शिव नादर के जन्मदिन पर जानिए उनकी सक्सेस स्टोरी

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14 Jul 2022
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एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) के फाउंडर शिव नाडर (Shiv Nadar) 14 जुलाई को अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह एक भारतीय अरबपति उद्योगपति हैं। जिन्होंने 1976 में एचसीएल की स्थापना की और अगले तीन दशकों में अपनी कंपनी को लगातार बदलते हुए आईटी हार्डवेयर कंपनी से एक मेन आईटी बिजनेस में बदल दिया। एक गैराज से शुरू की गई कंपनी आज भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। शिव नादर को ‘सबसे उदार भारतीय’ के रूप में मान्यता दी गई थी क्योंकि उन्होंने अपने 630 करोड़ रुपये के दान के लिए 2006 में हुरुन इंडिया परोपकार सूची (Hurun India Philanthropy List) में शीर्ष स्थान हासिल किया था।  आइए आज शिव नाडर के जन्मदिन पर हम आपको बताते हैं, कि कैसे उन्होंने अपनी कंपनी को ऊंचाइयों तक पहुंचाया ।

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भारतीय अरबपति उद्योगपति और समाजसेवी शिव नादर (Shiv Nadar) भारत के खुद के प्रयास से अरबों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं शिव नादर वैश्विक आईटी सेवा कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Global IT Services Company HCL Technologies Ltd) के पूर्व अध्यक्ष और सह-संस्थापक (Chairman and Co-Founder) हैं उनकी कंपनी को भारत का पहला स्वदेशी पीसी (Indigenous PC) बनाने का श्रेय दिया जाता है 14 जुलाई 2022 को शिव नादर अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं । 

शिव नादर का इतिहास  (History Of Shiv Nadar)

शिव नादर का जन्म (Shiv Nadar Birthday) तमिलनाडु के एक गांव में शिवसुब्रमण्यम नादर और वामासुंदरी देवी के यहां हुआ था उन्होंने, मदुरै से प्री-यूनिवर्सिटी की डिग्री हासिल की और फिर पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (PSG College of Technology) से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की उन्होंने 1967 में वालचंद ग्रुप के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे (COEP) में काम करना शुरू किया और बाद में कूपर इंजीनियरिंग कंपनी में काम किया उन्होंने दिल्ली क्लॉथ मिल्स (Delhi Cloth Mills) में नौकरी हासिल की जो उस समय भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी थी। 

हालांकि, दिन में 10-12 घंटे काम करने पर उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें अपना कुछ करना है वह और उनके कुछ सहयोगी जो डीसीएम के कैलकुलेटर डिवीजन (Calculator Division) में काम करते थे, उनके साथ जुड़ गए और उन सभी ने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया । 

कैसे हुई एचसीएल की शुरुआत (Business Journey Of Shiv Nadar)

1975 में, शिव नादर ने अपने दोस्तों और सहयोगियों के साथ माइक्रोकॉम्प लिमिटेड (Microcomp Ltd) की शुरुआत की एक साल बाद, नादर ने महसूस किया कि भारत में कंप्यूटर निर्माण में बड़ा गैप है, क्योंकि आईबीएम पॉलिटिकल इश्यूज (IBM Political Issues) की वजह से भारत से अपना बोरिया-बिस्तर समेट रहा था।  इस प्रकार, 18,700 रुपये के शुरुआती निवेश के साथ उन्होंने हिंदुस्तान कंप्यूटर लिमिटेड (Hindustan Computer Limited) की स्थापना की। 

तकनीकी क्रांति के उनके दृष्टिकोण को उत्तर प्रदेश सरकार ने मान्यता दी, और इसने उन्हें कंपनी में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले में अतिरिक्त 20 लाख रुपये दिए एचसीएल पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public Private Partnership) में से एक बन गई

1978 में, (HCL) ने (IBM) और (Apple) से पहले भारत में पहला PC प्रस्तुत किया इसे एचसीएल 8सी कहा जाता था ।  

इसके अलावा, आईटी क्षेत्र में आने वाले उछाल को भांपते हुए, 1979 में, एचसीएल को सिंगापुर में सुदूर कंप्यूटर (Remote Computer) स्थापित करने का अवसर मिला उस समय एचसीएल की कीमत 3 करोड़ रुपये थी और वह अपने पहले साल में 10 लाख रुपये की बिक्री हासिल करने में सफल रही। 

बाद में, एचसीएल ओवरसीज लिमिटेड (HCL Overseas Limited) को प्रौद्योगिकी विकास (Technology Development) सेवाओं के प्रदाता के रूप में शामिल किया गया था इसके बाद इसका नाम बदलकर एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड कर दिया गया । 

2020 में, शिव नादर ने एचसीएल में अपनी अध्यक्ष की भूमिका से इस्तीफा दे दिया और उनकी बेटी रोशनी नादर (Roshni Nadar) ने उन्हें एक सूचीबद्ध आईटी कंपनी की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला बनने में सफलता दिलाई। 

वर्तमान में, एचसीएल को आधुनिक कंप्यूटिंग का अग्रणी माना जाता है कंपनी 50 देशों में 169,000 से अधिक पेशेवरों के संचालन के साथ 10 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक का वार्षिक राजस्व उत्पन्न करती है। 

शिव नादर की सक्सेस स्टोरी (Success Story Of Shiv Nadar) 

‘अगर आप अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर शांति से काम कर रहे हो, तो आप अपने मकसद को लेकर आत्मविश्वास से भर जाओगे।’ यह विचार हैं एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) के फाउंडर शिव नादर (Shiv Nadar) के। आज हम आपको उनकी सक्सेस स्टोरी बताने जा रहे हैं।

जैसा कि वो कहते हैं कि बिजनेसमैन लोग किसी भी अवसर को हाथ से जाने नहीं देते। वैसे ही शिव नादर ने किया। 1976 में उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि भारत में कंप्यूटर्स नहीं हैं। वहीं आईबीएम किसी राजनीतिक मामले की वजह से देश छोड़कर जा रही थी। सबसे पहले उन्होंने 18,700 करोड़ रुपये एचसीएल टेक्नोलॉजीज में निवेश किए। 

साल 1979 में उन्होंने अपना बिजनेस विदेशों में फैलाना शुरू कर दिया। सिंगापुर को भी वो आईटी सर्विसेज मुहैया करवाने लगे। वहां उन्होंने फास्ट ईस्ट कंप्यूटर्स (Fast East Computers) के नाम से एक सेटअप सेट किया। पहली बार एचसीएल ने उस टाइम 3 करोड़ का बिजनेस किया। इस नए वेंचर ने हर साल 10 लाख रुपये सेल में बढ़ोतरी भी की। 

मिल चुके हैं कई पुरस्कार

2011 में, एचसीएल फाउंडेशन को एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की सामाजिक जिम्मेदारी शाखा के रूप में स्थापित किया गया था यह फाउंडेशन गरीबी को कम करने और स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और आपदा जोखिम में कमी और प्रतिक्रिया क्षेत्रों में समावेशी विकास (Overall Development) प्राप्त करने पर केंद्रित है। 

1981 में, शिव नादर की सहायता से, NIIT की स्थापना की गई थी, 1996 में, उन्होंने तमिलनाडु में एसएसएन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (SSN College Of Engineering) की स्थापना की। 

2008 में, SSN ट्रस्ट ने ग्रामीण छात्रों के लिए उत्तर प्रदेश में दो स्कूल स्थापित किए। 

शिव नादर को ‘सबसे उदार भारतीय’ के रूप में मान्यता दी गई थी क्योंकि उन्होंने अपने 630 करोड़ रुपये के दान के लिए 2006 में हुरुन इंडिया परोपकार सूची (Hurun India Philanthropy List) में शीर्ष स्थान हासिल किया था। 

2011 में, उन्होंने नोएडा में शिव नादर विश्वविद्यालय की स्थापना की। 

2008 में, उन्हें आईटी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

2017 में, उन्हें इंडिया टुडे पत्रिका द्वारा भारत के 50 सबसे शक्तिशाली लोगों में नादर को 16 वां स्थान दिया गया था। 

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