भारत बढ़ते अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अक्षय विकास की ओर अग्रसर

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25 Jun 2022
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नवीकरणीय संसाधनों का सबसे बेहतर विकल्प है सौर ऊर्जा । भारत 2021 में अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों में तीसरे स्थान पर है। भारत केवल चीन (136 गीगावाट) और अमेरिका (43 गीगावॉट) से पीछे रहते हुए 15.4 गीगावॉट के साथ 2021 में कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के लिए विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है। ऊर्जा के वो प्राकृतिक स्रोत जिनका क्षय नहीं होता या जिनका नवीकरण होता रहता है और जो प्रदूषणकारी नहीं हैं, उन्हे ही अक्षय ऊर्जा का स्रोत कहा जाता है। जैसे सूर्य, जल, पवन, ज्वार-भाटा, भूताप आदि और सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत उर्जा, ज्वार-भाटा से प्राप्त उर्जा, बायोमास, जैव इंधन आदि नवीनीकरणीय उर्जा के उदाहरण हैं। ये ग्लोबल वार्मिंग तथा जलवायु परिवर्तन से बचाव करते हैं। अक्षय ऊर्जा, अक्षय विकास #Renewable Developmentका प्रमुख स्तम्भ है। अक्षय उर्जा, ऊर्जा का ऐसा विकल्प है जो असीम और पूरे विश्व के हित में है। इस लेख में आप नवीकरणीय ऊर्जा Renewable Energy और भारत में इसके प्रदर्शन के बारे में जानेंगे। 

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अक्षय ऊर्जा Renewable Energy एक ऐसी ऊर्जा है जो दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग Global warming से मुक्ति दिला सकती है।  दुनिया के सभी देश पृथ्वी के बढ़ते तापमान को लेकर चिंतित हैं और इस कोशिश में जुटे हैं कि ऊर्जा की ऐसी तकनीक विकसित की जाए जिससे ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। वैसे इन गैसों के उत्सर्जन के लिए काफ़ी हद तक मानवीय गतिविधियां ज़िम्मेदार हैं। जीवाश्म ईंधन का प्रयोग, इमारतों का निर्माण, औद्योगिक विकास, पशुपालन, जंगलों की कटाई जैसी गतिविधियों ने ग्रीन हाउस गैसों Greenhouse Gases के उत्सर्जन में वृद्धि की है। यदि ये सिलसिला ऐसे ही तरह चलता रहा तो पृथ्वी का बहुत सा हिस्सा रहने लायक़ नहीं बचेगा इसलिए हम सबको मिलकर इसका विकल्प ढूंढ़ना होगा। इन्ही बातों को देखते हुए अक्षय ऊर्जा Renewable Energy के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है और इसको बढ़ावा दिया जा रहा है। अक्षय ऊर्जा तेल के आयात को कम करने और भारत को कार्बन मुक्त राष्ट्र #carbon free nation बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अक्षय ऊर्जा के फायदों को देखते हुए दुनिया के अधिकतम देश अब जागरूक हो रहे हैं और सौर ऊर्जा solar energy का इस्तेमाल कर रहे हैं। सौर ऊर्जा कभी खत्म न होने वाला संसाधन solar energy a never ending resource है और यह नवीकरणीय संसाधनों renewable resources का एक बेहतर विकल्प है। साथ ही यह वातावरण के लिये भी लाभदायक beneficial to the environment है और ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में यह काफी सस्ता भी है। ऊर्जा की मांग को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बजाय सौर ऊर्जा के ज़रिये आसानी से पूरा किया जा सकता है। इन्ही का नतीजा है कि भारत 2021 में अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों में तीसरे स्थान पर है। तो चलिए आज इस आर्टिकल में अक्षय ऊर्जा क्या है और अक्षय ऊर्जा में Renewable Energy में भारत का प्रदर्शन कैसा है विस्तार से जानते हैं। 

अक्षय ऊर्जा क्या है ? What is renewable energy?

ऊर्जा के वो प्राकृतिक स्रोत जिनका क्षय नहीं होता या जिनका नवीकरण होता रहता है और जो प्रदूषणकारी नहीं हैं, उन्हे ही अक्षय ऊर्जा का स्रोत कहा जाता है। जैसे सूर्य, जल, पवन, ज्वार-भाटा, भूताप आदि और सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत उर्जा, ज्वार-भाटा से प्राप्त उर्जा, बायोमास, जैव इंधन solar energy, wind energy, hydroelectric energy, tidal energy, biomass, biofuel आदि नवीनीकरणीय उर्जा के उदाहरण हैं। ऊर्जा का पर्यावरण से सीधा सम्बन्ध है। ऊर्जा के परम्परागत साधन (कोयला, गैस, पेट्रोलियम आदि) सीमित मात्रा में होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिये बहुत हानिकारक हैं। दूसरी तरफ ऊर्जा के ऐसे विकल्प हैं जो पूरणीय हैं तथा जो पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुंचाते, इन्हे ही अक्षय ऊर्जा या नवीनीकरणीय उर्जा कहते हैं। ये ग्लोबल वार्मिंग तथा जलवायु परिवर्तन global warming and climate change से बचाव करते हैं। अक्षय ऊर्जा, अक्षय विकास Renewable Development का प्रमुख स्तम्भ है। अक्षय उर्जा, ऊर्जा का ऐसा विकल्प है जो असीम और पूरे विश्व के हित में है। हर साल 20 अगस्त को भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस या अक्षय ऊर्जा दिवस #Renewable Energy Day भी मनाया जाता है। यह दिन भारत में अक्षय ऊर्जा संसाधनों के महत्व को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। सौर ऊर्जा पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। जब इसे उपयोग किया जाता है तो यह पर्यावरण में कार्बनडाईआक्साइड carbon dioxide सहित हानिकारक गैसें नहीं छोड़ती जिससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है। सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए विद्युत या गैस ग्रिड की आवश्यकता नहीं होती है और अक्षय ऊर्जा स्रोत वर्ष पर्यन्त उपलब्ध होने के साथ साथ सुरक्षित और भरोसेमंद भी है। 

नवीकरणीय ऊर्जा Renewable Energy में भारत का प्रदर्शन

अक्षय ऊर्जा- अक्षय ऊर्जा की बात करें तो भारत वर्ष 2021 में चीन और अमेरिका के बाद अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों में तीसरे स्थान पर है। 

नई सौर फोटोवोल्टिक क्षमता- नई सौर फोटोवोल्टिक क्षमता के लिये भारत एशिया का दूसरा और विश्व में तीसरा सबसे बड़ा बाज़ार है। 

पनबिजली क्षमता- भारत ने वर्ष 2021 में 843 मेगावाट की hydroelectric potential पनबिजली क्षमता वृद्धि की, जिससे कुल क्षमता बढ़कर 45.3 गीगावॉट हो गई। 

कुल संस्थापन- कुल संस्थापन की बात करें तो भारत,जर्मनी (59.2 GW) को पछाड़ते हुए कुल प्रतिष्ठानों (60.4 GW) की क्षमता में चौथे स्थान पर आ गया है। 

2021 में अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों में भारत तीसरे स्थान पर

नवीकरणीय ऊर्जा नीति नेटवर्क’ (Renewable Energy Policy Network for the 21st Century – REN21) द्वारा प्रकाशित एक ‘नवीकरणीय 2022 वैश्विक स्थिति रिपोर्ट’ (Renewable 2022 Global status report) के अनुसार, भारत 2021 में ‘नवीकरणीय ऊर्जा प्रतिष्ठानों’ (Renewable Energy Installations) या अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों में तीसरे स्थान पर है। नवीकरणीय संसाधनों का सबसे बेहतर विकल्प है सौर ऊर्जा। भारत केवल चीन (136 गीगावाट) और अमेरिका (43 गीगावॉट) से पीछे रहते हुए 15.4 गीगावॉट के साथ 2021 में कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के लिए विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है। वैश्विक संदर्भ में बात करें तो कुल मिलाकर सभी देशों ने 2021 में लगभग 3,146 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित की गयी जोकि पिछले वर्ष की तुलना में 11% अधिक है। COVID-19 महामारी के प्रभावों के बावजूद, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और स्थापना Investing and setting up renewable energy दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई।

अक्षय ऊर्जा पर रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव की बात करें तो यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने ऊर्जा संकट को और बढ़ा दिया है। रूस के यूक्रेन पर आक्रमण से चल रही ऊर्जा समस्या काफी बढ़ गई थी, जिसने 136 से अधिक देशों को भी हिलाकर रख दिया था जो जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भर थे। हालांकि, सरकारों ने जीवाश्म ईंधन के उत्पादन और सब्सिडी को बढ़ाकर इसका प्रत्युत्तर दिया है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में ‘दो अरब टन से अधिक उत्सर्जन’ के साथ 6% की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।

आज भारत द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। भारत ने सौर फोटोवोल्टिक (Solar Photovoltaic Energy) ऊर्जा, पवन और जल विद्युत जैसे स्रोतों के माध्यम से 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य की घोषणा की है। वर्तमान में, भारत में लगभग 197 बिलियन डॉलर की परियोजनाएं चल रही हैं। 2021 में, भारत में अपनी ‘नेट मीटरिंग योजना’ (Net Metering Scheme) के तहत ‘सौर फोटोवोल्टिक प्रतिष्ठानों’ पर निर्धारित सीमा को बढ़ा दिया गया, जिसके बाद देश का ‘रूफटॉप पीवी बाजार’ Rooftop PV Bazaar' रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।

राजस्थान बना 10 गीगावॉट सौर क्षमता को पार करने वाला पहला राज्य

राजस्थान Rajasthan की सौर ऊर्जा नीति 2019, जिसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2024-25 तक 30 गीगावाट सौर ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करना है। राजस्थान में कुल 32.5 GW स्थापित बिजली क्षमता है। राजस्थान की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का काफी योगदान है -अक्षय ऊर्जा स्थापित बिजली क्षमता का 55% योगदान देती है, तापीय ऊर्जा का योगदान 43% है और परमाणु ऊर्जा शेष 2% का योगदान करती है। राजस्थान भारत में उच्चतम सौर विकिरण स्तर प्राप्त करता है। राजस्थान में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं जैसे -सौर परियोजनाओं को चालू करने के लिए राजस्थान में भूमि की उपलब्धता है।

मेरकॉम के इंडिया सोलर प्रोजेक्ट ट्रैकर (India Solar Project Tracker) के अनुसार, राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने बड़े पैमाने पर 10 गीगावॉट के संचयी सौर प्रतिष्ठानों (cumulative large-scale solar installations) को पार कर लिया है। मेरकॉम इंडिया Mercom India, यह अमेरिका स्थित मेरकॉम कैपिटल ग्रुप की सहायक कंपनी है। यह एक स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान और संचार फर्म है जो भारतीय क्लीनटेक बाजारों में विशेषज्ञता प्रदान करती है। दिसंबर 2021 तक, भारत की संचयी सौर स्थापित क्षमता 55GW है। 

राजस्थान में सौर ऊर्जा के हिस्से की बात करें तो राजस्थान में सौर प्रमुख स्रोत है, जो बिजली क्षमता मिश्रण का लगभग 36% और नवीकरणीय ऊर्जा का 64% हिस्सा है। मेरकॉम के इंडिया सोलर प्रोजेक्ट ट्रैकर के अनुसार, राजस्थान में 16 गीगावाट से अधिक सौर परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं।

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ग्रीन ओपन एक्सेस नियम, 2022

ग्रीन ओपन एक्सेस नियम Green open access rules, 2022 के तहत बिजली मंत्रालय ने विश्वसनीय, सस्ती, टिकाऊ और हरित ऊर्जा green energy तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों में तेजी लाने के लिए ग्रीन ओपन एक्सेस नियम, 2022 को अधिसूचित किया है। दरअसल इसका उद्देश्य अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्रों सहित हरित ऊर्जा के उत्पादन, खरीद और खपत को प्रोत्साहित करना To encourage the production, purchase and consumption of green energy है। इसका महत्व ये है कि हरित ऊर्जा वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा स्वैच्छिक आधार पर खरीदी जा सकती है। अधिसूचित नियम हरित ऊर्जा की खुली पहुंच के लिए अधिक सरलीकृत प्रक्रिया की अनुमति देते हैं।

ग्रीन ओपन एक्सेस नियम 2022 की विशेषताओं के बारे में भी जान लेते हैं-छोटे उपभोक्ताओं को खुली पहुंच के माध्यम से अक्षय ऊर्जा खरीदने की अनुमति देने के लिए हरित ऊर्जा के लिए खुली पहुंच लेनदेन सीमा को 1 मेगावाट से घटाकर 100 किलोवाट (KW) कर दिया गया है। यह ओपन एक्सेस एप्लिकेशन की अनुमोदन प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रदान करता है, जो एक राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से सुलभ होगा। यदि उपभोक्ता हरित ऊर्जा का उपयोग करते हैं, तो उन्हें हरित प्रमाणपत्र Green certificate प्राप्त होगा। यह वितरण लाइसेंसधारी के साथ अधिशेष हरित ऊर्जा के बैंकिंग को अनिवार्य करता है। उपयुक्त आयोग हरित ऊर्जा के लिए अलग से शुल्क निर्धारित करेगा। यह ओपन एक्सेस चार्ज पर ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं को अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा, जिसमें ट्रांसमिशन, व्हीलिंग, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और स्टैंडबाय चार्ज शामिल हैं।

नवीकरणीय वैश्विक स्थिति रिपोर्ट 2022 Renewables Global Status Report

 नवीकरणीय वैश्विक स्थिति रिपोर्ट Renewables Global Status Report स्थानीय ऊर्जा उत्पादन और मूल्य शृंखलाओं के माध्यम से अधिक विविध तथा समावेशी ऊर्जा शासन प्राप्त करने की क्षमता सहित नवीकरणीय -आधारित अर्थव्यवस्था एवं समाज द्वारा वहन किये गए अवसरों पर प्रकाश डालती है। अभी हाल ही में REN21 (21वीं सदी के लिये अक्षय ऊर्जा नीति नेटवर्क) द्वारा नवीकरणीय वैश्विक स्थिति रिपोर्ट 2022 (GSR 2022) जारी की गई थी। 

नवीकरणीय ऊर्जा वैश्विक स्थिति रिपोर्ट 2022, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में हुई प्रगति का दस्तावेज़ीकरण करती है। अपनी कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय ऊर्जा की उच्च हिस्सेदारी वाले देश ऊर्जा स्वतंत्रता और सुरक्षा के उच्च स्तर सुनिश्चित करते हैं। दरअसल REN21 नवीकरणीय अभिकर्त्ताओं का एक वैश्विक समूह A global group of renewable agents है और इसमें भारत सरकार, वैज्ञानिक, गैर-सरकारी संगठन और उद्योग जगत के सदस्य शामिल होते हैं। इन्होंने दुनिया भर के देशों में अक्षय ऊर्जा प्रतिष्ठानों, बाज़ारों, निवेश और नीतियों पर पूरा डेटा तैयार किया है। 

इस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएंँ ये हैं कि सरकारों ने वर्ष 2021 में शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिये जो बातें की हैं, उनमें वास्तविकता यह है कि ऊर्जा संकट के जवाब में, अधिकांश देश जीवाश्म ईंधन के नए स्रोतों की तलाश कर रहे हैं और कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा देशों द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा शेयरों का एक विश्व मानचित्र A world map of renewable energy stocks प्रदान किया गया है। नवंबर 2021 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में नवंबर 2021 में रिकॉर्ड 135 देशों ने 2050 तक शुद्ध शून्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन #Net zero greenhouse gas emissions प्राप्त करने का संकल्प लिया।

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये भारत की बड़ी पहल India's big initiative to promote renewable energy

पवन ऊर्जा क्रांति- स्वच्छ ऊर्जा निर्माण और साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये भारत के मज़बूत पवन ऊर्जा क्षेत्र का लाभ उठाना। 

राष्ट्रीय सौर मिशन National Solar Mission (NSM)- दुनिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम के केंद्र में 100 GW की सौर महत्वाकांक्षा। 

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राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और SATAT- ईंधन आयात को कम करने, स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाने, कचरे का प्रबंधन करने और रोजगार सृजित करने के लिये मूल्य शृंखला का निर्माण। 

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन International Solar Alliance (ISA)- संपूर्ण मानव विकास के लिये सूर्य की शक्ति का दोहन। 

राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन National Hydrogen Energy Mission (NHEM)- स्वच्छ ईंधन की खोज करना। 

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना- भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मूल्य शृंखला में एकीकृत करना 

लघु जल विद्युत Small hydro power (SHP)- दूरदराज के समुदायों को आर्थिक मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिये पानी की शक्ति का उपयोग करना। 

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