नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में इस समूह ने हाल के वर्षों की सबसे व्यापक घोषणाओं में से एक जारी की। इसमें वैश्विक व्यापार, आतंकवाद, भू-राजनीतिक संघर्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वित्तीय सहयोग, वैश्विक शासन और विकास जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
12–13 सितंबर को हुए इस शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में कुल 140 पैराग्राफ हैं। यह घोषणा तेजी से बढ़ते और विकासशील देशों के बीच सहमति बनाने की भारत की कोशिश को दर्शाती है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब दुनिया में व्यापार को लेकर तनाव बढ़ रहा है, देशों के बीच मतभेद गहरे हो रहे हैं और पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है। इसलिए इसके फैसले और रुख ग्लोबल साउथ के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
भारत के लिए भी यह घोषणा खास महत्व रखती है। इसकी वजह यह है कि 2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान आगे बढ़ाई गई कई महत्वपूर्ण पहलों को अंतिम घोषणा में जगह मिली है। इनमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मानसिक स्वास्थ्य, औद्योगिक तकनीक, विकास के लिए वित्तीय सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग शामिल हैं।
इसके अलावा, BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की। घोषणा में एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों की भी आलोचना की गई है। हालांकि, BRICS देशों ने ऐसे प्रतिबंधों के खिलाफ किसी सामूहिक जवाबी कार्रवाई की व्यवस्था की घोषणा नहीं की है।
आइए जानते हैं कि BRICS 2026 की नई दिल्ली घोषणा में कौन-कौन से बड़े फैसले लिए गए और इनका वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और ग्लोबल साउथ पर क्या असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली घोषणा में आर्थिक मुद्दों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश टैरिफ और एकतरफा व्यापार उपायों को लेकर सामने आया है। BRICS देशों ने ऐसे एकतरफा दबाव वाले उपायों का विरोध किया है, जिन्हें वे अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर UN Charter और बहुपक्षीय व्यापार के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं मानते हैं।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब दुनिया में टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ रहा है और कई देशों की व्यापार नीतियों में संरक्षणवाद देखने को मिल रहा है। BRICS ने किसी एक देश का नाम लेने के बजाय इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाया और बताया कि एकतरफा संरक्षणवादी नीतियां अलग-अलग परिस्थितियों वाले सदस्य देशों के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती हैं।
BRICS ने एक ऐसे व्यापारिक माहौल की जरूरत पर जोर दिया जो निष्पक्ष, स्थिर और अनुमान लगाने योग्य हो। ऐसा वातावरण देशों के बीच आपसी लाभ वाले व्यापार और लंबे समय तक चलने वाले विकास को बढ़ावा दे सकता है। घोषणा में उन एकतरफा व्यापार उपायों को लेकर भी चिंता जताई गई है, जो विश्व व्यापार संगठन यानी World Trade Organization WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
नई दिल्ली घोषणा में जलवायु से जुड़ी व्यापार नीतियों का भी उल्लेख किया गया है। BRICS ने ऐसे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म का विरोध किया है, जिन्हें एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण या संरक्षणवादी तरीके से लागू किया जाता है।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण से जुड़े व्यापार नियम अब वैश्विक आर्थिक नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। विकासशील देशों को चिंता है कि व्यापार से जुड़ी पर्यावरणीय शर्तों का इस्तेमाल उनके निर्यात के लिए अतिरिक्त बाधाएं पैदा करने के लिए किया जा सकता है।
हालांकि, BRICS की घोषणा में एक साझा जवाबी टैरिफ व्यवस्था बनाने की बात नहीं कही गई है। इसका मुख्य जोर बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के सिद्धांतों की रक्षा करने और एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों का विरोध करने पर है।
आतंकवाद भी उन प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा, जिन पर भारत को BRICS घोषणा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन मिला। घोषणा में BRICS देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों के खिलाफ लड़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि घोषणा में अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।
घोषणा में उन मुद्दों को भी प्रमुखता दी गई है, जिन्हें भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। इनमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराना और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने मिलना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस यानी किसी भी तरह की सहनशीलता नहीं रखने की नीति दोहराई है। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मानदंड अपनाने का भी विरोध किया गया है।
घोषणा में यह स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को किसी धर्म या समुदाय से जोड़ने के बजाय उसके वास्तविक स्वरूप और गतिविधियों पर केंद्रित रखना है।
BRICS ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। घोषणा में BRICS काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप के काम को भी मान्यता दी गई है। यह समूह BRICS के सदस्य देशों के बीच आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देता है।
घोषणा में युवाओं के बीच बढ़ते कट्टरपंथ और चरमपंथ के प्रसार को भी एक गंभीर चिंता के रूप में पहचाना गया है। इसका मतलब है कि आतंकवाद से निपटने की चर्चा केवल आतंकी हमलों तक सीमित नहीं है। इसमें आतंकवाद की रोकथाम, उसकी फंडिंग, युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार को रोकना भी शामिल है।
भारत के लिए पहलगाम हमले का स्पष्ट उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि BRICS में अलग-अलग देशों की सदस्यता है और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर सभी देशों के विचार हमेशा एक जैसे नहीं रहे हैं। ऐसे में सर्वसम्मति से इस हमले की निंदा किया जाना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है।
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BRICS शिखर सम्मेलन के सामने पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और लगातार बढ़ता तनाव सबसे मुश्किल कूटनीतिक मुद्दों में से एक था। BRICS में शामिल देशों के अपने अलग-अलग हित और इस क्षेत्र को लेकर अलग-अलग विचार हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा रुख पर लाना आसान नहीं था।
इसके बावजूद, BRICS देशों ने एक साझा रुख अपनाया। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की और विवादों को बातचीत, विचार-विमर्श और कूटनीति के माध्यम से हल करने पर जोर दिया। Reuters के अनुसार, मुश्किल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद घोषणा को सभी सदस्यों की सहमति से अपनाया गया।
घोषणा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई है। साथ ही, ऐसे किसी भी कदम का विरोध किया गया है, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है। BRICS ने नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया है। इसके अलावा, व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा की आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
नई दिल्ली घोषणा में गाजा और अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानवीय स्थिति पर भी काफी ध्यान दिया गया है।
BRICS ने गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और लोगों तक बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील की है। संगठन ने फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने का विरोध किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानून के उल्लंघन की भी निंदा की गई है।
घोषणा में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों तथा युद्ध के दौरान भुखमरी को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की भी निंदा की गई है।
BRICS ने UNRWA के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया है। UNRWA संयुक्त राष्ट्र की वह एजेंसी है जो फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता के लिए काम करती है।
BRICS देशों ने इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के लिए दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। इसके तहत 1967 की सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य और उसकी राजधानी के रूप में पूर्वी यरुशलम की बात कही गई है।
घोषणा में लेबनान और सीरिया की स्थिति पर भी चर्चा की गई है। BRICS ने लेबनान में हुए युद्धविराम का पालन करने और लेबनान के बचे हुए क्षेत्रों से इजरायली सेना की वापसी की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सीरिया को लेकर घोषणा में एक ऐसी राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया गया है, जिसमें सभी प्रमुख पक्षों की भागीदारी हो और देश में समावेशी राजनीतिक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।
पश्चिम एशिया को लेकर BRICS की भाषा काफी सावधानी से तैयार की गई थी। घोषणा में सीधे किसी एक देश को जिम्मेदार ठहराने के बजाय संयम, बातचीत और कूटनीति, आम नागरिकों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता पहुंचाने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस संतुलित रुख से अलग-अलग राष्ट्रीय हितों वाले BRICS देशों के बीच सहमति बनाने में मदद मिली। यह खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS का विस्तार होने के बाद समूह में कई ऐसे देश शामिल हैं, जिनके पश्चिम एशिया को लेकर अलग-अलग हित और नीतियां हैं।
BRICS को लेकर लंबे समय से सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर होती रही है कि क्या सदस्य देश मिलकर कोई साझा मुद्रा शुरू कर सकते हैं। हालांकि, BRICS 2026 की नई दिल्ली घोषणा में किसी साझा BRICS मुद्रा की शुरुआत की घोषणा नहीं की गई है।
इसके बजाय, सदस्य देशों ने धीरे-धीरे आगे बढ़ने की रणनीति जारी रखी है। इसके तहत आपसी व्यापार और निवेश में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने तथा सीमा पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
घोषणा इस बात को भी ध्यान में रखती है कि BRICS के सभी देशों की आर्थिक व्यवस्थाएं और राष्ट्रीय प्राथमिकताएं एक जैसी नहीं हैं। इसलिए संगठन ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें सहयोग तो बढ़े, लेकिन किसी एक आर्थिक मॉडल को सभी सदस्य देशों पर लागू न किया जाए।
BRICS Payment Task Force में विभिन्न सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समूह अलग-अलग देशों की भुगतान और वित्तीय संदेश प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के तरीकों पर काम कर रहा है।
इस प्रयास का व्यापक उद्देश्य BRICS देशों के बीच सीमा पार भुगतान को तेज, सस्ता, सुरक्षित और अधिक आसान बनाना है। अगर इन प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में आने वाली कुछ व्यावहारिक परेशानियों और अतिरिक्त लागत को कम किया जा सकता है।
हालांकि, नई दिल्ली घोषणा को मौजूदा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के पूरी तरह वैकल्पिक सिस्टम की घोषणा के रूप में देखना सही नहीं होगा। फिलहाल BRICS का जोर व्यावहारिक भुगतान सहयोग बढ़ाने और व्यापार तथा निवेश में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर है।
घोषणा में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) New Development Bank (NDB) से स्थानीय मुद्रा में अधिक वित्तीय सहायता देने, फंड जुटाने के स्रोतों में विविधता लाने और बुनियादी ढांचे तथा विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए अधिक संसाधन जुटाने का आग्रह किया गया है।
यह कदम विकासशील देशों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। इन देशों को बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, परिवहन और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत होती है।
BRICS देशों ने प्रस्तावित न्यू इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (New Investment Platform) पर तकनीकी स्तर पर काम जारी रखने पर भी सहमति जताई है। इसे चरणबद्ध तरीके से और सभी देशों की सहमति के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, शिखर सम्मेलन में इस नए निवेश तंत्र को पूरी तरह से शुरू करने की घोषणा नहीं की गई।
भारत की ओर से गुजरात के GIFT City में BRICS Risk Lab स्थापित करने के प्रस्ताव को भी आगे चर्चा के लिए समर्थन मिला है। ऐसी पहल BRICS देशों को वित्तीय जोखिमों को बेहतर तरीके से समझने और निवेश तथा वित्तीय स्थिरता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद कर सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब BRICS के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नई दिल्ली घोषणा में AI को केवल तकनीक से जुड़ा विषय नहीं माना गया है, बल्कि इसे विकासशील देशों के लिए आर्थिक विकास और बेहतर शासन का एक महत्वपूर्ण अवसर भी माना गया है।
BRICS देशों ने AI संसाधनों तक अधिक व्यापक पहुंच की जरूरत पर जोर दिया है। इसके साथ ही AI को सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी, विश्वसनीय और ऊर्जा की दृष्टि से अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के सभी देशों के पास कंप्यूटिंग क्षमता, AI मॉडल, डेटा और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की समान पहुंच नहीं है। कई विकासशील देशों के सामने इन संसाधनों और विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ग्लोबल साउथ के लिए सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि AI कितनी तेजी से आगे बढ़ता है। महत्वपूर्ण यह भी है कि विकासशील देश AI के विकास में किस तरह भाग लेते हैं और इसके आर्थिक तथा सामाजिक लाभों का फायदा कैसे उठाते हैं।
घोषणा में फरवरी 2026 में भारत द्वारा आयोजित AI Impact Summit का भी स्वागत किया गया है। इसके साथ ही BRICS देशों ने BRICS Leaders' Statement on the Global Governance of Artificial Intelligence को लागू करने की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
इससे AI को BRICS सहयोग के लिए व्यापार, वित्त और विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के साथ एक रणनीतिक विषय के रूप में देखा जा रहा है।
BRICS घोषणा में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी DPI को लेकर भारत का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
घोषणा में भारत के उस प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है, जिसमें BRICS Digital Public Infrastructure Repository बनाने और सदस्य देशों में DPI से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की बात कही गई है।
भारत ने बड़े स्तर पर डिजिटल सिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया है। इसी वजह से DPI भारत की अंतरराष्ट्रीय विकास और तकनीकी कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
एक साझा DPI रिपॉजिटरी से BRICS देश डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी और अन्य डिजिटल प्रणालियों से जुड़े अनुभव और जानकारी साझा कर सकते हैं।
वहीं, पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए सदस्य देश यह समझ सकते हैं कि भारत जैसे डिजिटल समाधानों को अपनी स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार किस तरह अपनाया जा सकता है। इससे BRICS देशों के बीच डिजिटल सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में तकनीक के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
स्वास्थ्य भी ऐसा क्षेत्र है, जहां भारत को नए सहयोग तंत्र बनाने के लिए समर्थन मिला है।
घोषणा में BRICS Training Hub Network और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाले Centres of Excellence का नेटवर्क बनाने का समर्थन किया गया है। बेंगलुरु स्थित NIMHANS से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल के समन्वय केंद्र के रूप में काम करने की उम्मीद है।
यह BRICS देशों के बीच स्वास्थ्य सहयोग की बदलती सोच को दर्शाता है। अब स्वास्थ्य सहयोग केवल बीमारियों की रोकथाम और इलाज तक सीमित नहीं है। इसमें मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों की ट्रेनिंग और संस्थानों की क्षमता बढ़ाने जैसे विषयों को भी शामिल किया जा रहा है।
घोषणा में तकनीक और उद्योगों को आधुनिक बनाने को भी आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
भारत के India Centre for BRICS Industrial Competencies के प्रस्ताव का स्वागत किया गया है। इस केंद्र का उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और छोटे कारोबारों को Industry 4.0 तकनीकों और आधुनिक डिजिटल टूल्स को अपनाने में मदद करना है।
Industry 4.0 का मतलब ऐसे आधुनिक औद्योगिक सिस्टम से है, जिसमें ऑटोमेशन, डिजिटल तकनीक, आपस में जुड़े सिस्टम, डेटा और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए इन तकनीकों तक पहुंच काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। इनकी मदद से कंपनियां अपनी उत्पादकता बढ़ा सकती हैं, लागत और कामकाज को बेहतर तरीके से संभाल सकती हैं और तेजी से डिजिटल हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।
तत्काल आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के अलावा, घोषणा में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार पर भी काफी जोर दिया गया है।
आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, BRICS एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहता है जो अधिक प्रतिनिधित्व वाली, निष्पक्ष, प्रभावी और जवाबदेह हो। घोषणा में बहुपक्षवाद और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के प्रति BRICS की प्रतिबद्धता को भी दोहराया गया है।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS अपने सहयोग के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। समूह के विस्तार के बाद अब उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय फैसले लेने वाली संस्थाओं में अपनी अधिक प्रभावी भागीदारी चाहती हैं।
इसका व्यापक उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था जैसी संस्थाओं को आज की आर्थिक और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अधिक अनुरूप बनाना है।
घोषणा में Global South पर बार-बार दिया गया जोर इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है।
BRICS खुद को तेजी से एक ऐसे मंच के रूप में पेश कर रहा है, जहां उभरते और विकासशील देश व्यापार, विकास, तकनीक, ऊर्जा, वित्त और वैश्विक शासन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर चर्चा कर सकते हैं।
आधिकारिक घोषणा में BRICS के partner countries की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें उभरते बाजारों और विकासशील देशों की व्यावहारिक सहयोग में अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य विकासशील देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक स्तर पर उनकी आवाज को अधिक प्रभावी बनाना है।
भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता के दौरान कई ऐसी संस्थागत पहल शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य BRICS सहयोग को केवल चर्चाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलना था।
घोषणा में Task Force on Growth and Development का स्वागत किया गया है। इसके साथ ही BRICS-New Development Bank Knowledge Portal शुरू किया गया है। इस पोर्टल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच नीतियों से जुड़े अनुभव और विकास परियोजनाओं से मिली सीख को साझा करने में मदद करना है।
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें मंत्री, सांसद, सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ, कारोबारी और आम लोगों सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए।
इतने बड़े स्तर पर हुई गतिविधियां दिखाती हैं कि भारत ने BRICS को केवल साल में एक बार होने वाली नेताओं की बैठक तक सीमित रखने के बजाय इसे विभिन्न संस्थानों और क्षेत्रों के बीच व्यापक सहयोग के मंच के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की।
भारत के लिए New Delhi Declaration कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
पहला, पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा और सीमा पार आतंकवाद के संदर्भ भारत के इस रुख को मजबूत करते हैं कि आतंकवाद से सामूहिक रूप से और बिना किसी भेदभाव के निपटा जाना चाहिए।
दूसरा, एकतरफा टैरिफ और संरक्षणवादी व्यापार नीतियों का विरोध भारत के उस हित से मेल खाता है, जिसमें वैश्विक बाजारों तक स्थिर और भरोसेमंद पहुंच बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
तीसरा, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बेहतर भुगतान कनेक्टिविटी से सीमा पार व्यापार और निवेश के लिए नए विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, घोषणा में किसी साझा BRICS मुद्रा को शुरू करने का फैसला नहीं किया गया है।
चौथा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, AI, स्वास्थ्य और Industry 4.0 से जुड़ी भारत की पहलों को अब बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग और चर्चा के लिए एक बड़ा मंच मिला है।
अंत में, BRICS देशों के बीच अलग-अलग मत होने के बावजूद सर्वसम्मति से घोषणा को स्वीकार किया जाना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि और चुनौती दोनों को दर्शाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मई में BRICS के विदेश मंत्री संयुक्त बयान जारी करने में सफल नहीं हो पाए थे। ऐसे में सभी सदस्य देशों की सहमति से नई दिल्ली घोषणा को स्वीकार करना महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
नई दिल्ली घोषणा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि इसमें भू-राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ आर्थिक और विकास से जुड़ी व्यावहारिक पहलों को भी शामिल किया गया है।
घोषणा में टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया गया है और साथ ही स्थानीय मुद्राओं में भुगतान को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसमें आतंकवाद की निंदा करने के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
इसी तरह, पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कूटनीतिक समाधान और मानवीय सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बताई गई है। AI के मुद्दे पर भी घोषणा में सुरक्षा, समावेशिता और ग्लोबल साउथ के देशों की AI संसाधनों तक पहुंच पर जोर दिया गया है।
इस तरह, नई दिल्ली घोषणा एक ऐसे BRICS की तस्वीर पेश करती है, जिसका दायरा सदस्य देशों की संख्या और सहयोग के क्षेत्रों दोनों के स्तर पर लगातार बढ़ रहा है।
आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता का मुख्य फोकस resilience, innovation, cooperation and sustainability यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर रहा। दस्तावेज में यह भी पुष्टि की गई है कि 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन संभालेगा।
हालांकि, इस घोषणा का दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसमें किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। स्थानीय मुद्रा में भुगतान प्रणाली, AI सहयोग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं, विकास के लिए वित्तीय सहायता, आतंकवाद विरोधी तंत्र और संस्थागत सुधारों के लिए सदस्य देशों के बीच लगातार और मजबूत समन्वय की जरूरत होगी।
फिलहाल, नई दिल्ली घोषणा BRICS की प्राथमिकताओं की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। इसमें विकासशील देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक मजबूती, दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक मामलों में ग्लोबल साउथ की भूमिका को अधिक प्रभावशाली बनाने पर जोर दिया गया है।