Global Warming के दुष्प्रभाव

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01 Feb 2022
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हमारी उम्र चाहे जो भी हो, हमेशा हम अपने से पिछली पीढ़ी से सुनते हैं कि हमने तो यह देखा, यह अनुभव किया। जैसे कहीं न कहीं से उनके बाद वाली पीढ़ी ने कुछ न कुछ ऐसा नहीं देखा या अनुभूति नहीं की जो उनके समय में थी यह अंतर कुछ भी हो सकता है- हवा में ताज़गी का अंतर, वातावरण की हरियाली का अधिक होना या फिर किसी पुराने खूबसरत कुदरती स्थल की याद जो अब है ही नहीं। ऐसा आखिर क्यों है कि हर नई पीढ़ी को कुछ नया, आधुनिक और वैज्ञानिक तरक्की तो मिल रही है किन्तु बहुत साड़ी प्राकृतिक उपलब्धियों से दूर होते जा रहे है।

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Global Warming एक बहुत बड़ी वैश्विक समस्या के रूप में उभरकर सामने आई है। हमारी उम्र चाहे जो भी हो, हमेशा हम अपने से पिछली पीढ़ी से सुनते हैं कि हमने तो यह देखा, यह अनुभव किया। जैसे कहीं न कहीं से उनके बाद वाली पीढ़ी ने कुछ न कुछ ऐसा नहीं देखा या अनुभूति नहीं की जो उनके समय में थी यह अंतर कुछ भी हो सकता है, हवा में ताज़गी का अंतर, वातावरण की हरियाली का अधिक होना या फिर किसी पुराने खूबसरत कुदरती स्थल की याद जो अब है ही नहीं। ऐसा आखिर क्यों है कि हर नई पीढ़ी को कुछ नया, आधुनिक और वैज्ञानिक तरक्की तो मिल रही है किन्तु बहुत सारी प्राकृतिक उपलब्धियों से दूर होते जा रहे हैं। इसके कई कारण हैं, आइये इन कारणों को समझने का प्रयास करते हैं-

जनसंख्या परिवर्तन 

जनसंख्या परिवर्तन वैश्विक समस्या के रूप में उभरी है, कारण बहुत से हो सकतें है क्योंकि प्रकृति के संसाधन असीमित होते हैं, पर उनकी अपनी वृद्धि और अपना विकास चक्र होता है, बहुत सारी भौगोलिक परिस्थियों के अनुसार, मानव जीवन अक्सर अपनी बाधाओं को पार कर परिस्थितियों को स्वयं के अनुसार ढाल लेता है और वह वातावरण बना लेता है कि उसे सहजता हो सके जैसे आजकल की माँग के अनुसार तरह-तरह के फर्नीचरों के कारण लकड़ियों का कटाव। साज-सज्जा की माँग के कारण ढेर सारे फूलों का सजावट में उपयोग बड़ी संख्या में होता है।

पर्यावरण प्रदूषण  

बढ़ती इच्छाओं और बढ़ती आवश्यकताओं के कारण यह पर्यावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है। एक समय था जब सभी बैलगाड़ी पर निर्भर थे, पूरी तरह से गाँव की सड़कों और पगडंडियों पर चलने वाला साधन जिसे बैल खींचतें थे, तेज़ी चाहिए थी तो घोड़ागाड़ी भी हाज़िर थी। इसके बाद और तेज़ी की चाहत हुई तो cars, मोटर आ गईं, धीरे-धीरे और आवश्यकता महसूस होने लगी तो और विदेशी गाड़ियाँ आई ,और प्रदूषण बढ़ने लगा, आसमान में नील की जगह काला रंग दिखाई पड़ने लगा। धीरे-धीरे लोगों ने प्रदूषण से बचाव के लिए चेहरे को कपड़े से ढकना और आँखों पर sunglasses लगाना शुरू कर दिया। एक समय था जब सूर्य से मिली ऊर्जा का वर्णन किया जाता था पर अब प्रदूषण द्वारा बदलते समय के कारण इसी ऊर्जा से दूर रहने का प्रयास किया जा रहा है।

global warming 

बर्फ के पहाड़ों पर बर्फ़ का पिघलना, हवाओं में प्रदूषण के कण मौजूद होना, साँस की तकलीफ़ की बीमारी, त्वचा से जुड़ी समस्याएँ आदि। glomal warming ने कई तरह की समस्याएँ उतपन्न की हैं। प्राकृतिक वातावरण का यह बदलाव केवल गाड़ियों और पेट्रोल से नहीं हुआ बल्कि दिन पर दिन हर तरह की मशीनी आवश्यकताओं पर निर्भरता से हुआ है। ठंडी हवा की जगह air-conditioner, पंखे और प्राकृतिक हवा की जगह air-freshener, सूर्य की vitamin D को अपनाने की जगह, पराबैगनी किरणों से बचाव की हिदायत। तह सभी कुछ एक बहुत बड़े बदलाव की ओर संकेत कर रहे हैं। यहाँ तक कि ताजमहल का सफ़ेद संगमरमर भी वातावरण के कारण पीला पड़ गया।

Ozone Layer का फटना 

Ozone लेयर पृथ्वी पर एक तरह का आवरण बनए रखती है जो सूर्य की किरणों को बिना नुकसान पहुँचाएँ पृथ्वी पर आने देती है, इसकी पराबैगनी किरणों को सोखकर हम सभी को स्वास्थ्यवर्धक प्रकाश के सम्पर्क में रहने देती है। पिछले कई वर्षों में अत्यधिक बदलावों और प्रदूषण के कारण इस आवरण में छेद हो गया और यह छेद बढ़ता ही गया। विशषज्ञों के अनुसार यह global warming के दुष्प्रभाव का सबसे बड़ा संकेत था।

प्रकृति संरक्षण 

प्रकृति में ऐसी समस्या उत्पन्न होगी यह समझने वाले कई सारे कार्यकर्ताओं ने अथक परिश्रम किया है ,जैसे- 1972 में सर सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा पेड़ों को बचाने के लिए चलाया गया चिपको आंदोलन, इसके अलावा नदियों, जल संरक्षण के लिए मेधा पाटेकर द्वारा चलाया गया अभियान और Greta thunberg भी प्रकृति संरक्षण कार्यकर्ता कार्यों में आगे हैं।

त्वचा उत्पादों का बढ़ता व्यापार 

इसी बदलते माहौल के अनुसार कई सारी सौंदर्य उत्पादों ने अपने उत्पादों ने तो लोगों को इतना ज्ञान दे दिया है जितना कि शायद खुद भी आजकल की युवा पीढ़ी को न होगा जैसे कि high spf की sunscreen की बिक्री, हर cream में spf factor की मौजूदगी का दावा करना, यह कहना कि यही आपको आजकल के प्रदूषित वातावरण से बचाएगा, कहीं हद तक यह सही भी है क्योंकि यह समय की माँग के अनुसार ख़रीदा भी जा रहा है। ऐसे में इन चीज़ों की तरफ आधी जानकारी के साथ झुकाव बेहद खतरनाक है।

Lockdown का प्रभाव 

lockdown ही एक ऐसा समय था जब पूरी दुनिया ब्रेक पर थी।  वाहन नहीं चल रहे थे, लोग अपने घरों में थे, भीड़भाड़ से रहित एक शांतिपूर्ण वातावरण था। पंछियों, पशुओं ने इस वातावरण को इतना enjoy किया कि हर तरफ इस आनंद की तस्वीरें छप रही थी और दुनिया ने साफ़ आसमान देखा, शिमला के पहाड़ दूर-दूर से नज़र आने लगे। प्रकृति का यह रूप जैसे हम सभी ने कभी अनुभव नहीं किया था क्योंकि इसे भी एक ब्रेक चाहिए था। इससे ग्लेबल वार्मिंग काफी हद तक बेहतर हुई है और सुधार आया है।

समाधान 

अब लोग जागरूक हुए हैं, कई सारे लोग और संस्थान इसमें आगे आए हैं, जैसे MAMASEARTH का यह उद्देश्य कि आप जब भी उससे एक उत्पाद खरीदेंगें तो वह आपके नाम का एक पौधा लगाएगा। आप खुद भी अपने व्यक्तिगत जीवन global warming के दुष्प्रभाव को कम कर सकतें है ,जैसे आप खुद भी अपने घर, आस-पड़ोस में पेड़-पौधे लगाएं। यदि आपके पास समय हो तो eco freindly चीज़ों को जीवन में शामिल करें, गाड़ी की जगह साइकिल का प्रयोग करें इससे भी प्रदूषण रहित रहेंगे और प्रदूषण कम होगा आदि।

हम ऐसी ही eco friendly आदतों के बारे में फिर कभी ज़रूर बात करेंगे, तब तक आप global warming की प्रक्रिया को किस प्रकार से धीमा कर सकतें  है, यह सोचिये।

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