनके पास AI मॉडलों की पूरी सूची और प्रत्येक मॉडल की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने वाली व्यवस्था पूरी तरह लागू है। इतनी ही कंपनियों ने कहा कि उनके पास AI मॉडलों की औपचारिक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी तरह मौजूद है।
इसके अलावा, केवल 39% कंपनियों ने AI मॉडल विकसित करने और डेटा के इस्तेमाल से जुड़े स्पष्ट मानकों को पूरी तरह लागू किया है।
AI मॉडल के जोखिम के आधार पर उनकी श्रेणी तय करने वाली व्यवस्था केवल 33% कंपनियों में पूरी तरह स्थापित थी। सबसे कमजोर क्षेत्र अनपेक्षित या उभरते AI जोखिमों की पहचान के लिए व्यवस्थित व्यवस्था का रहा। केवल 27% उत्तरदाताओं ने कहा कि उनकी कंपनी में ऐसी व्यवस्था पूरी तरह लागू है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनियों ने AI शासन की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन व्यापक और मजबूत नियंत्रण प्रणाली तैयार करने के लिए अभी काफी काम बाकी है। विशेष रूप से AI मॉडल की निगरानी, जोखिम की पहचान और डेटा इस्तेमाल के मानकों को मजबूत करना जरूरी हो सकता है।
AI के इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा जोखिमों में डेटा संबंधी समस्याएं सबसे बड़ी चिंता के रूप में सामने आई हैं। लगभग 56% अधिकारियों ने गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और संभावित भेदभाव जैसे मुद्दों को अपनी कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण AI जोखिम बताया।
AI का इस्तेमाल जैसे-जैसे बड़े डेटा समूहों और महत्वपूर्ण कारोबारी प्रक्रियाओं में बढ़ेगा, इन जोखिमों की जटिलता भी बढ़ सकती है। इसलिए कंपनियों के लिए डेटा का जिम्मेदारी से इस्तेमाल, गोपनीय जानकारी की सुरक्षा और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती जा रही है।
अगले दो से तीन वर्षों को देखते हुए कंपनियों को AI जोखिमों की प्रकृति में बदलाव की आशंका है। सर्वेक्षण में 35% अधिकारियों ने माना कि नियामकीय और कानूनी समस्याएं भविष्य में AI से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता बन सकती हैं।
वहीं 32% अधिकारियों ने AI से निवेश पर पर्याप्त लाभ हासिल करने में आने वाली कठिनाइयों सहित कार्यान्वयन संबंधी जोखिमों को प्रमुख चिंता बताया।
इसका अर्थ है कि कंपनियों के सामने केवल AI को सफलतापूर्वक अपनाने की चुनौती नहीं होगी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके AI उपकरण और प्रक्रियाएं तेजी से बदलते कानूनों और नियमों के अनुरूप हों।
AI से जुड़े नियमों को लेकर अनिश्चितता कंपनियों के लिए पहले से ही चुनौती बनी हुई है। सर्वेक्षण में 38% अधिकारियों ने नियामकीय जटिलता को प्रभावी AI शासन व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी बाधा बताया।
दुनिया के अलग-अलग देशों में AI के इस्तेमाल को लेकर नए नियम और दिशानिर्देश बनाए जा रहे हैं। ऐसे में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए स्थिति और जटिल हो सकती है, क्योंकि उन्हें अलग-अलग देशों के अलग-अलग नियमों का पालन करना पड़ सकता है।
कंपनियों को अपनी नीतियों, नियंत्रण प्रणालियों और अनुपालन प्रक्रियाओं को समय-समय पर बदलते नियमों के अनुसार अपडेट करना होगा।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट AI को लेकर एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करती है। एक तरफ कंपनियां AI से उल्लेखनीय उत्पादकता लाभ हासिल कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कई संगठन अभी तक मॉडल जोखिम, डेटा सुरक्षा और नए जोखिमों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
भविष्य में AI कंपनियों के कारोबार का और बड़ा हिस्सा बन सकती है। इसलिए AI शासन को केवल एक अतिरिक्त अनुपालन प्रक्रिया मानने के बजाय कारोबारी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना जरूरी होगा।
कंपनियों को AI मॉडल की नियमित जांच, स्पष्ट जिम्मेदारी, डेटा सुरक्षा, जोखिम की पहचान और कर्मचारियों के लिए उचित दिशानिर्देश तैयार करने पर ध्यान देना होगा। इससे AI से मिलने वाले लाभों को सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से हासिल करने में मदद मिल सकती है।
AI कई उद्योगों में दोहरे अंकों तक उत्पादकता सुधार देने की क्षमता दिखा रही है। इससे कंपनियों को कम समय में अधिक काम करने, प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। लेकिन AI के तेजी से विस्तार के साथ डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, मॉडल जोखिम, भेदभाव और नियामकीय अनुपालन जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
आने वाले वर्षों में कंपनियों की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि वे कितनी तेजी से AI अपनाती हैं। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वे इस तकनीक को कितनी जिम्मेदारी, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ इस्तेमाल करती हैं। AI नवाचार और मजबूत शासन व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना उन कंपनियों के लिए जरूरी होगा, जो लंबे समय तक AI से टिकाऊ कारोबारी लाभ हासिल करना चाहती हैं।