India AI Impact Summit 2026 के लिए जब पूरी दुनिया के AI दिग्गज भारत में मौजूद हैं। ऐसे वक्त पर अडानी ग्रुप ने AI को लेकर अपने बड़े दांव का ऐलान किया है। भारत में AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दौड़ तेज हो रही है। इसी कड़ी में अडानी ग्रुप ने बड़ा दांव खेला है। ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है, कि कंपनी 2035 तक देशभर में AI आधारित डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए करीब 100 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इस घोषणा के बाद कंपनी के शेयरों में बाजार में पॉजिटिव प्रतिक्रिया देखने को मिली और स्टॉक में करीब 2.5 फीसदी की तेजी दर्ज हुई। वहीं अडानी ग्रुप के प्रमुख गौतम अडानी Gautam Adani ने भी एक्स पर कंपनी की AI योजनाओं की जानकारी दी है।
कंपनी ने बताया कि ग्रुप का लक्ष्य भारत को एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है। अडानी ग्रुप का मानना है, कि आने वाला दशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का होगा और इसके लिए बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता की जरूरत पड़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ग्रीन एनर्जी आधारित बड़े डेटा सेंटर नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। यह निवेश केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके साथ सर्वर मैन्युफैक्चरिंग, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस इलेक्ट्रिकल सिस्टम और सपोर्टिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी बड़े निवेश की संभावना बनेगी। अनुमान है, कि इस पहल से अगले दशक में 250 अरब डॉलर तक का एआई इकोसिस्टम तैयार हो सकता है।
अडानी ग्रुप पहले से ही डेटा सेंटर बिजनेस में मौजूद है, और अब वह अपनी क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी का जोर ऐसे डेटा सेंटर बनाने पर है, जो रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित हों, जिससे बढ़ती बिजली मांग के साथ पर्यावरणीय दबाव को भी कम किया जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है, कि एआई आधारित सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इकोनॉमी के विस्तार के कारण भारत में डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में तेज वृद्धि दर्ज करेगा। अडानी ग्रुप का यह निवेश इसी तेजी से बढ़ते अवसर को कैश करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
घोषणा के बाद शेयर बाजार में निवेशकों ने इस कदम को कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ रणनीति के रूप में देखा। डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य का मजबूत बिजनेस माना जा रहा है, जहां स्थिर कैश फ्लो और लंबी अवधि की मांग की संभावना बनी रहती है। विश्लेषकों के मुताबिक अगर कंपनी अपनी योजना के अनुसार निवेश और विस्तार को सफलतापूर्वक अमल में लाती है, तो आने वाले वर्षों में यह कारोबार अडानी ग्रुप के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन साबित हो सकता है।
अडानी ग्रुप की योजना केवल बड़े डेटा सेंटर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक अहम हिस्सा भारत के एआई स्टार्टअप, रिसर्च संस्थानों और डीप-टेक कंपनियों को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत डेटा सेंटर क्षमता का एक बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों और शोध संस्थानों के लिए रिजर्व रखा जाएगा, ताकि देश में एआई इनोवेशन को गति मिल सके और विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम हो।
ग्रुप अपने मौजूदा पार्टनर्स के साथ सहयोग को भी आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में फ्लिपकार्ट के साथ साझेदारी को विस्तार देते हुए एक नया हाई-परफॉर्मेंस एआई डेटा सेंटर विकसित किया जाएगा, जो ई-कॉमर्स, बड़े पैमाने की एआई प्रोसेसिंग और डिजिटल कॉमर्स वर्कलोड को सपोर्ट करेगा। इससे भारत में डिजिटल कारोबार और एआई आधारित सेवाओं के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा।
एआई डेटा सेंटर की भारी बिजली जरूरत को देखते हुए अडानी ग्रुप अपनी ग्रीन एनर्जी क्षमता का भी तेज विस्तार कर रहा है। गुजरात के खावड़ा में चल रही विशाल रिन्यूएबल परियोजना के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में भी बड़े निवेश की योजना है, ताकि डेटा सेंटर को स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।
ग्रुप भारत को ग्लोबल डेटा नेटवर्क से जोड़ने के लिए केबल लैंडिंग स्टेशनों और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विस्तार करेगा, जिससे अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के साथ कम लेटेंसी कनेक्टिविटी संभव होगी। साथ ही ट्रांसफॉर्मर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रिड उपकरणों जैसे अहम कंपोनेंट्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर सप्लाई चेन जोखिम कम करने की भी योजना है।
अडानी ग्रुप देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग से जुड़े विशेष कोर्स और रिसर्च लैब स्थापित करने की भी योजना पर काम कर रहा है। इसका मकसद भविष्य की एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने के लिए कुशल पेशेवरों की नई पीढ़ी तैयार करना है।