सही कर्मचारियों को काम पर रखने का मतलब केवल अच्छी डिग्री, तकनीकी ज्ञान और लंबे अनुभव वाले लोगों को चुनना नहीं है। कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की भी जरूरत होती है, जो अपनी बात स्पष्ट रूप से समझा सकें, दूसरों के साथ मिलकर काम कर सकें, समस्याओं का समाधान निकाल सकें, बदलावों को आसानी से अपना सकें, समय का सही उपयोग करें और मुश्किल परिस्थितियों में समझदारी से काम लें।
इन क्षमताओं को सॉफ्ट स्किल्स कहा जाता है। ये कौशल तय करते हैं कि कोई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को कितनी अच्छी तरह निभाता है, टीम के लक्ष्यों को पूरा करने में कितना योगदान देता है और कार्यस्थल पर दूसरों के साथ उसके संबंध कैसे रहते हैं।
आज के बदलते कार्यस्थल में सॉफ्ट स्किल्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है। कंपनियां नई तकनीकों को अपना रही हैं, काम करने के लचीले तरीके अपना रही हैं और अलग-अलग अनुभवों, विचारों और जरूरतों वाले लोगों के साथ काम कर रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों के लिए अपने काम का ज्ञान रखने के साथ-साथ दूसरों के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी जरूरी हो गया है।
किसी कर्मचारी को तकनीकी काम की अच्छी जानकारी हो सकती है, लेकिन अगर वह अपनी बात ठीक से नहीं समझा पाता, दूसरों की सलाह को स्वीकार नहीं करता, मतभेदों को सुलझाने में परेशानी महसूस करता है या टीम के साथ मिलकर काम नहीं कर पाता, तो उसके लिए सफल होना मुश्किल हो सकता है। वहीं, अच्छे व्यवहार और बातचीत की क्षमता रखने वाला कर्मचारी टीमवर्क को बेहतर बनाने, ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बनाने और काम की उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, भर्ती के दौरान उम्मीदवारों की सॉफ्ट स्किल्स को परखना हमेशा आसान नहीं होता। कई उम्मीदवार खुद को अच्छा कम्युनिकेटर, बेहतर लीडर या समस्याओं का समाधान निकालने में माहिर बता सकते हैं। लेकिन केवल उनके दावों से यह साबित नहीं होता कि वे वास्तविक परिस्थितियों में भी इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर पाएंगे।
इसलिए, भर्ती करने वाले लोगों को ऐसे तरीके अपनाने चाहिए, जिनसे उम्मीदवारों के वास्तविक व्यवहार और क्षमताओं का पता चल सके। इसके लिए केवल रिज्यूमे, आत्मविश्वास या पहली मुलाकात में बनी राय पर निर्भर रहना सही नहीं है।
एक अच्छी भर्ती प्रक्रिया में व्यवहार से जुड़े इंटरव्यू सवाल, काम से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित प्रश्न, उपयुक्त मूल्यांकन और सभी उम्मीदवारों के लिए एक जैसे मापदंड शामिल होने चाहिए। इससे उम्मीदवारों की क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने और उनकी तुलना करने में मदद मिलती है।
इस लेख में हम जानेंगे कि सॉफ्ट स्किल्स क्यों महत्वपूर्ण हैं Why are soft skills important?, भर्ती के दौरान किन क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए और इंटरव्यू में उम्मीदवारों की सॉफ्ट स्किल्स का निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आकलन कैसे किया जा सकता है। इससे कंपनियों और HR टीमों को सही उम्मीदवार चुनने और बेहतर भर्ती संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
सॉफ्ट स्किल्स ऐसी व्यक्तिगत और सामाजिक क्षमताएं हैं, जो यह तय करती हैं कि कोई व्यक्ति दूसरों से कैसे बात करता है, समस्याओं को कैसे सुलझाता है, अपनी जिम्मेदारियां कैसे निभाता है, फैसले कैसे लेता है और टीम के साथ मिलकर कैसे काम करता है। तकनीकी कौशल आमतौर पर किसी खास काम, मशीन या सॉफ्टवेयर से जुड़े होते हैं, जबकि सॉफ्ट स्किल्स का इस्तेमाल अलग-अलग नौकरियों और क्षेत्रों में किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को प्रोजेक्ट की जरूरतों को समझने के लिए समस्या सुलझाने और बातचीत करने के कौशल की जरूरत होती है। एक सेल्स प्रोफेशनल को ग्राहकों की जरूरतों और परेशानियों को समझने के लिए उनकी बात ध्यान से सुनना और उनकी भावनाओं को समझना आना चाहिए। वहीं, एक मैनेजर को टीम का सही मार्गदर्शन करने के लिए नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने और विवाद सुलझाने जैसे कौशल की जरूरत होती है।
अधिकतर कर्मचारी अकेले काम नहीं करते हैं। उन्हें अपने सहकर्मियों से बातचीत करनी होती है, जरूरी जानकारी साझा करनी होती है, काम को आपस में बांटना होता है और असहमति होने पर उसका समाधान निकालना होता है।
जो उम्मीदवार दूसरों की बात ध्यान से सुनते हैं, अलग-अलग विचारों का सम्मान करते हैं और टीम के काम में सकारात्मक योगदान देते हैं, वे बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे काम को समय पर पूरा करना और साझा लक्ष्यों को हासिल करना आसान हो जाता है।
इसीलिए, इंटरव्यू के दौरान यह समझना जरूरी है कि उम्मीदवार दूसरों के साथ कैसे काम करते हैं, अपनी राय किस तरह रखते हैं और किसी समस्या के समय टीम का सहयोग कैसे करते हैं।
आज कंपनियों में काम करने के तरीके लगातार बदल रहे हैं। नई तकनीकों का इस्तेमाल, काम की प्रक्रियाओं में बदलाव और ग्राहकों की बढ़ती उम्मीदें कर्मचारियों के सामने नई चुनौतियां पैदा करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में लचीला व्यवहार रखने वाले, मुश्किलों का सामना करने वाले और नई चीजें सीखने के लिए तैयार कर्मचारी बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 World Economic Forum's Future of Jobs Report 2025 के अनुसार, सर्वे में शामिल 69% नियोक्ताओं ने विश्लेषणात्मक सोच (Analytical Thinking) को कर्मचारियों के लिए एक प्रमुख कौशल माना। इसके बाद 67% नियोक्ताओं ने मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की क्षमता, लचीलेपन और तेजी से बदलाव अपनाने के कौशल को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, 61% नियोक्ताओं ने नेतृत्व और दूसरों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने की क्षमता को प्रमुख कौशल माना। इसके अलावा, 50% उत्तरदाताओं ने सहानुभूति और दूसरों की बात ध्यान से सुनने को जरूरी कौशल बताया।
ये आंकड़े बताते हैं कि आज के कार्यस्थल में तकनीकी जानकारी के साथ-साथ मानवीय कौशल भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए, भर्ती के दौरान ऐसे सवाल पूछना उपयोगी होता है, जिनसे पता चले कि उम्मीदवार ने पहले किसी बदलाव का सामना कैसे किया, नई जिम्मेदारी कैसे सीखी और मुश्किल परिस्थितियों में खुद को कैसे संभाला।
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अच्छी बातचीत से कर्मचारी अपनी बात स्पष्ट रूप से समझा सकते हैं, दूसरों की उम्मीदों को समझ सकते हैं और गलतफहमियों को कम कर सकते हैं। सहानुभूति उन्हें दूसरे व्यक्ति के नजरिए को समझने में मदद करती है। वहीं, पेशेवर व्यवहार उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत और सम्मानजनक तरीके से जवाब देने में मदद करता है।
ये कौशल ग्राहक सेवा, बिक्री, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जहां लोगों से लगातार बातचीत करनी पड़ती है।
उदाहरण के लिए, ग्राहक सेवा में काम करने वाले कर्मचारी को नाराज ग्राहक की बात धैर्य से सुननी चाहिए और उसकी समस्या का समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए। इसी तरह, बिक्री से जुड़े व्यक्ति को ग्राहक की जरूरत समझकर सही जानकारी देनी चाहिए, न कि केवल अपना उत्पाद बेचने पर ध्यान देना चाहिए।
इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से उनके पिछले अनुभवों के बारे में पूछकर यह समझा जा सकता है कि वे ग्राहकों, सहकर्मियों या अन्य लोगों के साथ मुश्किल परिस्थितियों में किस तरह व्यवहार करते हैं।
नेतृत्व करने की क्षमता केवल वरिष्ठ अधिकारियों या मैनेजरों के लिए जरूरी नहीं है। किसी भी पद पर काम करने वाले कर्मचारी को पहल करने, सही निर्णय लेने, अपनी गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करने और जरूरत पड़ने पर सहकर्मियों की मदद करने की आवश्यकता हो सकती है।
जिम्मेदारी निभाने वाला कर्मचारी अपने काम को गंभीरता से लेता है, तय समय पर काम पूरा करने की कोशिश करता है और गलती होने पर उसे छिपाने के बजाय सुधारने का प्रयास करता है। इसी तरह, नेतृत्व क्षमता रखने वाला कर्मचारी समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकता है और टीम के अन्य सदस्यों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
भर्ती के दौरान इन व्यवहारों का आकलन करने से यह समझने में मदद मिलती है कि उम्मीदवार अपनी तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर संगठन के लक्ष्यों में कितना योगदान दे सकता है।
इसलिए, उम्मीदवारों से ऐसे उदाहरण पूछना उपयोगी होता है, जिनमें उन्होंने किसी समस्या को हल करने के लिए पहल की हो, किसी गलती से सीख ली हो या किसी सहकर्मी की मदद करके टीम का काम आसान बनाया हो।
हां, नौकरी के इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों की सॉफ्ट स्किल्स का आकलन किया जा सकता है। हालांकि, तकनीकी कौशल की तरह इन्हें सीधे मापना हमेशा आसान नहीं होता। उदाहरण के लिए, कोडिंग टेस्ट से पता चल सकता है कि कोई उम्मीदवार प्रोग्रामिंग का काम सही तरीके से कर सकता है या नहीं। इसी तरह, लिखने का नमूना देखकर उसकी लेखन क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन सहानुभूति, बदलावों को अपनाने की क्षमता, टीमवर्क और अपनी भावनाओं को समझने जैसे कौशलों को परखने के लिए अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है।
कोई उम्मीदवार आत्मविश्वास के साथ खुद को अच्छा कम्युनिकेटर बता सकता है, लेकिन केवल आत्मविश्वास से यह साबित नहीं होता कि वह अपनी बात स्पष्ट रूप से समझा सकता है या दूसरों की बात ध्यान से सुनता है। इसी तरह, खुद को अच्छा लीडर बताने वाला व्यक्ति असहमति होने पर सही फैसला लेने या अपनी गलती की जिम्मेदारी स्वीकार करने में परेशानी महसूस कर सकता है।
इसलिए, भर्ती करने वालों को केवल उम्मीदवारों की बातों या अपने अनुमान के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें अलग-अलग तरीकों से उम्मीदवारों के व्यवहार और क्षमताओं से जुड़े प्रमाण जुटाने चाहिए। इंटरव्यू के सवाल, पिछले अनुभवों के उदाहरण और काम से जुड़ी परिस्थितियों पर उम्मीदवार की प्रतिक्रिया इसमें मदद कर सकती है।
भर्ती के दौरान केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उम्मीदवार आत्मविश्वासी, मिलनसार या समझदार दिखाई देता है या नहीं। जरूरी है कि भर्ती करने वाले उसकी क्षमताओं को उसके वास्तविक व्यवहार के आधार पर समझें। इसके लिए हर सॉफ्ट स्किल से जुड़े ऐसे व्यवहार तय किए जा सकते हैं, जिन्हें देखा और परखा जा सके।
उदाहरण के लिए।
- कम्युनिकेशन यानी बातचीत करने की क्षमता (Communication): उम्मीदवार अपनी बात स्पष्ट रूप से समझाता है, दूसरों की बात बीच में काटे बिना सुनता है और सामने वाले व्यक्ति के अनुसार अपनी बात रखने का तरीका बदलता है।
- टीमवर्क यानी मिलकर काम करने की क्षमता (Teamwork): उम्मीदवार जरूरी जानकारी दूसरों के साथ साझा करता है, अलग-अलग विचारों का सम्मान करता है और टीम के साझा लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान देता है।
- समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem-Solving): उम्मीदवार समस्या की असली वजह पहचानने की कोशिश करता है, अलग-अलग समाधानों पर विचार करता है और अपने फैसले के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से बताता है।
- बदलाव अपनाने की क्षमता (Adaptability): उम्मीदवार अचानक आने वाले बदलावों का समझदारी से सामना करता है और जरूरत पड़ने पर अपनी योजना में बदलाव करता है।
- जिम्मेदारी निभाने की क्षमता (Accountability): उम्मीदवार अपनी गलतियों को स्वीकार करता है, काम में आने वाली समस्याओं के बारे में समय पर जानकारी देता है और उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाता है।
- दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता (Empathy): उम्मीदवार दूसरों की परेशानियों और जरूरतों को समझने की कोशिश करता है और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करता है।
अमेरिका के कार्मिक प्रबंधन कार्यालय (US Office of Personnel Management यानी OPM) के अनुसार, संरचित इंटरव्यू के जरिए उम्मीदवारों की नौकरी से जुड़ी क्षमताओं का आकलन किया जा सकता है। इसमें उम्मीदवारों से उनके पिछले अनुभवों के बारे में सवाल पूछे जाते हैं और काल्पनिक कार्य परिस्थितियों में उनकी प्रतिक्रिया को समझा जाता है।
इस तरीके में सभी उम्मीदवारों से समान प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं और उनके जवाबों का मूल्यांकन पहले से तय मापदंडों के आधार पर किया जाता है। इससे भर्ती करने वालों को उम्मीदवारों की तुलना अधिक निष्पक्ष और एकसमान तरीके से करने में मदद मिलती है।
सॉफ्ट स्किल्स का सही आकलन करने की प्रक्रिया इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही शुरू हो जाती है और उम्मीदवार के चयन तक चलती है। इसके लिए कंपनियों को ऐसे तरीके अपनाने चाहिए, जो संबंधित पद की जरूरतों के अनुसार हों। उम्मीदवारों से काम से जुड़े सवाल पूछना, उनके जवाबों में दिए गए उदाहरणों को ध्यान से समझना और सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन एक जैसे मापदंडों पर करना जरूरी है।
इंटरव्यू के सवाल तैयार करने से पहले यह समझना जरूरी है कि संबंधित पद पर काम करने के लिए किन सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता है। हर नौकरी के लिए एक जैसी क्षमताओं की सूची बनाना सही तरीका नहीं है, क्योंकि अलग-अलग पदों की जिम्मेदारियां भी अलग होती हैं।
उदाहरण के लिए, एक टीम लीडर के लिए विवाद सुलझाने, काम बांटने, फैसले लेने और दूसरों को मार्गदर्शन देने की क्षमता जरूरी हो सकती है। वहीं, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि के लिए धैर्य, ध्यान से सुनने, दूसरों की जरूरतों को समझने और स्पष्ट बातचीत करने का कौशल महत्वपूर्ण है। इसी तरह, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के लिए काम व्यवस्थित करने, टीम के साथ तालमेल बनाने, समय का सही उपयोग करने और कई जरूरी कामों को एक साथ संभालने की क्षमता उपयोगी होती है।
सबसे पहले यह समझें कि कर्मचारी को कौन-कौन से काम करने होंगे, उसे किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और किन लोगों के साथ मिलकर काम करना होगा। इसके लिए मैनेजरों और अनुभवी कर्मचारियों से भी सलाह ली जा सकती है। उनसे यह जानने की कोशिश करें कि कौन-से व्यवहार किसी कर्मचारी को अपने काम में बेहतर बनाते हैं और किन कमियों के कारण काम प्रभावित होता है।
इसके बाद उन सॉफ्ट स्किल्स की सूची तैयार करें, जिनका इंटरव्यू में आकलन करना जरूरी है। एक इंटरव्यू में हर संभव कौशल को परखने की कोशिश करने के बजाय चार से छह सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। इससे इंटरव्यू को व्यवस्थित रखना और उम्मीदवारों का सही मूल्यांकन करना आसान हो जाता है।
व्यवहार से जुड़े सवालों में उम्मीदवारों से उनके पिछले अनुभवों के बारे में पूछा जाता है। ये अनुभव पिछली नौकरी, पढ़ाई, स्वयंसेवा या किसी अन्य संबंधित गतिविधि से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे सवालों का उद्देश्य यह समझना है कि उम्मीदवार ने पहले किसी परिस्थिति का सामना कैसे किया और समस्या को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए।
उदाहरण के लिए, उम्मीदवार से केवल यह पूछने के बजाय कि क्या वह टीम के साथ अच्छा काम कर सकता है, उससे सवाल पूछें कि जब उसे किसी ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पड़ा, जिसके विचार उससे अलग थे, तो उसने स्थिति को कैसे संभाला।
आपको कभी ऐसा फीडबैक मिला हो, जिसे स्वीकार करना मुश्किल था, तो आपने उसके बाद क्या किया।
काम के दौरान आपसे कोई गलती हुई हो, तो आपने उसे कैसे सुधारा।
जब आपको कम समय में कोई जरूरी काम पूरा करना था, तब आपने समय का प्रबंधन कैसे किया।
किसी सहकर्मी के साथ असहमति होने पर आपने समस्या को कैसे सुलझाया।
जब आपको कोई नई प्रक्रिया जल्दी सीखनी पड़ी, तो आपने उसे कैसे सीखा।
इन सवालों के जवाबों से भर्ती करने वालों को उम्मीदवार की सोच, व्यवहार और समस्याओं से निपटने के तरीके को समझने में मदद मिलती है।
उम्मीदवारों के जवाबों को बेहतर ढंग से समझने के लिए STAR मेथड का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक ऐसा तरीका है, जिसके माध्यम से उम्मीदवार अपने अनुभव को चार हिस्सों में समझा सकता है।
स्थिति (Situation): उस समय क्या परिस्थिति थी और समस्या क्या थी।
जिम्मेदारी (Task): उम्मीदवार को कौन-सा काम करना था या किस चुनौती का सामना करना था।
कार्रवाई (Action): समस्या को सुलझाने के लिए उम्मीदवार ने खुद कौन-से कदम उठाए।
परिणाम (Result): उन कदमों का क्या नतीजा निकला और उम्मीदवार ने उस अनुभव से क्या सीखा।
इस तरीके में कार्रवाई वाला हिस्सा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि उम्मीदवार ने खुद क्या योगदान दिया, न कि केवल यह कि पूरी टीम ने मिलकर क्या हासिल किया।
अगर उम्मीदवार का जवाब स्पष्ट नहीं है, तो इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति को उससे आगे के सवाल पूछने चाहिए। उदाहरण के लिए, आप पूछ सकते हैं कि आपने व्यक्तिगत रूप से क्या किया, दूसरे व्यक्ति ने कैसी प्रतिक्रिया दी और अगर आपको दोबारा ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े, तो आप क्या अलग करेंगे। ऐसे सवालों से उम्मीदवार के अनुभव और वास्तविक क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
इस तरीके में उम्मीदवारों से पूछा जाता है कि अगर उन्हें किसी काल्पनिक कार्यस्थल की समस्या का सामना करना पड़े, तो वे उसे कैसे सुलझाएंगे। यह तरीका उन उम्मीदवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, जिनके पास नौकरी का अनुभव कम है। इसका इस्तेमाल उन पदों के लिए भी किया जा सकता है, जहां कुछ खास परिस्थितियों का सामना कभी-कभी करना पड़ता है।
उदाहरण के लिए, इंटरव्यू में यह सवाल पूछा जा सकता है।
“मान लीजिए कि आपकी टीम को आज एक ग्राहक के सामने प्रेजेंटेशन देना है, लेकिन आपका एक सहकर्मी जरूरी रिपोर्ट समय पर नहीं देता है। उसने देरी का कारण भी नहीं बताया है। ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे।”
एक अच्छे जवाब में उम्मीदवार अपने सहकर्मी से बात करके देरी का कारण जानने, जरूरी जानकारी की पहचान करने, संबंधित मैनेजर को संभावित परेशानी के बारे में बताने और काम पूरा करने के लिए व्यावहारिक योजना बनाने जैसे कदमों का उल्लेख कर सकता है। साथ ही, उसे सहकर्मी के साथ पेशेवर संबंध बनाए रखने के महत्व को भी समझना चाहिए।
इसी तरह, उम्मीदवारों से नाराज ग्राहक को संभालने, दो मैनेजरों से अलग-अलग निर्देश मिलने, प्रोजेक्ट की प्राथमिकताएं अचानक बदलने या टीम के किसी सदस्य द्वारा बार-बार समय पर काम पूरा न करने जैसी परिस्थितियों के बारे में पूछा जा सकता है।
किसी कार्यस्थल की समस्या को सुलझाने के एक से अधिक सही तरीके हो सकते हैं। इसलिए, भर्ती करने वालों को केवल उम्मीदवार के अंतिम जवाब पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्हें यह भी समझना चाहिए कि उम्मीदवार समस्या से जुड़ी जानकारी कैसे जुटाता है, दूसरे लोगों पर उसके प्रभाव के बारे में कैसे सोचता है, अपना फैसला किस तरह समझाता है और अलग-अलग प्राथमिकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाता है।
परिस्थितियों पर आधारित सवाल संबंधित नौकरी की वास्तविक जिम्मेदारियों से जुड़े होने चाहिए। ऐसे पहेली जैसे सवालों या अवास्तविक परिस्थितियों से बचना चाहिए, जिनका उद्देश्य केवल यह पता लगाना हो कि उम्मीदवार इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति की पसंद का जवाब दे सकता है या नहीं।
बिना किसी तय योजना के लिए जाने वाले इंटरव्यू में उम्मीदवार के बारे में पहली राय, व्यक्तिगत पसंद या सामान्य बातचीत चयन के फैसले को प्रभावित कर सकती है। इस समस्या को कम करने के लिए संरचित इंटरव्यू का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें सभी उम्मीदवारों से पहले से तय किए गए मुख्य सवाल पूछे जाते हैं और उनके जवाबों का मूल्यांकन एक जैसे मापदंडों के आधार पर किया जाता है।
अमेरिका के कार्मिक प्रबंधन कार्यालय (US Office of Personnel Management यानी OPM) के अनुसार, संरचित इंटरव्यू नौकरी से जुड़ी क्षमताओं का व्यवस्थित तरीके से आकलन करने में मदद करते हैं। सवालों और मूल्यांकन के नियमों को पहले से तय करने से अलग-अलग इंटरव्यू लेने वालों के बीच मूल्यांकन में समानता बढ़ सकती है और व्यक्तिगत पसंद का प्रभाव कम हो सकता है।
1. जरूरी कौशल तय करें। संबंधित पद की जिम्मेदारियों के अनुसार उन सॉफ्ट स्किल्स की पहचान करें, जिनकी कर्मचारी को जरूरत होगी।
2. सवाल तैयार करें। उम्मीदवारों के पिछले अनुभवों और कार्यस्थल की संभावित परिस्थितियों से जुड़े सवालों की सूची बनाएं।
3. सभी उम्मीदवारों से समान मुख्य सवाल पूछें। इससे हर उम्मीदवार को अपनी क्षमताएं दिखाने का समान अवसर मिलता है।
4. मूल्यांकन के मापदंड तय करें। पहले से निर्धारित करें कि कमजोर, संतोषजनक और मजबूत जवाबों में क्या अंतर होगा।
5. जवाबों का अलग-अलग मूल्यांकन करें। उम्मीदवारों पर चर्चा करने से पहले प्रत्येक इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति अपने मूल्यांकन और उसके कारणों को दर्ज करे।
6. व्यक्तित्व के बजाय प्रमाणों की तुलना करें। उम्मीदवारों की तुलना उनके जवाबों, अनुभवों और संबंधित कौशल के आधार पर करें, न कि केवल उनके आत्मविश्वास या बातचीत के तरीके के आधार पर।
संरचित इंटरव्यू से हर तरह के पक्षपात को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, इससे भर्ती के फैसलों को अधिक स्पष्ट, निष्पक्ष और समझने योग्य बनाया जा सकता है। साथ ही, कंपनियों के लिए अपनी भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करना और समय के साथ उसमें सुधार करना भी आसान हो जाता है।
पर्सनैलिटी टेस्ट यानी व्यक्तित्व से जुड़े आकलन के जरिए उम्मीदवार की काम करने की आदतों और पसंद को समझने में मदद मिल सकती है। इससे यह जानने में मदद मिलती है कि कोई व्यक्ति टीम के साथ कैसे काम करता है, अपने काम को किस तरह व्यवस्थित करता है और फैसले कैसे लेता है। भर्ती प्रक्रिया में इन टेस्ट का इस्तेमाल अतिरिक्त जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब, जब इन्हें नौकरी से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हो।
हालांकि, केवल पर्सनैलिटी टेस्ट के नतीजों के आधार पर यह तय नहीं करना चाहिए कि कोई उम्मीदवार नौकरी में सफल होगा या नहीं। किसी व्यक्ति का व्यवहार काम की परिस्थिति, टीम के सदस्यों, कार्यस्थल के माहौल और उसे मिलने वाले सहयोग पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, कम बोलने वाला व्यक्ति भी एक अच्छा लीडर या प्रभावी कम्युनिकेटर हो सकता है।
पर्सनैलिटी टेस्ट का इस्तेमाल करने से पहले भर्ती करने वालों को यह जांचना चाहिए कि वह टेस्ट किस विशेषता का आकलन करता है और क्या उसके परिणामों की विश्वसनीयता के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं। यह भी देखना जरूरी है कि टेस्ट संबंधित पद और उम्मीदवारों के लिए उपयुक्त है या नहीं।
इसके अलावा, टेस्ट देते समय उम्मीदवारों को होने वाली संभावित परेशानियों, उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा और अनुचित तरीके से किसी उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया से बाहर किए जाने के जोखिम पर भी ध्यान देना चाहिए।
Myers-Briggs Type Indicator (MBTI), Caliper Profile और 16PF जैसे टूल व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं का आकलन करने के लिए बनाए गए हैं। इन सभी का उद्देश्य और तरीका एक जैसा नहीं है। इसलिए, इन्हें एक-दूसरे का विकल्प नहीं मानना चाहिए। इन टेस्ट के नतीजों को इंटरव्यू, काम से जुड़े व्यावहारिक परीक्षणों और अन्य उपयोगी मूल्यांकन तरीकों के साथ ही देखना चाहिए।
भर्ती का फैसला केवल किसी पर्सनैलिटी लेबल या एक खास व्यक्तित्व को आदर्श मानकर नहीं करना चाहिए। इन टेस्ट का उद्देश्य उम्मीदवार की काम करने की प्रवृत्तियों को समझना है, न कि उसे किसी निश्चित श्रेणी में बांध देना।
कई उम्मीदवार इंटरव्यू में अपनी सॉफ्ट स्किल्स के बारे में अच्छी तरह बता सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे वास्तविक काम में भी इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर पाएं। इसलिए, नौकरी से जुड़े छोटे-छोटे अभ्यास और परीक्षण आयोजित करना उपयोगी होता है।
इन अभ्यासों से भर्ती करने वाले यह देख सकते हैं कि उम्मीदवार अपनी बात कैसे समझाता है, जरूरी कामों को प्राथमिकता कैसे देता है, समस्याओं का समाधान कैसे खोजता है और दूसरों के साथ मिलकर कैसे काम करता है।
- लिखित बातचीत की क्षमता (Written Communication): उम्मीदवार से ऐसा ईमेल लिखने के लिए कहें, जिसमें किसी प्रोजेक्ट में देरी होने की जानकारी ग्राहक को स्पष्ट और पेशेवर तरीके से दी गई हो।
- काम को प्राथमिकता देने की क्षमता (Prioritization): उम्मीदवार को कई ऐसे काम दें, जिनकी समय-सीमा अलग-अलग हो और जिन्हें एक साथ पूरा करना मुश्किल हो। फिर उससे पूछें कि वह इन कामों को किस क्रम में पूरा करेगा और क्यों।
- समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem-Solving): उम्मीदवार के सामने कार्यस्थल से जुड़ी कोई वास्तविक समस्या रखें और उससे संभावित समाधानों के बारे में बताने को कहें।
- टीमवर्क (Teamwork): उम्मीदवारों को किसी छोटे समूह में एक साथ काम करने का अवसर दें। इस दौरान देखें कि वे दूसरों की बात कैसे सुनते हैं, सहयोग कैसे करते हैं और अलग-अलग विचार होने पर किस तरह अपनी राय रखते हैं।
- प्रेजेंटेशन देने की क्षमता (Presentation Skills): उम्मीदवार से किसी प्रस्ताव या विचार को ऐसे लोगों के सामने समझाने के लिए कहें, जिन्हें उस विषय की तकनीकी जानकारी न हो।
अमेरिका का कार्मिक प्रबंधन कार्यालय (US Office of Personnel Management यानी OPM) भी काम से जुड़े व्यावहारिक परीक्षणों को उम्मीदवारों के आकलन का एक तरीका मानता है। इन परीक्षणों में ऐसे अभ्यास शामिल होते हैं, जो वास्तविक नौकरी में किए जाने वाले कामों से मिलते-जुलते हैं। इस तरह, उम्मीदवार की क्षमताओं को संबंधित पद की जरूरतों के आधार पर समझा जा सकता है।
व्यावहारिक परीक्षण इतने लंबे और कठिन नहीं होने चाहिए कि उम्मीदवारों से बिना भुगतान के वास्तविक काम करवाया जाने लगे। इनका उद्देश्य केवल संबंधित सॉफ्ट स्किल्स का आकलन करना होना चाहिए।
इसके लिए उम्मीदवारों को स्पष्ट निर्देश दें, काम पूरा करने के लिए उचित समय दें और जरूरी जानकारी पहले से उपलब्ध कराएं। समान पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का मूल्यांकन एक जैसे मापदंडों पर करें।
जहां संभव हो, दिव्यांग उम्मीदवारों या विशेष जरूरत वाले आवेदकों के लिए उचित सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि परीक्षण में ऐसी अनावश्यक बाधाएं न हों, जिनका वास्तविक नौकरी के प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।
इस तरह, कंपनियां उम्मीदवारों को अपनी क्षमताएं दिखाने का समान अवसर दे सकती हैं और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और निष्पक्ष बना सकती हैं।
ग्रुप एक्टिविटी के जरिए यह समझने में मदद मिलती है कि उम्मीदवार दूसरों के साथ मिलकर कैसे काम करता है, अलग-अलग विचारों को किस तरह सुनता है और कम समय में फैसले कैसे लेता है। वहीं, रोल-प्ले के माध्यम से यह देखा जा सकता है कि उम्मीदवार किसी वास्तविक कार्यस्थल की स्थिति में किस तरह व्यवहार करेगा। ये तरीके खासतौर पर उन पदों के लिए उपयोगी हैं, जिनमें ग्राहकों से बातचीत करना, बातचीत के जरिए समझौता करना, टीम का नेतृत्व करना या विवाद सुलझाना जरूरी होता है।
उदाहरण के लिए, ग्राहक सेवा से जुड़े पद के लिए भर्ती करते समय इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति नाराज ग्राहक के साथ बातचीत करने की काल्पनिक स्थिति बना सकता है। इस दौरान उम्मीदवार की बात सुनने की क्षमता, सहानुभूति, स्पष्ट बातचीत, पेशेवर व्यवहार और समस्या का व्यावहारिक समाधान खोजने की योग्यता का आकलन किया जा सकता है।
ग्रुप एक्टिविटी आयोजित करते समय सभी उम्मीदवारों को समान अवसर देना जरूरी है। भर्ती करने वालों को केवल उस व्यक्ति को बेहतर नहीं मानना चाहिए, जो सबसे ज्यादा बोलता है या चर्चा में सबसे अधिक हिस्सा लेता है। कम बोलने वाला उम्मीदवार भी विचारों को सही तरीके से समझाकर, उपयोगी सवाल पूछकर या समूह को किसी फैसले तक पहुंचने में मदद करके महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इसलिए, उम्मीदवारों का मूल्यांकन इस आधार पर करें कि उनके विचार कितने उपयोगी हैं और वे टीम के काम में किस तरह योगदान देते हैं। केवल आत्मविश्वास से बोलने या बार-बार अपनी बात रखने को योग्यता का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
उम्मीदवार के पिछले काम से जुड़े लोगों से जानकारी लेने पर उसकी कार्यशैली, टीम के साथ तालमेल, जिम्मेदारी निभाने की आदत और बातचीत करने के तरीके को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर और उचित अनुमति के साथ, भर्ती करने वाले पूर्व मैनेजरों या पेशेवर संदर्भ देने वाले लोगों से उम्मीदवार के व्यवहार के बारे में जानकारी मांग सकते हैं।
सामान्य राय पूछने के बजाय उनसे वास्तविक घटनाओं और अनुभवों से जुड़े सवाल पूछना अधिक उपयोगी होता है।
संदर्भ जांच के दौरान पूछे जा सकने वाले कुछ सवाल। (Examples of Reference Check Questions)
उम्मीदवार दूसरों से मिले सुझावों और फीडबैक पर किस तरह प्रतिक्रिया देता था।
वह तय समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने में कितना भरोसेमंद था।
सहकर्मियों के साथ मतभेद होने पर वह स्थिति को कैसे संभालता था।
क्या आप किसी ऐसे उदाहरण के बारे में बता सकते हैं, जिसमें उम्मीदवार ने किसी मुश्किल समस्या का समाधान निकाला हो।
उम्मीदवार को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए किस तरह के सहयोग की जरूरत होती थी।
संदर्भों से मिली जानकारी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। अलग-अलग मैनेजरों की अपेक्षाएं अलग हो सकती हैं और किसी एक व्यक्ति की राय अधूरी या पक्षपातपूर्ण भी हो सकती है। इसलिए, केवल संदर्भ देने वाले व्यक्ति की बात के आधार पर उम्मीदवार को अस्वीकार या चयनित नहीं करना चाहिए।
जहां जरूरी हो, उम्मीदवार की सहमति लें और निजी जानकारी तथा रोजगार से जुड़े लागू नियमों का पालन करें। संदर्भ जांच को इंटरव्यू और अन्य मूल्यांकन तरीकों से मिली जानकारी के साथ जोड़कर देखना बेहतर होता है।
स्कोरकार्ड एक ऐसा मूल्यांकन प्रारूप है, जिसकी मदद से भर्ती करने वाले सभी उम्मीदवारों की क्षमताओं की तुलना एक जैसे मापदंडों पर कर सकते हैं। इससे यह समझाना भी आसान होता है कि किसी उम्मीदवार को कोई विशेष अंक क्यों दिए गए हैं।
स्कोरकार्ड को इंटरव्यू शुरू होने से पहले तैयार करना चाहिए। इसे बाद में किसी पसंदीदा उम्मीदवार के पक्ष में बदलना सही नहीं है।
एक आसान तरीका यह है कि प्रत्येक सॉफ्ट स्किल को पांच अंकों के पैमाने पर आंका जाए।
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अंक (Score) |
मूल्यांकन का आधार (Evaluation Standard) |
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1 — कमजोर (Weak) |
उम्मीदवार का जवाब स्पष्ट नहीं है या वह संबंधित कौशल का कोई उपयोगी उदाहरण नहीं दे पाता है। |
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2 — सीमित (Limited) |
उम्मीदवार को कौशल की कुछ समझ है, लेकिन वह अपने कदमों या सोच को स्पष्ट रूप से नहीं समझा पाता है। |
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3 — संतोषजनक (Competent) |
उम्मीदवार संबंधित उदाहरण देता है और समस्या से निपटने का उचित तरीका समझाता है। |
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4 — मजबूत (Strong) |
उम्मीदवार अपने कदम स्पष्ट रूप से बताता है, समझदारी से फैसले लेता है और सकारात्मक योगदान का उदाहरण देता है। |
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5 — उत्कृष्ट (Excellent) |
उम्मीदवार विस्तृत उदाहरणों के साथ प्रभावी व्यवहार, सही निर्णय लेने की क्षमता और अपने अनुभवों से सीखने की योग्यता दिखाता है। |
उदाहरण के लिए, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को बातचीत करने की क्षमता, टीमवर्क, समस्या सुलझाने, बदलाव अपनाने और समय प्रबंधन के लिए अलग-अलग अंक दिए जा सकते हैं।
अगर किसी पद के लिए कुछ कौशल दूसरों से अधिक महत्वपूर्ण हैं, तो भर्ती करने वाले उन्हें अलग-अलग महत्व भी दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, ग्राहक सेवा के पद पर बातचीत और सहानुभूति की क्षमता को अधिक महत्व दिया जा सकता है। वहीं, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के लिए समय प्रबंधन और काम को व्यवस्थित करने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, अलग-अलग कौशल को दिया जाने वाला महत्व नौकरी की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय किया जाना चाहिए और सभी उम्मीदवारों के मूल्यांकन में समान रूप से लागू होना चाहिए। इससे भर्ती के फैसले अधिक व्यवस्थित, स्पष्ट और तर्कसंगत बन सकते हैं।
केवल अंकों के आधार पर उम्मीदवार की पूरी क्षमता को समझना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, इंटरव्यू लेने वालों को हर अंक के साथ उसके पीछे का कारण भी संक्षेप में लिखना चाहिए। उदाहरण के लिए, उम्मीदवार ने किसी विवाद को कैसे सुलझाया, काम में देरी होने पर दूसरों को कैसे जानकारी दी या परिस्थिति बदलने पर अपनी योजना में क्या बदलाव किया।
अगर इंटरव्यू में कई लोग शामिल हैं, तो उन्हें आपस में चर्चा करने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार के जवाबों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना चाहिए। इससे किसी एक व्यक्ति की शुरुआती राय का असर बाकी सदस्यों के फैसले पर पड़ने की आशंका कम होती है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल अंकों के आधार पर यह अनुमान लगाना नहीं है कि कोई उम्मीदवार भविष्य में कितना सफल होगा। इसका मुख्य उद्देश्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर भर्ती के फैसले लेना, सभी उम्मीदवारों का समान तरीके से मूल्यांकन करना और चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
अच्छी योजना के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में गलत फैसले हो सकते हैं, अगर भर्ती करने वाले भ्रामक संकेतों पर भरोसा करें या अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए अलग मापदंड अपनाएं। इसलिए, सॉफ्ट स्किल्स का मूल्यांकन करते समय कुछ सामान्य गलतियों से बचना जरूरी है।
आत्मविश्वास से बोलने वाला उम्मीदवार इंटरव्यू में प्रभावशाली जवाब दे सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसके पास नौकरी के लिए आवश्यक सभी कौशल भी हों। दूसरी ओर, कम बोलने वाला उम्मीदवार अपने अनुभवों के बेहतर उदाहरण दे सकता है और किसी समस्या पर अधिक सोच-समझकर जवाब दे सकता है।
इसलिए, उम्मीदवार का मूल्यांकन केवल उसके बोलने के तरीके, हाव-भाव या आत्मविश्वास के आधार पर न करें। यह देखें कि उसके जवाब कितने स्पष्ट हैं, वह अपने अनुभवों से क्या उदाहरण देता है और उसके पास संबंधित कौशल का कितना प्रमाण है।
अगर उम्मीदवार से पूछा जाए कि क्या वह टीम के साथ अच्छा काम करता है, तो वह आसानी से हां में जवाब दे सकता है। ऐसे सवालों से उसकी वास्तविक क्षमताओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती।
इसके बजाय, उससे किसी वास्तविक अनुभव के बारे में पूछें। उदाहरण के लिए, किसी ऐसी परिस्थिति के बारे में बताने को कहें, जिसमें उसने टीम के साथ मिलकर कोई समस्या सुलझाई हो। यह भी पूछें कि उसने खुद क्या कदम उठाए और उसका क्या परिणाम निकला।
इससे उम्मीदवार के व्यवहार और काम करने के तरीके को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
अगर एक उम्मीदवार से उसके जवाब के बारे में कई अतिरिक्त सवाल पूछे जाएं, जबकि दूसरे उम्मीदवार का मूल्यांकन केवल छोटे से जवाब के आधार पर किया जाए, तो तुलना निष्पक्ष नहीं रह सकती।
इसलिए, सभी उम्मीदवारों से समान मुख्य सवाल पूछें और उनके जवाबों को एक जैसे मापदंडों पर परखें। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सवाल पूछे जा सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य सभी उम्मीदवारों की क्षमताओं को स्पष्ट रूप से समझना होना चाहिए।
कभी-कभी भर्ती करने वाले अनजाने में उन उम्मीदवारों को अधिक पसंद करने लगते हैं, जिनकी बातचीत करने की शैली, रुचियां, शैक्षणिक पृष्ठभूमि या व्यक्तित्व उनसे मिलता-जुलता होता है। लेकिन केवल समानताएं होने का मतलब यह नहीं है कि कोई उम्मीदवार नौकरी में बेहतर प्रदर्शन करेगा।
उम्मीदवारों का चयन उनकी वास्तविक क्षमताओं और नौकरी से जुड़ी योग्यताओं के आधार पर करना चाहिए। केवल अलग तरीके से बात करने, अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि होने या शांत स्वभाव रखने के कारण किसी योग्य उम्मीदवार को कम अंक नहीं देने चाहिए।
केवल एक इंटरव्यू के जवाब, पर्सनैलिटी टेस्ट या रोल-प्ले अभ्यास के आधार पर किसी उम्मीदवार की सभी क्षमताओं का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हर तरीके से उम्मीदवार के व्यवहार का एक अलग पहलू सामने आता है।
इसलिए, इंटरव्यू के सवालों, व्यावहारिक परीक्षणों, पिछले अनुभवों और जरूरत पड़ने पर संदर्भ जांच जैसे तरीकों को मिलाकर इस्तेमाल करना बेहतर होता है। इससे उम्मीदवार की क्षमताओं की अधिक संतुलित तस्वीर मिलती है और ऐसी कमियों या विरोधाभासों की पहचान करने में भी मदद मिलती है, जिनके बारे में आगे जानकारी जुटाने की जरूरत हो सकती है।