भाषण के आधार पर जेंडर, इमोशंस, उम्र, तथा बोली की संज्ञानात्मक प्रणाली

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31 Jul 2021
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मनुष्य का मस्तिष्क चलता फिरता संगणक (कंप्यूटर) है, वह दिन रात उन्हीं मशीनों में घिरा रहता है, जो उसने स्वयं ही ईज़ाद की हैं। उन मशीनों से तमाम सुविधाएं भी मिलती हैं, तो परेशानियां भी मिलना सम्भव है। परन्तु मनुष्य की सबसे बड़ी खोज, जो पूरी दुनिया को एक नई दुनिया बनाने का कार्य कर रही है या लगभग कर ही चुकी है, वह है आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस।

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आज का दौर कितनी संभावनाओं से भरा हुआ है। हम रोज़ ही कुछ न कुछ सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक बदलाव के साथ-साथ नई-नई तकनीकियों में परिवर्तन देखते हैं। आज जब हम इस विषय पर चर्चा कर रहें हैं, उसी समय न जाने कितनी तकनीकियाँ पनप रहीं होगीं। 

मनुष्य का मस्तिष्क चलता फिरता संगणक (कंप्यूटर) है, वह दिन रात उन्हीं मशीनों में घिरा रहता है, जो उसने स्वयं ही ईज़ाद की हैं। उन मशीनों से तमाम सुविधाएं भी मिलती हैं, तो परेशानियां भी मिलना सम्भव है। परन्तु मनुष्य की सबसे बड़ी खोज, जो पूरी दुनिया को एक नई दुनिया बनाने का कार्य कर रही है या लगभग कर ही चुकी है, वह है आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस। इसके द्वारा मानव जाति को एक नई पहचान नई उड़ान मिली है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एन्ड कम्युनिकेशन तकनीकी एक व्यापक विषय है। जिस तरह से इसका जाल पूरे विश्व में फैल गया है, उससे कोई भी व्यक्ति अछूता नहीं है। आज के समय में लगभग प्रत्येक व्यक्ति के पास एक मोबाइल फोन तो है ही। बहुत कम लोग ऐसे होंगें, जो बिना मोबाइल के काम चला रहे होंगे। परन्तु यह विषय मोबाइल के उदाहरण से बहुत आगे निकल गया है आईये जानते हैं कैसे ? 

ग्रामोंफोन के आविष्कार से जब संप्रेषण तकनीकी का जन्म हुआ तभी ये अनुमान लगाया जा सकता था कि अब इस तकनीकी का बस विकास होना बाक़ी था और धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते ये तकनीकी पूरा अकार ले चुकी है। कौन जानता था कि, आज के दौर में हमारी पहचान हमारी भावनाओं और हमारी उम्र के साथ-साथ हमारे जेंडर का अनुमान इतनी सहजता से लगाया सकता है, इतनी सहजता से संज्ञान में ले सकता है। इस चौकाने वाली तकनीकी के कई उदाहरण हैं जैसे की मोबाइल ऐप, एलेक्सा , डिजिटल घड़ी, यहाँ तक कि हमारी कार हमारा घर और घर में लगी सप्रेशन तकनीकियां कितनी कारगर और आवश्यक हैं। कुछ बातों पर ध्यान देते हुए इसको और विस्तार से जानेंगे। 

इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन में जेंडर का आधार- 

आर्टिफिशल इंटेलिजेंट आज के समय में यह पता लगाने में सक्षम है कि जो भी व्यक्ति इस यांत्रिकी को इस्तेमाल कर रहा है वह कौन है, कहने का मतलब उसका जेंडर क्या है? वह स्त्री है या पुरुष है?  यहाँ पर एक बात और जोड़ना चाहेंगे कि वैज्ञानिक प्रमाण यह कहता है कि महिलाओं कि आवाज़ की आवृति (फ्रीक्वेंसी) पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। जिसके चलते ऐसी डिवाइस महिलाओं की आवाज़ की पहचान कर लेती हैं। यहाँ तक कि इन उपकरणों में भी महिलाओं की ही आवाज़ सम्लित होती है जो की सहजता से समझी जा सकती है। 

उपकरण के द्वारा आँकी जाने वाली भावनाओं पर एक नज़र- 

धीरे-धीरे जिस तरह सम्प्रेषण की गति बढ़ी है उसको देखते हुए कभी किसी ने नहीं सोचा होगा की एक निर्जीव बेजान डिवाइस आपकी भावनाओं को समझ उसके अनुरूप कार्य करेगी। अब मान लीजिये आपको गुस्सा आ रही है, तो उपकरण आपको बता सकता है कि आपने क्रोध में प्रश्न पूछा है। यदि आप मुसीबत में हैं और आप उपकरण से कहते हैं कि मेरी मदद करो तो ये डिवाइस आपकी मदद के लिए सीधे उस व्यक्ति को सूचित कर सकती है, जिससे आपने मदद की गुहार की है। कहने का मतलब है आप की भावनाओं को पूरी तरह समझ कर उसका निवारण करने का प्रयास कर सकती है, या करती है। 

उम्र को परिभाषित करती ये तकनीकी- 

कौन किस उम्र का है, उसको कैसा और किस तरह का ज्ञान देना है, आजकल के उपकरण इसको बहुत आसानी से समझ लेते हैं। बच्चों के लिए ये बहुत उपयोगी टूल है ताकि बच्चे इंटरनेट से जुड़कर किसी गलत ज्ञान को न अपना लें। 

बोली या भाषा का संज्ञान- 

बोली या भाषा के बिना हम सम्प्रेषण या कम्युनिकेशन की इतनी विस्तृत कल्पना नहीं कर सकते हैं। बोली या भाषा व्यक्ति की पहचान, उसके जीवन की धार तथा उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का आधार है। अगर हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस) की बात करें, तो इसका सम्पूर्ण आधार भाषा के साथ-साथ बोली पर निर्भर है। आपके क्षेत्र में कोई भी भाषा या बोली बोली जाती हो, इन उपकरणों में दुनिया भर की सारी भाषाएँ सम्मिलित हैं। आपकी भावनाएं भाषा के माध्यम से समझ कर आपको बेहतर सुविधा प्रदान करने का युग है। 

भारत के सन्दर्भ में- 

जिस तरह से भारत ने देश दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है, वह बेहद प्रशंसनीय है साथ ही साथ इलेक्ट्रॉनिक एवं कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भी देश गति कर रहा है। देश चाँद और मंगल पर पहुंच गया है। सम्प्रेषण की उन्नत और स्वदेशी तकनीकी के चलते देश अग्रसर श्रेणी में है तथा अन्य देशों के साथ हाथ से हाथ मिलाकर चल रहा है। आज भारत के लोग कई डिवाइसेस से घिरे हुए हैं, जहाँ उनके जेंडर उनके, इमोशन और उनकी बोली की पहचान कर उनको मदद मिलती है। भारत विविध भाषाओं और बोलियों का देश है मगर जिस तरह से उनकी बोलियों को ध्यान रखा गया उसके चलते ये प्रणाली बहुत सहजता उत्पन्न करती है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी ने इस क्षेत्र को बहुत व्यापक बनाया है और निरंतर इस पर प्रयासरत है। 

इलेक्ट्रॉनिक एवं इनफार्मेशन के लाभ- 

यदि हम लाभ की बात करें तो इस के बहुत व्यापक लाभ हैं जिस तरह हम इन सब उपकरणों से घिरे हैं उसके चलते ये हमारे जीवन में, हमारे जीवन की दिनचर्या में योगदान देते हैं। हमारी ख़ुशी हमारी समस्याओं को समझ हमारे इमोशंस को भाँप सकते हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की नज़र में हैं, जिसके द्वारा अपराधों में कमी आयी है और लोगों का भय भी कम हुआ है। इसके द्वारा आपकी आपसी गतविधियों पर नज़र रख आपको सुविधा प्रदान की जा सकती है। 

इलेक्ट्रॉनिक एवं इनफार्मेशन की हानियां- 

आज हम स्वतंत्र होकर भी टेक्नोलॉजी के माया जाल में फस गए हैं। हर छोटी-छोटी जगह पर जिस तरह से हमारी मदद तकनीकी के माध्यम से हो जाती है उसको हानि के तौर पर देखे तो, यह हमारे मस्तिष्क को कमजोर भी कर रही है क्योंकि हमको लगता है कि जो हम चाहते हैं वो एक बटन दबाने से मिल जाए और यदि ऐसा हो जाता है तो उस कार्य से संबंधित हम अपना दिमाग क्यों लगाएंगे। इसको आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि मान लीजिये आप को मैथ्स का कोई कैलकुलेशन करना है, तो आप दिमाग की वजह कैलकुलेटर का प्रयोग करना ज्यादा पसंद करेंगे। इस तरह से हमारे विचार की गति धीमी पड़ती जाती है जो उपकरणों के इस्तेमाल का एक ऋणात्मक पहलू है। 

हमारा मानना है आप एक नज़र में इलेक्ट्रॉनिक एन्ड इनफार्मेशन को भली-भाँति समझ पाए होंगे। प्रत्येक विषय का व्यापक स्वरुप है जो निरंतर ज्ञान के भंडार से भरा रहता है और दिन प्रतिदिन भरता रहता है। E & I भी ऐसा ही विषय है।

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