भारतीय सिनेमा में महिलाओं की नायिका- लता मंगेशकर को सलाम

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08 Mar 2022
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भारत की स्वर कोकिला लता दीदी के जीवन संघर्षो को देखें तो वो हमेशा से हमारे भारतीय समाज की सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा रहेंगी। उन्होंने सभी महिलाओं के सामने ये साबित कर दिखाया कि जीवन में कितनी भी मुसीबते हों अगर मेहनत और लगन सच्ची हो तो हर कामयाबी आपके कदम चूमती है। आज इस महिला दिवस के इस अवसर पर भारतीय सिनेमा की मशहूर गायिका स्वर कोकिला को हम सब की तरफ से सलाम।

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दुनिया को अलविदा कहने वाली हमेशा जिंदा है माँ सरस्वती के अवतार में जी हाँ सुरों की मलिका लता मंगेशकर जी भले ही आज जिंदा नही है लेकिन वो करोड़ो फैन्स के दिलों में आज भी जिंदा हैं उनकी आवाज ही उनकी मौजूदगी का एहसास है जो हमेशा हमारे कानों में गूँजती रहेगी। लता जी ने दुनियाभर के भारतीयों के साथ-साथ विदेशियों के दिलों में राज किया है। लता जी के जीवन की शुरुआत इंदौर शहर के मध्यवर्गीय परिवार में सन 28 सितंबर 1929 में हुआ था। इनके पिता का नाम दीनानाथ मंगेशकर Dinanath Mangeshkar था जो अपने ज़माने में महाराष्ट्र के एक थिएटर कंपनी (Theater Company) की शुरुआत करने वाले मशहूर कलाकार थे। लता जी अपने परिवार में 4 भाई बहनों में से सबसे बड़ी थी।अन्तर्राष्टीय महिला दिवस International Women's Day के अवसर पर यदि लता जी के जीवन के इतिहास पर नज़र डालें तो ये इन्होंने भारतीय सिनेमा में वो मुक़ाम हासिल किया है जो शायद अब इनके बाद कोई नहीं कर पायेगा। इन्हें भारत रत्न के अलावा पद्म विभूषण और कई फ़िल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया है। इतनी बड़ी कामयाबी का राज इनकी आवाज था जो बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के लिए रहस्मयी और कई लोगों के लिए चमत्कार बनकर ही रह गयी। 

छोटी सी उम्र में बड़ी मुसिबतों का सामना किया लता जी ने:-

लता जी की उम्र जब (Lata Mangeshkar age) 13 साल की थी तो उनके सर से पिता का साया और साथ हमेशा के लिए ख़त्म हो गया। उसके बाद इनके परिवार को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। लता जी के पिता जानते थे कि वो संगीत की दुनियां में जरूर एक दिन अपना नाम रौशन करेंगी क्योंकि उन्होंने बचपन से ही लता जी के अंदर संगीत के प्रति सच्ची लगन और प्रेम देख लिया था। उन्हें भरोसा था कि उनके बाद वो सबको संभाल लेगी। और वैसा ही हुआ लता जी सब भाई बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते हर हाल में उन्हें पालने की जिम्मेदारी अपने नाज़ुक कंधों पर डाल ली। उन्होंने ठान लिया था कि अब वो रोज़ काम की तलाश करेंगी। लता जी का झुकाव बचपन से ही संगीत में था लेकिन वे अभिनय भी करती थी। हालतों को देखकर जल्दी काम शुरू करने के लिए उन्होंने अपने पिता के मित्र अभिनेता श्रीपद जोशी Shripad Joshi से बात की जोशी जी ने फिल्म्स डिरेक्टर करने वाले मास्टर विनायक से बात की जिसने उन्हें कई मराठी फ़िल्मों (Marathi Films) में छोटे मोटे रोल दिए। और गाने का मौका भी मिला। 

लता जी उस जमाने में वर्ष 1942 में मंगला गौर फ़िल्म,1943 में माझे बाल ,1944 में गजभाऊ,1945 में बड़ी मां,

1946 में जीवन यात्रा जैसी कई फिल्‍मों में लता मंगेशकर ने कई छोटे-मोटे किरदार निभाए ,जीवन यात्रा (1946),माँद (1948),छत्रपति शिवाजी (1952) में अभिनेत्री के रूप में काम किया।

उन दिनों जीवन की इस जंग में मास्टर विनायक जी ने उनका बहुत साथ दिया क्योंकि वो छोटी सी उम्र में उनके बुलंद हौसलों को देख चुके थे साथ ही वे उनका संगीत के लगाव देखकर जान गए थे कि लता जी एक प्रतिभाशाली गायिका है। जिसे उन्हें इसमें और मेहनत और सुधार करना चाहिए। 

जिंदगी की जंग लड़ते-लड़ते संगीत की दुनियां में अब कदम रख चुकी थी लता दीदी

मजबूर हालतों में लता दीदी मुंबई चली गई। लता जी वहां फिल्मों में काम करती थी लेकिन उन्हें अभिनय करना बिल्कु पसन्द नहीं था। मास्टर विनायक की मदद से उन्हें वहां प्लेबैक play back singer के तौर पर काम मिलने लगा। काम ज्यादा नहीं था पर वो खुश थी कि वे जो चाहती थी उसकी शुरुआत धीरे-धीरे हो रही है। लेकिन गायिका के जीवन को अपनाते हुए ऐक्टिंग की दुनियां को 1947 में अलविदा बोल दिया और संगीत का सपना पूरा करने के लिए लता मंगेश्कर ने अपना पहला गाना गया । (Lata Mangeshkar first songs)

  “नाचू या गडे, खेलू सारी मनी होस भाड़ी”

ये गाना उनके जीवन का सबसे यादगार पहला गाना था जिसके बदले उन्हें उस ज़माने में 25 रुपये मिले। इस गाने के बाद उन्होंने 1949 में फ़िल्म 'महल' का गीत "आयेगा आनेवाला" गाया। इस गाने में मधुबाला ने अभिनय किया। इस गाने ने म्यूज़िक इंडस्ट्री में धूममचा दी ये गाना उस समय का सुपर हिट गाना बन गया। जो लोग इस आवाज के फैन बने वो ये जाने के लिए बेचैन हो गए कि आख़िर इस गाने को इतनी प्यारी आवाज देने वाली गायिका कौन हैं। इसके बाद तो लता जी ने कई सुपरहिट गाने गाए। (Lata Mangeshkar superhit song) जैसे 'लग जा गले' (lata mangeshkar "lag ja gale") आदि कई फिल्मों के प्रसिद्ध गानों की सूची है। लता जी ने हमारे भारतीय सिनेमा के ये 20 भाषाओं में 30,000 से ज़्यादा गाने गाए हैं। जिसमें पुराने से लेकर नये सब शामिल है। लेकिन अगर लता जी के लास्ट गाने (lata mangeshkar last song) की बात की जाए तो आपको बता दें उन्होंने अपना लास्ट गाना देश और भारतीय सेना के नाम पर गया जिस गाने के बोल 'सौगंध मुझे इस मिट्टी की' था। इस गाने को 30 मार्च 2019 को रिलीज किया गया था। 

अकेले ही व्यतीत किया पूरा जीवन लता जी ने 

लता जी ने अपना पूरा जीवन अकेले ही व्यतीत किया उन्होंने कभी शादी नहीं की। बहुत से लोग लता जी के पति (lata mangeshkar husband) के बारे में जानना चाहते हैं लेकिन आपको बता दे अपने जीवन में जिम्दारियों से इतनी घिरी थी कि उन्होंने इस बारे में ख्याल ही नहीं किया और कभी शादी नहीं कि। जबकि इस बात में कई लोगों के बहुत अवधारणायें है जो कितनी सच है और कितनी नहीं कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

लता जी का निधन 

लता जी का जीवन का सफर 28 सितंबर 1929 – 6 फ़रवरी 2022 तक का ही रहा। करोना पोसिटिव होने के कारण उन्होंने 6 फरवरी को 93 की उम्र में आख़िर सांस ली और वो सदा के दुनियां को अलविदा कह गईं। लेकिन वो करोडों लोगों के दिलों में आज भी जिंदा है। ये अपने जीवन मे एक ऐसी महिला रही है जिन्होंने कभी हार नहीं मानी और हर मुसीबत का सामना अपनी मेहनत, भक्ति, प्रेम से किया है। इन्होंने अपनी जिंदगी को इतनी सादगी से जिया है कि आज हर कोई इन्हें माँ, दीदी आदि के नाम से पुकारता है। ये हमारे समाज की सभी औरतों के लिए सदा एक प्रेरणा बनी रहेंगी जो हमेशा इस बात का एहसास करवाती रहेंगी कि जिंदगी में किसी भी उतार-चढ़ाव में पीछे नहीं हटना चाहिए बल्कि सामने खड़े होकर सामना करके आगे बढ़ना चाहिए।

आज इस महिला दिवस पर आपको मेरी और थिंक विथ निश की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं।

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