त्योहारी सीजन शुरू होते ही अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्य ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट, खास ऑफर और सीमित समय की सेल लेकर आते हैं। इस दौरान कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू उपकरण, सूखे मेवे और त्योहारों से जुड़ी कई जरूरी चीजें कम कीमत पर खरीदने का मौका मिलता है। हालांकि, ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के साथ ही साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ जाता है। साइबर अपराधी लोगों को सस्ते सामान और आकर्षक ऑफर का लालच देकर धोखाधड़ी का शिकार बना सकते हैं।
ऑनलाइन ठगी करने वाले अपराधी नकली शॉपिंग वेबसाइट, सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन, मशहूर कंपनियों के लोगो और बेहद कम कीमत वाले ऑफर का इस्तेमाल करते हैं। इन तरीकों से वे ग्राहकों का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में लोगों को पैसे गंवाने पड़ सकते हैं, उनकी निजी जानकारी चोरी हो सकती है या भुगतान करने के बाद भी सामान नहीं मिलता है।
ऑनलाइन धोखाधड़ी केवल कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उत्पादों तक सीमित नहीं है। साइबर ठग होटल बुकिंग, हवाई टिकट, ट्रेन टिकट, किराये की गाड़ियों और त्योहारों से जुड़े सामान के नाम पर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से साइबर अपराधी अब ऐसे फर्जी विज्ञापन और वेबसाइट तैयार कर सकते हैं, जो देखने में बिल्कुल असली जैसे लगते हैं। इस कारण ग्राहकों के लिए सही और नकली ऑफर के बीच अंतर करना पहले से ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में ऑनलाइन खरीदारी करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। साइबर ठगी के आम तरीकों को समझकर और कुछ आसान सुरक्षा उपाय अपनाकर ग्राहक अपने पैसे और निजी जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं।
इस लेख में हम जानेंगे कि फेस्टिव सेल के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड कैसे होता है How online shopping fraud occurs during festive sales, साइबर अपराधी किन तरीकों से लोगों को निशाना बनाते हैं, भारत में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान हैं और सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी के लिए किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
फिशिंग (Phishing) साइबर ठगी का एक आम तरीका है। इसमें साइबर अपराधी लोगों की निजी जानकारी, बैंक खाते का विवरण और पासवर्ड चुराने की कोशिश करते हैं।
इसके लिए ठग लोकप्रिय ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाते हैं। इसके बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन चलाकर ग्राहकों को इन वेबसाइटों तक पहुंचाते हैं।
इन विज्ञापनों में भारी छूट और बेहद सस्ते सामान का लालच दिया जाता है। इसका मकसद ग्राहकों को बिना जांच-पड़ताल किए जल्दबाजी में खरीदारी करने के लिए तैयार करना होता है।
कई मामलों में भुगतान मिलने के बाद ठग सामान नहीं भेजते और संपर्क करना बंद कर देते हैं। इसके अलावा, नकली वेबसाइटों पर बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या अन्य निजी विवरण दर्ज करने से ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी भी चोरी हो सकती है।
उपलब्ध रिपोर्ट में बताई गई साइबर अलर्ट की जांच के अनुसार, फ्लिपकार्ट जैसी दिखने वाली एक संदिग्ध वेबसाइट की पहचान की गई थी। इस वेबसाइट का पता big-deals-4.netify.app/sale/ बताया गया था।
इसी तरह, कुछ विज्ञापनों में कथित तौर पर मीशो के लोगो का गलत इस्तेमाल करके बेहद कम कीमत पर कपड़े बेचने का दावा किया गया।
इन संदिग्ध ऑफर में शामिल थे।
केवल ₹149 में तीन सूट देने का ऑफर।
सिर्फ ₹199 में तीन कुर्ता सेट देने का दावा।
कुछ शिकायतकर्ताओं के अनुसार, खरीदारी के लिए भेजी गई रकम मीशो के बजाय दूसरे व्यक्तियों या जनरल स्टोर जैसे कारोबारों से जुड़े बैंक खातों में जमा हुई थी।
इन घटनाओं से पता चलता है कि ऑनलाइन भुगतान करने से पहले विक्रेता की पहचान और पैसे प्राप्त करने वाले खाते की जांच करना कितना जरूरी है।
ध्यान रखें: किसी वेबसाइट पर लोकप्रिय कंपनी का लोगो दिखाई देना या सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि ऑफर असली है।
त्योहारी सीजन में सूखे मेवे, सजावट का सामान, उपहार और पटाखों जैसे उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। साइबर अपराधी इसी मौके का फायदा उठाकर लोगों को नकली ऑफर के जरिए ठगने की कोशिश करते हैं।
वे महंगे सामान को बेहद कम कीमत पर बेचने का दावा करते हैं, ताकि ग्राहक आकर्षक छूट देखकर तुरंत भुगतान कर दें।
एक रिपोर्ट में ऐसे संदिग्ध विज्ञापन का जिक्र किया गया था, जिसमें केवल ₹239 में चार किलोग्राम सूखे मेवे देने का दावा किया गया था।
इतनी कम कीमत देखकर ग्राहक बिना विक्रेता की विश्वसनीयता जांचे खरीदारी कर सकते हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मेटा की विज्ञापन लाइब्रेरी (Meta Ad Library) में एक कथित फर्जी प्रचार अभियान से जुड़े लगभग 240 विज्ञापन दर्ज थे।
इस अभियान पर ग्राहकों को गुमराह करने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।
हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय किसी भी आकर्षक ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।
ग्राहकों को सबसे पहले सामान की कीमत की तुलना दूसरी भरोसेमंद वेबसाइटों से करनी चाहिए।
अगर कोई महंगा उत्पाद बाजार की सामान्य कीमत से बहुत कम दाम पर मिल रहा है, तो उसकी अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
इसके अलावा, खरीदारी से पहले विक्रेता का नाम, संपर्क जानकारी, सामान वापस करने की नीति और भुगतान से जुड़ी शर्तें जरूर पढ़ें।
जरूरी बात: फेसबुक, इंस्टाग्राम या किसी अन्य लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि उस विज्ञापन को देने वाला विक्रेता भरोसेमंद या सत्यापित है।
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ऑनलाइन ठगी केवल शॉपिंग वेबसाइटों और सोशल मीडिया विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। साइबर अपराधी सर्च इंजन पर दिखाई देने वाले परिणामों, नकली बिजनेस लिस्टिंग और फर्जी कस्टमर केयर नंबरों के जरिए भी लोगों को निशाना बना सकते हैं।
त्योहारों की छुट्टियों के दौरान होटल, ट्रेन टिकट, हवाई टिकट और किराये की गाड़ियों की मांग बढ़ जाती है।
ठग इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर असली ट्रैवल कंपनियों और होटलों जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार करते हैं।
इन वेबसाइटों पर ग्राहकों को आकर्षक कीमतों पर बुकिंग करने का लालच दिया जाता है।
उदाहरण के लिए, कुछ रिपोर्टों में पुरी स्थित होटल सोनार बांग्ला (Hotel Sonar Bangla) जैसी दिखने वाली संदिग्ध वेबसाइटों का जिक्र किया गया है।
ऐसी वेबसाइटों पर होटल की तस्वीरें, कमरों की कीमतें और बुकिंग से जुड़ी जानकारी दिखाई जा सकती है, ताकि ग्राहकों को वेबसाइट असली लगे।
इसके बाद ठग कमरे की बुकिंग पक्की करने के नाम पर अग्रिम भुगतान मांग सकते हैं।
लेकिन पैसे भेजने के बाद ग्राहकों को पता चल सकता है कि होटल में उनके नाम से कोई बुकिंग हुई ही नहीं है।
इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए होटल की आधिकारिक वेबसाइट और संपर्क नंबर की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
होटल, फ्लाइट या किराये की गाड़ी बुक करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या किसी भरोसेमंद बुकिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें।
भारतीय रेलवे के टिकट बुक करने के लिए यात्रियों को IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या उसकी अधिकृत सेवाओं का उपयोग करना चाहिए।
होटल या अन्य यात्रा सेवाओं के लिए अग्रिम भुगतान करने से पहले बुकिंग की जानकारी और भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति या कंपनी की पहचान की पुष्टि करें।
जरूरत पड़ने पर होटल या सेवा देने वाली कंपनी से सीधे संपर्क करके बुकिंग की जानकारी जांच सकते हैं।
इसके अलावा, अनजान वेबसाइटों, विज्ञापनों या सर्च रिजल्ट में दिखाई देने वाले कस्टमर केयर नंबरों पर बिना जांच किए भरोसा न करें।
याद रखें: यात्रा की बुकिंग करते समय थोड़ी सावधानी बरतने और सही जानकारी की पुष्टि करने से फर्जी वेबसाइटों और ऑनलाइन भुगतान से जुड़ी ठगी का खतरा कम किया जा सकता है।
भारत सरकार ने ऑनलाइन खरीदारी को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई उपभोक्ता संरक्षण नियम लागू किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करना और ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 (Consumer Protection E-Commerce Rules, 2020) के तहत ऑनलाइन विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए कई जरूरी जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।
उपलब्ध रिपोर्ट में उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) संशोधन नियम, 2026 का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होने की बात कही गई है।
हालांकि, इन संशोधित नियमों की कानूनी स्थिति, लागू होने की तारीख और प्रावधानों की सही जानकारी के लिए सरकारी अधिसूचना की पुष्टि करना जरूरी है।
उपलब्ध रिपोर्ट में ऑनलाइन ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण उपायों का उल्लेख किया गया है।
छूट और कीमत की स्पष्ट जानकारी: ऑनलाइन कंपनियों को किसी उत्पाद पर छूट देने से पहले उसकी कीमत और प्रचार से जुड़े दावों की सही जानकारी देने पर जोर दिया गया है।
प्रायोजित विज्ञापनों में पारदर्शिता: पैसे देकर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों और सर्च रिजल्ट में उत्पादों की रैंकिंग से जुड़ी जानकारी अधिक स्पष्ट रखने की बात कही गई है।
विक्रेता की सही पहचान: ग्राहकों को सामान बेचने वाले विक्रेता, निर्माता और आयातक की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
डार्क पैटर्न से सुरक्षा: ग्राहकों को भ्रमित करके या दबाव बनाकर खरीदारी करवाने वाले वेबसाइट डिजाइन और तरीकों पर रोक लगाने के उपाय बताए गए हैं।
निजी जानकारी की सुरक्षा: ग्राहकों के व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने और उसके गलत इस्तेमाल को रोकने पर ध्यान दिया गया है।
शिकायतों का समाधान: ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी शिकायतों को समय पर सुनने और उनका समाधान करने के लिए कंपनियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उपभोक्ता की शिकायत मिलने के 48 घंटे के भीतर उसकी प्राप्ति की पुष्टि और एक महीने के भीतर उसका समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि, इन समय-सीमाओं की पुष्टि संबंधित लागू नियमों से करना जरूरी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) को वर्ष 2025 में कुल 17,71,622 शिकायतें मिली थीं।
इनमें से लगभग 5,11,196 शिकायतें ई-कॉमर्स सेवाओं से संबंधित बताई गई हैं। यह कुल शिकायतों का लगभग 29 प्रतिशत है।
हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक वार्षिक रिकॉर्ड से पुष्टि की जानी बाकी है।
ये आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ग्राहकों की सुरक्षा और शिकायतों का समय पर समाधान कितना महत्वपूर्ण है।
ग्राहक अपने अधिकारों की जानकारी प्राप्त करने और ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।
त्योहारी सेल के दौरान ऑनलाइन खरीदारी करते समय कुछ आसान साइबर सुरक्षा उपाय अपनाकर धोखाधड़ी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
किसी भी वेबसाइट पर पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या निजी विवरण दर्ज करने से पहले उसका वेब पता अच्छी तरह जांचें।
साइबर ठग अक्सर लोकप्रिय ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के नाम से मिलते-जुलते वेब पते बनाते हैं, ताकि ग्राहक उन्हें असली वेबसाइट समझ लें।
अनजान विज्ञापनों या मैसेज में मिले लिंक पर क्लिक करने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करें।
ध्यान रखें कि वेबसाइट पर HTTPS या ताले का निशान दिखाई देने का मतलब केवल यह है कि आपका कनेक्शन सुरक्षित तरीके से एन्क्रिप्ट किया गया है। इससे यह साबित नहीं होता कि वेबसाइट असली या भरोसेमंद है।
अगर कोई ऑनलाइन विक्रेता किसी अनजान व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजने के लिए कहता है, तो सावधान हो जाएं।
भुगतान करने से पहले जांच लें कि पैसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति या कंपनी का नाम असली विक्रेता से मेल खाता है या नहीं।
अपना यूपीआई पिन (UPI PIN), ओटीपी (OTP), बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड का सुरक्षा कोड किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें।
याद रखें कि यूपीआई पिन का इस्तेमाल पैसे भेजने या भुगतान की अनुमति देने के लिए किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं।
किसी अनजान ऑनलाइन वेबसाइट से सामान खरीदने से पहले विक्रेता की पूरी जानकारी जांचें।
उसका नाम, संपर्क विवरण, डिलीवरी की शर्तें और रिफंड पॉलिसी जरूर पढ़ें।
केवल वेबसाइट पर दिखाई गई अच्छी समीक्षाओं के आधार पर किसी विक्रेता पर भरोसा न करें। दूसरी भरोसेमंद वेबसाइटों पर भी ग्राहकों के अनुभव और रेटिंग देखें।
अगर कोई नई वेबसाइट केवल पांच सितारा रेटिंग और बहुत अच्छी समीक्षाएं दिखा रही है, तो उसकी विश्वसनीयता की अतिरिक्त जांच करें।
साइबर अपराधी व्हाट्सऐप, एसएमएस और सोशल मीडिया के जरिए नकली मोबाइल ऐप और खतरनाक डाउनलोड लिंक भेज सकते हैं।
ऐसे लिंक से ऐप डाउनलोड करने पर मोबाइल में नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर आ सकता है और निजी जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए अनजान लिंक या गैर-आधिकारिक स्रोतों से APK फाइल इंस्टॉल न करें।
शॉपिंग ऐप केवल भरोसेमंद ऐप स्टोर से डाउनलोड करें और ऐप बनाने वाली कंपनी की पहचान जरूर जांचें।
इसके अलावा, किसी भी शॉपिंग ऐप को मोबाइल की ऐसी जानकारी या सुविधाओं की अनुमति न दें, जिनकी उसे जरूरत नहीं है।
ऑनलाइन खरीदारी के दौरान अपने बैंक खाते, डेबिट या क्रेडिट कार्ड और यूपीआई से जुड़े लेनदेन की नियमित जांच करें।
बैंक से आने वाले भुगतान संबंधी मैसेज और नोटिफिकेशन को भी ध्यान से देखें।
अगर खाते से कोई ऐसा भुगतान दिखाई दे, जो आपने नहीं किया है, तो तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा देने वाली कंपनी से संपर्क करें।
भारत में वित्तीय साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की जा सकती है।
इसके अलावा, पीड़ित व्यक्ति राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
समय पर शिकायत करने से आगे होने वाले नुकसान को रोकने और ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से साइबर अपराधियों के लिए ऑनलाइन धोखाधड़ी करना और आसान हो सकता है।
अब ठग AI टूल्स की मदद से असली जैसे दिखने वाले विज्ञापन, मशहूर कंपनियों की भाषा और प्रचार शैली की नकल, नकली उत्पादों की तस्वीरें और भ्रामक वीडियो तैयार कर सकते हैं।
कुछ मामलों में साइबर अपराधी AI से तैयार की गई नकली आवाजों का इस्तेमाल करके ग्राहक सेवा प्रतिनिधि होने का दावा भी कर सकते हैं।
इस तरह के विज्ञापन और वेबसाइट देखने में इतने असली लग सकते हैं कि ग्राहकों के लिए उनकी सच्चाई पहचानना मुश्किल हो जाता है।
इसलिए केवल किसी विज्ञापन का अच्छा डिजाइन, आकर्षक तस्वीरें या लोकप्रिय ब्रांड का लोगो देखकर उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
AI की मदद से तैयार किए गए फर्जी विज्ञापनों और ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए ग्राहकों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
किसी भी ऑफर पर भरोसा करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाकर उसकी पुष्टि करें।
ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहें, जिनमें बहुत कम समय में ऑफर खत्म होने, सीमित स्टॉक बचने या तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है।
किसी उत्पाद या ऑफर की सच्चाई जांचने के लिए केवल तस्वीरों, वीडियो, मशहूर हस्तियों के प्रचार या कंपनी के लोगो पर निर्भर न रहें।
सबसे जरूरी बात यह है कि ऑनलाइन खरीदारी करने से पहले ऑफर, विक्रेता और वेबसाइट की विश्वसनीयता की स्वतंत्र रूप से जांच करें। इससे AI की मदद से होने वाली ऑनलाइन ठगी का खतरा कम किया जा सकता है।
अगर आपको लगता है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान आपके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो बिना देर किए जरूरी कदम उठाएं। समय पर शिकायत करने से आगे होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकने और ठगी की रकम वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।
सबसे पहले अपने बैंक, क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी या भुगतान सेवा प्रदाता से संपर्क करें। उन्हें संदिग्ध लेनदेन की जानकारी दें और आगे के अनधिकृत भुगतान रोकने के लिए जरूरी कार्रवाई करने को कहें। साथ ही यह भी पूछें कि क्या उस लेनदेन के लिए शिकायत, भुगतान विवाद या चार्जबैक (Chargeback) की सुविधा उपलब्ध है।
इसके बाद वित्तीय साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें। आप भारत सरकार के आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
शिकायत के लिए सभी जरूरी सबूत सुरक्षित रखें। इनमें फर्जी विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट, वेबसाइट का पता, भुगतान की रसीद, बैंक लेनदेन का विवरण, ठगों के साथ हुई बातचीत और ऑर्डर की पुष्टि से जुड़े मैसेज शामिल हो सकते हैं।
अगर आपने किसी संदिग्ध वेबसाइट पर अपना पासवर्ड या लॉगिन से जुड़ी जानकारी साझा की है, तो तुरंत संबंधित खाते का पासवर्ड बदलें। जहां संभव हो, वहां दो-स्तरीय सुरक्षा यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Two-Factor Authentication) भी चालू करें।
ध्यान रखें: ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत शिकायत करना और सभी सबूत सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इससे संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने और शिकायत का समाधान करने में मदद मिल सकती है।
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान भारी छूट और आकर्षक ऑफर का फायदा उठाया जा सकता है। हालांकि, खरीदारी करते समय फर्जी विज्ञापनों, नकली वेबसाइटों और संदिग्ध भुगतान अनुरोधों से सावधान रहना भी जरूरी है।
साइबर अपराधी अक्सर सीमित समय के ऑफर और सस्ते सामान का लालच देकर ग्राहकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने के लिए उकसाते हैं। ऐसे में बिना जांच किए किसी भी लिंक या विज्ञापन पर भरोसा करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
ऑनलाइन खरीदारी से पहले वेबसाइट की पहचान, विक्रेता की विश्वसनीयता और भुगतान की जानकारी की पुष्टि जरूर करें। सुरक्षित भुगतान के तरीकों का इस्तेमाल करें और अपने बैंक खाते से होने वाले लेनदेन पर नियमित नजर रखें।
AI की मदद से तैयार किए जा रहे नकली विज्ञापनों और वेबसाइटों के कारण अब अतिरिक्त सतर्कता बरतना और भी जरूरी हो गया है।
याद रखें कि ऑनलाइन भुगतान करने से पहले किसी ऑफर की जांच करने में लगाए गए कुछ मिनट आपके पैसे और निजी जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
सुरक्षित ऑनलाइन शॉपिंग का मतलब केवल सबसे बड़ी छूट पाना नहीं है, बल्कि सही जानकारी के आधार पर भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से खरीदारी करना और किसी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होने पर तुरंत उचित कदम उठाना भी है।