JRD TATA -आधुनिक भारत के आर्थिक विकास की बुनियाद रखने वाले महान उद्योगपति

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29 Jul 2022
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जेआरडी टाटा JRD Tata की बात करें तो उनकी गिनती भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे महान उद्योगपतियों में होती है। उन्होंने टाटा समूह के साथ ही आजाद भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका जन्म आज ही के दिन ठीक 118 साल पहले फ्रांस में हुआ था। टाटा समूह (Tata Group) की सबसे लंबे समय तक अगुवाई करने वाले दिग्गज उद्योगपति जेआरडी टाटा की आज 118वीं बर्थ एनिवर्सरी (#118th Birth Anniversary Of JRD Tata) है। जेआरडी टाटा ने अपने जीवन में कई बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हीं महान उपलब्धियों की बदौलत उन्हें हमेशा याद किया जाता है और आगे भी याद किया जाता रहेगा। उनका योगदान भारत को अपनी पहली एयरलाइन देने तक सीमित नहीं है बल्कि स्टील सेक्टर में भी उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया है। देश के आजाद होने के बाद तत्कालीन नेहरू सरकार ने टाटा एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण करने के बाद उसे एयर इंडिया के रूप में पहचान दी तो JRD TATA को उसका चेयरमैन बनाया गया। जेआरडी टाटा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, टाटा मेमोरियल कैंसर रिसर्च सेंटर एंड हास्पिटल, इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, नेशनल सेंटर फॉर परफार्मिग आर्ट्स एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज और विभिन्न ट्रस्टों का निर्माण किया। भारत के आर्थिक विकास की गाथा जब भी लिखी जाएगी उसमें भारत रत्न जेआरडी टाटा-JRD Tata (जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा) का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। आइए भारत को पहली विमानन कंपनी देने वाले जेआरडी टाटा के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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यदि हम भारत में आधुनिक उद्योग की नींव रखने की बात करें तो टाटा परिवार के मशहूर उद्योगपति famous industrialist जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा Jehangir Ratanji Dadabhoy Tata (JRD Tata) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। उन्होंने बहुत सारे सेक्टर में अपना परचम लहराया है। देश में स्टील, इंजीनियरिंग, होटल, ऑटोमोबाइल steel, engineering, hotel, automobile के विकास में बहुत योगदान दिया है। इसके अलावा देश में सिविल एविएशन की नींव रखने का श्रेय भी JRD Tata को जाता है। जेआरडी टाटा JRD Tata ने 15 साल की उम्र में पहली बार प्लेन में बैठने के बाद यह तय कर लिया था कि वो इसे अपना करियर बनाएंगे। 24 साल की उम्र में वो भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस मिला था। उन्होंने देश में पहले एयरलाइंस टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी, जो बाद में एयर इंडिया में तब्दील हो गई। चलिए विस्तार से जानते हैं जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा के बारे में। 

जेआरडी टाटा के बारे में  About JRD Tata

जेआरडी टाटा का जन्म JRD Tata Birthday आज ही के दिन साल 1904 में पेरिस Paris में हुआ था। उनके पिता RD Tata टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा Jamsetji Tata के बिजनेस पार्टनर और रिश्तेदार थे। जेआरडी टाटा की मां सुजैन Suzanne फ्रांस की नागरिक थीं। वह अपने माता-पिता की चार संतानों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पढ़ाई की बात करें तो उनकी पढ़ाई फ्रांस (France) के अलावा जापान (Japan) और इंग्लैंड (England) में हुई थी। भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा की आज 118वीं जयंती है। जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा, टाटा समूह के कई कंपनियों के संस्थापक Founder of several Tata group companies रहे हैं। उन्होंने करीब पांच दशक तक टाटा समूह का नेतृत्व किया था। रतनजी दादाभाई टाटा अपने परोपकारी कामों के लिए भी बहुत याद किए जाते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि टाटा फ्रांस आर्मी का हिस्सा भी थे। दरअसल उनकी मां फ्रांस की थी। उनका बचपन भी वहीं गुजरा इसलिए उन्हें एक साल के लिए आर्मी की ट्रेनिंग दी गई थी और आर्मी कार्यालय में वे काम करते थे। उनकी मृत्यु के शोक में संसद स्थगित रहा था। बहुत कम लोग ऐसे हुए हैं जिनके देहांत पर संसद को स्थगित किया गया हो। टाटा के देहांत पर संसद के दोनों सदनों को स्थगित किया गया था।

देश के पहले कॉमर्शियल पायलट Country's First Commercial Pilot

उड़ान भरने के प्रति टाटाओं (TATAs) का प्रेम जगजाहिर है। यह जुड़ाव सिर्फ जेआरडी टाटा (JRD Tata) को ही नहीं था, जिन्होंने भारत को पहली एयरलाइन (First Indian Airline) बनाकर दी, उनके बाद टाटा संस (Tata Sons) की बागडोर संभालने वाले रतन टाटा (Ratan Tata) भी विमान उड़ाने का शौक रखते हैं। विमान और उड़ान से टाटाओं का संबंध जेआरडी टाटा के समय से शुरू हुआ। 

देश के पहले कॉमर्शियल पायलट First commercial pilot के रूप में जाने जाते हैं जेआरडी टाटा। जब वह 15 साल के थे, तभी उन्होंने फ्रांस में एक विमान में उड़ान भरने का आनंद लिया था और 15 साल की उम्र में पहली बार प्लेन में बैठने के बाद यह तय कर लिया था कि वो इसे अपना करियर बनाएंगे। फिर 24 साल की उम्र में वो भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस मिला था। 1930 में उन्होंने आगा खान कम्पटीशन में भाग लेने के लिए भारत से इंग्लैंड के बीच अकेले सफर किया था।

जेआरडी टाटा ने खुद ही उड़ाई पहली फ्लाइट

दरअसल साल 1930 में टाटा के मुख्यालय (Bombay House) में एक एयरमेल सर्विस शुरू करने का प्रस्ताव आया, जो बॉम्बे, अहमदाबाद और कराची को कनेक्ट करने वाला था। टाटा समूह के तत्कालीन चेयरमैन दोराबजी टाटा (Dorabji Tata) को जेआरडी के मित्र व टाटा में सहयोगी जॉन पीटरसन (John Peterson) ने इस सर्विस को शुरू करने के लिए मना लिया। जेआरडी टाटा ने एयरफोर्स के पायलट नेविल विंसेंट के साथ मिलकर कंपनी शुरू की। इस कंपनी की शुरुआत यात्री उड़ानों के लिए नहीं बल्कि डाक ढोने के लिए की गई थी। पहली डाक सेवा की उड़ान कराची से मद्रास के लिए थी और इसमें जेआरडी टाटा खुद पायलट बने थे। 

जेसीके पीटर्सन के मार्गदर्शन में लिया शुरुआती प्रशिक्षण

जेआरडी टाटा ने अपना शुरुआती कारोबारी प्रशिक्षण टाटा के मुंबई स्थित मुख्यालय में जेसीके पीटर्सन JCK Peterson  (तत्कालीन डायरेक्टर इंचार्ज, टाटा स्टील) के मार्गदर्शन में शुरू किया। स्टील कारोबार की शुरुआती ट्रेनिंग के बाद वे 1926 में जमशेदपुर चले गए। वहां उन्होंने टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी के परिचालन का अध्ययन किया। जमशेदपुर में रहने के दौरान उन्हें पिता आरडी टाटा की मृत्यु की सूचना मिली और जेआरडी मुंबई वापस लौट गए। जेआरडी को पिता के जाने के बाद टाटा संस लिमिटेड का डायरेक्टर बनाया गया। डायरेक्टर पद पर आसीन होने के समय उनकी आयु 26 साल थी। 

टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी के डायरेक्टर बने

टाटा संस के डायरेक्टर जेआरडी टाटा को 1933 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी का डायरेक्टर Director of Tata Iron and Steel Company बनाया गया। 1938 में टाटा स्टील के तत्कालीन अध्यक्ष सर एनबी सकलतवाला की मृत्यु के बाद जेआरडी टाटा स्टील के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए। जेआरडी टाटा स्टील के अध्यक्ष पद पर लगातार 46 वर्ष तक रहे। आधुनिक भारत की औद्योगिक बुनियाद रखने वाले महान उद्योगपति थे जेआरडी टाटा। जेआरडी टाटा ने जब टाटा समूह की जिम्मेदारी संभाली थी उस समय सिर्फ 14 कंपनियां थीं। उनकी कड़ी मेहनत और दूरदर्शी नीतियों से 5 दशक बाद टाटा समूह में 95 से अधिक कंपनियां खड़ी हो गईं। टाटा संस का चेयरमैन Tata Sons Chairman बनने के बाद उन्होंने समूह को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। भारत में आधुनिक उद्योग की नींव रखने की बात हो तो टाटा परिवार के मशहूर उद्योगपति जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (JRD Tata) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। कुछ लोग ही यह जानते होंगे कि जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा पाकिस्तान के संस्थापक मो. अली जिन्ना के रिश्तेदार भी थे। दरअसल टाटा की बहन की शादी ब्रिटिश बैरनेट दिनशॉ मानेकजी पेटिट से हुई थी। उनकी बहन की भाभी रतनबाई पेटिट ने मोहम्मद अली जिन्ना से शादी की थी। इस तरह टाटा जिन्ना के रिश्तेदार बन गए। 

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टाटा ग्रुप का विकास और उनकी उपलब्धियां Growth and achievements of Tata Group

जेआरडी को भारत में नागरिक उड्डयन का पिता Father Of Civil Aviation कहा जाता है। जेआरडी टाटा महज 34 साल की उम्र में 26 जुलाई 1938 को टाटा संस के चेयरमैन बने। उस समय टाटा संस की सिर्फ 15 कंपनी थी, जिसमें टाटा स्टील (टिस्को) TISCO भी थी। उन्होंने 1945 में टाटा मोटर्स (टेल्को) की नींव रखी। टाटा मोटर्स की गाड़ी तैयार हुई, तो देश में परिवहन सेवा कहीं बेहतर हुई थी। टाटा स्टील को छोड़ जमशेदपुर Jamshedpur में स्थापित टाटा समूह की अधिकतर कंपनियों की स्थापना उनके कार्यकाल में हुई थी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह की परिसंपत्ति 62 करोड़ से बढ़कर 10 हजार करोड़ की हो गई। वे गुलाम भारत में विदेशी कार खरीदने वाले पहले शख्स First person to buy foreign car भी थे। उनके लिए कार के साथ-साथ ड्राइवर भी विदेश से बुलवाया गया था। 

बेहद कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने कई उद्योगों के विकास में अहम भूमिका निभाई। जेआरडी टाटा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, टाटा मेमोरियल कैंसर रिसर्च सेंटर एंड हास्पिटल, इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, नेशनल सेंटर फॉर परफार्मिग आर्ट्स एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज Tata Institute of Social Sciences, Tata Memorial Cancer Research Center and Hospital, Institute of Fundamental Research, National Center for Performing Arts and National Institute of Advanced Studies और विभिन्न ट्रस्टों का निर्माण किया। 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ United Nations Organisation ने भारत में जनसंख्या नियंत्रण में अहम योगदान देने के लिए उन्हें यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन अवार्ड United Nations Population Award से सम्मानित किया। देश के लिए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्म विभूषण और भारत रत्न का सम्मान दिया गया। 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न highest civilian award Bharat Ratna से सम्मानित किया गया। 1954 में फ्रांस ने जेआरडी टाटा को अपने सर्वोच्च नागरकिता पुरस्कार ‘लीजन ऑफ द ऑनर’ Legion of the Honor से नवाजा। 1955 में वह पद्म विभूषण Padma Vibhushan से सम्मानित किए गए। उनका 29 नवम्बर 1993 को जेनेवा में स्वर्गवास हुआ। 

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