ऑनलाइन शॉपिंग आज भारत में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गई है। अब लोग किराने का सामान, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दवाइयां, घरेलू जरूरतों की चीजें और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स जैसी लगभग हर वस्तु घर बैठे वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए खरीद सकते हैं।
ई-कॉमर्स (E-commerce) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल, सस्ते इंटरनेट और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान सुविधाओं ने खरीदारी को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। अब ग्राहकों को छोटी-बड़ी चीजें खरीदने के लिए बाजार जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
हालांकि, ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती सुविधा के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट, नकली विज्ञापन, धोखाधड़ी वाले लिंक, नकली उत्पाद और ऑनलाइन पेमेंट स्कैम के जरिए ग्राहकों को अपना निशाना बनाते हैं।
इस समस्या की गंभीरता को एक रिपोर्ट से भी समझा जा सकता है। GSMA India Consumer Scam Report 2026 के अनुसार, सर्वे में शामिल उन भारतीय लोगों में, जिन्होंने किसी तरह की धोखाधड़ी का सामना किया था, 33% ने ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े स्कैम की शिकायत की। यह धोखाधड़ी की सबसे अधिक रिपोर्ट की गई श्रेणी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 12% भारतीय लोगों ने पिछले 12 महीनों के दौरान किसी न किसी तरह के स्कैम का सामना किया था। वहीं, भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित रखना भी पहले से अधिक जरूरी हो गया है।
ई-कॉमर्स कंपनियां और बैंक ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए अपने सुरक्षा सिस्टम को बेहतर बना रहे हैं। लेकिन ग्राहकों की जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन फ्रॉड के तरीकों को समझकर, संदिग्ध ऑफर की पहचान करके, अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखकर और पेमेंट करते समय सावधानी बरतकर आर्थिक नुकसान के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस लेख में हम भारत में ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े प्रमुख खतरों major risks associated with online shopping, पेमेंट फ्रॉड और फर्जी वेबसाइट की पहचान करने के तरीकों के बारे में जानेंगे। साथ ही, कुछ आसान और उपयोगी सुरक्षा उपाय भी समझेंगे, जिनकी मदद से आप बिना किसी परेशानी के सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग के तेजी से बढ़ते चलन ने भारत के खुदरा बाजार (Retail Industry) को काफी बदल दिया है। अब ग्राहक घर बैठे अलग-अलग वेबसाइटों पर उत्पादों की कीमतों की तुलना कर सकते हैं, दूसरे ग्राहकों के रिव्यू पढ़ सकते हैं, आकर्षक छूट का लाभ उठा सकते हैं और सामान की होम डिलीवरी प्राप्त कर सकते हैं। इससे खरीदारी करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
हालांकि, डिजिटल खरीदारी की इस सुविधा के साथ धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ा है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, ईमेल और फर्जी वेबसाइटों के जरिए एक साथ हजारों लोगों तक पहुंच सकते हैं। वे ग्राहकों को आकर्षक ऑफर का लालच देकर उनकी निजी जानकारी और बैंक से जुड़ी जानकारियां चुराने या पैसे ठगने की कोशिश करते हैं।
मार्च 2026 में जारी एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में खुदरा डिजिटल भुगतान के कुल 22,167.90 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। इन लेनदेन का कुल मूल्य 849.12 लाख करोड़ रुपये था। इनमें यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की हिस्सेदारी 81% रही।
डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल से ऑनलाइन लेनदेन का दायरा बड़ा हुआ है। इसके साथ ही साइबर अपराधियों के लिए लोगों को निशाना बनाने के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल National Cyber Crime Reporting Portal पर वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की 24,02,579 शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों में लोगों को कुल 22,495 करोड़ रुपये का नुकसान होने की सूचना दी गई। हालांकि, इन आंकड़ों में केवल ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि कई तरह के वित्तीय साइबर अपराध शामिल हैं। फिर भी ये आंकड़े इस समस्या के बड़े स्तर को समझने में मदद करते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े कुछ प्रमुख खतरे इस प्रकार हैं।
फर्जी शॉपिंग वेबसाइटें: ऐसी वेबसाइटें ग्राहकों से पैसे तो ले लेती हैं, लेकिन ऑर्डर किया गया सामान नहीं भेजती हैं।
धोखेबाज विक्रेता: कुछ विक्रेता असली उत्पाद बताकर नकली, खराब या कम गुणवत्ता वाला सामान बेचते हैं।
फिशिंग मैसेज और ईमेल: ऐसे संदेशों के जरिए ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारियां चुराई जाती हैं।
फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि: धोखेबाज खुद को किसी कंपनी का ग्राहक सेवा अधिकारी बताकर ग्राहकों से गोपनीय जानकारी मांगते हैं।
नकली पेमेंट लिंक और QR कोड: इनका इस्तेमाल ग्राहकों के बैंक खाते से पैसे निकालने या उन्हें गलत खाते में भेजने के लिए किया जाता है।
भ्रामक विज्ञापन: बहुत कम कीमत पर महंगे उत्पाद देने का लालच देकर लोगों को ठगा जाता है।
निजी डेटा की चोरी: कुछ फर्जी ऐप और असुरक्षित वेबसाइटें ग्राहकों की निजी और वित्तीय जानकारी चुरा सकती हैं।
ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि किसी वेबसाइट का अच्छा डिजाइन, आकर्षक विज्ञापन या पेशेवर दिखने वाला पेज इस बात की गारंटी नहीं है कि वह असली और भरोसेमंद है। ऑनलाइन खरीदारी करते समय वेबसाइट और विक्रेता की विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि ग्राहक पहले से ही इसके अलग-अलग तरीकों को समझें। साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके अपनाते रहते हैं। खासतौर पर त्योहारों के मौसम, बड़ी सेल, क्लीयरेंस सेल और ऑनलाइन शॉपिंग फेस्टिवल के दौरान ऐसे मामले सामने आ सकते हैं।
आइए, ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े कुछ आम स्कैम और उनसे बचने के उपायों के बारे में जानते हैं।
साइबर अपराधी कई बार ऐसी नकली वेबसाइट बनाते हैं, जो दिखने में लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या बड़े ब्रांड की असली वेबसाइट जैसी लगती हैं। वे इन वेबसाइटों पर असली कंपनियों के लोगो, उत्पादों की तस्वीरें, वेबसाइट का डिजाइन और आकर्षक विज्ञापन कॉपी कर लेते हैं। इससे ग्राहकों को वेबसाइट असली लगने लगती है।
इन फर्जी वेबसाइटों पर महंगे उत्पादों को बाजार की सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर दिखाया जाता है। कम कीमत देखकर ग्राहक बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए ऑर्डर कर देते हैं। पेमेंट मिलने के बाद धोखेबाज वेबसाइट बंद कर सकते हैं, ग्राहकों के मैसेज का जवाब देना बंद कर सकते हैं या नकली सामान भेज सकते हैं।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें (How to Stay Safe).
खरीदारी करने से पहले वेबसाइट का पूरा वेब एड्रेस (URL) ध्यान से जांचें।
WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक से खरीदारी करने से बचें।
किसी वेबसाइट पर भरोसा करने से पहले उसके बारे में जानकारी प्राप्त करें।
संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट का एड्रेस खुद ब्राउजर में टाइप करें या उसका सत्यापित मोबाइल ऐप इस्तेमाल करें।
बहुत कम कीमत पर महंगे उत्पाद बेचने वाली अनजान वेबसाइटों से सावधान रहें।
फिशिंग (Phishing) साइबर धोखाधड़ी का एक ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी किसी भरोसेमंद कंपनी, बैंक या सेवा प्रदाता के नाम से फर्जी ईमेल या मैसेज भेजते हैं। उनका उद्देश्य लोगों से पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी, कार्ड डिटेल और दूसरी गोपनीय जानकारियां हासिल करना होता है।
उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक को मैसेज मिल सकता है कि उसके ऑर्डर की डिलीवरी रोक दी गई है, क्योंकि उसके पते में कुछ जानकारी अधूरी है। मैसेज में एक लिंक दिया जाता है और ग्राहक से पता अपडेट करने या डिलीवरी के लिए छोटी-सी अतिरिक्त फीस जमा करने को कहा जाता है।
जैसे ही ग्राहक उस लिंक पर क्लिक करता है, उसे किसी फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। वहां उससे लॉगिन डिटेल, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी और अन्य निजी जानकारियां मांगी जा सकती हैं। इन जानकारियों का इस्तेमाल करके धोखेबाज उसके बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें (How to Stay Safe).
अनजान नंबर या ईमेल से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
किसी भी मैसेज के जवाब में अपना पासवर्ड, OTP या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
ऑर्डर और डिलीवरी की स्थिति जानने के लिए संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें।
अगर कोई मैसेज अतिरिक्त पेमेंट करने या तुरंत जानकारी अपडेट करने का दबाव बनाए, तो पहले उसकी सत्यता जांचें।
आकर्षक छूट और सस्ते ऑफर ग्राहकों को ऑनलाइन खरीदारी के लिए सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। साइबर अपराधी भी इसी बात का फायदा उठाते हैं। वे फर्जी विज्ञापनों के जरिए स्मार्टफोन, ब्रांडेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और घरेलू उपकरणों को बाजार की सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर बेचने का दावा करते हैं।
ऐसे विज्ञापनों में अक्सर '90% की छूट', 'सिर्फ दो उत्पाद बाकी', 'ऑफर पांच मिनट में खत्म हो जाएगा' या 'आज ही खरीदें' जैसे संदेश दिए जाते हैं। इनका मकसद ग्राहकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के लिए मजबूर करना होता है, ताकि वे विक्रेता और वेबसाइट की जांच न कर सकें।
कई बार ग्राहक कम कीमत के लालच में अनजान वेबसाइट पर पेमेंट कर देते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि वेबसाइट फर्जी थी या उत्पाद की जानकारी गलत थी।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें (How to Stay Safe).
किसी भी आकर्षक ऑफर पर भरोसा करने से पहले अलग-अलग भरोसेमंद वेबसाइटों पर उत्पाद की कीमत की तुलना करें।
खरीदारी करने से पहले विक्रेता की जानकारी और उसकी विश्वसनीयता जांचें।
बहुत ज्यादा छूट देने वाले अनजान विज्ञापनों से सावधान रहें।
केवल इसलिए खरीदारी न करें क्योंकि कोई ऑफर सीमित समय के लिए उपलब्ध बताया जा रहा है।
किसी भी वेबसाइट पर पेमेंट करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें।
याद रखें कि केवल बड़ी छूट मिलना किसी वेबसाइट या विक्रेता के भरोसेमंद होने का प्रमाण नहीं है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक आम तरीका फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को ठगना है। इसमें साइबर अपराधी खुद को किसी लोकप्रिय ई-कॉमर्स कंपनी, बैंक या कूरियर सेवा का कर्मचारी बताते हैं।
वे ग्राहकों को फोन, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर सकते हैं। कई बार वे ऑर्डर की डिलीवरी में देरी, पेमेंट फेल होने या रिफंड मिलने में परेशानी का बहाना बनाते हैं।
इसके बाद वे समस्या ठीक करने के नाम पर ग्राहक से OTP, UPI PIN, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी और बैंकिंग पासवर्ड मांगते हैं। कुछ धोखेबाज ग्राहकों को मोबाइल में रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कहते हैं। इससे वे दूर बैठकर ग्राहक के मोबाइल की गतिविधियों तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें (How to Stay Safe).
किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क करने के लिए उसकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करें।
फोन या मैसेज पर किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड न बताएं।
रिफंड पाने के लिए किसी के कहने पर अनजान ऐप डाउनलोड न करें।
किसी दूसरे व्यक्ति को अपने मोबाइल या कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस न दें।
कस्टमर केयर नंबर खोजते समय सोशल मीडिया पोस्ट और अनजान वेबसाइटों पर दिए गए नंबरों पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
ध्यान रखें कि असली कस्टमर केयर प्रतिनिधि को आपके बैंक खाते से पैसे भेजने के लिए UPI PIN या OTP की जरूरत नहीं होती है।
QR कोड ने डिजिटल भुगतान को काफी आसान बना दिया है। अब ग्राहक कुछ ही सेकंड में स्कैन करके दुकानदार या ऑनलाइन विक्रेता को पैसे भेज सकते हैं। हालांकि, साइबर अपराधी इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल करके लोगों को ठगते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई फर्जी विक्रेता ग्राहक को QR कोड भेजकर दावा कर सकता है कि इसे स्कैन करने से उसके खाते में रिफंड आ जाएगा या पेमेंट की पुष्टि हो जाएगी। लेकिन वास्तव में उस QR कोड को स्कैन करने और पेमेंट को मंजूरी देने से ग्राहक के बैंक खाते से पैसे कट सकते हैं।
कुछ मामलों में धोखेबाज ग्राहकों को फोन करके बताते हैं कि उनका रिफंड अटक गया है। इसके बाद वे पैसे वापस दिलाने के नाम पर QR कोड स्कैन करने या UPI PIN डालने के लिए कहते हैं।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें (How to Stay Safe).
किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए QR कोड को बिना जांचे स्कैन न करें।
याद रखें कि UPI के जरिए पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती है।
UPI PIN केवल तभी दर्ज करें, जब आप खुद किसी को पैसे भेज रहे हों और लेनदेन को मंजूरी देना चाहते हों।
पेमेंट करने से पहले स्क्रीन पर दिखाई देने वाले प्राप्तकर्ता का नाम और राशि जरूर जांचें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पेमेंट रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।
ऑनलाइन भुगतान करते समय हमेशा सतर्क रहें। छोटी-सी लापरवाही भी आपके बैंक खाते से पैसे निकलने का कारण बन सकती है।
ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी हर धोखाधड़ी में पैसे चुराना ही शामिल नहीं होता है। कई बार ग्राहकों को असली ब्रांड का उत्पाद बताकर नकली सामान बेच दिया जाता है। कुछ विक्रेता इस्तेमाल किए हुए उत्पादों को नया बताकर बेचते हैं, जबकि कुछ मामलों में ग्राहकों को ऐसा सामान मिलता है जो वेबसाइट पर दिखाई गई तस्वीरों और जानकारी से बिल्कुल अलग होता है।
Authentication Solution Providers' Association (ASPA) ने CRISIL के सहयोग से मार्च 2026 में एक देशव्यापी उपभोक्ता अध्ययन जारी किया। इसके अनुसार, सर्वे में शामिल लगभग 35% भारतीय उपभोक्ताओं ने पिछले एक साल के दौरान नकली उत्पादों का सामना किया था।
यह अध्ययन बताता है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीदारी में उत्पादों की असलियत की जांच करना कितना जरूरी है। खासतौर पर ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मेटिक्स, एक्सेसरीज और ऐसे दूसरे उत्पादों की खरीदारी करते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, जिनकी नकली प्रतियां बाजार में बेची जाती हैं।
खुद को सुरक्षित कैसे रखें (How to Stay Safe).
खरीदारी करने से पहले विक्रेता की रेटिंग और ग्राहकों के रिव्यू जरूर पढ़ें।
उत्पाद की तस्वीरों और उसकी पूरी जानकारी को ध्यान से देखें।
ग्राहकों द्वारा अपलोड की गई असली तस्वीरों और वीडियो को प्राथमिकता दें।
ब्रांडेड उत्पाद खरीदते समय उसकी प्रामाणिकता (Authenticity) से जुड़ी जानकारी जांचें।
खरीदारी से पहले रिटर्न, रिफंड और एक्सचेंज की शर्तें अच्छी तरह समझ लें।
बहुत कम कीमत पर मिलने वाले ब्रांडेड उत्पादों को खरीदने से पहले उनकी विश्वसनीयता की जांच करें।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय केवल उत्पाद की कीमत और उसकी तस्वीर देखकर फैसला न करें। विक्रेता की विश्वसनीयता, उत्पाद की गुणवत्ता और रिटर्न पॉलिसी की जांच करना भी उतना ही जरूरी है।
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ऑनलाइन खरीदारी करते समय अपनी निजी जानकारी या पेमेंट डिटेल दर्ज करने से पहले यह जांचना बेहद जरूरी है कि संबंधित वेबसाइट असली और भरोसेमंद है या नहीं। कई बार साइबर अपराधी लोकप्रिय कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट बनाकर ग्राहकों को ठगते हैं। इसलिए किसी भी वेबसाइट पर खरीदारी करने से पहले कुछ मिनट उसकी जांच जरूर करनी चाहिए।
वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
किसी भी वेबसाइट पर खरीदारी करने से पहले उसके वेब एड्रेस (URL) को ध्यान से देखें। कई बार धोखेबाज असली वेबसाइट से मिलते-जुलते नाम वाली फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। इनमें असली वेबसाइट के नाम की स्पेलिंग में एक या दो अक्षरों का अंतर हो सकता है। इसलिए वेबसाइट का नाम अच्छी तरह जांचने के बाद ही उस पर अपनी जानकारी दर्ज करें।
किसी सुरक्षित वेबसाइट के एड्रेस की शुरुआत आमतौर पर HTTPS से होती है। यह वेबसाइट और उपयोगकर्ता के बीच भेजी जाने वाली जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन (Encryption) का इस्तेमाल करता है। हालांकि, केवल HTTPS होने का मतलब यह नहीं है कि वेबसाइट असली और भरोसेमंद है। फर्जी वेबसाइटें भी HTTPS का इस्तेमाल कर सकती हैं।
वेबसाइट पर कंपनी या विक्रेता का नाम, संपर्क नंबर, रजिस्टर्ड बिजनेस की जानकारी, शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) का विवरण और उपलब्ध होने पर कंपनी का पता जरूर देखें। अगर वेबसाइट पर जरूरी व्यावसायिक जानकारी उपलब्ध नहीं है या दी गई जानकारी संदिग्ध लगती है, तो वहां से खरीदारी करने से बचें।
ऑर्डर देने से पहले वेबसाइट की डिलीवरी, ऑर्डर कैंसिलेशन, रिटर्न, रिफंड और प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें। इससे आपको पता चलेगा कि उत्पाद खराब निकलने, ऑर्डर रद्द होने या सामान वापस करने की स्थिति में कंपनी क्या प्रक्रिया अपनाती है।
किसी वेबसाइट पर दिए गए ग्राहक रिव्यू को ही पूरी तरह सही न मानें। कई बार फर्जी वेबसाइटें ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए नकली रिव्यू और रेटिंग दिखाती हैं। इसलिए खरीदारी से पहले स्वतंत्र रिव्यू प्लेटफॉर्म और दूसरे भरोसेमंद स्रोतों पर भी ग्राहकों के अनुभव जरूर देखें।
अगर कोई शॉपिंग वेबसाइट आपको पेमेंट के लिए किसी अनजान या असंबंधित वेबसाइट पर भेजती है, तो सावधान हो जाएं। इसी तरह, अगर कोई विक्रेता कंपनी के आधिकारिक पेमेंट सिस्टम के बजाय किसी व्यक्ति के बैंक खाते में सीधे पैसे भेजने के लिए कहता है, तो पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें।
ग्राहकों को यह भी समझना चाहिए कि फर्जी वेबसाइटें सर्च इंजन के विज्ञापनों में भी दिखाई दे सकती हैं। किसी वेबसाइट का Google सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह सत्यापित या भरोसेमंद है।
ऑनलाइन खरीदारी में पेमेंट की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। ग्राहक को हमेशा ऐसे भुगतान विकल्प चुनने चाहिए, जिनमें सुरक्षा के उचित इंतजाम हों और लेनदेन का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहे।
डिजिटल पेमेंट करते समय थोड़ी-सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या कैश ऑन डिलीवरी का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) Unified Payments Interface (UPI) ने ऑनलाइन भुगतान को काफी आसान बना दिया है। इसकी मदद से लोग मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही सेकंड में पैसे भेज सकते हैं। हालांकि, UPI का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
UPI से सुरक्षित भुगतान करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
अपना UPI PIN केवल तभी दर्ज करें, जब आप किसी को पैसे भेज रहे हों और भुगतान को मंजूरी देना चाहते हों।
अपना UPI PIN किसी दूसरे व्यक्ति के साथ कभी साझा न करें।
पेमेंट करने से पहले प्राप्तकर्ता का नाम अच्छी तरह जांच लें।
अनजान विक्रेताओं या व्यक्तियों द्वारा भेजे गए QR कोड को बिना जांचे स्कैन न करें।
किसी अनजान व्यक्ति से आई पेमेंट रिक्वेस्ट को बिना समझे स्वीकार न करें।
लेनदेन की पुष्टि करने से पहले भुगतान की राशि जरूर जांचें।
याद रखें कि UPI के जरिए पैसे प्राप्त करने के लिए PIN दर्ज करने की जरूरत नहीं होती है। अगर कोई व्यक्ति पैसे वापस करने या आपके खाते में पैसे भेजने के नाम पर UPI PIN मांगता है, तो सावधान हो जाएं।
ऑनलाइन खरीदारी के लिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय हमेशा भरोसेमंद पेमेंट गेटवे चुनें। इसके अलावा, अपने बैंक की ट्रांजैक्शन अलर्ट सुविधा चालू रखें, ताकि खाते से होने वाले हर लेनदेन की जानकारी आपको समय पर मिल सके।
कार्ड से सुरक्षित भुगतान करने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां इस प्रकार हैं।
अपना कार्ड CVV, PIN और OTP किसी के साथ साझा न करें।
अपने कार्ड पर उपलब्ध सुविधा के अनुसार ऑनलाइन लेनदेन की एक उचित सीमा तय करें।
इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन की सुविधा की जरूरत न होने पर उसे बंद रखें।
अगर आपका बैंक वर्चुअल कार्ड की सुविधा देता है, तो ऑनलाइन खरीदारी के लिए उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
अपने बैंक स्टेटमेंट को नियमित रूप से जांचें और किसी अनजान लेनदेन की जानकारी मिलने पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
इन छोटी-छोटी सावधानियों से कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी का खतरा कम किया जा सकता है।
कैश ऑन डिलीवरी (Cash on Delivery या COD) ऑनलाइन खरीदारी का एक ऐसा विकल्प है, जिसमें ग्राहक सामान मिलने पर भुगतान करता है। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो किसी नए विक्रेता से खरीदारी कर रहे हैं या ऑनलाइन एडवांस पेमेंट करने में सहज महसूस नहीं करते हैं।
अगर किसी अनजान विक्रेता की वेबसाइट पर पहले से पैसे जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, तो COD उपलब्ध होने पर इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि कैश ऑन डिलीवरी से नकली या खराब उत्पाद मिलने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता है। इसलिए ग्राहक को विक्रेता की जानकारी जांचनी चाहिए और सामान मिलने पर प्लेटफॉर्म के डिलीवरी नियमों का पालन करना चाहिए। किसी भी समस्या की स्थिति में रिटर्न और रिफंड की निर्धारित प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
अगर कोई ऑनलाइन विक्रेता आपसे शॉपिंग प्लेटफॉर्म के बाहर किसी अनजान व्यक्ति के बैंक खाते, निजी UPI ID या पर्सनल डिजिटल वॉलेट में पैसे भेजने के लिए कहता है, तो सावधान हो जाएं।
कई धोखेबाज ग्राहकों को कम कीमत या अतिरिक्त छूट का लालच देकर आधिकारिक वेबसाइट के बजाय सीधे अपने निजी खाते में पेमेंट करने के लिए कहते हैं। ऐसा करने पर ग्राहकों को बाद में पैसे वापस पाने या शिकायत दर्ज कराने में परेशानी हो सकती है।
खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
जहां तक संभव हो, शॉपिंग प्लेटफॉर्म के आधिकारिक पेमेंट सिस्टम से ही भुगतान करें।
किसी अनजान व्यक्ति के निजी बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
प्लेटफॉर्म के बाहर भुगतान करने पर मिलने वाली अतिरिक्त छूट के लालच में न आएं।
पेमेंट करने से पहले विक्रेता और भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति की जानकारी जांचें।
हर ऑनलाइन लेनदेन का रिकॉर्ड, रसीद और ट्रांजैक्शन आईडी अपने पास सुरक्षित रखें।
आधिकारिक पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करने से लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है और किसी विवाद की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने में मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन दुनिया में निजी जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। साइबर अपराधी इसका गलत इस्तेमाल करके पहचान की चोरी (Identity Theft), ऑनलाइन अकाउंट पर कब्जा, बैंकिंग धोखाधड़ी और दूसरी तरह के साइबर अपराध कर सकते हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटें आमतौर पर ऑर्डर पूरा करने और सामान की डिलीवरी के लिए ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और डिलीवरी एड्रेस जैसी जानकारी मांगती हैं। हालांकि, ग्राहकों को ऐसी अतिरिक्त जानकारी देने से बचना चाहिए, जिसकी खरीदारी पूरी करने के लिए जरूरत नहीं है।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखने के लिए इन सावधानियों का पालन करें।
केवल वही जानकारी साझा करें, जो ऑर्डर देने और सामान की डिलीवरी के लिए जरूरी है।
अनजान या कम भरोसेमंद शॉपिंग वेबसाइटों पर अपने कार्ड की जानकारी सेव न करें।
बिना किसी उचित और सत्यापित जरूरत के आधार कार्ड की जानकारी, बैंकिंग पासवर्ड या OTP साझा न करें।
अपने शॉपिंग अकाउंट के लिए मजबूत और अलग पासवर्ड बनाएं।
जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Two-Factor Authentication) चालू रखें।
सार्वजनिक कंप्यूटर पर अपने शॉपिंग अकाउंट में लॉगिन करने से बचें।
अपने अकाउंट की लॉगिन गतिविधि और सेव किए गए पेमेंट विकल्पों की नियमित रूप से जांच करें।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर ऑर्डर की रसीद, डिलीवरी का पता, मोबाइल नंबर और दूसरी निजी जानकारियां सार्वजनिक रूप से साझा न करें। ऐसी जानकारी का इस्तेमाल धोखेबाज आपको निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं।
ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। अगर आप एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल कई वेबसाइटों और मोबाइल ऐप पर करते हैं, तो इससे आपके दूसरे अकाउंट भी खतरे में पड़ सकते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर किसी एक शॉपिंग वेबसाइट का डेटा चोरी हो जाता है, तो साइबर अपराधी वहां से मिले पासवर्ड और लॉगिन जानकारी का इस्तेमाल आपके दूसरे ऑनलाइन अकाउंट में प्रवेश करने के लिए कर सकते हैं। इसे क्रेडेंशियल स्टफिंग (Credential Stuffing) कहा जाता है।
इस खतरे से बचने के लिए हर वेबसाइट और ऐप के लिए अलग पासवर्ड बनाना चाहिए।
मजबूत पासवर्ड बनाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
पासवर्ड लंबा रखें और उसमें अक्षरों, अंकों और विशेष चिन्हों का इस्तेमाल करें।
अपना नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या आसानी से पहचानी जाने वाली जानकारी पासवर्ड में न रखें।
एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल अलग-अलग वेबसाइटों पर न करें।
समय-समय पर अपने महत्वपूर्ण अकाउंट की सुरक्षा जांचें।
पासवर्ड को सुरक्षित रखने के लिए पासवर्ड मैनेजर (Password Manager) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पासवर्ड मैनेजर एक ऐसा डिजिटल टूल है, जो अलग-अलग अकाउंट के लिए मजबूत पासवर्ड बनाने और उन्हें सुरक्षित तरीके से सेव करने में मदद करता है। इससे आपको हर वेबसाइट का पासवर्ड अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।
ऑनलाइन शॉपिंग करते समय अपनी निजी जानकारी और अकाउंट की सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहिए। थोड़ी-सी सावधानी आपको कई तरह की साइबर धोखाधड़ी से बचाने में मदद कर सकती है।
मोबाइल ऐप ने ऑनलाइन खरीदारी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। अब ग्राहक कुछ ही मिनटों में अपनी पसंद का सामान ऑर्डर कर सकते हैं। हालांकि, अनजान स्रोतों से मोबाइल ऐप डाउनलोड करना आपके स्मार्टफोन और निजी जानकारी के लिए खतरा बन सकता है।
साइबर अपराधी कई बार लोकप्रिय शॉपिंग, बैंकिंग और डिलीवरी ऐप जैसी दिखने वाली नकली ऐप बनाते हैं। इन ऐप के जरिए वे आपके फोन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और आपकी निजी या बैंकिंग जानकारी चुरा सकते हैं। कुछ फर्जी ऐप जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगते हैं, जिससे आपकी निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल होने का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे खतरों से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
मोबाइल ऐप हमेशा Google Play Store और Apple App Store जैसे आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
कोई भी ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके डेवलपर यानी ऐप बनाने वाली कंपनी का नाम जरूर जांचें।
ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग, ग्राहकों के रिव्यू और डाउनलोड की संख्या देखें।
WhatsApp, Telegram या अनजान वेबसाइटों से मिली APK फाइल डाउनलोड करने से बचें।
ऐप को दी गई परमिशन की जांच करें और गैर-जरूरी एक्सेस को बंद कर दें।
अपने स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और मोबाइल ऐप को नियमित रूप से अपडेट करते रहें।
जिन ऐप का आप लंबे समय से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उन्हें फोन से हटा दें।
इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) ने अक्टूबर 2024 में ऑनलाइन स्कैम से बचने के लिए जारी अपनी एडवाइजरी में भी कुछ जरूरी सुझाव दिए थे। इसमें अनजान लोगों द्वारा भेजे गए ऐप डाउनलोड न करने और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की सलाह दी गई थी। इसके अलावा, CERT-In ने असली और अपडेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया था।
इसलिए किसी भी नए ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें। केवल लोकप्रिय दिखने या आकर्षक ऑफर देने के कारण किसी अनजान ऐप पर भरोसा न करें।
ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े खतरे केवल साइबर अपराध और पेमेंट फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं। कई बार डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के डिजाइन का इस्तेमाल करके ग्राहकों को ऐसे फैसले लेने के लिए प्रभावित करते हैं, जिन्हें वे सामान्य परिस्थितियों में शायद नहीं लेते। इस तरह के भ्रामक डिजाइन को डार्क पैटर्न (Dark Patterns) कहा जाता है।
डार्क पैटर्न ऐसी तकनीकें हैं, जिनके जरिए वेबसाइट या ऐप पर ग्राहकों को भ्रमित किया जाता है, उन पर दबाव बनाया जाता है या उन्हें बिना पूरी जानकारी दिए कोई विकल्प चुनने के लिए प्रेरित किया जाता है।
सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने वर्ष 2023 में डार्क पैटर्न की रोकथाम और नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें इस तरह की 13 भ्रामक गतिविधियों की पहचान की गई है।
ऑनलाइन शॉपिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ आम डार्क पैटर्न इस प्रकार हैं।
कुछ वेबसाइटें ग्राहकों को तुरंत खरीदारी करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से 'सिर्फ एक उत्पाद बाकी है', 'सेल दो मिनट में खत्म हो जाएगी' या 'ऑफर का आखिरी मौका' जैसे संदेश दिखाती हैं।
कई बार इन संदेशों के जरिए ग्राहकों को यह महसूस कराया जाता है कि अगर उन्होंने तुरंत ऑर्डर नहीं किया, तो उन्हें अच्छा ऑफर नहीं मिलेगा। हालांकि, कुछ मामलों में यह जल्दबाजी केवल ग्राहक पर दबाव बनाने के लिए दिखाई जाती है।
इस तरीके में किसी उत्पाद की शुरुआती कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन पेमेंट करने के अंतिम चरण में डिलीवरी फीस, हैंडलिंग चार्ज या अन्य अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिए जाते हैं।
इससे ग्राहक को शुरुआत में उत्पाद सस्ता लगता है, लेकिन भुगतान करते समय उसकी कुल कीमत बढ़ जाती है।
कुछ वेबसाइटें ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना शॉपिंग कार्ट में अतिरिक्त उत्पाद, सब्सक्रिप्शन या दूसरी सेवाएं जोड़ देती हैं।
ग्राहक कई बार जल्दबाजी में ऑर्डर पूरा करते समय इन अतिरिक्त चीजों पर ध्यान नहीं देते और अनजाने में उनका भुगतान कर देते हैं।
कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापनों को इस तरह दिखाया जाता है कि वे सामान्य सर्च रिजल्ट या स्वतंत्र उत्पाद सुझाव लगते हैं।
इससे ग्राहक को पता नहीं चलता कि उसे दिखाई जा रही जानकारी वास्तव में किसी कंपनी द्वारा प्रचार के लिए दिखाई गई है।
कुछ डिजिटल सेवाओं में सब्सक्रिप्शन लेना काफी आसान होता है, लेकिन उसे बंद करने या रद्द करने के लिए ग्राहकों को कई मुश्किल चरणों से गुजरना पड़ता है।
कई बार ग्राहक सब्सक्रिप्शन बंद करना चाहते हैं, लेकिन जटिल प्रक्रिया के कारण ऐसा नहीं कर पाते और उनके खाते से बार-बार पैसे कटते रहते हैं।
जुलाई 2025 में उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को सलाह दी थी कि वे अपनी वेबसाइट और ऐप की जांच के लिए सेल्फ-ऑडिट करें और उनमें मौजूद डार्क पैटर्न की पहचान करके उन्हें हटाएं। इससे पहले जून 2025 में CCPA ने भी इस विषय पर एडवाइजरी जारी की थी।
ग्राहक डार्क पैटर्न से कैसे बच सकते हैं।
ऑर्डर पूरा करने से पहले शॉपिंग कार्ट में मौजूद सभी उत्पादों की जांच करें।
पेमेंट करने से पहले कुल कीमत और अतिरिक्त शुल्क को ध्यान से देखें।
किसी भी सब्सक्रिप्शन को लेने से पहले उसकी शर्तें और कैंसिलेशन प्रक्रिया समझें।
किसी सेवा या अतिरिक्त उत्पाद के लिए अपनी सहमति देने से पहले पूरी जानकारी पढ़ें।
वेबसाइट पर दिखाए जाने वाले सीमित समय के ऑफर और जल्दबाजी वाले संदेशों से प्रभावित होकर तुरंत खरीदारी न करें।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय जल्दबाजी करने के बजाय सभी विकल्पों को समझना जरूरी है। इससे आप अनावश्यक खर्च और भ्रामक ऑफर से बच सकते हैं।
ऑनलाइन खरीदारी में उत्पाद की गुणवत्ता और विक्रेता की विश्वसनीयता जानने के लिए दूसरे ग्राहकों के रिव्यू काफी मददगार हो सकते हैं। इनसे आपको उत्पाद के प्रदर्शन, डिलीवरी की स्थिति और ग्राहक सेवा के अनुभव के बारे में जानकारी मिलती है।
हालांकि, इंटरनेट पर मौजूद सभी रिव्यू सही हों, यह जरूरी नहीं है। कुछ विक्रेता अपने उत्पादों की अच्छी छवि बनाने के लिए नकली रेटिंग और फर्जी रिव्यू का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसलिए किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी रेटिंग के साथ-साथ ग्राहकों की प्रतिक्रियाओं को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए।
उत्पाद खरीदने से पहले इन जरूरी बातों पर ध्यान दें।
केवल स्टार रेटिंग देखकर उत्पाद खरीदने का फैसला न करें। ऐसे रिव्यू पढ़ें, जिनमें उत्पाद की गुणवत्ता, काम करने की क्षमता, मजबूती, पैकेजिंग और ग्राहक सेवा के बारे में विस्तार से बताया गया हो। इससे आपको उत्पाद की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
ऐसे रिव्यू को प्राथमिकता दें, जिनके साथ 'Verified Purchase' का टैग लगा हो। इसका मतलब है कि संबंधित प्लेटफॉर्म ने उस रिव्यू को खरीदारी से जुड़ा हुआ सत्यापित किया है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर सत्यापित रिव्यू पूरी तरह निष्पक्ष या सही हो।
उत्पाद की असली तस्वीरें और वीडियो देखकर उसकी गुणवत्ता, आकार, रंग और बनावट के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकती है। इसलिए केवल कंपनी द्वारा दिखाई गई प्रचार संबंधी तस्वीरों पर निर्भर न रहें।
किसी उत्पाद के नकारात्मक रिव्यू भी जरूर पढ़ें। अगर कई ग्राहक खराब सामान, नकली उत्पाद, रिफंड में देरी या खराब कस्टमर सपोर्ट की शिकायत कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी शिकायतें विक्रेता या उत्पाद से जुड़ी संभावित समस्याओं का संकेत हो सकती हैं।
ऑर्डर देने से पहले यह जांचें कि उत्पाद को कितने दिनों के भीतर वापस किया जा सकता है। साथ ही, रिफंड मिलने की प्रक्रिया, रिप्लेसमेंट की शर्तें और किन उत्पादों को वापस नहीं किया जा सकता है, इसकी जानकारी भी प्राप्त करें।
खासकर महंगे उत्पाद खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
इसके अलावा, महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या अन्य जरूरी सामान की खरीदारी करते समय उत्पाद का विवरण, विक्रेता की जानकारी, बिल और ऑर्डर कन्फर्मेशन अपने पास सुरक्षित रखें। भविष्य में किसी विवाद, शिकायत या रिफंड की जरूरत पड़ने पर ये दस्तावेज आपके काम आ सकते हैं।