सफ़र क्या है?

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08 Nov 2021
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भविष्य का कोई निश्चित भाग्य नहीं होता, हम केवल उसकी कल्पना कर सकते हैं। परन्तु वर्तमान में किए गए कार्य ही हमारे प्रयासों, एहसासों और हमारे अनुभवों को एकत्र करके भविष्य में एक पुस्तक का निर्माण करते हैं। यही एक सफ़र की परिभाषा और कहानी होती है, जो सिर्फ और सिर्फ एक भाव को व्यक्त करता है। 

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थकान किसी को भी एक मोड़ पर लाकर ठहरा ही देती है। वहां पर इच्छाओं के जाल का एक-एक तार धीरे-धीरे टूटने लगता है। उस समय में यह प्रतीत होता है कि अब बस, अब आगे और अधिक चल पाना शायद संभव नहीं हो पाएगा। यह ठहराव किसी निश्चित मोड़ का मोहताज नहीं होता है। यह सफ़र के किसी भी चौराहे पर अपनी स्थिरता का आलम खड़ा कर देता है। हम छोटे-छोटे पलों से एक पन्ना सजाते हैं और ऐसे ही कई पन्नों को एक साथ लाकर तैयार हुई किताब से हमारी एक यात्रा की कहानी बनती है, जिसे हम अपने सफ़र का नाम देते हैं। जिसे हम औरों के साथ साझा करते हैं। इस डगर में हम असीमित अनुभवों को सीखते हैं, जिसमें से कई अनुभवों से हम स्वयं ही अंजान रह जाते हैं। ये हमारे स्वभाव और समझ को परिवर्तित कर देते हैं, परन्तु हमें स्वयं का अनुभव नहीं होने देते हैं। हमारी कहानी सदैव यादगार होनी चाहिए। अनेक परिस्थितियों से गुजरना ही असल जीवन है, परन्तु उसे खुबसूरत सफ़र का नाम देना और अन्य नये हालातों के लिए बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करना अवश्य ही हम पर निर्भर करता है। तो आईए सफ़र को उसके मुकाम तक पहुंचाएं। 

सफ़र….

यह शब्द स्वयं में अनगिनत कहानियों की दास्तां को समेटे चलता है। अधूरी, मुकम्मल, हसीन, गमगीन, ना जाने कितनी परिस्थितियों से गुजर कर यह ख़ुद एक मुकम्मल सफ़र कहलाता है। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि हर किसी का अपना एक सफ़र अवश्य होता है। कई उतार-चढ़ाव का साक्षी बनकर कोई एक सफ़र की कहानी लिखता है। कुछ सफ़र यादगार हो जाते हैं, कुछ गुमनाम हो जाते हैं। जिस प्रकार विभिन्न प्रकार की फिल्में कई कहानियों को दर्शाती हैं और उनमें से कुछ कहानियां दिल और दिमाग पर काबिज़ हो जाती हैं तथा कुछ दर्शकों को पसंद नहीं आती, ठीक वैसे ही वास्तविक जीवन में घटित हालातों का भी प्रभाव रहता है। 

हमने संभवतः एक भाव को इस प्रभाव में अवश्य ही सुना होगा, कि इनका सफ़र बहुत कठिन रहा है, बहुत कठिन रास्ते से गुजरकर इन्होंने इस ऊंचाई को प्राप्त किया है। साथ ही इनकी यात्रा बड़ी प्रेरणादायक है। 

इन भावों से सबसे पहले क्या प्रश्न मन के समन्दर में गोते खाता है..?

क्या यह प्रश्न हमें एक निश्चित विचारधारा की ओर ले जाने का प्रयत्न कर रहा है..?

क्या केवल उन्हीं कहानियों के रास्ते याद रह जाते हैं, जिन्होंने एक गंतव्य को प्राप्त किया हो। या फ़िर हमने सफ़र की परिभाषा को एक सीमा में बांध दिया है। बेशक ये कहानियां हमें प्रेरणा देते हैं, परन्तु यह किसी की साधना को परिभाषित नहीं करते हैं। 

भविष्य का कोई निश्चित भाग्य नहीं होता है, हम केवल उसकी कल्पना कर सकते हैं। परन्तु वर्तमान में किए गए कार्य ही हमारे प्रयासों, एहसासों और हमारे अनुभवों को एकत्र करके भविष्य में एक पुस्तक का निर्माण करते हैं। यही एक सफ़र की परिभाषा और कहानी होती है, जो सिर्फ और सिर्फ एक भाव को व्यक्त करता है। 

" यही ज़िंदगी है"

आज एक सफ़र पर निकला जाए,

सफ़र ऐसा जो आस्था की गहराइयों में उतरकर हताश उम्मीद की सींपी में सुकून का मोती ढूँढ लाए।

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