विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस

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26 Apr 2022
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वैसे तो हर दिन कोई न कोई त्यौहार, उत्सव या कोई विशेष दिन लेकर आता है। आज है 26 अप्रैल, मुझे विश्वास है कि आज भी बहुत सारे विशेष अवसरों को स्मरण करने का दिन है, किन्तु इस लेख में आज आपसे बातें होंगी- विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस के विषय में। मानव क्षमता और बुद्धि द्वारा निर्मित हर रचना बौद्धिक सम्पदा के अंतर्गत आती है। जिनमें से कुछ को छूकर अनुभव कर सकतें हैं, कुछ को देखकर और कुछ को केवल जानकारी में होना अथवा अनुभव करके जैसे- किसी के द्वारा बनाई गई तस्वीर, लिखी हुई कविता, कोई फिल्म, कोई कहानी या कोई वस्त्र का पैटर्न या फिर किसी के द्वारा बनाई गई दवाई।  

आपके द्वारा किसी कृति की रचना या आपकी बौद्धिक तेजस्विता को भी आजकल कानूनी सहायता की आवश्यकता पड़े तो हिचकिचाईयेगा नहीं, क्योंकि विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस यही कहता है कि अपने अधिकारों को पहचानिए।

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 वैसे तो हर दिन कोई न  कोई त्यौहार, उत्सव या कोई विशेष दिन लेकर आता है। आज है 26 अप्रैल, मुझे विश्वास है कि आज भी बहुत सारे विशेष अवसरों को स्मरण करने का दिन है, किन्तु इस लेख में आज आपसे बातें होंगी- विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस के विषय में। 

पहले समझिये क्या है बौद्धिक सम्पदा-

मानव क्षमता और बुद्धि द्वारा निर्मित हर रचना बौद्धिक सम्पदा के अंतर्गत आती है। जिनमें से कुछ को छूकर अनुभव कर सकतें हैं, कुछ को देखकर और कुछ को केवल जानकारी में होना अथवा अनुभव करके जैसे- किसी के द्वारा बनाई गई तस्वीर, लिखी हुई कविता, लेख, कोई फिल्म, कोई कहानी या कोई वस्त्र का पैटर्न या फिर किसी के दवारा बनाई गई दवाई।  अब प्रश्न यह उठता है कि भूमि, मकान आदि वस्तुओं के लिए तो हर देश में कानून है तो फिर यदि कोई कृति या रचना या लेखनी या फिर आपकी बनाई हुई कोई पाककला की विधि अगर पूर्णतः वास्तविक रूप से आपकी ही है तो इसे आप दूसरों द्वारा बिना आपकी जानकारी के प्रयोग करे  या कोई  आपकी बौद्धिक सम्पदा को खुद के होने का हक जताए तो ऐसे में आप क्या करेंगें ?

विशेष तौर पर यदि आपको  यह भी नहीं पता था कि आप इस बात पर कानून का सहारा  भी ले सकतें है। इसलिए समझिये कि बौद्धिक सम्पदा  क्षेत्र का दायरा बहुत विस्तृत है, इसके अंतर्गत बहुत सारी यानी लगभग वह सभी बातें और वस्तुएं आती है जो आपने खुद रची हों यह आपके परिवार की कोई  धरोहर भी हो सकती है, ऐसे कई केस सुनने में आते हैं जहाँ किसी गहने, पुस्तक, वस्त्र, पाककला विधि, कविता इनसभी चीज़ों पर कई लोगों ने अपना अधिकार अपने वास्तविक प्रमाणों से निश्चित किया है।

अब आते हैं आपकी दूसरी दुविधा पर, यानी-  अधिकार Intellectual property right

बौद्धिक संपदा अधिकार के अंतर्गत सभी मानसिक रचनाऐं रचनात्मक, कलात्मक और वाणिज्यिक के संदर्भ में विशेष अधिकारों के समूह हैं।

प्रथम अधिकार copyright कॉपीराइट क़ानूनों से आवृत हैं, जो सभी रचनात्मक कार्यों, जैसे पुस्तकें books फ़िल्में movies, संगीत music , पेंटिंग painting , छाया-चित्र photography और सॉफ्टवेयर softwares  को संरक्षण प्रदान करता है और कॉपीराइट अधिकार-धारक को एक निश्चित अवधि के लिए पुनरुत्पादन reproduction पर या उस वास्तु से जुड़े किसी भी तरह के बदलाव पर नियंत्रण का विशेष अधिकार देता है।

आपने कई बार copyright claim शब्द कहीं देखा, सुना या पढ़ा होगा।

यही वह शब्द है जो दो कार्य करता है-

1. एक आपकी रचनात्मकता या यूँ कहे तो आपकी बौद्धिक सम्पदा को चोरी होने से बचाता है 

2, दूसरा किसी भी अन्य व्यक्ति या संस्था को आपकी इच्छा के बिना आपकी किसी भी बौद्धिक सम्पदा के आधार का प्रयोग  करने देता।

अब आते है बौद्धिक सम्पदा की दूसरी श्रेणी पर-

दूसरी श्रेणी के अंतर्गत सामूहिक रूप से "औद्योगिक संपत्ति" industrial  property मानी जाती  है, क्योंकि इनका उपयोग विशेष रूप से औद्योगिक industrial  या वाणिज्यिक commercial प्रयोजनों के लिए किया जाता है। पेटेंट शब्द भी आपको याद होगा, पेटेंट का अधिकार भी बौद्धिक सम्पदा के अधिकार के अंतर्गत ही आता है।  पेटेंट नए, उपयोगी अविष्कारों या किसी संस्था का चिन्ह आदि  के लिए दिया जा सकता है ताकि उस पर वास्तविक निर्माता, बनाने वाली कम्पनी या वास्तविक स्वामी का ही अधिकार रहे।  पेटेंट धारक स्वामी की भी दूसरे बिना उसकी अनुमति के, आविष्कारक द्वारा बिना लाइसेंस दिए एक निश्चित अवधि के लिए आविष्कार के अभ्यास से रोकने का अधिकार प्रदान करता है।

ट्रेडमार्क भी बौद्धिक सम्पदा को सुदृढ़ करता है, जैसे दूध के पैकेटों पर उनकी वास्तविक पहचान के लिये, बने होते हैं। 

एक बात समझने का प्रयास करिये क़ि बौद्धिक संपदा शब्द,  विशिष्ट क़ानूनी अधिकार को दर्शाता  है, ना कि स्वयं किसी भी बौद्धिक कार्य को। 

विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस-

विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस  World Intellectual Property Day विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन WIPO के  स्थापना दिवस पर प्रतिवर्ष यह दिन  26 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य बौद्धिक सम्पदा intellectual property के अधिकारों यानी- पेटेंट patent , ट्रेडमार्क trademark , इंडस्ट्रियल डिजाईन industrial logo, कॉपीराइट copyright  आदि के प्रति लोगों को जागरुक करना है।

वह 26  अप्रैल का ही दिन था जब 1970 में WIPO का कन्वेशन convention लागू हुआ था, वैसे वैश्विक बौद्धिक समदा वर्ष 2021 का विषय था- intellectual property and small businesses- taking big ideas to market यानी वैश्विक सम्पदा और छोटे उद्योग , बड़े विचारों को बाज़ार तक पहुँचाना।

यह बहुत अद्भुद अधिकार है जो आपको यह क्षमता देता है आपकी वह सम्पदा जिसमे, इतने प्रयास लगे हैं आप , उन्हें अपना कह सके और किसी भी व्यक्ति को आपसे इस बात के लिए अनुमति ,लेनी होगी यदि वह आपकी सम्पदा का प्रयोग करना चाहतें हैं, जैसे आजकल यदि कोई अपने यूट्यूब youtube channel पर किसी के और के द्वारा बनाया गया काम या वीडियो दिखाना चाहता है तो उस व्यक्ति का नाम क्रेडिट्स credits  में देते हैं ताकि वह काम वास्तव में किसका है यह दिखाई दे और कोई कानूनी बौद्धिक सम्पदा प्रयोग की अड़चन भी ना आए।  पहले के समय में जब यह अधिकार नहीं थे तो ऐसे बहुत से व्यक्तियों को इसका नुक्सान भी सहना पड़ा होगा जैसे संगीत बनाया किसी और ने और प्रयोग हुआ किसी और के नाम पर या फिर कोई रचना किसी किसी अन्य व्यक्ति की रही हो और नाम किसी और का हुआ हो।  एक नुकसान अब भी इस अधिकार की जानकारी के अभाव का भी हो सकता है, क्यूंकि कला कैसी भी हो पर कोई आपके कार्य पर अपना अधिकार जताए, ऐसा विचार भला कोई सोचेगा ही क्यों, इसलिए आवश्यक है कि आपका काम बड़ा हो या छोटा पर उसे क़ानूनी रूप से पंजीकृत अवश्य कराऐं ताकि आपके देश में आपके मूल प्रमाणों की जानकारी हो और कोई अनुचित लाभ ना उठाए।  वैसे तो बौद्विक सम्पदा का सबसे बड़ा संघ संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का chamber of  commerce चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स  है  किन्तु भारत में भी बौद्धिक सम्पदा से जुड़े कुछ कानून है जैसे- 

बौद्धिक संपदा अधिकार Indian property rights  के संरक्षण हेतु भारत सरकार की पहलें

1. भारतीय पेटेंट अधिनियम indian patent act ,1970

2. राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार Indian property right policy  नीति 2016

3. भारत विश्व बौद्धिक संपदा संगठन World Indian Property Organisation का भी सदस्य है, जो IPR आईपीआर से जुडी अंतर्राष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों को प्रशासित करता है।

फिल्मों में भी हुए है कई किस्से- 

मैं आपसे किसी पुरानी फिल्म की बात नहीं करुँगी बल्कि हाल ही में रिलीज़ हुई दक्षिण भारतीय फिल्म श्याम सिंह रॉय का उल्लेख करुँगी, जिसमें पुनर्जन्म की कहानी अवश्य है पर कहानी यह है मुख्य नायक जो पिछले जन्म में क्रांतिकारी लेखक था वह अगले जन्म में फिल्मकार होकर भी अपनी ही कहानियाँ बनाता है, इसपर मूल लेखक की पारिवारिक पुस्तक कम्पनी कॉपीराइट का इलज़ाम लगाती है, किन्तु फिर भी उस कम्पनी के सबसे वरिष्ठ सदस्य और उसके पूर्व जन्म के छोटे भाई के दिए हुए प्रमाणों से यह कोर्ट में यह साबित हो जाता है वह युवक ही उन पुस्तकों का लेखक था और यह सब उसी की कृतियाँ हैं तो कॉपीराइट का मुकदमा ही नहीं बनता।  खैर यह तो फ़िल्मी बातें हैं पर आप वास्तविक जीवन में रहतें है तो प्रमाण और कार्य भी वास्तविक ही रहेंगें, क्योंकि कल्पना और वास्तविकता में बहुत बड़ा अंतर होता है।   

करिये अपने अधिकारों की पहचान-

आपके द्वारा किसी कृति की रचना या आपकी बौद्धिक तेजस्विता को भी आजकल कानूनी सहायता की आवश्यकता पड़े तो हिचकिचाईयेगा नहीं, क्योंकि विश्व बौद्धिक सम्पदा दिवस यही कहता है कि अपने अधिकारों को पहचानिए।

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