सोशल मीडिया की दुनिया

2015
25 Sep 2021
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सोशल मीडिया भी एक अलग दुनिया है, जिसमें हम एक दूसरे से कोसो दूर होते हुए भी पास महसूस करते हैं। और इसी कारण साक्षात सामने बैठे  हुए भी लोगों से मीलों दूर हो जाते हैं। कोई भी चीज बेहद उपयोग करने पर, उसका परिणाम सदैव नकारात्मक ही मिलता है। मनुष्य में संवेदनाएं केवल सोशल मीडिया पर दिखती हैं। किसी को दान देना, किसी की सहायता करना यह सब सोशल मीडिया पर दिखावे के रूप में लोग करने लगे हैं जिससे उनकी छवि हमेशा सफ़ेद रहे। असल जिंदगी में कम ही ऐसा होता है। मनुष्य के द्वारा बनाये इस दुनिया के जाल में मनुष्य ही फँसता जा रहा है।

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दुनिया बहुत बड़ी है, जिसमें रहने वालों की अलग-अलग दुनिया बसी हुई है। इस दुनिया में एक और दुनिया है सोशल मीडिया की दुनिया। जिसमें सोशल केवल नाम भर है ,लोग एक दूसरे से लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन के जरिये जुड़ते हैं। इस दुनिया के नियम क़ानून भी अलग होते हैं, लोग इसमें दार्शनिक जीवन जीते हैं। सामान्य दुनिया में किसी से दोस्ती करने के लिए लम्बे समय तक उनके साथ समय बिताते हैं, उन्हें परखते हैं, लड़ाई करने के बाद एक-दूसरे को मनाने  के लिए भी बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है फिर कहीं जा कर रिश्ता मजबूत बनता है। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में लोग पल में दोस्त बन जाते हैं। अपने बारे में  बिना एक दूसरे को जाने- देखे सारी बातें बिना एक दूसरे को साझा कर लेते हैं। लोगों के बीच एक मोबाइल होता है, जो उन्हें जोड़ता है। कोई कभी भी किसी से भी बात कर लेता है। भले सामान्य दुनिया में वह सामने बैठे इंसान से बात-चीत करने में झिझकते हैं। इस दुनिया में झगड़े लड़ाई-होने पर लोग एक दूसरे को ब्लॉक या अनफॉलो कर देते हैं। बड़ा अजीब सा रिश्ता होता है, इंसान अगर घंटो ऑनलाइन नहीं आता तो लोग उसे पूछने लगते हैं या उसे व्यस्त समझने लगते हैं। 

इस सोशल मीडिया वाली ज़िन्दगी में मोबाइल का बड़ा योगदान है। लगभग हर हाथों में यह यंत्र देखने को मिल ही जाता है। घर से निकलते वक्त गंतव्व तक पहुंचने के बीच हम अपने मोबाइल की स्क्रीन में झांकते रहते हैं। जैसे ही थोड़ा सा समय हमें मिल जाता है, तुरंत सोशल मीडया पर अपने अंगूठों को घसीटने लगते हैं। इस दुनिया में खास बात यह है कि इसमें आम जन बड़े से बड़े लोगों के ऊपर टिप्पणी कर सकते हैं। साधारण ज़िन्दगी में हम व्यक्ति के बारे में मन में कुछ सोचते हैं, मुँह पर कुछ बोलते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर आप अपने व्यक्तित्व को छुपा कर अपने मन के विचारों को लोगों तक पंहुचा सकते हैं।साधारण जीवन में हम कलाकारों या नेताओं को देखने के लिए तरसते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर न कोई बड़ा है, न कोई छोटा सब एक समान हैं। एक आम इंसान ट्विटर पर बड़े-बड़े महारथी के ऊपर सकारात्मक या नकारात्मक टिप्पणी कर सकता है। 

कितनी दिलचस्प बात है, सोशल मीडिया पर आप अपने जीवन को चित्र के ज़रिये व्याख्या कर अपने बारे में बताते हैं। सोशल मीडिया पर हम जो दिखाते हैं,  दुनिया हमें उसी नजर से देखेगी। यही वजह है की हम पास रहकर भी दूर हैं। सोशल मीडिया पर हम सब अपना सबसे अच्छा संस्करण दिखाना चाहते हैं।  जहां जाते हैं, जो खाते हैं, जो पहनते हैं, हर चीज़ सोशल मीडिया के ज़रिये लोगों को बताते हैं। पहले खाने से पहले भोग लगाने कि प्रथा थी और अब सोशल मीडिया पर फोटो लेने के नए रिवाज़ के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। 

इस दुनिया में आप नाम के साथ भी रह सकते हैं और गुमनाम भी रह सकते हैं। एंजेल प्रिया न जाने कितने लड़कों के दिल में बस्ती होगी और कितनों का दिल भी टूट चूका होगा। घंटो- घंटो बातें करने के बाद उन्हें पता चलता होगा कि एंजेल प्रिया कोई लड़की नहीं बल्कि लड़का है। इस तरह कितने लोगों की असलियत भी सामने आ जाती है और हकीकत में रिश्ते टूट जाते हैं। 

सोशल मीडिया बड़ी गजब की दुनिया है। वास्तिवकता से कोसों दूर हकीकत से कोई वास्ता न रखने वाली दुनिया जिसमें हर कोई खुद का अच्छा संस्करण दिखाने की कोशिश में लगा हुआ होता है। हम सड़क पर होते हादसों पर उतना दर्द व्यक्त नहीं करते या कहें मुँह फेर लेते हैं, जितना सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीर देख कर टिप्पणी के जरिये दुःख व्यक्त करते हैं। इस दुनिया में इंसान को उसके रंग, कितनी गुणवत्ता वाली चित्र और व्याख्या उसने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है, उसी आधार पर उसके व्यक्तित्व का पैमाना करते हैं। सोशल मीडिया की इस रीति को हमने महत्वता देनी शुरू कर दी है, इसका सकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है।

हर चीज़ के दो पहलू होते हैं, उसी प्रकार सोशल मीडिया के भी दो पहलू हैं - सकारत्मक और नकारात्मक। हर चीज़ की एक सीमा होती है, हद से ज्यादा कोई भी चीज इस्तेमाल करने पर हम उसकी हद को पार कर जाते हैं। सोशल मीडिया पर हम इतने निर्भर हो गए है कि असल ज़िन्दगी को भूलते जा रहे हैं। जो सोशल मीडिया से दूर है उन्हें बहुत कुछ नहीं पता या कहे उन्हें बहुत कुछ पता है। हद से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले सूरज को उगते, सूरज को ढलते, चिड़ियों की चहचाहट दिनों -दिनों तक अपने घर में लोगों से सुकून के पल नहीं बिता पाते हैं। इसके साथ ही इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि हम घर बैठे दुनिया के किसी कोने से जुड़ सकते हैं। घर बैठे ही पैसे कमा सकते हैं, कुशलता के जरिये अपनी नई पहचान बना सकते हैं। किसी भी चीज़  का उपयोग तय सीमा तक किया जाये तो हम उसकी सार्थकता को बढ़ा रहे होते हैं, अन्यथा उसका दुष्परिणाम हो सकता है। 

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