कमर्शियल रियल एस्टेट क्या होता है

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28 Dec 2021
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इन्वेस्टमेंट के अधार पर देखा जाए तो रियल एस्टेट भारतीयों के लिए हमेशा से ही एक पसंदीदा ऑप्शन रहा है। कमर्शियल प्रॉपर्टीस के कुछ इम्प्लीकेशन यानि निहितार्थ हैं कि इसे कैसे वित्तपोषित financed किया जाता है, इस पर कैसे टैक्स लगाया जाता है और इस पर कानून कैसे लागू होते हैं।

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आज हम इस टॉपिक में जिस विषय पर बात करेंगे वो है कमर्शियल रियल एस्टेट commercial real estate। क्या आप जानते है? ये क्या होता है और कितने प्रकार की होता है।  कमर्शियल प्रॉपर्टीज वह  प्रॉपर्टीज होती हैं, जिसका उपयोग वर्तमान और भविष्य में हम वाणिज्यिक  गतिविधियों commercial activities के लिए कर सकते हैं। कमर्शियल प्रॉपर्टीस आमतौर पर उन बिल्डिंग्स के लिए होती है जो बिज़नेस करते हैं, लेकिन प्रॉफिट कमाने के लिए उपयोग की जाने वाली जमीन के साथ-साथ बड़ी रेजिडेंशियल रेंटल प्रॉपर्टीस Residential Rental Properties भी बना सकते हैं। इन्वेस्टमेंट के अधार पर देखा जाए तो रियल एस्टेट भारतीयों के लिए हमेशा से ही एक पसंदीदा ऑप्शन रहा है। कमर्शियल प्रॉपर्टीस के कुछ इम्प्लीकेशन यानि निहितार्थ हैं कि इसे कैसे वित्तपोषित financed किया जाता है, इस पर कैसे टैक्स लगाया जाता है और इस पर कानून कैसे लागू होते हैं।

कमर्शियल प्रॉपर्टीस में मॉल, किराना स्टोर, ऑफिस, औद्योगिक सम्पदा industrial estates, निर्माण की दुकानें manufacturing और बहुत कुछ शामिल है। कमर्शियल प्रॉपर्टीस का प्रदर्शन- जिसमें सेल प्राइस, नई बिल्डिंग्स रेट्स और अधिभोग दर occupancy rates शामिल हैं इसका उपयोग अक्सर किसी दिए गए क्षेत्र या अर्थव्यवस्था में व्यावसायिक गतिविधियों को मापने में किया जाता है।

कमर्शियल प्रॉपर्टीस और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीस में अंतर-

कमर्शियल प्रॉपर्टीस

कमर्शियल प्रॉपर्टीस को पारंपरिक रूप से एक अच्छे निवेश के रूप में देखा गया है। बिल्डिंग्स के लिए प्रारंभिक निवेश लागत  initial investment cost और किरायेदारों के लिए अनुकूलन से जुड़ी लागत रेजिडेंशियल रियल एस्टेट से अधिक है। ‘लेकिन अगर हम साल 2020 की बात करें तो सबसे ज्यादा नुकसान भी कमर्शियल प्रॉपर्टीस के इन्वेस्टर्स को हुआ है जैसा की हमने ऊपर बताया कमर्शियल रियल एस्टेट उनके हाई रिटर्न कॉस्ट high return cost वाले सूचकांक के कारण उच्च रिटर्न दे रही थी, लेकिन महामारी के बाद वाणिज्यिक रियल एस्टेट के बाद मॉल और ऑफिस स्पेस लॉकडाउन और तेज़ी से फैलते वर्क फ्रॉम होम ट्रैंड के कारण प्रभावित हुए हैं।

वाणिज्यिक रियल एस्टेट को ठीक होने में अभी भी बहुत समय लग सकता है क्योंकि इस वक्त भारत में लगभग 6 मिलियन वर्ग फुट कार्यालय स्थान खाली पड़ा हुआ है। वर्क फ्रॉम होम के कारण कंपनियां वाणिज्यिक रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करने से खुद को रोक सकती हैं और हो सकता है कि अब वह फ्लेक्सी-वर्किंग, को-वर्किंग स्पेस Flexi-working, co-working space का विकल्प चुन सकती हैं, जो कि कमर्शियल प्रॉपर्टीस को आगे भी काफ़ी प्रभावित कर सकता हैं।

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीस

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीस को इन्वेस्टमेंट के लिए हमेशा ही अच्छा माना जाता है और अगर हम Non Resident Indian (NRI) एनआरआई, की बात करें तो ये अपने गृह देश में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीस खरीदने में काफ़ी इन्वेस्टमेंट करते हैं। आजकल लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा पैसा रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में लगा रहें हैं, जो एक प्रकार से सही भी है क्योंकि इसकी लंबी अवधि है, इसमें कोई नुकसान नहीं है और यदि प्रॉपर्टी को बैंक लोन bank loan के जरिए से फाइनेंस किया जाता है, तो इसमें आयकर का लाभ income tax benefits भी मिलता है।

अंत में यदि आप भी रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट करने का सोच रहें हैं, तो कमर्शियल प्रॉपर्टीस या रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीस में से अपने लिए एक अच्छा विकल्प चुन सकते है जिससे आपको लाभ भी होगा और आपका पैसा सुरक्षित भी रहेगा।

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