आज के डिजिटल दौर में बच्चे पहले की तुलना में अधिक समय मोबाइल, टीवी, वीडियो गेम और अन्य स्क्रीन पर बिताने लगे हैं। इसके कारण उनका आउटडोर खेलना और शारीरिक गतिविधियां धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। यह स्थिति दुनियाभर में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
हाल के शोध बताते हैं कि केवल 10 में से 1 बच्चा ही शारीरिक गतिविधि, अच्छी नींद और सीमित स्क्रीन टाइम से जुड़े स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर पाता है। लगातार बैठे रहने और कम सक्रिय जीवनशैली का असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और उनके संपूर्ण विकास पर भी पड़ता है।
शारीरिक गतिविधियां केवल व्यायाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह बच्चों के स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं। नियमित खेलकूद और एक्टिव रहने से बच्चों की हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक तनाव भी कम होता है।
यह लेख बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर शारीरिक गतिविधियों के वैज्ञानिक रूप से सिद्ध फायदों The scientifically proven benefits of physical activities on children's physical and mental health को आसान भाषा में समझाएगा।
साथ ही इसमें नए शोध, विशेषज्ञों द्वारा अपनाई जा रही बेहतरीन आदतों और आधुनिक तकनीक व ऐप्स के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, जो बच्चों को मजेदार तरीके से सक्रिय और फिट रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सक्रिय जीवनशैली बेहद जरूरी है। नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास, एकाग्रता और खुशी को भी बढ़ाती हैं। एक्टिव रहने वाले बच्चे अधिक ऊर्जावान होते हैं और उनका मानसिक विकास भी बेहतर होता है।
आज के समय में बच्चे पहले की तुलना में कम शारीरिक गतिविधियां कर रहे हैं। मोबाइल फोन, वीडियो गेम, टीवी और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने बच्चों के आउटडोर खेल और एक्सरसाइज का समय कम कर दिया है। यह समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है।
बच्चों में शारीरिक निष्क्रियता की स्थिति काफी गंभीर होती जा रही है। वर्ष 2024 में किए गए एक शोध University of Wollongong, के अनुसार, केवल बहुत कम बच्चे ही शारीरिक गतिविधि, सीमित स्क्रीन टाइम और पर्याप्त नींद से जुड़े वैश्विक स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर पा रहे हैं।
| क्षेत्र | प्रतिशत |
|---|---|
| अफ्रीका | 23.9% |
| निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देश | 16.6% |
| उच्च आय वाले देश | 14.4% |
| अमेरिका क्षेत्र | 7.7% |
विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization के अनुसार, 5 से 17 वर्ष के बच्चों को हर दिन कम से कम 60 मिनट तक मध्यम या तेज शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसमें दौड़ना, साइकिल चलाना, खेलकूद और अन्य एरोबिक गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
वहीं 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 3 घंटे तक शारीरिक रूप से सक्रिय रहना चाहिए। इसमें कम से कम 60 मिनट की मध्यम या तेज गतिविधि शामिल होना जरूरी माना जाता है।
आज के बच्चे रोजाना औसतन 5 से 7 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं (BBC Future article)। इसके कारण उनके पास खेलने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए बहुत कम समय बचता है। लगातार बैठे रहने की यह आदत बच्चों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अधिक सक्रिय बनाने के लिए केवल परिवार ही नहीं, बल्कि स्कूल और समाज को भी मिलकर प्रयास करने होंगे। यदि बच्चों को बचपन से ही खेलकूद और एक्टिव लाइफस्टाइल की आदत डाली जाए, तो उनका भविष्य अधिक स्वस्थ और बेहतर बन सकता है।
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शारीरिक स्वास्थ्य के फायदे : विज्ञान द्वारा प्रमाणित तथ्य Physical Health Benefits: Science-Backed Evidence
नियमित शारीरिक गतिविधियां बच्चों के शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि एक्टिव रहने वाले बच्चों का शारीरिक विकास बेहतर होता है और उनमें कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
बचपन शरीर के विकास का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान दौड़ना, कूदना, चढ़ना और खेलकूद जैसी गतिविधियां हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।
एक्सरसाइज और खेलकूद बच्चों के दिल और फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। नियमित एक्टिविटी से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
आज के समय में बच्चों में बढ़ता मोटापा एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। नियमित शारीरिक गतिविधियां शरीर का वजन संतुलित रखने में मदद करती हैं।
नियमित और संतुलित एक्सरसाइज बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है। इससे बच्चे कम बीमार पड़ते हैं और जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं।
एक्टिव बच्चों में संक्रमण और सामान्य बीमारियों का खतरा कम देखा गया है।
शारीरिक गतिविधियां केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती हैं। नियमित खेलकूद तनाव, चिंता और उदासी को कम करने में मदद करते हैं।
साल 2025 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करते हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा काफी कम होता है।
British Journal of Sports Medicine शोध के अनुसार, यदि 11 साल की उम्र में कोई बच्चा रोजाना एक घंटा एक्सरसाइज करता है, तो 18 साल की उम्र तक उसमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा लगभग 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
| मानसिक स्वास्थ्य समस्या | लड़कों में जोखिम में कमी | लड़कियों में जोखिम में कमी |
|---|---|---|
| डिप्रेशन | 29% | 18% |
| चिंता | 39% | 14% |
| नशे की लत | 35% | 41% |
शोध में पाया गया कि बचपन से एक्टिव रहने वाले लड़कों में मानसिक समस्याओं का खतरा कम देखा गया।
टीम गेम्स और संगठित खेलों में भाग लेने वाले बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य के अधिक फायदे मिलते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार 10 से 12 वर्ष की उम्र बच्चों के विकास का बेहद महत्वपूर्ण समय होता है। इस उम्र में नियमित शारीरिक गतिविधियां बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
यह समय किशोरावस्था शुरू होने से पहले और उसके शुरुआती चरण का होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र में किया गया व्यायाम और खेलकूद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव डालता है।
इस दौरान एक्टिव रहने वाले बच्चों में आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बेहतर विकसित होती है।
जब बच्चे दौड़ते, खेलते या एक्सरसाइज करते हैं, तब शरीर में एंडोर्फिन नाम के “फील-गुड” हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन बच्चों के मूड को बेहतर बनाने और उन्हें खुश महसूस कराने में मदद करते हैं।
शारीरिक गतिविधियों का यह प्रभाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।
तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है।
बच्चों का मूड बेहतर रहता है।
शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती बढ़ती है।
साल 2024 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन (2024 JAMA Pediatrics meta-analysis) में पाया गया कि शारीरिक गतिविधियां उन बच्चों के लिए भी काफी फायदेमंद हैं, जिन्हें न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याएं होती हैं।
इन समस्याओं में ध्यान की कमी, सीखने में कठिनाई, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और व्यवहार संबंधी चुनौतियां शामिल हो सकती हैं।
शोध के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज और खेलकूद से ऐसे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सोचने-समझने की क्षमता में सुधार देखा गया।
| परिणाम | प्रभाव स्तर | विश्वास सीमा |
|---|---|---|
| कुल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार | 0.67 | 0.50 - 0.85 |
| सोचने और समझने की क्षमता में सुधार | 0.74 | 0.53 - 0.95 |
| मानसिक और भावनात्मक स्थिति बेहतर हुई | 0.56 | 0.16 - 0.96 |
| अंदरूनी मानसिक समस्याओं में कमी | 0.72 | 0.34 - 1.10 |
| गुस्सा और व्यवहार संबंधी समस्याओं में कमी | 0.58 | 0.28 - 0.89 |
विशेषज्ञों का मानना है कि हर बच्चे की मानसिक और शारीरिक जरूरत अलग होती है। इसलिए बच्चों की स्थिति और जरूरत को ध्यान में रखते हुए शारीरिक गतिविधियों और खेलों का चयन करना चाहिए।
सही प्रकार की एक्टिविटी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
नियमित शारीरिक गतिविधियां बच्चों के दिमागी विकास और पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। एक्टिव रहने वाले बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है और वे पढ़ाई में अधिक ध्यान लगा पाते हैं।
शारीरिक गतिविधियां बच्चों के दिमाग को सक्रिय बनाती हैं। इससे उनकी एकाग्रता और याद रखने की क्षमता बेहतर होती है।
बच्चों की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
कक्षा में ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है।
एक्टिव ब्रेक लेने के बाद बच्चों का प्रदर्शन बेहतर होता है।
पढ़ाई के दौरान फोकस और याददाश्त मजबूत होती है।
शोध में पाए गए प्रमुख फायदे Research-Based Benefits
एक्टिव रहने वाले बच्चों का स्कूल प्रदर्शन बेहतर होता है।
पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे एक्टिव ब्रेक लेने से सीखने की क्षमता बढ़ती है।
खेलकूद और फिजिकल एजुकेशन में भाग लेने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर बेहतर पाए गए हैं।
एक्सरसाइज बच्चों के दिमाग के विकास को तेज करती है। इससे मानसिक और भावनात्मक विकास बेहतर होता है।
दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
सोचने और समझने की क्षमता बढ़ती है।
मानसिक संतुलन और मूड बेहतर रहता है।
सामाजिक और भावनात्मक विकास मजबूत होता है।
शारीरिक गतिविधियां बच्चों को केवल फिट ही नहीं बनातीं, बल्कि उनके सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक संतुलन को भी बेहतर बनाती हैं।
खेलकूद और टीम स्पोर्ट्स बच्चों को दूसरों के साथ मिलकर काम करना सिखाते हैं। इससे उनके व्यवहार और सामाजिक संबंध बेहतर होते हैं।
बच्चों में सामाजिक कौशल विकसित होते हैं।
गलत और असामाजिक व्यवहार की संभावना कम होती है।
टीमवर्क और सहयोग की भावना बढ़ती है।
दोस्तों और साथियों के साथ रिश्ते बेहतर होते हैं।
बच्चे समाज में आसानी से घुलमिल पाते हैं।
नियमित शारीरिक गतिविधियां बच्चों को अपने शरीर और व्यक्तित्व के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद करती हैं।
बच्चे अपने शरीर को लेकर अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं।
आत्मसम्मान बढ़ता है।
खुद पर भरोसा मजबूत होता है।
व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
शारीरिक गतिविधियां बच्चों को अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने और नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है।
अकेलेपन और मानसिक दबाव की भावना घटती है।
बच्चों का मानसिक संतुलन बेहतर रहता है।
भावनात्मक स्वास्थ्य मजबूत होता है।
बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय बनाने के लिए परिवार, स्कूल और समाज सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही माहौल और अच्छी आदतें बच्चों को एक्टिव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
रोजाना अच्छी गुणवत्ता वाली फिजिकल एजुकेशन।
खेल और एक्टिव ब्रेक के लिए पर्याप्त समय।
कक्षा के दौरान छोटे-छोटे फिजिकल एक्टिविटी ब्रेक।
शिक्षकों और स्टाफ की सक्रिय भागीदारी।
परिवार और समुदाय का सहयोग।
स्कूल से पहले और बाद में खेलकूद कार्यक्रम।
अनुमान है कि वर्ष 2025 तक हर राज्य के कम से कम 45 प्रतिशत स्कूलों में बच्चों को कक्षा या आउटडोर एक्टिविटी ब्रेक दिए जाएंगे।
शोध (Education Endowment Foundation) के अनुसार बच्चे वही चीजें जल्दी सीखते हैं, जिन्हें वे अपने आसपास के लोगों को करते हुए देखते हैं। इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों को खुद भी गतिविधियों में भाग लेना चाहिए।
| तरीका | विवरण | फायदा |
|---|---|---|
| पार्टिसिपेट | बड़े लोग खुद गतिविधियों में हिस्सा लें | बच्चे प्रेरित होते हैं और गतिविधियों को मजेदार मानते हैं। |
| स्पार्क या टेम्प्ट | बच्चों की रुचि के अनुसार माहौल और संसाधन तैयार करना | बच्चों की भागीदारी बढ़ती है। |
| ऑटोनॉमी | बच्चों को अपनी पसंद से खेलने और चुनने की आजादी देना | बच्चे अधिक समय तक एक्टिव रहते हैं। |
शिक्षकों और अभिभावकों को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जहां बच्चे आसानी से खेल सकें और शारीरिक गतिविधियों में रुचि लें।
बच्चों को इनडोर और आउटडोर दोनों तरह की गतिविधियों के अवसर दें।
बच्चों को खुलकर खेलने और स्वतंत्र रूप से मूव करने की आजादी दें।
खेल उपकरण और फर्नीचर में बदलाव करके नई रुचि पैदा करें।
बच्चों की पसंद के अनुसार नए और रोचक खेल शामिल करें।
दुनियाभर में कई बड़ी संस्थाएं बच्चों को एक्टिव बनाने के लिए अभियान चला रही हैं।
एक प्रमुख उदाहरण NFL का PLAY 60 अभियान है, जिसने बच्चों को फिट और एक्टिव बनाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया है।
शारीरिक गतिविधियों के कार्यक्रमों पर 325 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च।
फिटनेस ट्रैकिंग प्रतियोगिताएं।
स्कूलों में PLAY 60 चैंपियंस प्रोग्राम।
स्कूलों में फ्लैग फुटबॉल जैसी गतिविधियों को बढ़ावा।
विशेषज्ञों के अनुसार माता-पिता कुछ आसान आदतों के जरिए बच्चों को अधिक एक्टिव बना सकते हैं।
बच्चों के लिए सही गतिविधियों के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
ऐसी गतिविधियां चुनें जो बच्चों को मजेदार लगें।
उम्र और क्षमता के अनुसार खेल और एक्सरसाइज चुनें।
खेलने और एक्टिविटी के लिए सही समय तय करें।
सुरक्षित वातावरण और सही उपकरण उपलब्ध कराएं।
बच्चों को गेंद, रस्सी कूद और अन्य एक्टिव खिलौने दें।
खुद एक्टिव बनें, क्योंकि बच्चे माता-पिता से सीखते हैं।
बच्चों के साथ नियमित रूप से खेलें।
स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें।
व्यस्त दिनचर्या में भी एक्सरसाइज के लिए समय निकालें।
जरूरत से ज्यादा गतिविधियां न कराएं और दर्द या थकान पर ध्यान दें।
आज के डिजिटल दौर में तकनीक केवल बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह बच्चों को एक्टिव और फिट बनाने का भी बड़ा माध्यम बन सकती है। कई आधुनिक ऐप्स और गेम्स बच्चों को मजेदार तरीके से एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
एक्सरगेम्स यानी ऐसे वीडियो गेम्स जिनमें बच्चों को खेलने के दौरान शरीर को मूव करना पड़ता है। इसमें दौड़ना, कूदना, हाथ-पैर चलाना और शरीर को एक्टिव रखना शामिल होता है।
शोध (University of Birmingham research) में पाया गया कि ऐसे गेम्स बच्चों की शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
लगभग 70 प्रतिशत अध्ययनों में बच्चों की शारीरिक गतिविधि बढ़ी।
प्राथमिक स्कूल के बच्चों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ।
गेमिफिकेशन यानी खेल के रूप में एक्टिविटी बच्चों को अधिक आकर्षित करती है।
बच्चों में उत्साह, सकारात्मक सोच और मोटिवेशन बढ़ा।
मोटर स्किल, ध्यान और सोचने की क्षमता बेहतर हुई।
यह ऐप 4 से 10 साल के बच्चों के लिए बेहद लोकप्रिय है। इसमें छोटे-छोटे वीडियो होते हैं, जिनमें डांस, एक्सरसाइज और माइंडफुलनेस एक्टिविटी शामिल होती हैं।
1 से 5 मिनट की मजेदार एक्टिविटी वीडियो।
अवतार और पॉइंट सिस्टम के जरिए बच्चों को मोटिवेट करना।
स्कूल और घर दोनों जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्क्रीन टाइम को एक्टिव टाइम में बदलने में मदद।
बच्चों के लिए सुरक्षित प्लेटफॉर्म।
यह ऐप बच्चों को आसान वीडियो के जरिए एक्सरसाइज करना सिखाता है।
अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए वर्कआउट।
7 मिनट के छोटे और प्रभावी एक्सरसाइज सेशन।
ताकत, संतुलन और स्टैमिना बढ़ाने में मदद।
यह ऐप योग और कहानियों को जोड़कर बच्चों को एक्टिव बनाता है।
कहानी के माध्यम से योग सिखाना।
शरीर की लचीलापन और ताकत बढ़ाना।
बच्चों का फोकस और आत्मविश्वास बेहतर करना।
मजेदार तरीके से बच्चों को योग से जोड़ना।
यह फिटनेस ऐप बच्चों को दौड़ने, कूदने और शरीर को हिलाने के लिए प्रेरित करता है।
गेम खेलते समय शरीर को मूव करना जरूरी।
फिटनेस ट्रैकिंग की सुविधा।
बच्चों को एक्टिव बनाने के लिए खास डिजाइन।
इस गेम में बच्चों को मेंढक की मदद करनी होती है, जिसके लिए उन्हें कूदना और घूमना पड़ता है।
खेल के दौरान लगातार शारीरिक गतिविधि।
बच्चों को एक्टिव रखने वाला मजेदार गेम।
आज कई योग ऐप्स बच्चों के लिए विशेष रूप से बनाए गए हैं।
Wuf Shanti Yoga.
Fun Yoga for Kids.
Sing Song Yoga.
Down Dog Yoga for Kids.
Super Stretch Yoga.
Cosmic Kids Yoga.
Kids Morning Exercises.
ये ऐप्स बच्चों को योग, स्ट्रेचिंग और ध्यान की आदत विकसित करने में मदद करते हैं।
यह ऐप खासकर बड़े बच्चों और किशोरों के लिए उपयोगी माना जाता है।
प्रोफेशनल एथलीट्स द्वारा एक्सरसाइज गाइड।
15 से 45 मिनट तक के वर्कआउट सेशन।
शरीर को मजबूत और फिट बनाने में मदद।
कुछ एक्सरसाइज के लिए उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है।
आजकल बच्चों की फिटनेस पर नजर रखने के लिए स्मार्ट वॉच और एक्टिविटी ट्रैकर्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ये डिवाइस बच्चों के कदम, कैलोरी और शारीरिक गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं।
साल 2025 में किए गए एक बड़े अध्ययन में स्कूलों में इस्तेमाल होने वाले एक्टिविटी ट्रैकर्स का विश्लेषण किया गया।
15 अलग-अलग अध्ययनों को शामिल किया गया।
10 अध्ययनों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
कुल कदमों, कैलोरी और एक्टिविटी स्तर में बहुत बड़ा अंतर नहीं पाया गया।
हालांकि कुछ शोधों में बच्चों के कदमों की संख्या में सकारात्मक प्रभाव देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में अभी और रिसर्च की जरूरत है।
यूट्यूब पर बच्चों के लिए कई मुफ्त फिटनेस वीडियो उपलब्ध हैं, जो उन्हें मजेदार तरीके से एक्टिव रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
डांस वर्कआउट वीडियो लगभग 45 मिनट।
Moe Jones द्वारा Kids Workout Video लगभग 15 मिनट।
NateBowerFitness द्वारा 20 मिनट का फुल बॉडी वर्कआउट।
LIVEexercise Playtime द्वारा बच्चों के लिए एक्सरसाइज वीडियो लगभग 30 मिनट।
POPSUGAR Fitness द्वारा बॉक्सिंग वर्कआउट क्लास।
Yoga Yak द्वारा बच्चों के लिए फुल योगा क्लास लगभग 32 मिनट।
ये वीडियो बच्चों को घर पर ही एक्टिव और फिट रहने में मदद करते हैं।
इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट्स मौजूद हैं, जो बच्चों और परिवारों को मुफ्त फिटनेस गाइड और एक्सरसाइज उपलब्ध कराती हैं।
Darebee.com : आसान डायग्राम के साथ मुफ्त वर्कआउट।
Fitnessblender.com : 10 से 60 मिनट तक के मुफ्त फिटनेस वीडियो।
GoNoodle.com : छोटे बच्चों के लिए एक्टिव वीडियो जो स्क्रीन टाइम को मजेदार बनाते हैं।
हर उम्र के बच्चों की शारीरिक जरूरत अलग होती है। इसलिए उनकी उम्र के अनुसार सही गतिविधियां और एक्सरसाइज जरूरी होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों को बचपन से ही एक्टिव रहने की आदत डालनी चाहिए।
| आयु वर्ग | रोजाना गतिविधि | गतिविधि की तीव्रता |
|---|---|---|
| रेंगने से पहले के शिशु | हाथ-पैर चलाना, पकड़ना, खींचना, फर्श पर खेलना | हल्की गतिविधि |
| छोटे बच्चे (टॉडलर्स) | 180 मिनट यानी 3 घंटे | हल्की से तेज गतिविधि |
| प्री-स्कूल बच्चे | 180 मिनट, जिसमें 60 मिनट तेज गतिविधि शामिल | मिश्रित गतिविधि |
फर्श पर खेलना।
दौड़ना और कूदना।
गेंद से खेलना।
डांस और म्यूजिक एक्टिविटी।
हल्की स्ट्रेचिंग और योग।
आउटडोर गेम्स।
इन गतिविधियों से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है और वे अधिक ऊर्जावान बने रहते हैं।
छोटे बच्चों को खेल-खेल में एक्टिव रखना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
पेट के बल लेटकर खेलने वाली गतिविधियां।
ब्लॉक्स और खिलौनों से खेलना।
रंगों और मिट्टी जैसी क्रिएटिव एक्टिविटी।
कूदना, चलना और डांस करना।
स्विमिंग और पानी से जुड़े खेल।
पार्क और खेल के मैदान की गतिविधियां।
चढ़ना, कूदना और रस्सी कूदना।
छुपन-छुपाई खेलना।
गेंद फेंकना और पकड़ना।
स्कूटर चलाना और साइकिल चलाना।
आउटडोर गेम्स और खुली जगह में खेलना।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 5 से 17 साल के बच्चों को रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधियां करनी चाहिए ताकि उनका शरीर और दिमाग स्वस्थ बना रहे।
हर दिन कम से कम 60 मिनट तक मध्यम या तेज शारीरिक गतिविधि।
ज्यादातर गतिविधियां एरोबिक यानी दौड़ने, कूदने और एक्टिव मूवमेंट वाली होनी चाहिए।
गतिविधियां पूरे सप्ताह नियमित रूप से करनी चाहिए।
ये सुझाव दिव्यांग बच्चों पर भी लागू होते हैं।
दिमागी विकास बेहतर होता है।
शरीर की मूवमेंट और मोटर स्किल मजबूत होती है।
आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है।
बच्चों का सामाजिक मेलजोल बेहतर होता है।
हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
पढ़ाई में प्रदर्शन बेहतर होता है।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम होता है।
हर बच्चे को उसकी क्षमता और जरूरत के अनुसार शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने का मौका मिलना चाहिए।
शारीरिक गतिविधि कार्यक्रम ऐसे होने चाहिए जिनमें हर बच्चा आसानी से शामिल हो सके।
अलग-अलग मानसिक और विकास संबंधी चुनौतियों वाले बच्चों को साथ में गतिविधियां करने का मौका देना चाहिए।
बच्चों की मानसिक जरूरतों के अनुसार गतिविधियों को तैयार करना जरूरी है।
गतिविधियां बच्चों की उम्र और क्षमता के अनुसार होनी चाहिए।
दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
दुनियाभर में बच्चों की शारीरिक गतिविधियों में काफी अंतर देखा जाता है। कुछ क्षेत्रों में बच्चे ज्यादा एक्टिव हैं, जबकि कई जगहों पर स्थिति चिंताजनक है।
आर्थिक समस्याओं के कारण खेलकूद से दूर रहने वाले बच्चों की मदद करना।
शहरों में सुरक्षित खेल के मैदान और पार्क उपलब्ध कराना।
बच्चों की संस्कृति और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यक्रम तैयार करना।
अलग-अलग समुदायों में परिवारों की भागीदारी बढ़ाना।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को गतिविधियां मजेदार लगेंगी, तो वे लंबे समय तक उन्हें जारी रखेंगे।
ऐसी गतिविधियां चुनें जो बच्चों को पसंद हों।
पूरे परिवार को खेलकूद में शामिल करें।
माता-पिता खुद एक्टिव रहकर बच्चों के लिए उदाहरण बनें।
बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।
ध्यान रखें कि गतिविधियां बच्चों के लिए सुरक्षित और आरामदायक हों।
बच्चों को एक्टिव और स्वस्थ बनाने के लिए परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर काम करना होगा। कुछ आसान और नियमित आदतों के जरिए बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें और खाली समय को खेलकूद में लगाएं।
खुद एक्टिव रहें, क्योंकि बच्चे माता-पिता को देखकर सीखते हैं।
बच्चों के साथ खेलें, वॉक पर जाएं या नई खेल गतिविधियां सिखाएं।
बच्चों को गेंद, रस्सी कूद और एक्टिव खिलौने उपलब्ध कराएं।
पढ़ाई और ट्यूशन के बीच भी एक्सरसाइज और खेलने के लिए समय निकालें।
पढ़ाई के दौरान 10 मिनट के एक्टिविटी ब्रेक दें।
खेल के मैदान और जरूरी खेल उपकरण उपलब्ध कराएं।
GoNoodle और Sworkit Kids जैसे ऐप्स का उपयोग करें।
स्कूल से पहले और बाद में स्पोर्ट्स क्लब शुरू करें।
शिक्षकों और स्टाफ को भी फिटनेस कार्यक्रमों में शामिल करें।
बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित पार्क और मैदान बनाएं।
सभी परिवारों के लिए सस्ती खेल सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
स्कूलों और समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाएं।
बच्चों को पैदल चलने और साइकिल से स्कूल जाने के लिए प्रेरित करें।
फैमिली फिटनेस इवेंट और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करें।
तकनीक और नई सोच बच्चों की फिटनेस को और बेहतर बनाने में मदद कर रही हैं। आने वाले समय में कई नई तकनीकें बच्चों को अधिक एक्टिव बना सकती हैं।
ऐसे गेम्स और एक्सरसाइज जिनमें बच्चों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे किसी रोमांचक दुनिया का हिस्सा हों।
ऐप्स बच्चों की उम्र, रुचि और क्षमता के अनुसार वर्कआउट तैयार करेंगे।
स्कूलों में रियल टाइम ट्रैकिंग और रिवार्ड के साथ फिटनेस प्रतियोगिताएं बढ़ेंगी।
भविष्य में पढ़ाई और शारीरिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ने वाले तरीके बढ़ेंगे।
ऐप्स के जरिए माता-पिता और बच्चे एक साथ फिटनेस लक्ष्य पूरा कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को अधिक एक्टिव बनाने के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास काफी नहीं हैं। इसके लिए बड़े स्तर पर बदलाव जरूरी हैं।
सरकार द्वारा बेहतर नीतियां बनाना।
स्कूलों में रोजाना शारीरिक गतिविधियां सुनिश्चित करना।
परिवारों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना।
सुरक्षित खेल मैदान और पार्क तैयार करना।
ऐसी तकनीक का उपयोग करना जो बच्चों को एक्टिव बनाए, न कि केवल स्क्रीन तक सीमित रखे।
शारीरिक गतिविधियां बच्चों के लिए कोई विकल्प नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी जरूरत हैं। नियमित खेलकूद और एक्सरसाइज बच्चों की हड्डियों, मांसपेशियों, दिल और दिमाग को मजबूत बनाते हैं। साथ ही यह तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं के खतरे को भी कम करते हैं।
आज केवल बहुत कम बच्चे ही रोजाना जरूरी शारीरिक गतिविधियां कर पा रहे हैं, जो एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। इस स्थिति को सुधारने के लिए परिवार, स्कूल, सरकार और समाज सभी को मिलकर काम करना होगा।
अच्छी फिजिकल एजुकेशन, एक्टिव ब्रेक, परिवार की भागीदारी और आधुनिक फिटनेस ऐप्स बच्चों को एक्टिव और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार 10 से 12 वर्ष की उम्र बच्चों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होती है, लेकिन शारीरिक गतिविधियों के फायदे जन्म से ही शुरू हो जाते हैं। हर दिन की छोटी-छोटी एक्टिविटी बच्चों को मजबूत, आत्मविश्वासी और खुशहाल बनाने में मदद करती है।
असल सवाल यह नहीं है कि हम बच्चों की शारीरिक गतिविधियों को प्राथमिकता दे सकते हैं या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या हम इसे नजरअंदाज करने का जोखिम उठा सकते हैं।
इस लेख में शामिल जानकारी और आंकड़े 2024 से 2026 के बीच प्रकाशित शोध अध्ययनों, स्वास्थ्य संगठनों और विशेषज्ञ संस्थाओं की रिपोर्ट पर आधारित हैं।