व्यक्ति में इंसानियत की भावना, मानवाधिकार की कामना

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10 Dec 2021
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हम कुछ सिद्धांतों के सहारे जीवन का निर्वाह अवश्य करते हैं, परन्तु हमारे सिद्धांतों में हर एक मनुष्य के लिए एक ही भाव हो निश्चित नहीं। हम कुछ नीतियों के सहारे आगे बढ़ते हैं, परन्तु कुछ कुरीतियां भी हम अपने व्यवहार के साथ लेकर चलते हैं तथा कुछ के लिए यह सब कहने की बातें होती हैं। इस प्रकार में दुनिया में ऐसे कई लोगों के अधिकारों का हनन होता है, जो वास्तव में बिल्कुल हमारे जैसे होते हैं। तो क्या यह व्यवहार मानवाधिकार के विरूद्ध नहीं…?

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विश्व का कोई भी क्षेत्र हो, प्रत्येक स्थान पर लोगों के रहने के कायदे होते हैं। वहां के लोगों के द्वारा निर्मित अपना एक समाज होता है, जो वहां के कायदे कानून से चलता है। हालांकि उन कायदे-कानून को मानने के लिए कोई भी व्यक्ति बाध्य तो नहीं होता है परन्तु यदि कोई सबके साथ कदमताल मिलाकर ना चले तो लोग उसके साथ उचित व्यवहार नहीं रखते तथा उसके लिए गलत धारणा बनाने लगते हैं। यह किसी एक स्थान की कहानी नहीं, दुनिया का कोई भी कोना इस प्रचलन से अछूता नहीं है। प्रत्येक जगह यही मानसिकता प्रवाहित है, हां यह अलग बात है कि हर जगह पर इसके तरीके ज़रूर अलग हो सकते हैं। हमारा समाज में नीतियां तथा कुरितियां एक साथ चलती हैं। हम कुछ सिद्धांतों के सहारे जीवन का निर्वाह अवश्य करते हैं, परन्तु हमारे सिद्धांतों में हर एक मनुष्य के लिए एक ही भाव हो निश्चित नहीं। हम कुछ नीतियों के सहारे आगे बढ़ते हैं, परन्तु कुछ कुरीतियां evils भी हम अपने व्यवहार के साथ लेकर चलते हैं तथा कुछ के लिए यह सब कहने की बातें होती हैं। इस प्रकार में दुनिया में ऐसे कई लोगों के अधिकारों का हनन होता है, जो वास्तव में बिल्कुल हमारे जैसे होते हैं। तो क्या यह व्यवहार मानवाधिकार के विरूद्ध नहीं…?

मानवाधिकार एक भावना है जो प्रत्येक मनुष्य में सबके लिए एक-समान होना चाहिए। यह उस सभ्य समाज का आईना है जो समानता का चित्र प्रतिबिंबित करती है। जिसके सामने छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब, ऊंच-नीच, छुआ-छूत तथा जाति-धर्म का एक ही चेहरा है, इंसानियत humanity का। इंसानियत ही मानव का प्रथम कर्तव्य है।

दुनिया में समाज ने स्वयं को कई वर्गों में बांट दिया है, जहां पर कुछ लोगों के साथ इस प्रकार से व्यवहार किया जाता है, जैसे उन्होंने इस दुनिया में आकर कोई अपराध कर दिया है। इनमें जाति-धर्म तथा अमीर-गरीब वह कुरीति है जो ऐसे लोगों का जीवन दूभर बनाती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से निम्न की श्रेणी में गिने जाते हैं। इसी प्रक्रिया में ये लोग उन अधिकारों से वंचित रह जाते हैं जो एक सामान्य व्यक्ति का हक़ होता है।

इन्हीं कुरीतियों को ख़त्म करने तथा दुनिया में समानता के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए वैश्विक संस्था युनाइटेड नेशन United Nations विश्व भर में 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस International Human Rights Day,मनाती है। इसकी शुरुआत युनाइटेड नेशन द्वारा 1948 में की गई थी। जिसे धीरे-धीरे करके दुनिया के लगभग प्रत्येक देश ने अपने क्षेत्र में स्वीकृति दी है।

इस पहल के माध्यम से युनाइटेड नेशन लोगों को इस तथ्य से परिचित कराना चाहता है कि दुनिया में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति समान अधिकार equal rights का हक़दार है। उसके साथ धर्म, नस्ल, लिंग, रंग, स्टेटस, भाषा, विचारों में भिन्नता, ऊंच-नीच तथा अन्य चीज़ों के आधार पर भेद-भाव discrimination करना उचित नहीं है। हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम सब एक जैसे ही इस दुनिया में आते हैं तथा एक ही प्रक्रिया से हमारे अस्तित्व का अंत होता है। हम किसी भी प्रकार भिन्न नहीं तथा प्रत्येक व्यक्ति के मानवाधिकार की रक्षा करना हमारा दायित्व है।