कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी- व्यवसाय के साथ समाज कल्याण

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05 Apr 2022
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बीते कुछ सालों में महामारी (pandemic) के दौर में हमने में सीएसआर (CSR) शब्द को ज्यादातर सुना है और कई बार हमने टीवी और अख़बारों की हेडलाइंस में भी सीएसआर के बारें में सुना और पढ़ा जरूर है, हेडलाइंस जैसे- सीएसआर के तहत टाटा ने पीएम केयर्स फंड में इतने करोड़ का दान दिया या अंबानी ने इतने करोड़ का दान दिया या अदाणी और बिरला ने इतना दान दिया। ऐसे ही कई बार आपने सीएसआर शब्द सुना होगा, आज इस आर्टिकल में हम आपको सीएसआर से जुड़ीं कुछ एहम बातें बताएंगे और साथ ही ये भी बताएंगे कि कौनसी कंपनिया सीएसआर के तहत अपना सामजिक दायित्व निभा रही हैं। 

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सीएसआर एक विचार है, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र में विकास के साथ समाज कल्याण की पहल भी शामिल है। सीएसआर को शुरू करने के पीछे का उद्देश्य था कि समाज के हर वर्ग को उचित सहयोग और जीवनयापन हेतु संसाधन उपलब्ध कराये जा सके। इसके साथ ही सीएसआर में  पर्यावरण के संरक्षण हेतु भी कई गतिविधियां शामिल हैं। सीएसआर यानि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के जरिये कई कंपनियां देशहित में अपना योगदान दे रहीं हैं। 

सीएसआर कोरोनाकाल में जनता के लिए हितकारी साबित हुआ, सीएसआर के जरिये कई बड़ी कंपनियों ने सरकार और समाज की आर्थिक सहायता की। इस आर्टिकल में आगे आप जानेंगे सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (social corporate responsibility) से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें । अब बिज़नेस (Business) में एक और शब्द जुड़ गया है “सीएसआर” यानी “कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी”, शब्द 1960 के दशक के अंत में और 1970 के दशक की शुरुआत में कई बहुराष्ट्रीय निगमों के हितधारकों के गठन के बाद उपयोग में आया। 

साल 1984 में लिखी गयी "स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट" (Strategic management) के लेखक आर एडवर्ड फ्रीमैन (R. Edward Freeman) ने साफ़ तौर पर सीएसआर का जिक्र है जिसमें कहा गया है कि कंपनियों को स्वेच्छा से एक आर्थिक (economic), सामाजिक (social) और पर्यावरणीय (environmental) रूप से समाज (society) के लिए जिम्मेदार तरीके से व्यापार करना चाहिए, इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) उन व्यवसाय प्रथाओं को संदर्भित करती है, जिसमें समाज को लाभ पहुंचाने वाली पहल शामिल है। 

भारत में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की शुरुआत 

अगर बात करें भारत की तो भारत में प्राचीन काल से ही सीएसआर भारतीय संस्कृति (Indian culture) का हिस्सा रहा है। इसकी अवधारणा मौर्यकालीन इतिहास में भी देखी गयी, इसके साथ-साथ कौटिल्य जैसे दार्शनिकों ने भी व्यापार करते समय नैतिक प्रथाओं और सिद्धांतों पर जोर दिया। प्राचीन समय में भी सीएसआर को गरीबों और वंचितों के लिए दान के रूप में, अनौपचारिक रूप से लागू किया गया था। भारतीय शास्त्रों में भी इस बात का जिक्र है जो लोग व्यवसाय या कमाई करते थे वो अपनी कमाई का हिस्सा समाज के वंचित वर्ग के साथ साझा करता थे। भारत ने आजादी के बाद इस तरह के आर्थिक मॉडल का पालन किया कि देश में प्रत्येक गांव हर प्रकार से आत्मनिर्भर बनें। जिसके तहत व्यापारियों, किसानों और कारीगरों ने सुनिश्चित किया कि गाँव के प्रत्येक व्यक्ति के पास रोज़गार, पर्याप्त भोजन और आश्रय हो, जिससे कोई भी व्यक्ति भूखा या आश्रयहीन ना रहे। फिलहाल बात करते हैं आज के भारत की औद्योगिक क्रांति के आगमन के साथ ही टाटा (Tata), बिरला (Birla), मोडिस (MODIS), गोदरेज (Godrej), बजाज (Bajaj) और सिंघानिया (Singhania) जैसे उद्योगपति परिवारों ने भारत के बाजार में अपनी जगह बनाई और शैक्षणिक संस्थानों (educational institute) और स्वास्थ्य सेवा संगठनों (health organization) की स्थापना करके अपने सीएसआर खर्च के तहत सामाजिक कल्याण (social welfare) के लिए कार्य किये। 

भारत में किसी भी कंपनी को कारोबार करने के पहले अपने आप को रजिस्टर्ड करवाना अनिवार्य है, भारत की हर एक बड़ी कंपनी को कंपनीज एक्ट में रजिस्टर्ड करवाना होता है। हालांकि, भारत में हर कंपनी सीएसआर के दायरे में नहीं आती। बहुत सी छोटी कंपनिया हैं, जिनकी कमाई बहुत सीमित है वो सीएसआर के लिए बाध्य नहीं हैं। भारत में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत प्रावधानों के माध्यम से अनिवार्य कर दिया गया है। कोई कंपनी जो प्राइवेट लिमिटेड (private limited) या पब्लिक लिमिटेड (Public limited) है, जिन्होंने 500 करोड़ रुपये का शुद्ध मूल्य या 1,000 करोड़ रुपये का टर्न ओवर या 5 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ का कारोबार किया है, उन्हें तीन वित्तीय वर्षों के लिए, अपने औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2% सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है। भारत, दुनिया का ऐसा पहला देश है जिसने सीएसआर को अनिवार्य किया। 1 अप्रैल 2014 से भारत में सीएसआर का कानून पूरी तरह से लागू हो गया है। यह कानून सिर्फ भारतीय कंपनियों पर ही लागू नहीं बल्कि उन सभी विदेशी कंपनियों पर पर भी लागू होता है जो भारत में कार्य कर रही हैं। 

भारत में क्या हैं सीएसआर के मानक? 

सभी कंपनियों के लिए सीएसआर के मानक तय हैं, जिनके मुताबिक ही कंपनियों को अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी संबंधी गतिविधियों का संचालन करना होता है। इसके लिए कंपनियों को स्पष्ट दिशा निर्देश और नियम दिए गए है। नियम के मुताबिक, प्रत्येक कंपनी में सीएसआर समिति होती है। सीएसआर के तहत कंपनी के बोर्ड में यह तय होता है कि कंपनी को कौन-सी गतिविधि, कब और कहां चलानी है, और तय गतिविधि ही सीएसआर के दायरे में आती है। हर बड़ी कंपनी को सीएसआर नीति का पालन करना होता है। 

नीचे सीएसआर की कुछ मान्य गतिविधियां दी गयी हैं (CSR Activities of Companies) कंपनियों को इन्हीं में से अपने सीएसआर के लिए गतिविधियों का चयन करना होता है।

 

सीएसआर के मानक                     गतिविधियां 

राष्ट्रीय धरोहर, कला और संस्कृति की सुरक्षा​​​​​

ऐतिहासिक महत्व वाली इमारतों, स्थलों एवं कला को बढ़ावा देना एवं सुरक्षा करने हेतु कार्य 

पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देना

देश में पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देना एवं इस क्षेत्र का विकास करना

सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना

आम नागरिकों हेतु सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना करना 

अनाथालय और छात्रावास की स्थापना

देश में अनाथालय और छात्रावास की स्थापना हेतु उनके लिए भवन का निर्माण, साथ ही रख रखाव व संचालन करना 

वृद्धाश्रम की स्थापना

सीनियर सिटीजन्स के लिए वृद्धाश्रम की स्थापना, उनके लिए भवन का निर्माण, साथ ही रख -रखाव व संचालन करना 

डे केयर केंद्रों की स्थापना

देश में डे केयर केंद्रों की स्थापना करना, या भवन निर्माण करना साथ ही उसका रखरखाव करना 

महिलाओं के लिए घर और छात्रावासों की स्थापना

देश की महिलाओं के लिए घर और छात्रावासों की स्थापना करना और साथ ही छात्रावास का संचालन संभालना 

ग्रामीण खेलों, राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त खेलों, ओलंपिक खेलों और पैरालंपिक खेलों को बढ़ावा 

देश में ग्रामीण खेलों, राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त खेलों, ओलंपिक खेलों और पैरालंपिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को प्रशिक्षण मुहैया कराना

प्रौद्योगिकी इनक्यूबेटरों के लिए फंड 

केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त शैक्षणकि संस्थानों में स्थित प्रौद्योगिकी इनक्यूबेटरों के लिए फंड मुहैया कराना

शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना 

देश के नागरिकों  के लिए और खासकर ग्रामीण में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना 

मिट्टी, हवा और जल की गुणवत्ता पर ध्यान 

देश की मिट्टी, हवा और जल की गुणवत्ता की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए कार्य करना 

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

देश में पर्यावरण संतुलन हेतु प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना 

वनस्पतियों, जीव संरक्षण, पशु कल्याण, कृषि वानिकी का संरक्षण

देश में वनस्पतियों, जीव संरक्षण, पशु कल्याण, कृषि वानिकी का संरक्षण करना 

ग्रामीण विकास परियोजनाएं

देश के विकास हेतु विभिन्न ग्रामीण विकास परियोजनाओं में सहयोग करना

जीविका वृद्धि संबंधी परियोजनाएं

देश की गरीबी निवारण हेतु जीविका वृद्धि संबंधी परियोजनाएं लाना 

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को बढ़ावा 

देश में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को बढ़ावा देकर देश को विकास के मार्ग पर अग्रसर करना 

शहीदों की विधवाओं, सशस्त्र बलों के वीरों और उनके आश्रितों का हित 

देश के लिए युद्ध में मारे गए शहीदों की विधवाओं, सशस्त्र बलों के वीरों और उनके आश्रितों के लाभ से जुड़े काम करना।

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों को बढ़ावा 

देश के पिछड़े समूहों के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से काम करना

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के अन्य आयाम 

  • कंपनी द्वारा विदेश में किया गया खर्च सीएसआर नहीं माना जायेगा: 

भारत की कोई कंपनी यदि भारत के बाहर किसी देश पर सामुदायिक लाभ के लिए कार्य करती है, तो उस खर्च को सीएसआर का हिस्सा नहीं माना जाएगा। सीएसआर के नियम में ये स्पष्ट है कि कंपनी को हर हाल में भारत में ही अपनी सीएसआर गतिविधियां चलानी हैं। 

  • दो कंपनियां मिलकर भी चला सकती हैं सीएसआर गतिविधियां:

सीएसआर के नए नियम के मुताबिक दो कंपनियां एक साथ मिलकर भी सीएसआर की गतिविधियां चला सकती है। यानी एक से अधिक कंपनियां आपस में मिलकर सीएसआर के तहत कोई कार्यक्रम, परियोजना या आयोजन का संचालन सम्मिलित रूप से कर सकती हैं, हालांकि उन्हें अपने कार्य की रिपोर्ट अलग-अलग दिखानी होगी । जिसका अर्थ है कि कंपनियां सीएसआर रिपोर्ट अलग-अलग प्रस्तुत करेंगी, जिसमें उनके हिस्से का खर्च भी अंकित होगा। 

  • एनजीओ भी हो सकते हैं सीएसआर गतिविधि में भागीदार:

भारत की कोई बड़ी कंपनी अपने सीएसआर को पूरा करने के लिए किसी संस्था या ट्रस्ट को भागीदार बना सकती है, लेकिन उस संस्था या एनजीओ (NGO) को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 (Societies Registration Act, 1860) तथा ट्रस्ट एक्ट के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। 

भारत में कैसे की जाती है सीएसआर की गणना? 

हम सब जानते हैं कि किसी भी पहल को तब तक सफल या असफल घोषित नहीं किया जा सकता जब तक कि उसके नापने का कोई पैमाना न हो। सीएसआर के तहत कंपनी द्वारा बड़ी मात्रा में धनराशि का इस्तेमाल होता है, और सीएसआर में कितनी धनराशि खर्च हुई यह जानने के लिए सीएसआर का माप बेहद महत्वपूर्ण होता है। किसी कंपनी के सीएसआर को नापने तथा उनका लेखा जोखा करने के लिए कानून द्वारा कोई मानक ढांचा उपलब्ध नहीं है। भारत में सभी कंपनियां अपने अपने तरीके से खुद ही अपने-अपने सीएसआर का रिपोर्ट बनाती है और अपने-अपने वेबसाइट पर प्रदर्शित करती हैं। सीएसआर खर्च में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी कंपनियां अपने सीएसआर की रिपोर्टिंग करती और उन्हें संभाल कर रखती हैं। 

क्या भारत में सफल है कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी या सीएसआर? 

सभी बड़ी कंपनियां अपने शुद्ध मुनाफ़े का 2% से अधिक सीएसआर पर खर्च करती हैं। आपको बता दें कि  सीएसआर कानून लागू होने के बाद से मार्च 2019 तक, सीएसआर पर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया जा चुके है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार भारत में अधिक विकास की जरूरत वाले राज्यों को छोड़कर खर्च की गई राशि केवल कुछ राज्यों में ही केंद्रित है। जिसके फलस्वरूप, राष्ट्रीय विकास में भी कई विसंगतियां पैदा हुई हैं। इसके अलावा, सरकारी हस्तक्षेप कभी-कभी सीएसआर परियोजनाओं में मंदी का कारण बनता है। हालाँकि, सीएसआर के तहत देश में कई विकास कार्य हुए हैं और महामारी के दौर में कुछ बड़ी कंपनियों ने समाज कल्याण में एहम योगदान दिया। आज, सीएसआर फंड (Corporate Social fund) के जरिये देश में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहा है, सामाजिक और आर्थिक नीतियों में बदलाव की वजह से इसका सीधा फायदा देश के युवा आबादी को हो रहा है, इसके साथ-साथ देश भी विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। सीएसआर देश के लोगों के बीच आर्थिक, सामाजिक समावेश, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यवहार में बदलाव लाने में भी प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

सीएसआर गतिविधियों की सराहना के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार 

देश में कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा सीएसआर और सस्टेनेबल डेवलोपमेंट के क्षेत्र में किये जाने वाले कार्यों को सराहने के लिए भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय सीएसआर अवॉर्ड दिया जाता है। भारत के सीएसआर जगत में राष्ट्रीय सीएसआर अवॉर्ड (National CSR Award) बहुत ही प्रतिष्ठित अवॉर्ड माना जाता है। भारत सरकार कॉर्पोरेट कंपनियों के सीएसआर और सस्टेनेबल डेवलोपमेंट (Sustainable development) के काम को हर साल पुरस्कृत करती है। इससे कॉर्पोरेट क्षेत्र में एक सकारात्मक कंपटीशन का वातावरण भी पैदा होता है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय सीएसआर अवार्ड मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (Ministry of Corporate Affairs) के अंतर्गत आता है और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (Indian Institute of Corporate Affairs) की मदद से ही इस अवार्ड समारोह (Award show) का आयोजन किया जाता है। 

सीएसआर के तहत सबसे अधिक समाजकल्याण करने वाली कंपनियां:

कंपनी सेक्टर वास्तविक सीएसआर निर्धारित सीएसआर
रिलाइंस (Reliance) रिफाइनरीज 922.00 करोड़ 884.00 करोड़

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS

आईटी सॉफ्टवेयर 

674.00 करोड़

663.00 करोड़ 

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)

बैंक

634.91 करोड़ 

627.86 करोड़ 

आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ONGC)

आयल ड्रिल

522.98 करोड़ 

538.72 करोड़ 

इनफ़ोसिस (Infosys)

आईटी सॉफ्टवेयर 

325.32 करोड़ 

372.39 करोड़

आईटीसी लिमिटेड (ITC limited)

डाइवर्सिफाईड

365.43 करोड़ 

352.84 करोड़ 

इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (IOC ltd)

रिफाइनरीज

460.38 करोड़ 

342.00 करोड़ 

नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC)

पावर जनरेशन डिस्ट्रीब्यूशन 

418.87 करोड़ 

278.57 करोड़

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc lmt)

माइनिंग मिनिरल प्रोडक्ट्स 

214.03 करोड़ 

196.50 करोड़ 

पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (PGCOI)

पावर जनरेशन डिस्ट्रीब्यूशन 

240.59 करोड़ 

233.79 करोड़ 

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत सभी बड़ी कंपनियां समाज हित में अपना योगदान दे रही हैं। आशा है ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। व्यवसाय से संबंधित अन्य जानकारी के लिए पढ़ते रहिये -TWN 

पर्यावरण संरक्षण में मदद करने वाली कुछ कंपनियां

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