भारतीय कृषि तेजी से तकनीक आधारित क्षेत्र में बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट इमेजरी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटप्लेस और प्रिसीजन फार्मिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल खेती से जुड़े अलग-अलग कामों में बढ़ रहा है। इन तकनीकों की मदद से किसानों को बेहतर जानकारी देने, खेती की लागत कम करने, फसल की उत्पादकता बढ़ाने और बाजार तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।
कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र आज भी भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 2024-25 में कृषि और संबद्ध गतिविधियों का देश के मौजूदा मूल्यों पर GDP में लगभग 17.3 प्रतिशत योगदान रहा। यह आंकड़ा बताता है कि कृषि की उत्पादकता बढ़ाना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आय में सुधार करना कितना जरूरी है।
एग्रीटेक कंपनियों के लिए भी भारत में अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। 2025 में भारतीय एग्रीटेक बाजार का आकार लगभग 974 मिलियन डॉलर आंका गया था। इसके 2034 तक बढ़कर करीब 2.52 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान बाजार के लगभग 10.59 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार भी कृषि में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा दे रही है। 2024 में शुरू किए गए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के लिए ₹2,817 करोड़ का कुल बजट रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों के लिए उपयोगी डिजिटल सेवाओं और डेटा आधारित कृषि समाधानों को बढ़ावा देना है।
इसके साथ ही देश का एग्री-स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विकसित हो रहा है। वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत 2,000 से अधिक एग्री-स्टार्टअप्स को तकनीकी और वित्तीय सहायता दी गई है।
आज एग्रीटेक स्टार्टअप केवल खेती की सलाह तक सीमित नहीं हैं। ये कंपनियां प्रिसीजन फार्मिंग, कृषि वित्त, भंडारण, सप्लाई चेन, बाजार से जुड़ाव और AI आधारित फसल व कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रही हैं।
ऐसे में 2026 में ये 10 एग्रीटेक स्टार्टअप 10 Agritech Startups in 2026 अपनी तकनीक, नए बिजनेस मॉडल और कृषि क्षेत्र में संभावित प्रभाव के कारण खास ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
ये कंपनियां आने वाले समय में भारतीय कृषि को अधिक स्मार्ट, कुशल और तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत के टॉप 10 एग्रीटेक स्टार्टअप्स 2026 (Top 10 Agritech Startups in India 2026)
देहात DeHaat भारत के प्रमुख एग्रीटेक प्लेटफॉर्म में से एक है। इसकी शुरुआत 2012 में हुई थी और इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है। कंपनी कृषि से जुड़ी कई सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर काम करती है। इसमें किसानों को खेती के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराने से लेकर कृषि सलाह, वित्तीय सहायता और फसल बेचने के लिए बाजार से जोड़ने तक की सेवाएं शामिल हैं।
देहात खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के साथ काम करता है और कई भारतीय राज्यों में अपनी सेवाओं का विस्तार कर चुका है। कंपनी का उद्देश्य किसानों की उन समस्याओं को दूर करना है, जिनका सामना उन्हें खेती शुरू करने से लेकर फसल बेचने तक करना पड़ता है।
देहात की प्रमुख सेवाओं में शामिल हैं।
बीज और फसल सुरक्षा उत्पादों जैसे कृषि इनपुट उपलब्ध कराना।
किसानों को फसल और खेती से जुड़ी विशेषज्ञ सलाह देना।
किसानों को उनकी उपज बेचने के लिए बाजार से जोड़ना।
वित्तीय सेवाओं और कर्ज की सुविधा तक पहुंच बनाने में मदद करना।
तकनीक की मदद से फसलों की निगरानी करना।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कृषि से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराना।
कंपनी ने AgriCentral के माध्यम से अपने तकनीकी सिस्टम को भी मजबूत किया है। यह एक कृषि सलाह देने वाला ऐप है, जो किसानों को फसल से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है और फसलों में होने वाली बीमारियों की पहचान में भी मदद करता है। DeHaat अपनी सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल बढ़ा रहा है।
देहात ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग ₹3,010 करोड़ का परिचालन राजस्व दर्ज किया। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि थी। कंपनी ने इसी अवधि में लगभग ₹369 करोड़ का शुद्ध लाभ भी दर्ज किया। हालांकि, इस लाभ पर एक बार हुए गैर-नकद उचित मूल्य समायोजन का काफी प्रभाव रहा था।
एग्रीटेक क्षेत्र में लगातार लाभ कमाना आसान नहीं है। इसलिए DeHaat का प्रदर्शन यह दिखाता है कि अगर कृषि इनपुट, सलाह, बाजार से जुड़ाव और अन्य सेवाओं को एक साथ जोड़ा जाए, तो एक बड़ा और विविध कृषि कारोबार तैयार किया जा सकता है।
देहात भारत में फुल-स्टैक एग्रीटेक मॉडल की संभावनाओं को दिखाता है। कंपनी खेती को केवल बीज या खाद खरीदने और फसल बेचने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखती, बल्कि किसानों को खेती के अलग-अलग चरणों में कई सेवाओं से जोड़ने का प्रयास करती है।
निंजाकार्ट Ninjacart की शुरुआत 2015 में हुई थी और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। कंपनी कृषि क्षेत्र की एक बड़ी समस्या पर काम करती है, यानी खेतों से ताजे फल और सब्जियों को तेजी से और कुशल तरीके से बाजार तथा ग्राहकों तक पहुंचाना।
निंजाकार्ट सीधे खेती के उत्पादन पर ही ध्यान नहीं देता। यह कृषि की पूरी सप्लाई चेन में किसानों, व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, थोक खरीदारों और अन्य कारोबारियों को तकनीक की मदद से जोड़ने का प्रयास करता है।
फल और सब्जियां जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद हैं। अगर इन्हें समय पर बाजार तक नहीं पहुंचाया जाए, तो इनकी गुणवत्ता खराब हो सकती है और काफी मात्रा में खाद्य नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, कई बिचौलियों, परिवहन की समस्याओं और मांग का सही अनुमान नहीं लग पाने से भी किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो सकता है।
निंजाकार्ट इन समस्याओं को कम करने के लिए कई तरह की तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराता है।
मांग और आपूर्ति को डिजिटल माध्यम से जोड़ना।
तकनीक आधारित लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था।
कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन का प्रबंधन।
उत्पादों की गुणवत्ता जांच और ग्रेडिंग।
डिजिटल व्यापार और भुगतान से जुड़ी सुविधाएं।
कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के लिए क्रेडिट और वित्तीय सेवाएं।
कंपनी के मौजूदा प्लेटफॉर्म के अनुसार, निंजाकार्ट का नेटवर्क 8 लाख से अधिक किसानों, 1 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं, 20,000 से ज्यादा रीसेलर्स और 120 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है।
2026 में निंजाकार्ट ने अपनी कारोबारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। कंपनी ने जुलाई 2026 में 60 लाख डॉलर यानी लगभग $6 मिलियन की अतिरिक्त फंडिंग जुटाई। कंपनी की वित्तीय जानकारी से जुड़े डेटाबेस के अनुसार, इसके साथ Ninjacart की कुल रिपोर्टेड फंडिंग $360 मिलियन से अधिक हो गई।
कंपनी अब केवल ताजे फल और सब्जियों की सप्लाई तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल कॉमर्स, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
निंजाकार्ट यह दिखाता है कि एग्रीटेक का मतलब केवल खेतों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक नहीं है। सप्लाई चेन में तकनीक का इस्तेमाल भी कृषि क्षेत्र के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। बेहतर लॉजिस्टिक्स, मांग का सही अनुमान और बाजार तक आसान पहुंच किसानों को बेहतर अवसर दे सकती है। साथ ही, इससे उपभोक्ताओं तक कृषि उत्पादों को अधिक कुशल तरीके से पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
Also Read: रणनीतिक साझेदारियाँ क्या हैं और 2026 में स्टार्टअप्स के लिए क्यों जरूरी हैं
AgroStar की शुरुआत 2013 में हुई थी और इसका मुख्यालय पुणे में है। कंपनी ने एक ऐसा एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जहां किसानों को डिजिटल कृषि सलाह के साथ खेती में इस्तेमाल होने वाले जरूरी इनपुट भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े बेहतर फैसले लेने में मदद करना और उन्हें जरूरी कृषि उत्पादों तक आसान पहुंच देना है।
एग्रोस्टार का तकनीकी प्लेटफॉर्म किसानों को फसल में होने वाली बीमारियों, कीटों, फसल प्रबंधन और खेती के बेहतर तरीकों से जुड़ी जानकारी देता है। इसके साथ ही किसान बीज, उर्वरक, फसल सुरक्षा उत्पाद और अन्य जरूरी कृषि इनपुट भी प्राप्त कर सकते हैं।
कंपनी का डिजिटल मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसान एक ही व्यापक व्यवस्था के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी और जरूरी उत्पादों तक पहुंच बना सकते हैं। इससे किसानों को अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।
एग्रोस्टार के लिए हाल के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक नवंबर 2025 में 3 करोड़ डॉलर यानी $30 मिलियन का इक्विटी निवेश था। यह निवेश जलवायु क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनी Just Climate के नेतृत्व में हुआ था, जिसमें कंपनी के मौजूदा निवेशकों ने भी हिस्सा लिया।
एग्रोस्टार के अनुसार, इस निवेश का इस्तेमाल देशभर में कारोबार बढ़ाने, नए उत्पाद और तकनीकी समाधान विकसित करने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश बढ़ाने के लिए किया जाना है।
कंपनी के अनुसार, उसके ओम्नीचैनल नेटवर्क के जरिए 1 करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। इस नेटवर्क में 10,000 से अधिक रिटेल स्टोर और कंपनी का प्रत्यक्ष डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल है। एग्रोस्टार के अनुसार, उसके कृषि सलाह प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.5 करोड़ सलाह संबंधी इंटरैक्शन दर्ज किए जा चुके हैं।
कंपनी के टिकाऊ कृषि से जुड़े प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। एग्रोस्टार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में उसके समाधानों की मदद से 276 अरब लीटर पानी की बचत हुई। इसके अलावा, रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में कमी के कारण 1.20 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂-equivalent उत्सर्जन को रोकने में मदद मिली।
एग्रोस्टार डिजिटल कृषि सलाह, कृषि इनपुट और टिकाऊ खेती को एक ही व्यवस्था में जोड़ने का प्रयास करता है। इसका मॉडल दिखाता है कि तकनीक की मदद से किसानों को बेहतर जानकारी और जरूरी कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ संसाधनों के अधिक कुशल इस्तेमाल और किसान की आय बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
Arya.ag कृषि क्षेत्र के उस महत्वपूर्ण हिस्से पर काम करता है, जिस पर अक्सर कम ध्यान दिया जाता है। यह हिस्सा है फसल की कटाई के बाद उसका भंडारण, वित्त और सही बाजार तक पहुंच।
2013 में शुरू हुई और नई दिल्ली में मुख्यालय वाली Arya.ag एक ऐसा एकीकृत मॉडल संचालित करती है, जिसमें अनाज के भंडारण, वित्तीय सुविधा और बाजार से जुड़ाव को एक साथ जोड़ा गया है। कंपनी किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ काम करती है, ताकि कटाई के बाद आने वाली समस्याओं को कम किया जा सके और किसान अपनी उपज बेचने के बारे में बेहतर निर्णय ले सकें।
कई किसानों को फसल कटने के तुरंत बाद अपनी उपज बेचनी पड़ती है। इसके पीछे तत्काल पैसों की जरूरत या उचित भंडारण सुविधा का अभाव जैसे कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को कई बार अपनी फसल का बेहतर बाजार भाव मिलने का इंतजार करने का अवसर नहीं मिलता।
Arya.ag इन समस्याओं को कम करने के लिए कई सेवाएं उपलब्ध कराता है।
कृषि उत्पादों के लिए वेयरहाउसिंग यानी भंडारण सुविधा।
वेयरहाउस रसीद के आधार पर वित्तीय सुविधा।
अनाज की खरीद-बिक्री और व्यापार से जुड़ी सेवाएं।
किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ काम करना।
तकनीक की मदद से बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना।
जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना।
वेयरहाउस रसीद वित्तपोषण के तहत किसान अपनी संग्रहीत उपज के आधार पर कर्ज प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें फसल को तुरंत बेचने के बजाय कुछ समय तक सुरक्षित रखने और बेहतर बाजार भाव मिलने पर बेचने का अवसर मिल सकता है।
जनवरी 2026 में Arya.ag ने GEF Capital Partners से ₹725 करोड़ की Series D फंडिंग जुटाई। कंपनी के अनुसार, इस पूंजी का इस्तेमाल जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने, तकनीक की पहुंच बढ़ाने, किसानों के साथ जुड़ाव मजबूत करने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए किया जाना है।
Arya.ag ने देश में बड़े स्तर पर वेयरहाउस नेटवर्क और कई जिलों में अपनी गतिविधियों की जानकारी दी है। 2026 की फंडिंग के बाद कंपनी ने किसानों और FPOs के साथ अपनी पहुंच और मजबूत करने तथा तकनीक आधारित कृषि सेवाओं का विस्तार करने की योजना पर जोर दिया।
Arya.ag यह दिखाता है कि एग्रीटेक की भूमिका केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं है। फसल कटने के बाद उसका सही तरीके से भंडारण, किसान को वित्तीय सुविधा और बेहतर बाजार तक पहुंच दिलाना भी किसान की आय पर बड़ा असर डाल सकता है।
इस तरह, Arya.ag कृषि की उस कड़ी को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है जो खेत से फसल निकलने के बाद शुरू होती है और बाजार तक पहुंचने पर पूरी होती है।
CropIn बेंगलुरु स्थित एक एग्रीटेक कंपनी है, जिसकी शुरुआत 2010 में हुई थी। यह मुख्य रूप से कृषि डेटा और तकनीक आधारित सेवाओं पर काम करती है। कंपनी Software-as-a-Service यानी SaaS मॉडल के जरिए कृषि क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं को तकनीकी समाधान उपलब्ध कराती है।
CropIn का काम सीधे किसानों को कोई सामान्य मोबाइल सेवा देने तक सीमित नहीं है। यह कृषि कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, बीमा कंपनियों, सरकारी संस्थाओं और अन्य संगठनों को खेत और फसल से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तकनीक विकसित करती है। इस जानकारी का इस्तेमाल बेहतर कृषि योजना और निर्णय लेने में किया जा सकता है।
CropIn के तकनीकी प्लेटफॉर्म में कई तरह के समाधान शामिल हैं।
SmartFarm, जो खेत और फसल के पूरे चक्र को प्रबंधित करने में मदद करता है।
SmartRisk, जो कृषि से जुड़े जोखिमों का आकलन करने में सहायता करता है।
SmartAcre, जो सैटेलाइट डेटा की मदद से फसलों की निगरानी करता है।
कृषि डेटा प्लेटफॉर्म, जो मौसम, मिट्टी और फसल से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।
कंपनी का तकनीकी सिस्टम खेतों से मिलने वाले डेटा को सैटेलाइट इमेजरी, मशीन लर्निंग और अन्य सूचनाओं के साथ जोड़ता है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को फसल की स्थिति और संभावित जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।
CropIn के अनुसार, उसके क्रॉप इंटेलिजेंस मॉडल्स को दुनियाभर में 250 से अधिक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का प्लेटफॉर्म भारत के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मौजूद है।
CropIn की तकनीक का एक महत्वपूर्ण उपयोग कृषि जोखिम का आकलन है। खेत और फसल से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी मिलने पर बैंक और बीमा कंपनियां कृषि ऋण और फसल बीमा से जुड़े जोखिमों का अधिक प्रभावी तरीके से मूल्यांकन कर सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन और मौसम में बढ़ती अनिश्चितता के कारण कृषि जोखिमों का आकलन करना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे समय में सैटेलाइट डेटा, मौसम संबंधी जानकारी और AI आधारित विश्लेषण वित्तीय संस्थाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
CropIn यह दिखाता है कि कृषि डेटा आधुनिक खेती की आधारभूत जरूरत बन सकता है। इसका प्रभाव किसी किसान के मोबाइल ऐप पर सीधे दिखाई नहीं देता, लेकिन इसकी तकनीक सरकारों, बैंकों, बीमा कंपनियों और बड़ी कृषि कंपनियों को बेहतर फैसले लेने में मदद कर सकती है।
इस तरह CropIn कृषि क्षेत्र में डेटा और तकनीक के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है।
Fasal बेंगलुरु स्थित एक एग्रीटेक कंपनी है, जो खास तौर पर बागवानी यानी फल, सब्जियों और अन्य हॉर्टिकल्चर फसलों में प्रिसीजन फार्मिंग पर काम करती है। यह कंपनी Wolkus Technology Solutions द्वारा संचालित है।
फसल की शुरुआत कृषि क्षेत्र की समझ रखने वाले उद्यमियों ने की थी। कंपनी IoT सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और खेत से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल करके किसानों को उनकी फसल के अनुसार जरूरी सलाह देने का प्रयास करती है।
फसल की तकनीक खेत और आसपास के वातावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजों पर नजर रखती है।
मिट्टी में नमी का स्तर।
तापमान।
हवा में नमी यानी आर्द्रता।
बारिश।
पत्तियों की नमी।
स्थानीय मौसम की स्थिति।
इन आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद किसानों को सिंचाई, फसल की सेहत, कीट और रोग नियंत्रण तथा खेती से जुड़े अन्य फैसलों के बारे में सलाह दी जाती है।
फसल के मौजूदा तकनीकी प्लेटफॉर्म के अनुसार, कंपनी ने 200 से अधिक फसल मॉडल विकसित किए हैं और 100 से अधिक फसलों के लिए वैज्ञानिक आधार पर तैयार मॉडल उपलब्ध कराए हैं।
Fasal के तकनीकी समाधान से पानी और खेती में इस्तेमाल होने वाले अन्य संसाधनों की बचत से जुड़े कई परिणाम सामने आए हैं। 2025 में NITI Aayog द्वारा समर्थित एक केस स्टडी के अनुसार, Fasal की तकनीक करीब 10,000 एकड़ क्षेत्र में इस्तेमाल की गई थी।
इस केस स्टडी में शामिल किसानों ने कीटनाशकों पर खर्च में 60 प्रतिशत तक की कमी और उपज में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की जानकारी दी। इसके अलावा, इस तकनीक के इस्तेमाल से 52 अरब लीटर से अधिक पानी की बचत का भी उल्लेख किया गया।
कंपनी के अपने मौजूदा प्लेटफॉर्म के अनुसार, उसका डेटाबेस 60,000 एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र को कवर करता है। कंपनी पानी की बचत, उपज में सुधार और फसल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले संसाधनों में कमी को अपने प्रमुख प्रभावों में गिनती है।
फसल पारंपरिक अनुभव आधारित खेती से डेटा आधारित प्रिसीजन फार्मिंग की ओर बढ़ते बदलाव का उदाहरण है। इसकी तकनीक किसानों को खेत की वास्तविक स्थिति के आधार पर पानी और फसल सुरक्षा उत्पादों का इस्तेमाल करने में मदद कर सकती है।
इससे किसान केवल एक तय समय-सारणी के आधार पर सिंचाई या कीट नियंत्रण करने के बजाय मौसम, मिट्टी और फसल की वास्तविक जरूरत के अनुसार फैसले ले सकते हैं। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और खेती को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
Bijak की शुरुआत 2019 में हुई थी और इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है। यह कंपनी मुख्य रूप से B2B कृषि जिंस बाजार में काम करती है। इसका उद्देश्य किसानों, व्यापारियों, थोक खरीदारों, प्रोसेसर और अन्य कारोबारियों के बीच होने वाले कृषि उत्पादों के व्यापार को तकनीक की मदद से अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
भारत में कृषि जिंसों का कारोबार अक्सर अलग-अलग और स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से होता है। इसमें किसान, व्यापारी, थोक विक्रेता, प्रोसेसर और खरीदार अलग-अलग स्तरों पर जुड़े होते हैं। ऐसी व्यवस्था में कीमत, भुगतान और लेनदेन से जुड़ी जानकारी हर पक्ष तक आसानी से नहीं पहुंच पाती। Bijak डिजिटल तकनीक के माध्यम से इस प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने का प्रयास करता है।
बीजक का प्लेटफॉर्म कृषि जिंसों के व्यापार से जुड़े लोगों के लिए कई तरह की सुविधाओं पर केंद्रित है।
कृषि जिंसों के खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ना।
डिजिटल माध्यम से कीमतों की जानकारी और मूल्य खोज की सुविधा।
कृषि जिंसों की खरीद-बिक्री में मदद।
व्यापार से जुड़े वित्तीय विकल्प उपलब्ध कराना।
कारोबार से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना।
बिल बनाने और लेजर यानी हिसाब-किताब रखने के डिजिटल उपकरण।
कृषि व्यापारियों के लिए डेटा और विश्लेषण की सुविधा।
बीजक का प्लेटफॉर्म कई तरह की कृषि जिंसों को कवर करता है। कंपनी ने ऐसे डिजिटल इंटरफेस पर भी काम किया है, जिन्हें उन उपयोगकर्ताओं के लिए आसान बनाया जा सके जो जटिल डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल करने के आदी नहीं हैं।
कृषि बाजार में सही कीमत की जानकारी एक बड़ी चुनौती है। अगर अलग-अलग बाजारों और व्यापारियों के बीच कीमत से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध न हो, तो किसानों और अन्य कारोबारियों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि उन्हें उचित और प्रतिस्पर्धी कीमत मिल रही है या नहीं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म इस जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, डिजिटल लेनदेन रिकॉर्ड होने से खरीदार और विक्रेता के बीच भरोसा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
बीजक ऐसे कृषि बाजार में काम करता है जो अभी भी काफी खंडित और स्थानीय नेटवर्क पर निर्भर है। कृषि कारोबार में व्यक्तिगत संबंध, भरोसा और स्थानीय स्तर पर बने व्यापारिक संपर्कों की बड़ी भूमिका होती है। इसके अलावा, कंपनी को पहले से मौजूद कृषि बाजार संस्थानों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
फिर भी, Bijak का मॉडल यह दिखाता है कि एग्रीटेक का इस्तेमाल केवल फसल उगाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों के व्यापार और बाजार व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
AgNext Technologies चंडीगढ़ स्थित एक एग्रीटेक कंपनी है, जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। कंपनी कृषि क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक समस्या पर काम करती है, यानी कृषि उत्पादों की गुणवत्ता का सही और निष्पक्ष आकलन करना।
कृषि उत्पादों की कीमत उनकी गुणवत्ता पर काफी हद तक निर्भर करती है। AgNext Technologies इस प्रक्रिया को अधिक तेज, तकनीक आधारित और व्यवस्थित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर विजन, स्पेक्ट्रोस्कोपी, सेंसर और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करती है।
कंपनी का प्रमुख प्लेटफॉर्म Qualix कृषि उत्पादों की गुणवत्ता की तेजी से जांच और मूल्यांकन के लिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल अनाज, मसाले, तिलहन, डेयरी उत्पाद और अन्य कृषि उत्पादों की जांच में किया जा सकता है।
पारंपरिक तरीके से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच करने में काफी समय लग सकता है। कई मामलों में यह जांच इंसानी निरीक्षण और अनुभव पर भी निर्भर करती है। तकनीक आधारित स्वचालित जांच से इस प्रक्रिया को तेज करने और गुणवत्ता के लिए अधिक एक समान मानक तैयार करने में मदद मिल सकती है।
AgNext के अनुसार, उसकी तकनीक कृषि उत्पादों की गुणवत्ता का सटीक आकलन करने में सक्षम है। कंपनी ने कृषि उत्पादों के नमूनों से जुड़े बड़े डेटा सेट भी तैयार किए हैं। इसके समाधान कृषि उत्पादों की खरीद करने वाले केंद्रों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और कृषि जिंसों के कारोबार से जुड़े व्यवसायों के लिए विकसित किए गए हैं।
किसी कृषि उत्पाद की गुणवत्ता का सीधा असर उसकी कीमत पर पड़ सकता है। एक ही प्रकार की फसल की दो अलग-अलग खेपों को अलग-अलग कीमत मिल सकती है। इसका कारण नमी की मात्रा, मिलावट, आकार, ग्रेड और उत्पाद की दूसरी गुणवत्ता संबंधी विशेषताएं हो सकती हैं।
अगर गुणवत्ता की जानकारी तकनीक की मदद से अधिक निष्पक्ष और स्पष्ट तरीके से उपलब्ध हो, तो किसानों, खरीदारों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों और व्यापारियों के बीच पारदर्शिता बढ़ सकती है।
कंपनी से जुड़े डेटा स्रोतों के अनुसार, AgNext ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग ₹31 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था। हालांकि, निजी कंपनियों के वित्तीय आंकड़े अलग-अलग स्रोतों और रिपोर्टिंग अवधि के आधार पर अलग हो सकते हैं। इसलिए ऐसे आंकड़ों को संबंधित वित्तीय स्रोत और अवधि के संदर्भ में देखना जरूरी है।
AgNext Technologies यह दिखाती है कि AI का इस्तेमाल केवल खेत और फसल की निगरानी तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग कृषि उत्पाद खेत से बाजार तक पहुंचने के बाद उनकी वास्तविक गुणवत्ता का आकलन करने के लिए भी किया जा सकता है।
ऐसी तकनीक कृषि उत्पादों की खरीद प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने में मदद कर सकती है। इससे किसानों और खरीदारों के बीच गुणवत्ता और कीमत से जुड़े फैसलों को अधिक व्यवस्थित बनाने की संभावना बढ़ती है।
गुरुग्राम स्थित Intello Labs कृषि उत्पादों की गुणवत्ता पर काम करने वाला एक एग्रीटेक स्टार्टअप है। इसकी खासियत कंप्यूटर विजन और AI की मदद से फलों और सब्जियों जैसे ताजे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांचना है।
कंपनी का उद्देश्य फलों और सब्जियों की गुणवत्ता जांच में होने वाली मानवीय गलतियों और अलग-अलग राय को कम करना है। इसके लिए तकनीक की मदद से रंग, आकार, चोट, खराब होने के संकेत और अन्य गुणवत्ता मानकों का विश्लेषण किया जाता है।
ताजे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता एक जैसी बनाए रखना मुश्किल होता है, क्योंकि फल और सब्जियां जल्दी खराब हो सकती हैं। साथ ही, अलग-अलग लोगों द्वारा की गई जांच में भी अंतर हो सकता है।
Intello Labs मशीन विजन की मदद से कृषि उत्पादों का विश्लेषण करता है और उनकी गुणवत्ता से जुड़ी एक समान जानकारी तैयार करता है। इस तकनीक का इस्तेमाल खरीद, छंटाई, ग्रेडिंग और सप्लाई चेन से जुड़े कामों में किया जा सकता है।
कंपनी अपने मौजूदा प्लेटफॉर्म को ताजे कृषि उत्पादों के लिए “Physical AI” के रूप में पेश करती है। कंपनी के अनुसार, उसके सिस्टम के जरिए 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक कृषि उत्पादों को प्रोसेस किया जा चुका है और ग्रेडिंग की सटीकता 95 प्रतिशत से अधिक है। कंपनी के अनुसार, उसके AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए 1 अरब से अधिक तस्वीरों का डेटा भी इस्तेमाल किया गया है।
बेहतर ग्रेडिंग से कृषि उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के अनुसार अलग करना आसान हो सकता है। इससे कंपनियां स्टॉक और इन्वेंट्री से जुड़े बेहतर फैसले ले सकती हैं तथा अनावश्यक रूप से अच्छे उत्पादों को रिजेक्ट करने या बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।
कंपनी ताजे कृषि उत्पादों के कारोबार के लिए डिजिटल सिस्टम को भी विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य केवल तस्वीरों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटोमेटेड छंटाई, पैकिंग और गुणवत्ता के आधार पर होने वाले कारोबार को भी बेहतर बनाना है।
Intello Labs यह दिखाता है कि कंप्यूटर विजन किस तरह कृषि के वास्तविक और डिजिटल पहलुओं को जोड़ सकता है। आमतौर पर एग्रीटेक में खेतों से डेटा जुटाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, लेकिन यह तकनीक सप्लाई चेन में आगे बढ़ रहे वास्तविक कृषि उत्पाद की गुणवत्ता को भी जांचने में मदद करती है।
इस सूची में अंतिम नाम Unnati और Gramophone का है। जनवरी 2026 में हुए एक महत्वपूर्ण सौदे के बाद दोनों एग्रीटेक कंपनियां एक बड़े डिजिटल कृषि नेटवर्क के रूप में और करीब आई हैं।
Unnati एक डिजिटल कृषि और एग्री-फिनटेक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है। वहीं, Gramophone ने कृषि इनपुट और फार्म मैनेजमेंट से जुड़ी तकनीक आधारित सेवाओं का एक नेटवर्क तैयार किया है। दोनों के एक साथ आने का उद्देश्य किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों के लिए सेवाओं को और मजबूत बनाना है।
इस व्यापक प्लेटफॉर्म में कृषि से जुड़ी कई सेवाओं को एक साथ जोड़ा जा सकता है, जैसे।
डिजिटल कृषि सलाह और मार्गदर्शन।
कृषि इनपुट का वितरण।
कृषि उत्पादों और सेवाओं का डिजिटल कारोबार।
वित्तीय सहायता और कृषि ऋण।
किसानों से जुड़ाव और डिजिटल सेवाएं।
फसल प्रबंधन से जुड़ी सेवाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण नेटवर्क।
Gramophone का प्लेटफॉर्म किसानों को बीज, फसल सुरक्षा उत्पाद, पोषण से जुड़े उत्पाद और कृषि उपकरण जैसे इनपुट डिजिटल माध्यम से खरीदने की सुविधा देता है।
जनवरी 2026 में Unnati ने स्टॉक-स्वैप सौदे के जरिए Gramophone का अधिग्रहण करने पर सहमति जताई। इस सौदे के तहत Info Edge की सहायक कंपनी ने Gramophone में अपनी हिस्सेदारी के बदले Unnati में 15.7 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। इसके अलावा, Info Edge ने Unnati में 35 करोड़ रुपये के नए निवेश की भी प्रतिबद्धता जताई।
बाद में कंपनी की फाइलिंग में Gramophone की हिस्सेदारी के हस्तांतरण और Unnati में Info Edge के निवेश की जानकारी दर्ज की गई।
यह सौदा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनियों के एक साथ आने से एग्रीटेक प्लेटफॉर्म को बड़ा नेटवर्क और अधिक सेवाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है। इससे किसानों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कृषि से जुड़ी कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की क्षमता भी बढ़ सकती है।
Unnati और Gramophone का एक साथ आना भारतीय एग्रीटेक सेक्टर में बढ़ते एक महत्वपूर्ण रुझान को दिखाता है। यह रुझान कृषि से जुड़ी अलग-अलग सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने से जुड़ा है।
किसानों को बीज और अन्य कृषि इनपुट खरीदने, खेती की सलाह लेने, कृषि कारोबार करने और वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म इन सेवाओं को एक ही नेटवर्क के जरिए अधिक आसानी से उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
इस तरह Unnati और Gramophone का संयोजन भारतीय कृषि में डिजिटल सेवाओं को अधिक व्यापक और एकीकृत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
ये 10 एग्रीटेक स्टार्टअप कृषि के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं, लेकिन सभी मिलकर यह दिखाते हैं कि भारत में एग्रीटेक सेक्टर कितना व्यापक हो चुका है।
AgroStar, CropIn, AgNext Technologies और Intello Labs जैसी कंपनियां दिखाती हैं कि AI का इस्तेमाल कृषि सलाह, खेती से जुड़े डेटा का विश्लेषण, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच और कंप्यूटर विजन जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।
AI बड़ी मात्रा में कृषि डेटा का विश्लेषण पारंपरिक तरीकों की तुलना में तेजी से कर सकता है। इससे किसानों, कृषि कंपनियों और अन्य संस्थानों को बेहतर जानकारी, सुझाव और निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
Fasal यह दिखाता है कि सटीक खेती यानी प्रिसिजन फार्मिंग में IoT सेंसर कितने उपयोगी हो सकते हैं। केवल समय-समय पर खेत की मैनुअल जांच करने के बजाय किसान खेत की स्थिति से जुड़ी जानकारी लगभग वास्तविक समय में प्राप्त कर सकते हैं।
मिट्टी की नमी, मौसम और फसल की स्थिति जैसी जानकारी किसानों को सिंचाई, पोषण और फसल सुरक्षा से जुड़े फैसले अधिक सही तरीके से लेने में मदद कर सकती है।
DeHaat, Ninjacart, Arya.ag, Bijak और Unnati जैसी कंपनियां यह दिखाती हैं कि तकनीक खेती शुरू होने से पहले और फसल तैयार होने के बाद आने वाली समस्याओं को भी हल करने में मदद कर सकती है।
इन कंपनियों का काम कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ा है।
कृषि इनपुट।
कृषि वित्त और ऋण।
फसल भंडारण।
कृषि जिंसों का कारोबार।
लॉजिस्टिक्स और परिवहन।
बाजार तक पहुंच।
किसानों को कृषि सलाह।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसान की आय केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसने कितनी फसल पैदा की। फसल को सही तरीके से वित्तीय सहायता मिलना, सुरक्षित रखना, समय पर बाजार तक पहुंचाना, उसकी गुणवत्ता तय करना और बेहतर कीमत पर बेचना भी किसान की आय को प्रभावित करता है।
पानी की कमी, मौसम में बदलाव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और फसलों की बदलती परिस्थितियां कृषि के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। ऐसे में जलवायु के प्रति अधिक मजबूत और टिकाऊ खेती की जरूरत बढ़ रही है।
AgroStar की सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी पहल, Arya.ag का क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि पर ध्यान और Fasal की संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने वाली प्रिसिजन फार्मिंग यह दिखाती है कि एग्रीटेक कंपनियां तकनीक को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती से जोड़ रही हैं।
सिर्फ तकनीक से भारतीय कृषि में बड़ा बदलाव नहीं लाया जा सकता। स्टार्टअप्स को तकनीक के साथ कई व्यावहारिक समस्याओं का भी समाधान करना होगा। इनमें तकनीक की लागत, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी, किसानों में जागरूकता, भरोसा, छोटी और बिखरी हुई जमीनें, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय भाषाओं में सेवाओं की उपलब्धता जैसी चुनौतियां शामिल हैं।
इसलिए सफल एग्रीटेक कंपनियों को तकनीक के साथ मजबूत जमीनी नेटवर्क और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए बिजनेस मॉडल पर भी ध्यान देना होगा।
इस लेख में शामिल 10 एग्रीटेक स्टार्टअप्स यह साबित करते हैं कि भारत का एग्रीटेक इकोसिस्टम अब केवल खेती की सलाह देने वाले मोबाइल ऐप्स तक सीमित नहीं है। DeHaat किसानों के लिए कई सेवाओं को एक साथ जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है। Ninjacart ताजे कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन को डिजिटल बनाने पर काम कर रहा है। AgroStar कृषि सलाह को कृषि इनपुट और टिकाऊ खेती से जोड़ रहा है। वहीं, Arya.ag भंडारण, वित्त और अनाज के कारोबार को एक साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
CropIn खेती से जुड़े डेटा को उपयोगी जानकारी और इंटेलिजेंस में बदल रहा है। Fasal IoT और AI की मदद से प्रिसिजन हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा दे रहा है। Bijak कृषि जिंसों के कारोबार को डिजिटल बनाने की कोशिश कर रहा है। AgNext Technologies AI की मदद से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। Intello Labs ताजे कृषि उत्पादों की जांच में कंप्यूटर विजन का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, Unnati और Gramophone का संयोजन कृषि सेवाओं को एक बड़े और अधिक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की बढ़ती प्रवृत्ति को दिखाता है।
भारतीय एग्रीटेक का भविष्य इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि ये तकनीकें छोटे स्तर के प्रयोगों और अलग-अलग समाधानों से आगे बढ़कर लाखों किसानों के लिए सस्ती, भरोसेमंद और बड़े स्तर पर उपलब्ध सेवाओं में कितनी जल्दी बदलती हैं।
जैसे-जैसे AI, IoT, सैटेलाइट डेटा, कंप्यूटर विजन, डिजिटल फाइनेंस और सप्लाई चेन तकनीक आगे बढ़ेंगी, एग्रीटेक स्टार्टअप भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, पारदर्शी, जलवायु के प्रति मजबूत और बाजार से बेहतर तरीके से जुड़ा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।