बढ़ते इंजीनियरिंग कॉलेज घटती इंजीनियरिंग

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16 Sep 2021
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देश में जो शिक्षा का स्तर था वह भी आगे बढ़ रहा है। लेकिन देश में अगर हम इंजीनियरिंग कॉलेज की बात करें तो इंजीनियरिंग कॉलेज की तादाद बढ़ गई है पर कहीं ना कहीं हमें इंजीनियरिंग घटती नजर आती है।

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भारत देश बदल रहा है, नई तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा है। देश में पिछले दो दशकों में हजारों लाखों इंजीनियरिंग कॉलेज खुल चुके हैं। देश में जो शिक्षा का स्तर था वह भी आगे बढ़ रहा है। लेकिन देश में अगर हम इंजीनियरिंग कॉलेज की बात करें तो इंजीनियरिंग कॉलेज की तादाद बढ़ गई है पर कहीं ना कहीं हमें इंजीनियरिंग घटती नजर आती है। पहले के दौर में इंजीनियरिंग कॉलेज तो कम हुआ करते थे लेकिन शिक्षा का स्तर काफी गहरा हुआ करता था, जो लोग पढ़ते थे उसे अमल में लाकर वह बड़े योगदान और अविष्कार किया करते थे। आज की तारीख में देश में ढेरों इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, लेकिन वहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले इंजीनियर कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

कई वर्षों से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत ने ढेरों ऊंचाइयों छुई हैं यह देश के लिए गर्व की बात है। आज देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की कमी नहीं है। छात्र इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिग्री लेकर देश और विदेश में नाम कमा रहे हैं पर सिक्के का दूसरा पहलू यह बात भी बयां करता है कि इस क्षेत्र में लाखों इंजीनियरिंग कॉलेज खोल देने से शिक्षा का स्तर नहीं बढ़ जाता। भले ही देश में कॉलेज कम  हों मगर पढ़ाई का स्तर बढ़े तो यह बड़ी उन्नति की बात होगी।

सिर्फ डिग्री हासिल कर अविष्कार नहीं कर सकते

देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की बढ़ोतरी होना काफी अच्छी बात है पर कोई सिर्फ डिग्री हासिल कर बड़े अविष्कार नहीं कर सकता अगर इंजीनियरिंग कॉलेजों में अच्छी पढ़ाई मुहैया नहीं कराई गई तो छात्रों का बड़ा नुकसान होगा। आंकड़ों के मुताबिक भारत में लाखों की तादाद में इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र दाखिला लेते हैं लेकिन पढ़ाई के नाम पर इन छात्रों को कुछ नहीं मिलता। जो पढ़ाई में खुद अपना ध्यान झोंक कर आगे बढ़ते हैं वह तो किसी तरह रोजगार पा लेते हैं लेकिन वह भी कोई बड़े कारनामे नहीं कर पाते और जो बच्चे कुछ अच्छा करते हैं वह कौशल के मामले में फिसड्डी रह जाते हैं।

सर्वे के मुताबिक

एक सर्वे के मुताबिक 90 से 94% इंजीनियर कौशल के नाम पर काबिल नहीं होते। एक कंपनी में इंजीनियरों का चयन करने वाले मैनेजर ने बताया कि उन्होंने छात्रों से लेकर अनुभवी लोगों तक के साक्षात्कार लिए हैं और वह भी इस सर्वे को बिल्कुल सही मानते हैं। आज नौकरी पाने के लिए जिस कौशल की जरूरत होती है, उसमें से 60% भी अगर कंपनी किसी कर्मचारी में देखती है तो वह चयनित कर लेती है। आजकल काम के लोग बड़ी मशक्कत के बाद मिलते हैं। कंपनी नए लोगों को काफी कुछ सिखाती है जिसका समय करीब 6 महीने से साल भर का होता है, जिसके बाद कर्मचारी अच्छी तरह काम करने लायक बनते हैं। अगर यह सारे कौशल छात्र पढ़ाई के वक्त ही सीख लें तो यह घटती इंजीनियरिंग का मुद्दा ही खत्म हो जाए। जब छात्र कॉलेज के दौरान ही  सब कुछ अच्छी तरह सीख लेगा तो उसे कंपनी को कुछ सिखाना नहीं पड़ेगा। जिसके कारण वह अपने पेशे में  आसानी से वरिष्ठता हासिल कर सकता है।

छात्रों का अनौपचारिक व्यवहार भी है बड़ा कारण

हर बार गलती स्कूल कॉलेजों की नहीं होती कई बार छात्रों का अनौपचारिक व्यवहार भी शिक्षा के स्तर को गिराता है। छात्र देखते हैं कि ढेरों कॉलेज हैं हमें कहीं भी एडमिशन मिलेगा, हम कहीं भी पढ़ेंगे, जैसे चाहेंगे वैसे रहेंगे। अपनी इस मस्त मौला गतिविधि के चलते वह अपनी शिक्षा का कितना नुकसान करते हैं यह उन्हें आने वाले कुछ वर्षों में पता चलता है, जब उनके साथी आगे निकल जाते हैं। छात्रों को यह पता नहीं होता कि वह अपने आप को धोखा देकर अपने आने वाले भविष्य के साथ बड़ा धोखा कर रहे हैं।

बढ़ते कॉलेजों में हो सख्त शिक्षक

छात्रों को भी अपने व्यवहार में बदलाव लाकर सजग होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। शिक्षा देने के प्रति शिक्षक तो हमेशा अच्छा काम करना चाहते हैं लेकिन छात्रों का अनौपचारिक व्यवहार देखकर वह भी बदल गए हैं। आजकल ढेरों कॉलेज हैं और इन कॉलेजों में शिक्षकों के नाम पर केवल भर्ती कर ली जाती है जिन्हें ढंग से शिक्षा देना तक नहीं आता वह छात्रों का भला कैसे कर पाएंगे ऐसे में शिक्षकों का सख्त होना और शिक्षा देने के प्रति अपने आप को ईमानदार रहना काफी जरूरी है।

कुछ बड़े कॉलेज पर पढ़ाई के नाम पर डब्बा गुल

देश में कई ऐसे इलाके हैं जहां पर इंजीनियरिंग कॉलेजों में काफी बढ़ोतरी हो रही है और इंजीनियरिंग कॉलेजों को इतना आकर्षक बनाया जाता है कि छात्र वहीं पढ़ना चाहते हैं वहां पर सर्व सुविधा युक्त केंपस होने के रहने घूमने-फिरने तक की शानदार सुविधाएं होती हैं जिसे देखकर छात्र वहां पढ़ने के इच्छुक हो जाते हैं लेकिन वहां पढ़ाई के नाम पर छात्र को कुछ भी नहीं मिलता ऐसे कॉलेजों को यह संदेश मिलना चाहिए कि कॉलेजों को अच्छा और खूबसूरत बनाना तो बहुत अच्छी बात है लेकिन वहा विशिष्ट शिक्षा मुहैया कराना लक्ष्य बनाना होगा तब जाकर छात्रों का इंजीनियर बनना सार्थक साबित होगा।

सरकार को लेने होंगे कड़े फैसले

सरकार जब किसी कॉलेज को बनाने की और वहां शिक्षा प्रदान करने की अनुमति प्रदान करती है तो वहां जाकर शिक्षा से जुड़े मंत्री और आला अधिकारियों को यह जरूर देखना चाहिए कि वहां शिक्षा के नाम पर सच में कुछ दिया जा रहा है या नहीं या फिर छात्रों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर सरकार ऐसे बेहतरीन कदम उठाती है तो इंजीनियरिंग कॉलेजों के बढ़ने के साथ-साथ इंजीनियरिंग का स्तर भी बढ़ेगा।

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