फास्ट-फूड कंपनी केएफसी ने अमेरिका में अपने रेस्टोरेंट के लिए पेय पदार्थों की आपूर्ति को लेकर कोका-कोला के साथ समझौता किया है। इस फैसले के साथ ही कंपनी का PepsiCo के साथ लगभग 40 वर्षों से चला आ रहा रिश्ता खत्म हो जाएगा। यह बदलाव अमेरिकी फास्ट-फूड और पेय पदार्थ बाजार में दोनों बड़ी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत Coca-Cola के पेय पदार्थ 2027 के वसंत तक अमेरिका में KFC के रेस्टोरेंट में उपलब्ध होने की उम्मीद है। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते से जुड़ी वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।
केएफसी के अमेरिका में कुल 3,718 रेस्टोरेंट हैं। ऐसे में यह समझौता Coca-Cola को अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और फास्ट-फूड क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर देगा। दूसरी ओर, KFC के अमेरिकी कारोबार से बाहर होने के कारण PepsiCo को अपने पेय पदार्थ व्यवसाय की रणनीति पर नए सिरे से ध्यान देना पड़ सकता है।
केएफसी KFC के साथ अमेरिकी बाजार में पेय पदार्थों की साझेदारी खोना PepsiCo के लिए एक झटका माना जा रहा है। कंपनी पहले से ही अमेरिका में अपने शीतल पेय कारोबार की बिक्री बढ़ाने और स्नैक्स कारोबार से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने की कोशिश कर रही है।
पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के उद्योग में बढ़ती कीमतों, परिचालन लागत और ग्राहकों की बदलती पसंद का असर देखने को मिल रहा है। कई ग्राहक अब स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर खाने-पीने के विकल्प चुन रहे हैं। इस बदलाव से पारंपरिक स्नैक्स और शीतल पेय कंपनियों को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत पड़ रही है।
PepsiCo के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रेमन लागुआर्ता PepsiCo Chief Executive Officer (CEO) Ramon Laguarta ने हाल में संकेत दिया था कि कारोबार की वृद्धि को दोबारा गति देने और मुनाफे का अंतर बेहतर करने की कोशिशों में अनुमान से अधिक समय लग रहा है।
ऐसे समय में KFC जैसे बड़े रेस्टोरेंट साझेदार का अमेरिकी कारोबार खोना निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा सकता है। हालांकि, केवल इस समझौते के खत्म होने से PepsiCo के पूरे कारोबार की स्थिति तय नहीं होती, लेकिन इससे अमेरिकी बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति पर चर्चा जरूर बढ़ सकती है।
केएफसी और पेप्सिको का रिश्ता उस समय शुरू हुआ, जब PepsiCo ने फास्ट-फूड कारोबार में विस्तार करने की रणनीति के तहत KFC का अधिग्रहण किया था। उस समय कंपनी का उद्देश्य केवल पेय पदार्थों तक सीमित रहने के बजाय खाद्य कारोबार में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना था।
बाद में PepsiCo ने 1997 में KFC को अपने कारोबार से अलग कर दिया। इसके बावजूद, KFC को पेय पदार्थों की आपूर्ति से जुड़ा कारोबारी संबंध उसकी मूल कंपनी Yum Brands के साथ व्यवस्था के माध्यम से जारी रहा।
अब KFC के अमेरिकी रेस्टोरेंट के लिए नया समझौता होने से यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि PepsiCo और Yum Brands के बीच सभी कारोबारी रिश्ते खत्म हो रहे हैं।
PepsiCo ने पुष्टि की है कि Taco Bell और KFC के अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट से जुड़े समझौतों का नवीनीकरण किया गया है। कंपनी के एक प्रवक्ता के अनुसार, Taco Bell के साथ समझौता 10 वर्षों के लिए है। इससे PepsiCo को इस प्रमुख फास्ट-फूड ब्रांड के साथ अपना कारोबार जारी रखने का अवसर मिलेगा।
KFC के फैसले ने बाजार विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि Coca-Cola और PepsiCo दोनों ही पेय पदार्थ उद्योग की प्रमुख कंपनियां हैं। फ्रीडम कैपिटल मार्केट्स के मुख्य बाजार रणनीतिकार जे वुड्स ने KFC जैसे बड़े ब्रांड के साथ साझेदारी खत्म होने को PepsiCo के लिए प्रतिकूल घटनाक्रम बताया।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब PepsiCo पर अपने कारोबार के प्रदर्शन में सुधार दिखाने का दबाव है। निवेशक कंपनी की बिक्री वृद्धि, परिचालन क्षमता और मुनाफे से जुड़े नतीजों पर नजर रख रहे हैं।
हालांकि, KFC का फैसला अपने आप में PepsiCo के भविष्य का पूरा आकलन नहीं करता। कंपनी के पास दूसरे बड़े रेस्टोरेंट साझेदार भी हैं। फिर भी, इस बदलाव से यह सवाल उठ सकता है कि अमेरिकी बाजार में पेय पदार्थों के बड़े समझौतों के लिए प्रतिस्पर्धा के बीच PepsiCo अपनी स्थिति को कैसे मजबूत करेगी।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि Freedom Capital Markets के पास Coca-Cola के शेयर हैं। इसलिए बाजार रणनीतिकार की टिप्पणी पर विचार करते समय इस कारोबारी संबंध को भी ध्यान में रखना उचित है।
PepsiCo को एक्टिविस्ट निवेशक Elliott Investment Management की ओर से भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस निवेशक ने पिछले वर्ष कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का खुलासा किया था।
Elliott ने उत्तरी अमेरिका में PepsiCo के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए बदलावों की मांग की है। इसमें कमजोर प्रदर्शन करने वाली संपत्तियों को बेचने की संभावित योजना भी शामिल है। कंपनी की रणनीति, परिचालन दक्षता और बेहतर कारोबारी नतीजे देने की क्षमता पर इस कारण अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
ऐसे माहौल में KFC के अमेरिकी पेय पदार्थ समझौते का खोना निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब यह देखना होगा कि PepsiCo अपनी बिक्री और मुनाफे को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाती है और दूसरे बड़े साझेदारों के साथ अपने रिश्तों को किस तरह बनाए रखती है।
KFC के साथ समझौते से कोका-कोला की अमेरिकी क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट यानी जल्दी भोजन उपलब्ध कराने वाले रेस्टोरेंट क्षेत्र में मौजूदगी बढ़ेगी। कंपनी पहले से ही McDonald's और Wendy's जैसे बड़े बर्गर ब्रांडों के साथ लंबे समय से कारोबार कर रही है।
KFC का अमेरिकी कारोबार मिलने से कोका-कोला को अपने पेय पदार्थों की आपूर्ति के लिए एक और बड़ा मंच मिलेगा। यह समझौता इस बात को भी दिखाता है कि बड़े रेस्टोरेंट समूहों के साथ पेय पदार्थों की आपूर्ति के अनुबंध हासिल करने के लिए Coca-Cola और PepsiCo के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है।
इससे पहले भी दोनों कंपनियों के बीच ऐसे बदलाव हो चुके हैं। वर्ष 2012 में PepsiCo ने Dunkin के साथ अपना पेय पदार्थ समझौता खो दिया था और उसकी जगह Coca-Cola ने ले ली थी। उस समय PepsiCo और Dunkin के बीच पांच वर्षों की व्यवस्था रही थी।
KFC के अमेरिकी कारोबार से बाहर होने के बावजूद PepsiCo के पास कई महत्वपूर्ण रेस्टोरेंट साझेदार बने हुए हैं। इनमें Subway और Jersey Mike's Subs जैसे सैंडविच ब्रांड शामिल हैं।
इसके अलावा, PepsiCo Pizza Hut के सोडा फाउंटेन कारोबार का संचालन भी करती है। Pizza Hut वर्ष 2026 में Yum Brands के समूह से अलग हो गया था। इससे पहले, वर्ष 2011 में Pizza Hut ने Coca-Cola से PepsiCo की ओर रुख किया था।
ये साझेदारियां दिखाती हैं कि KFC का अमेरिकी समझौता खत्म होने के बाद भी PepsiCo का रेस्टोरेंट कारोबार में महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है। हालांकि, बड़े ब्रांडों के साथ पेय पदार्थों की आपूर्ति के अनुबंधों को लेकर प्रतिस्पर्धा आगे भी जारी रहने की संभावना है।
KFC को उम्मीद है कि 2027 के वसंत तक अमेरिका में उसके रेस्टोरेंट में Coca-Cola के पेय पदार्थ मिलने लगेंगे। इसके साथ ही PepsiCo के साथ वह साझेदारी समाप्त हो जाएगी, जो दशकों पहले शुरू हुई थी और KFC के PepsiCo से अलग होने के बाद भी जारी रही।
दोनों कंपनियों ने नए समझौते की वित्तीय शर्तें सार्वजनिक नहीं की हैं। इसके बावजूद, यह बदलाव अमेरिकी रेस्टोरेंट पेय पदार्थ बाजार में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। Coca-Cola के लिए यह अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर है, जबकि PepsiCo के लिए बिक्री, मुनाफे और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस बदलाव का दीर्घकालीन असर इस बात पर निर्भर करेगा कि Coca-Cola KFC के रेस्टोरेंट को कितनी प्रभावी ढंग से आपूर्ति करती है और PepsiCo अपने दूसरे बड़े साझेदारों के साथ कारोबार बनाए रखते हुए इस नुकसान से कैसे निपटती है।
KFC का अमेरिका में पेय पदार्थों के लिए Coca-Cola को चुनना PepsiCo के साथ करीब 40 वर्षों से चले आ रहे संबंधों का अंत है। इस फैसले से Coca-Cola को फास्ट-फूड बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जबकि PepsiCo पर बिक्री वृद्धि, बढ़ती लागत और मुनाफे को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि, PepsiCo के पास अब भी कई बड़े रेस्टोरेंट साझेदार हैं। इसलिए इस बदलाव का पूरे कारोबार पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। 2027 के वसंत में नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों कंपनियां इस प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति को कैसे मजबूत करती हैं।