भारतीय सिनेमा जगत की सफल महिला फिल्म निर्देशक

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31 May 2022
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एक समय में तो फिल्मी दुनिया में महिलाओं का कदम रखना भी अच्छा नहीं माना जाता था लेकिन ऐसे समय में भी फातिमा बेगम Fatma Begum, शोभना समर्थ Shobhna Samarth, जद्दनबाई Jaddanbai, टीपी राजालक्ष्मी T. P. Rajalakshmi ने बॉलीवुड में कई फिल्मों का निर्देशन किया। कुछ ऐसी निर्देशक भी आईं जिन्होंने अपने एक्टिंग करियर के साथ-साथ निर्देशन में भी अपना हाथ आजमाया और वे उसमें सफल भी हुईं। आइए कुछ ऐसी महिला निर्देशकों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने अपने काम से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई और अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के बल पर आज भारतीय सिनेमा में खुद को स्थापित किया है और तमाम महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में उबरकर सामने आईं हैं। 

 

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बीते कई सालों में अक्सर जब भी किसी हिट फिल्म Hit Film का जिक्र होता था तो लोग उस फिल्म के अभिनेता और निर्देशक की बात करते थे और ये बात हम सबको पता है कि इस इंडस्ट्री में लंबे समय तक पुरूष निर्देशकों का वर्चस्व रहा है। 2-3 निर्देशकों को छोड़ दें तो ये कहना गलत नहीं होगा कि बॉलीवुड में महिला निर्देशक न के बराबर थीं। 

सिनेमा Cinema को आए हुए करीब 100 साल हो गए हैं और हर दशक में कुछ नए ट्रेंड और बदलाव आए हैं जिसे लोगों ने अपनाया है और बहुत ज्यादा पसंद आने पर उसकी तारीफ भी की है। महिला निर्देशकों Female Directors का बॉलीवुड Bollywood में कदम रखना भी कुछ ऐसा ही है क्योंकि एक समय में तो फिल्मी दुनिया में महिलाओं का कदम रखना भी अच्छा नहीं माना जाता था लेकिन ऐसे समय में भी फातिमा बेगम Fatma Begum, शोभना समर्थ Shobhna Samarth, जद्दनबाई Jaddanbai, टीपी राजालक्ष्मी T. P. Rajalakshmi ने बॉलीवुड में कई फिल्मों का निर्देशन किया। कुछ ऐसी निर्देशक भी आईं जिन्होंने अपने एक्टिंग करियर के साथ-साथ निर्देशन में भी अपना हाथ आजमाया और वे उसमें सफल भी हुईं। आइए कुछ ऐसी महिला निर्देशकों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने अपने काम से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई-

1. मेघना गुलज़ार Meghna Gulzar

मशहूर गीतकार, लेखक और डायरेक्टर गुलजार साहब को तो आप सब जानते ही होंगे। मेघना गुलज़ार इनकी और अपने समय की जानी मानी ऐक्टर राखी की बेटी हैं। मेघना ने काफी विविधता भरी फिल्में बनाई हैं और अच्छी बात तो यह है कि दर्शकों को उनकी यही बात सबसे ज्यादा पसंद है। वह रिस्क लेने से नहीं डरती हैं और बहुत ही खूबसूरती से अपनी हर फ़िल्म को पेश करती हैं। नोएडा के बहुचर्चित हत्याकांड आरुषि-हेमराज हत्याकांड पर आधारित फिल्म तलवार Talwar को दर्शकों ने खूब पसंद किया था और इसके बाद राज़ी Raazi और छपाक Chhapak में भी उनके निर्देशन की काफी तारीफ हुई है। बॉलीवुड में उन्हें एक सशक्त महिला फिल्मकार Influential filmmaker के रूप में जाना जाता है। 

2. गौरी शिंदे Gauri Shinde

पुणे में पली बढ़ीं गौरी शिंदे ने सिंबोयसिस स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन Symbiosis School of Mass Communication से पढ़ाई की है। ग्रेजुएशन के बाद वह मुंबई आ गईं और एडवर्टाइजिंग एजेंसी advertising agency में कई काम किये । उन्होंने करीब 100 एड और शॉर्ट फिल्में बनाईं हैं और इसी वक्त उनकी मुलाकात मशहूर फिल्म निर्देशक आर. बाल्की R. Balki से हुई थी। ये कहना गलत नहीं होगा कि गौरी शिंदे ने दर्शकों का फ़िल्म देखने का तरीका और टेस्ट बदल दिया है क्योंकि उन्होंने कई वूमेन सेंट्रिक फिल्म्स Women Centric Films में काम किया है, जो बेहद सफल हुई हैं। उन्होंने 2012 में आई श्री देवी की फिल्म इंग्लिश विंग्लिश English Vinglish से निर्देशन की शुरुआत की थी और इस फिल्म को लोगों ने खूब पसंद किया था। इसके साथ-साथ इस फिल्म को फाइनैंशियल टाइम्स Financial times ने '25 इंडियन फिल्म टू वॉच' 25 Indian Films to Watch की श्रेणी में शामिल किया था, जो गौरी शिंदे के निर्देशन करियर के लिए काफी अच्छा साबित हुआ था क्योंकि ये उनकी पहली फिल्म थी। गौरी शिंदे की फिल्म 'डियर जिंदगी' Dear Zindagi को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया और वास्तव में इस फिल्म के बाद से ही लोगों ने मेंटल हेल्थ और डिप्रेशन के बारे में खुल कर बात करनी शुरू की। बॉलीवुड में हर साल लव स्टोरीज से रिलेटेड कई फिल्में आती हैं लेकिन मेंटल हेल्थ पर बनी यह फिल्म बेहद रिफ्रेशिंग थी और बड़ी ही खूबसूरती और सरल तरीके से मेंटल हेल्थ के बारे में इस फिल्म में बताया गया था और कई लोगों ने इस फिल्म में आलिया भट्ट Alia Bhatt के कैरेक्टर से रिलेट भी किया होगा। 

3. जोया अख्तर Zoya Akhtar

प्रख्यात स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार screenwriter and poet जावेद अख्तर Javed Akhtar की बेटी और मशहूर अभिनेता फरहान अख्तर की बहन जोया अख्तर को बॉलीवुड में न्यू कांसेप्ट की फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। जोया ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी New York University से फिल्ममेकिंग में डिप्लोमा किया है और उसके बाद उन्होंने मीरा नायर Mira Nair और देव बेनेगल को असिस्ट भी किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2009 में आई फिल्म लक बाय चांस Luck by chance से की थी। उनकी फिल्म जिंदगी ना मिलेगी दोबारा Zindagi na milegi dobara और दिल धड़कने दो Dil Dhadakne Do को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। उनकी फिल्में ह्यूमन इमोशन human emotions को बहुत ही बेहतरीन तरीके से दर्शाती हैं। फिल्म जिंदगी ना मिलेगी दोबारा को हर व्यक्ति को एक बार ज़रूर देखना चाहिए। 

4. कोंकणा सेन शर्मा Konkona Sen Sharma

फिल्म निर्देशक अपर्णा सेन की बेटी कोंकणा सेन शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत एक्टिंग Acting से की थी लेकिन वह हमेशा से फिल्म निर्देशन करना चाहती थीं। उनकी फिल्म 'अ डेथ इन द गंज' A Death in the Gunj को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। रशियन निर्देशक यूलिया सोलंट्सेवा Yuliya Solntseva के बाद कांस Cannes में बेस्ट डायरेक्टर का खिताब जीतने वाली वह दूसरी महिला निर्देशक हैं। इसके साथ- साथ 2006 में आई फिल्म ओमकारा Omkara के लिए कोंकणा सेन शर्मा को फिल्मफेयर Filmfare और नेशनल अवॉर्ड National award भी मिला था। 

5. फराह खान Farah Khan

शाहरुख खान Shahrukh Khan और दीपिका पादुकोण Deepika Padukone की फिल्म ओम शांति ओम Om Shanti Om आने के बाद से लोग फराह खान को और भी ज्यादा पसंद करने लगे। फराह भारतीय फिल्‍म निर्देशक, निर्माता, अभिनेत्री और कोरियोग्राफर हैं और वह सौ से भी ज्यादा बॉलीवुड गानों में अपनी कोरियोग्राफी Choreography की कला दिखा चुकी हैं। ओम शांति ओम और मैं हूं ना जैसी हिट फिल्में देने के बाद फराह ने एक सफल निर्देशक की श्रेणी में अपनी जगह बना ली है। वह एक मंजी हुई डायरेक्टर हैं और दर्शक किस तरह का कंटेंट पसंद करेंगे उन्हें इस बात की भी अच्छी समझ है। 

निष्कर्ष

इन सभी महिला निर्देशक के अलावा ऐसी और भी कई महिला निर्देशक हैं, जो निर्देशक की कुर्सी पर बैठकर शानदार काम कर रही हैं और फिल्म इंडस्ट्री को रिफ्रेशिंग और बेहतरीन कंटेंट refreshing content दे रही हैं। रीमा कागती Reema Kagti की फिल्म ‘तलाश’, नंदिता दास Nandita Das की फिल्म ‘फिराक’, मीरा नायर Mira Nair की फिल्म ‘माॅनसून वेडिंग’, अनुशा रिजवी Anusha Rizvi की फिल्म ‘पीपली लाइव’, गुरिंदर चड्रढा Gurinder Chadha की फिल्म ‘बेंड इट लाइक बेकहम', रेवती Revathi की फिल्म ‘मित्र- माई फ्रेंड', किरण राव Kiran Rao की फिल्म ‘धोबी घाट’, दीपा मेहता Deepa Mehta की फिल्म ‘फायर’, कल्पना लाजमी Kalpana Lajmi की फिल्म ‘रुदाली’, भावना तलवार Bhavna Talwar की फिल्म ‘धरम’, अरुणा राजे Aruna Raje की फिल्म ‘रिहाई’ और अपर्णा सेन Aparna Sen की फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज अय्यर’, रिफ्रेशिंग और अच्छे कंटेंट का शानदार उदाहरण हैं। 

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