भारत का सोलर एनर्जी सेक्टर अब केवल उभरते हुए रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह देश के बिजली क्षेत्र में हो रहे बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सोलर पावर प्लांट, रूफटॉप सोलर सिस्टम, बड़े स्तर की सोलर परियोजनाएं, सोलर पंप, बैटरी स्टोरेज और घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से विस्तार हो रहा है। इससे सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स, EPC कंपनियों और आम उपभोक्ताओं के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक भारत की कुल स्थापित सोलर क्षमता 168.04 गीगावाट (GW) पहुंच गई थी। इसमें जमीन पर लगाए गए सोलर प्रोजेक्ट्स की क्षमता 123.99 GW, ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम की क्षमता 32.59 GW, हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स से जुड़ी सोलर क्षमता 4.83 GW और ऑफ-ग्रिड सोलर की क्षमता 6.63 GW थी।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, भारत ने वर्ष 2025 के दौरान लगभग 50 GW नई सोलर PV क्षमता जोड़ी। इस तेजी के साथ सोलर एनर्जी देश में रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान देने वाले स्रोतों में शामिल हो गई है।
इसी बढ़ती मांग को देखते हुए भारत की सोलर कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार कर रही हैं। कंपनियां TOPCon और HJT जैसी नई और अधिक दक्ष तकनीकों को अपना रही हैं। साथ ही, देश में सोलर पैनल, सोलर सेल और अन्य जरूरी उपकरणों की घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कई कंपनियां सोलर पैनल के साथ इन्वर्टर, बैटरी स्टोरेज और अन्य ऊर्जा समाधान भी उपलब्ध करा रही हैं।
इस लेख में भारत के सोलर एनर्जी क्षेत्र में अलग-अलग स्तर पर काम करने वाली 10 प्रमुख कंपनियों और ब्रांड्स के बारे में जानकारी दी गई है। यह सूची लोगों को भारत के तेजी से बढ़ते सोलर उद्योग को समझने और प्रमुख कंपनियों की भूमिका के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसे कंपनियों के प्रदर्शन की किसी आधिकारिक या स्वतंत्र रैंकिंग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत में सोलर एनर्जी का क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, सोलर तकनीक की लागत में कमी आई है और सरकार भी अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसके अलावा, घरों और व्यवसायों में रूफटॉप सोलर सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है और भारत में सोलर उपकरणों के घरेलू निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत में सोलर ऊर्जा के विस्तार का अंदाजा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय यानी MNRE के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अगस्त 2026 तक देश में कुल 168.04 गीगावाट सोलर पावर क्षमता स्थापित हो चुकी थी। मार्च 2014 के अंत में यह क्षमता लगभग 2.82 गीगावाट थी। यानी पिछले एक दशक से अधिक समय में भारत की सोलर क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत में बिजली की मांग हर साल औसतन लगभग 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। एजेंसी का अनुमान है कि इसी अवधि में सोलर फोटोवोल्टिक बिजली उत्पादन में हर साल औसतन लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। वर्ष 2030 तक देश के कुल बिजली उत्पादन में सोलर ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
सोलर क्षेत्र में इस तेज वृद्धि के कारण सोलर पैनल, सोलर सेल, इन्वर्टर, बैटरी, माउंटिंग सिस्टम और अन्य उपकरणों की मांग भी बढ़ रही है। साथ ही, सोलर प्रोजेक्ट लगाने और उन्हें चलाने वाली EPC कंपनियों तथा ऊर्जा समाधान देने वाली कंपनियों के लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।
भारत अब सोलर उपकरणों के लिए दूसरे देशों से होने वाले आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए देश में सोलर सेल, मॉड्यूल और दूसरे जरूरी उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस दिशा में MNRE की Approved List of Models and Manufacturers यानी ALMM की महत्वपूर्ण भूमिका है। मंत्रालय सोलर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल और सेल के लिए स्वीकृत कंपनियों और मॉडलों की सूची जारी करता है। लागू नियमों के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कुछ परियोजनाओं के साथ-साथ कुछ ओपन-एक्सेस और नेट-मीटरिंग परियोजनाओं में केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले निर्माता और मॉडल ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
मार्च 2026 में सरकार ने ALMM व्यवस्था का दायरा बढ़ाते हुए इसमें इंगॉट और वेफर को भी शामिल किया। यह नया प्रावधान 1 जून 2028 से लागू होने वाला है। इसका उद्देश्य सोलर निर्माण की पूरी सप्लाई चेन में भारत में होने वाले उत्पादन और घरेलू मूल्यवर्धन को और बढ़ाना है।
नीचे दी गई कंपनियों का चयन सोलर मैन्युफैक्चरिंग, प्रोजेक्ट निर्माण, ऊर्जा समाधान, रूफटॉप सोलर, उपकरणों और संबंधित तकनीकों में उनकी मौजूदगी के आधार पर किया गया है। यह सूची किसी आधिकारिक या स्वतंत्र रैंकिंग का दावा नहीं करती है। इसका उद्देश्य भारत के सोलर एनर्जी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों और उनके काम को समझाना है।
iNVERGY Power Supply सोलर एनर्जी सिस्टम के एक महत्वपूर्ण हिस्से यानी इन्वर्टर और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर काम करती है। कई कंपनियां मुख्य रूप से सोलर मॉड्यूल बनाने पर ध्यान देती हैं, जबकि iNVERGY का फोकस सोलर सिस्टम से बनने वाली बिजली को बदलने, नियंत्रित करने और स्टोर करने वाली तकनीकों पर है।
कंपनी के उत्पादों में ऑन-ग्रिड इन्वर्टर, हाइब्रिड इन्वर्टर, ऑफ-ग्रिड सिस्टम, घरेलू एनर्जी स्टोरेज समाधान और कमर्शियल तथा इंडस्ट्रियल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शामिल हैं। कंपनी यूटिलिटी स्तर पर इस्तेमाल होने वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज समाधान भी उपलब्ध कराती है।
इसके हाइब्रिड इन्वर्टर सोलर पैनल से मिलने वाली बिजली, बैटरी और ग्रिड बिजली को एक साथ मैनेज करने में मदद करते हैं। इससे घर या व्यवसाय की जरूरत के अनुसार बिजली का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
कंपनी के कुछ हाइब्रिड सिस्टम में बैटरी मैनेजमेंट कम्युनिकेशन, वाई-फाई आधारित मॉनिटरिंग, मैक्सिमम पावर पॉइंट ट्रैकिंग और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इसका Hybrid OGH रेंज 1.5 किलोवाट से 6.2 किलोवाट तक के मॉडल पेश करता है और स्मार्ट मॉनिटरिंग को सपोर्ट करता है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर इन्वर्टर, हाइब्रिड सिस्टम, बैटरी, एनर्जी स्टोरेज और पावर मैनेजमेंट।
उपयुक्त उपयोग: घरों, कमर्शियल संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए।
Tata Power Solar भारत की सोलर एनर्जी इंडस्ट्री की प्रमुख और लंबे समय से सक्रिय कंपनियों में से एक है। यह कंपनी टाटा पावर के व्यापक रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार का हिस्सा है।
कंपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग, EPC सेवाओं, रूफटॉप सोलर, बड़े स्तर के सोलर प्रोजेक्ट्स और अलग-अलग ग्राहकों के लिए सोलर समाधान उपलब्ध कराने जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
कंपनी की प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में स्थित 4.3 गीगावाट की सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण सुविधा शामिल है। टाटा पावर के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में TP Solar ने 2.8 गीगावाट सोलर सेल और 2.9 गीगावाट सोलर मॉड्यूल का उत्पादन किया।
कंपनी की वित्त वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में उसके संचालन के तहत कुल 4.9 गीगावाट सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण क्षमता भी दर्ज की गई है।
टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी ने जनवरी 2026 तक 10 गीगावाट EPC प्रोजेक्ट्स के निष्पादन का आंकड़ा भी पार कर लिया था। इसमें 9.7 गीगावाट सोलर और 290 मेगावाट विंड प्रोजेक्ट शामिल थे।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल, EPC, रूफटॉप सोलर, बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स और सोलर पंप।
उपयुक्त उपयोग: घरों, कमर्शियल संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए।
Adani Solar भारत की प्रमुख सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल है। कंपनी सोलर उपकरणों के निर्माण को बड़े स्तर पर बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को एक ही व्यवस्था में लाने पर भी ध्यान दे रही है।
Adani Enterprises की 2026 की बिजनेस रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पास 4 गीगावाट सोलर सेल, 4 गीगावाट सोलर मॉड्यूल और 2 गीगावाट इंगॉट-वेफर निर्माण क्षमता है। कंपनी अपनी TOPCon तकनीक से जुड़ी निर्माण क्षमता का भी विस्तार कर रही है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में TOPCon सोलर सेल और मॉड्यूल की क्षमता में 6-6 गीगावाट की अतिरिक्त वृद्धि करने की योजना बताई है। यदि यह योजना तय समय के अनुसार पूरी होती है, तो कंपनी की कुल सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण क्षमता 10-10 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
सोलर उद्योग में इस तरह का बैकवर्ड इंटीग्रेशन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका कारण यह है कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग अब केवल तैयार मॉड्यूल बनाने तक सीमित नहीं रह गई है। उद्योग में सेल के साथ-साथ वेफर और इंगॉट जैसे शुरुआती स्तर के घटकों के घरेलू निर्माण पर भी जोर बढ़ रहा है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर सेल, सोलर मॉड्यूल, इंगॉट, वेफर और बड़े स्तर पर सोलर मैन्युफैक्चरिंग।
उपयुक्त उपयोग: बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स, औद्योगिक जरूरतों और बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए।
Waaree Energies ने सोलर मॉड्यूल और सेल के साथ-साथ कई अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को शामिल करते हुए एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म तैयार किया है।
कंपनी के अनुसार, उसके पास वर्तमान में 21.15 गीगावाट सोलर मॉड्यूल और 5.4 गीगावाट सोलर सेल निर्माण क्षमता है। कंपनी इन क्षमताओं को चीन के बाहर सबसे बड़ी क्षमताओं में शामिल बताती है।
Waaree का कारोबार केवल सोलर मॉड्यूल और सेल तक सीमित नहीं है। कंपनी सोलर इंगॉट, वेफर, इन्वर्टर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज, ट्रांसफॉर्मर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रही है। इसके अलावा, कंपनी टर्नकी EPC समाधान भी उपलब्ध कराती है।
कंपनी के अनुसार, उसके पास 7.5 गीगावाट से अधिक का रिन्यूएबल EPC पोर्टफोलियो है। कंपनी ने अपने उत्पादों और तकनीकों की विश्वसनीयता जांचने के लिए टेस्टिंग क्षमताओं पर भी जोर दिया है।
सोलर उद्योग के लिए इस तरह का विविध कारोबार महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है कि बढ़ते सोलर बाजार में अब केवल एक उपकरण की जरूरत नहीं होती। पैनल, सेल, इन्वर्टर, बैटरी, ट्रांसफॉर्मर और प्रोजेक्ट निर्माण जैसी कई सेवाओं और उपकरणों की जरूरत होती है। ऐसे में एकीकृत सप्लाई चेन कंपनियों को अलग-अलग चरणों में काम करने का अवसर देती है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल, EPC, एनर्जी स्टोरेज, इन्वर्टर और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर।
उपयुक्त उपयोग: बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स, कमर्शियल और औद्योगिक सोलर परियोजनाओं के लिए।
Vikram Solar भारत की स्थापित सोलर कंपनियों में से एक है। कंपनी का मुख्य ध्यान अधिक दक्षता वाले सोलर मॉड्यूल बनाने और देश में अपनी निर्माण क्षमता को बढ़ाने पर है।
अगस्त 2026 में कंपनी ने तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित गंगईकोंडान में 6 गीगावाट क्षमता वाले सोलर PV मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन किया। इससे कंपनी की घरेलू सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता को और बढ़ाने में मदद मिली है।
कंपनी सोलर निर्माण प्रक्रिया के दूसरे चरणों में भी आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। सितंबर 2026 में Vikram Solar ने Avaada Electro के साथ 1 गीगावाट N-type G12R TOPCon सोलर सेल के लिए 1,250 करोड़ रुपये के समझौते की घोषणा की। इन सेल का निर्माण भारत में किया जाना है और ये ALMM के निर्धारित मानकों के अनुरूप होंगे।
कंपनी ने भविष्य के लिए भी बड़े स्तर पर निर्माण क्षमता बढ़ाने की योजना बताई है। इसके लंबे समय के रोडमैप में 15.5 गीगावाट मॉड्यूल और 12 गीगावाट सोलर सेल निर्माण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य शामिल है। यह विस्तार बैकवर्ड इंटीग्रेशन के जरिए सोलर उत्पादन के अलग-अलग चरणों को मजबूत करने की दिशा में है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर PV मॉड्यूल, अधिक दक्षता वाली सोलर तकनीक, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और सोलर प्रोजेक्ट समाधान।
उपयुक्त उपयोग: बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स, कमर्शियल परियोजनाओं और उच्च गुणवत्ता वाले सोलर इंस्टॉलेशन के लिए।
Rayzon Solar भारत की उन नई सोलर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने कम समय में अपनी उत्पादन क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी की है।
कंपनी ने वर्ष 2018 में केवल 40 मेगावाट की उत्पादन क्षमता के साथ शुरुआत की थी। इसके बाद कंपनी ने अपनी क्षमता को लगातार बढ़ाया। कंपनी की प्रोफाइल के अनुसार, इसकी क्षमता 150 मेगावाट, 300 मेगावाट, 1.1 गीगावाट, 2.1 गीगावाट, 3 गीगावाट और फिर मार्च 2025 तक 6 गीगावाट तक पहुंच गई।
Rayzon Solar ने वर्ष 2026 में अपनी उत्पादन क्षमता को 10 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया है। हालांकि, 10 गीगावाट को कंपनी का लक्ष्य समझना चाहिए, न कि इसे पहले से चालू उत्पादन क्षमता मानना चाहिए।
कंपनी का तेजी से विस्तार यह दिखाता है कि भारत का घरेलू सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षेत्र किस तरह तेजी से बदल रहा है। देश में सोलर ऊर्जा की बढ़ती मांग के साथ नई कंपनियां भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बड़े प्रोजेक्ट्स की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर PV मॉड्यूल और बड़े स्तर पर सोलर मैन्युफैक्चरिंग।
उपयुक्त उपयोग: बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स, कमर्शियल परियोजनाओं और लागत को ध्यान में रखकर लगाए जाने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए।
Loom Solar ने घरेलू सोलर बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई है। कंपनी सोलर पैनल, इन्वर्टर, लिथियम बैटरी और घरों के लिए पूरे रूफटॉप सोलर सिस्टम उपलब्ध कराती है।
कंपनी के मौजूदा उत्पादों में N-type TOPCon पैनल, HJT पैनल और बाइफेशियल मॉड्यूल सहित कई तरह के सोलर उत्पाद शामिल हैं। इन तकनीकों का उपयोग अधिक बिजली उत्पादन और बेहतर ऊर्जा दक्षता के लिए किया जाता है।
Loom Solar घरों और छोटे व्यवसायों की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग क्षमता वाले सोलर सिस्टम भी उपलब्ध कराती है। कंपनी का मुख्य ध्यान आम ग्राहकों पर है। इससे उन लोगों के लिए सोलर तकनीक को अपनाना आसान हो सकता है, जिन्हें बड़े औद्योगिक सोलर प्रोजेक्ट की जरूरत नहीं होती है।
कंपनी ने अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस के बारे में भी जानकारी दी है। इसमें सोलर सेल की कटिंग, स्ट्रिंगिंग, लेमिनेशन, इलेक्ट्रोल्यूमिनेसेंस टेस्टिंग, फ्रेमिंग और अंतिम गुणवत्ता जांच जैसे चरण शामिल हैं।
इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य तैयार सोलर मॉड्यूल की गुणवत्ता और प्रदर्शन की जांच करना है।
प्रमुख क्षेत्र: घरेलू सोलर पैनल, रूफटॉप सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और लिथियम बैटरी।
उपयुक्त उपयोग: घरों, छोटे व्यवसायों और छोटे स्तर पर बिजली उत्पादन करने वाले सोलर सिस्टम के लिए।
Saatvik Solar भारत के तेजी से विस्तार कर रहे सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियों में से एक है। कंपनी सोलर मॉड्यूल के साथ-साथ सेल निर्माण और उत्पादन प्रक्रिया के दूसरे चरणों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर काम कर रही है।
कंपनी की अंबाला स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लगभग 4.8 गीगावाट सालाना सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता है। इसके अलावा, कंपनी ओडिशा में एकीकृत सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है।
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में उसका उत्पादन 3,162 मेगावाट रहा। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का ऑर्डर बुक लगभग 5.89 गीगावाट था।
अगस्त 2026 में Saatvik Solar ने ओडिशा सरकार के साथ एक प्रस्तावित 3.6 गीगावाट सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए समझौता किया। इसकी पहली चरण की योजना में 2.4 गीगावाट सोलर सेल और 4 गीगावाट सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता विकसित करना शामिल है।
कंपनी N-type TOPCon सोलर सेल निर्माण को भी आगे बढ़ा रही है। इसके अलावा, ओडिशा में प्रस्तावित 2.4 गीगावाट सेल निर्माण सुविधा के लिए कंपनी ने ALMM List-II में शामिल होने के लिए आवेदन किया है।
इन योजनाओं से पता चलता है कि भारत का सोलर उद्योग केवल मॉड्यूल बनाने से आगे बढ़कर सेल और अन्य शुरुआती स्तर के घटकों के घरेलू निर्माण पर भी ध्यान दे रहा है। इसे सोलर सप्लाई चेन में बैकवर्ड इंटीग्रेशन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल, TOPCon तकनीक, EPC और एकीकृत सोलर मैन्युफैक्चरिंग।
उपयुक्त उपयोग: बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल सोलर परियोजनाओं के लिए।
Goldi Solar ने गुजरात में अपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का तेजी से विस्तार किया है। कंपनी उत्पादन में ऑटोमेशन और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर भी अधिक ध्यान दे रही है।
कंपनी के अनुसार, उसकी मौजूदा सालाना सोलर PV मॉड्यूल निर्माण क्षमता 15.2 गीगावाट है। गुजरात में कंपनी AI आधारित मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं संचालित करती है। इसके साथ ही, कंपनी सोलर सेल निर्माण क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है, ताकि सोलर उत्पादन की पूरी प्रक्रिया में उसकी भागीदारी बढ़ सके।
Goldi Solar ने पहले अपनी मॉड्यूल निर्माण क्षमता को 3 गीगावाट से बढ़ाकर 14 गीगावाट करने और 4 गीगावाट सोलर सेल निर्माण क्षमता स्थापित करने की योजना की घोषणा की थी। कंपनी की नई जानकारी के अनुसार, उसकी मॉड्यूल निर्माण क्षमता अब 15.2 गीगावाट बताई गई है। इससे पता चलता है कि कंपनी ने पिछले कुछ समय में अपनी विस्तार योजनाओं को काफी तेजी से आगे बढ़ाया है।
कंपनी भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोलर उत्पाद उपलब्ध कराती है। इसका ध्यान अधिक दक्षता वाले सोलर मॉड्यूल के निर्माण पर है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर PV मॉड्यूल, ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग और सोलर तकनीक।
उपयुक्त उपयोग: घरेलू, कमर्शियल और बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए।
RenewSys भारत के सोलर उद्योग में एक अलग तरह की भूमिका निभाती है। कंपनी सोलर मॉड्यूल के साथ-साथ उनमें इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण घटकों का भी निर्माण करती है।
कंपनी के अनुसार, यह भारत की पहली ऐसी एकीकृत कंपनियों में से है जो सोलर PV मॉड्यूल के साथ एनकैप्सुलेंट, बैकशीट और सोलर सेल जैसे प्रमुख घटकों का भी निर्माण करती है। कंपनी की निर्माण सुविधाएं भारत और मध्य पूर्व में मौजूद हैं और इसके उत्पाद 50 से अधिक देशों में पहुंचते हैं।
मार्च 2026 में RenewSys ने महाराष्ट्र के खोपोली में 3 गीगावाट क्षमता वाली AI आधारित और पूरी तरह ऑटोमेटेड सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग सुविधा शुरू की। इसके बाद कंपनी की कुल मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़कर 5.6 गीगावाट हो गई।
कंपनी के मौजूदा निर्माण पोर्टफोलियो में एनकैप्सुलेंट, बैकशीट और सोलर सेल भी शामिल हैं। मई 2026 में कंपनी के N-type TOPCon सोलर सेल को MNRE की ALMM List-II में भी शामिल किया गया।
कंपनी के अनुसार, RenewSys को 2026 Kiwa PVEL PV Module Reliability Scorecard में Top Performer के रूप में भी मान्यता मिली है। यह स्कोरकार्ड सोलर मॉड्यूल की विश्वसनीयता और प्रदर्शन से जुड़े परीक्षणों के लिए जाना जाता है।
प्रमुख क्षेत्र: सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल, एनकैप्सुलेंट, बैकशीट और PV घटक।
उपयुक्त उपयोग: बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स, कमर्शियल परियोजनाओं और रूफटॉप सोलर की सप्लाई चेन के लिए।
किसी कंपनी की सोलर मॉड्यूल या सेल निर्माण क्षमता उसके बड़े स्तर पर काम करने का संकेत दे सकती है। लेकिन सोलर सिस्टम खरीदते समय केवल उत्पादन क्षमता को ही सबसे महत्वपूर्ण आधार नहीं मानना चाहिए।
ग्राहकों और व्यवसायों को सोलर सिस्टम खरीदने या EPC कंपनी के साथ समझौता करने से पहले कई अन्य बातों की भी जांच करनी चाहिए।
बाजार में अलग-अलग तकनीक वाले सोलर पैनल उपलब्ध हैं। इनमें TOPCon, HJT, Mono PERC और Bifacial जैसी तकनीकें शामिल हैं।
पैनल चुनते समय केवल उसकी वाट क्षमता नहीं देखनी चाहिए। पैनल की दक्षता, समय के साथ बिजली उत्पादन में होने वाली कमी, अलग-अलग तापमान में प्रदर्शन और वारंटी की शर्तों की भी तुलना करनी चाहिए।
इससे ग्राहक को अपनी जरूरत और स्थान के अनुसार सही सोलर पैनल चुनने में मदद मिल सकती है।
जिन सोलर प्रोजेक्ट्स में ALMM की शर्त लागू होती है, वहां संबंधित निर्माता और खास मॉडल की मौजूदा MNRE स्वीकृति की जांच करना जरूरी है।
ALMM की सूची समय-समय पर अपडेट होती रहती है। इसलिए केवल पुरानी सूची या पुराने दस्तावेजों के आधार पर कंपनी या मॉडल का चुनाव करने से बचना चाहिए। खरीद या प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले मौजूदा स्थिति की पुष्टि करना बेहतर होता है।
सोलर सिस्टम लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए लगाए जाते हैं। इसलिए केवल पैनल की कीमत या क्षमता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है।
खरीदारी से पहले वारंटी की अवधि, सर्विस की उपलब्धता, खराब उपकरण बदलने की नीति, सिस्टम की मॉनिटरिंग सुविधा और कंपनी की बिक्री के बाद की सेवा के बारे में जानकारी लेनी चाहिए।
प्रदाता कंपनी की लंबे समय तक सेवा देने की क्षमता भी बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है।
सोलर सिस्टम केवल सोलर पैनल से नहीं बनता है। इसमें इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, केबल, सुरक्षा उपकरण, बैटरी, मॉनिटरिंग सिस्टम और इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अगर इन हिस्सों में से किसी एक की गुणवत्ता या इंस्टॉलेशन सही नहीं है, तो पूरे सिस्टम के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर रूफटॉप सोलर सिस्टम में सही इंस्टॉलेशन बहुत जरूरी है।
अच्छी गुणवत्ता वाले सोलर पैनल लगाने के बावजूद यदि पैनल सही तरीके से लगाए नहीं गए हैं, उनकी दिशा और झुकाव उचित नहीं है या वायरिंग और अन्य उपकरणों में समस्या है, तो बिजली उत्पादन उम्मीद के अनुसार नहीं हो सकता है।
इसलिए सोलर कंपनी चुनते समय केवल पैनल की क्षमता या कंपनी के नाम पर ध्यान देने के बजाय तकनीक, गुणवत्ता, प्रमाणन, वारंटी, सर्विस, अन्य उपकरणों और इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखना चाहिए।
भारत का सोलर एनर्जी क्षेत्र अब विकास के एक नए चरण में पहुंच रहा है। आने वाले समय में केवल सोलर पैनल की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, बेहतर तकनीक, एनर्जी स्टोरेज और मजबूत सप्लाई चेन भी इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अगस्त 2026 तक भारत में 168.04 गीगावाट सोलर पावर क्षमता स्थापित हो चुकी थी। वहीं, IEA के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में लगभग 50 गीगावाट सोलर PV क्षमता जोड़ी गई। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में सोलर ऊर्जा का विस्तार कितनी तेजी से हो रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। Mercom India के अनुसार, दिसंबर 2025 तक देश की कुल सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता लगभग 210 गीगावाट पहुंच गई थी। इसी अवधि में सोलर सेल निर्माण क्षमता करीब 27 गीगावाट थी। रिपोर्ट के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत में लगभग 119 गीगावाट नई मॉड्यूल निर्माण क्षमता और 9 गीगावाट से अधिक नई सेल निर्माण क्षमता जोड़ी गई।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत का सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। देश में केवल सोलर पैनल बनाने की क्षमता ही नहीं बढ़ रही है, बल्कि सेल और अन्य जरूरी घटकों के घरेलू निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, आने वाले समय में केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। मैन्युफैक्चरिंग के साथ बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक तकनीक, कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता, मजबूत सप्लाई चेन, सोलर उपकरणों की रीसाइक्लिंग और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की क्षमता भी जरूरी होगी।
इन सभी क्षेत्रों में सुधार होने से भारत अपने सोलर एनर्जी सेक्टर को अधिक मजबूत और टिकाऊ बना सकता है।
वर्ष 2026 में भारत का सोलर एनर्जी क्षेत्र कई अलग-अलग हिस्सों को एक साथ जोड़ रहा है। इसमें बड़े स्तर के सोलर प्रोजेक्ट्स, रूफटॉप सोलर, सोलर मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज और नई तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
Tata Power Solar, Adani Solar, Waaree Energies, Vikram Solar, Rayzon Solar, Loom Solar, Saatvik Solar, Goldi Solar और RenewSys जैसी कंपनियां सोलर उद्योग के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। वहीं, iNVERGY Power Supply मुख्य रूप से सोलर इन्वर्टर और एनर्जी स्टोरेज समाधान के क्षेत्र में काम करती है।
भारत के सोलर उद्योग की वृद्धि को देश में बढ़ती बिजली की मांग और तेजी से बढ़ती घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही, ALMM और घरेलू निर्माण से जुड़े नियमों जैसी सरकारी पहलों से कंपनियों को देश में सोलर सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
ग्राहकों के लिए सोलर कंपनियों की बढ़ती संख्या का मतलब है कि उनके पास अब पहले की तुलना में अधिक विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, विकल्प बढ़ने के साथ सही जानकारी के आधार पर फैसला लेना भी जरूरी हो गया है।
सोलर सिस्टम खरीदते समय केवल कीमत या कंपनी के नाम को आधार नहीं बनाना चाहिए। ग्राहकों को सोलर पैनल की तकनीक, प्रमाणपत्र, वारंटी की शर्तें, इंस्टॉलेशन की गुणवत्ता, बिक्री के बाद मिलने वाली सेवा और लंबे समय तक सिस्टम के प्रदर्शन जैसी बातों की भी जांच करनी चाहिए।
भारत में सोलर बिजली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग भी मजबूत हो रही है। आने वाले समय में सोलर ऊर्जा का संबंध बैटरी स्टोरेज, स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के साथ और मजबूत हो सकता है।
इस लेख में शामिल कंपनियां भारत के तेजी से बदलते सोलर एनर्जी क्षेत्र की विविधता को समझने का एक उदाहरण देती हैं। कोई कंपनी मॉड्यूल और सेल बनाती है, कोई बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स पर काम करती है, तो कोई इन्वर्टर, बैटरी और एनर्जी स्टोरेज जैसे समाधान उपलब्ध कराती है। इन सभी क्षेत्रों का विकास मिलकर भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है।